Monday, February 3, 2025

"चला जाऊँ मैं" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"चला जाऊँ मैं" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
चला जाऊँ मैं, जाऊँ मैं गाँव,
कहाँ रुकूं मैं, पूछो न माम।
घाटी में बसी, खुशियाँ रै रंग,
पानी रै संग, गाओ गीत भंग।

घुघूती के संग, पंछी रै गीत,
गाँव रै गलियाँ, मन रै मीठ।
बुरांश रौ फूल, बसा है प्यार,
गढ़वाल में बसा, हर्ष रौ संसार।

झील रै पानी, लहरायो छांव,
मन रै गीत, गाओ सब साथ।
चला जाऊँ मैं, जाऊँ मैं गाँव,
घाटी में बसी, रीतों की राह।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाल की खूबसूरत घाटियों, गाँवों और वहाँ के सरल और प्यारे जीवन को दर्शाता है। गीत में गाँव की गलियों, बुरांश के फूलों, और घुघूती के गीतों का उल्लेख है। यह गढ़वाली संस्कृति, वहाँ के रिश्तों और खुशियों को दिल से प्रस्तुत करता है।


"रात रै चाँदनी" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"रात रै चाँदनी" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
रात रै चाँदनी, रोशन बगिया,
घुघूती के गीत, गाओ संगी।
वसंत रै रंग, बुरांश रौ फूल,
गढ़वाल की रीत, बसी हमारो पूल।

पानी रै झरने, बहते रै गगन,
काँठी में बसी, ममता रै छन।
कान रै गहनों, पाजेब रै साथ,
गढ़वाल रै माटी में, हर दिल रै बात।

घाटी रै सब रंग, पंछी रै गीत,
गाँव की सूरत, प्यारी सी रीत।
मन रौ प्यार रै बसा गढ़वाल,
सपने सजे, सुन सुन गाओ जवाल।

रात रै चाँदनी, रोशन बगिया,
घुघूती के गीत, गाओ संगी।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाल की चाँदनी रातों, वहाँ के प्यारे प्राकृतिक दृश्यों, और गढ़वाली समाज की सुंदरता को प्रस्तुत करता है। चाँदनी रात में बुरांश के फूलों, घाटी की हरियाली और पंछियों के गीतों का वर्णन है। यह गीत गढ़वाल की माटी, वहाँ के रिश्तों और वहाँ की जीवनशैली की सरलता और सौंदर्य को व्यक्त करता है।


"न्यौली रै गीत" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"न्यौली रै गीत" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
न्यौली रै गीत, गाओ साथ,
मन में बसी यादें, दिल में बात।
घुघूती की बोली, सागर में लहर,
गढ़वाल रै प्यार, सबको है असर।

पानी रै झरने, बहते चाँद,
हरियाली में बसे, गढ़वाल के रंग।
गांव रै खुशियाँ, खेतों रै रंग,
जीवन के गीत, बगिया रै संग।

झूमे रै बदन, पाजेब की छमक,
सपनों में बसा, गढ़वाल का झक।
न्यौली रै गीत, गाओ सब लोग,
हमारी गढ़वाल की प्यारी नज़्म।

न्यौली रै गीत, गाओ साथ,
मन में बसी यादें, दिल में बात।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाल की पारंपरिक खुशी, त्यौहारों, और लोक संस्कृति का चित्रण करता है। गीत में गढ़वाली जीवन की सादगी, गाँव की खुशियाँ, और प्रकृति के रंगों का वर्णन किया गया है। "न्यौली रै गीत" गढ़वाल की खुशी और एकजुटता को दर्शाता है, जो वहाँ के समाज में बहुत महत्व रखता है।


"रंगीन बुरांश" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"रंगीन बुरांश" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
रंगीन बुरांश, बगिया रै छांव,
गांव में बहता, मन रै गावा।
घुघूती रै गीत, बसी मधुर आवाज,
गढ़वाल रै सूरज, चमकता रै राज।

पानी रै धार, चाँद रै संग,
घाटी रै हरियाली, जीवन रै रंग।
धन्य गढ़वाल, धन्य रौ प्यार,
गाँव की गलियों में, बसा रै संसार।

बुआ रै आशीर्वाद, सास रै ममता,
जन्मुं फेर भी, गढ़वाल रै कथा।
सपनों में बसा, यंहा का रंग,
बुरांश के फूल, महकते हैं संग।

