Wednesday, July 22, 2026

जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई

 

संपादकीय: जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई

"जो भी दिखे, उसे ये डिलीवरी दे देना।"

जंतर-मंतर पहुँचे एक फूड पार्सल पर लिखे ये शब्द केवल एक डिलीवरी निर्देश नहीं थे, बल्कि हमारे समय के लिए एक गहरा सामाजिक संदेश थे। उस पार्सल पर न किसी व्यक्ति का नाम था, न मोबाइल नंबर, न धर्म, न जाति और न ही किसी संगठन का परिचय। मानो भेजने वाले ने यह घोषणा कर दी हो कि भूख की सबसे बड़ी पहचान केवल भूख है।

जंतर-मंतर केवल दिल्ली का एक स्थान नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र का वह सार्वजनिक मंच है जहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी समस्याएँ, अधिकार और उम्मीदें लेकर पहुँचते हैं। यहाँ किसान भी आते हैं, छात्र भी, बेरोजगार युवा भी, कर्मचारी भी, महिलाएँ भी और सामाजिक संगठन भी। उनके मुद्दे अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन एक चीज़ समान होती है—लंबा इंतज़ार, सीमित संसाधन और संघर्ष।

ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति किसी अनजान प्रदर्शनकारी के लिए भोजन भेजता है और केवल इतना लिखता है कि "जो भी दिखे, उसे दे देना", तो वह किसी एक व्यक्ति का पेट ही नहीं भरता, बल्कि लोकतंत्र में करुणा का स्थान भी मजबूत करता है।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सार्वजनिक जीवन में पहचान की राजनीति पहले से अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है। अक्सर लोगों को उनके धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र या विचारधारा के आधार पर देखा जाता है। लेकिन भूख इन सभी सीमाओं को अस्वीकार कर देती है। एक भूखे व्यक्ति के सामने सबसे पहले भोजन का महत्व होता है, न कि उसे देने वाले की पहचान।

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता है, लेकिन उससे भी बड़ी शक्ति उसकी साझी संवेदना है। इतिहास गवाह है कि प