रंगीन बुरांश, बगिया रै छांव,
गांव में बहता, मन रै गावा।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाल के प्राकृतिक सौंदर्य, गाँव के रिश्ते और वहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। बुरांश के रंगीन फूल, घाटी की हरियाली, और गाँव की गलियों में फैले प्यार और समृद्धि का बहुत ही सुंदर तरीके से वर्णन किया गया है। यह गीत गढ़वाल के प्रति गहरी श्रद्धा और उसके रिश्तों की अहमियत को व्यक्त करता है।


"सुनि ले भैय्या, मेरो मन" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"सुनि ले भैय्या, मेरो मन" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
सुनि ले भैय्या, मेरो मन बुरा,
तेरे बिना यारा, कछु नि खुला।
सुनि ले भैय्या, मेरो दिल रा हाल,
घटन रै बीच, बसा गढ़वाल।

घाटी रै बुरांश, रंगीनी बहार,
घघरा रै छाँव, सुनि ले यारा प्यार।
घुघूती के गीत, बासा सुगंध,
गांव रै ताल में, जीवन की खोज।

पानी रै धार, बहते हुए रंग,
गाँव की गलियों में, बसी मीठी अंग।
बुआ का प्यार, सास का आशीर्वाद,
गढ़वाल रै जीवन, प्यारा सा राग।

सुनि ले भैय्या, मेरो दिल की बात,
गढ़वाल रै गीत, सच्चे हो जाते साथ।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाल के जीवन, प्यार और परंपराओं के प्रति गहरी भावनाओं का चित्रण करता है। इसमें भाई से प्यार की अपील, गढ़वाल की घाटियों, बुरांश के फूलों, और गांव की मीठी गलियों का जिक्र है। यह गीत गढ़वाली जीवन की सादगी, रिश्तों की अहमियत, और प्रकृति के प्रति प्रेम को प्रस्तुत करता है।


"पानी रै धार" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"पानी रै धार" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
पानी रै धार, बहतां गयो,
झील रै पानी, मन गयो।
घाघरा लहरायो, पाजेब थमायो,
संग गाओ गीत, दिल भी गयो।

घुघूती रै गान, पंछी रै बोल,
खेत रै हरियाली, दिल रै रोल।
बुरांश के फूल, रंगीनी बगिया,
गढ़वाल की हवा, सच्चा रै दुआ।

नदी रै संग, बहते रंग,
मन के धड़कन, गाओ हर अंग।
न्यौली की बोली, गीत का रंग,
सपने रै सच, गढ़वाल में बसा संग।

पानी रै धार, संग गाओ गीत,
घुमत गढ़वाल में, जीवन रै मीठ।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाल के प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़ी जीवन की सरलता और गढ़वाली लोकगीतों की मिठास को दर्शाता है। इसमें पानी की धार, बुरांश के फूल, खेतों की हरियाली, और गढ़वाल की प्यारी हवा का जिक्र है। गीत गढ़वाली संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, और लोक जीवन के प्रति प्रेम को व्यक्त करता है।

"छोरी गैंठाळी" (गढ़वाली लोकगीत)

यहाँ एक और गढ़वाली पारंपरिक लोकगीत के बोल प्रस्तुत हैं:

"छोरी गैंठाळी" (गढ़वाली लोकगीत)

बोल:
छोरी गैंठाळी, काण मा कुण्डल,
पाजेब लहरायो, छन-छन छनकल।
झुमे रै बदन, रूप में रंग,
मन में बसी सच्ची प्रेम रांग।

पानी की धार में बहते प्यारे गीत,
रंगीन फुलैं से बसी रीत।
घाघरा में छुपे रै प्यार,
गढ़वाल की सूरत, जीवन का सार।

बुरांश फुल्ल्यूं, लहराती हवा,
कण-कण में बसी रै ममता का स्वर।
मन रौ प्यारे गढ़वाल रै नाम,
गाँव की गलियाँ बसी हैं सुवास।

चाँदनी रात रै गीत गाओ,
घूघूती रै संग गाओ।
धन्य छौं माटी, धन्य छौं हवा,
गढ़वाल रौ प्रेम सच्चा।

अर्थ:
यह गीत गढ़वाली समाज की परंपराओं, प्यार, और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का चित्रण करता है। इसमें लड़की की सुंदरता, उसकी किलकारी, पाजेब की छनक, और गढ़वाल के प्रति गहरी भावना को बहुत ही भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यह गीत गढ़वाल के प्रति प्रेम और उसकी संस्कृति का सम्मान करता है।


न्यूज़ विचार और व्यव्हार

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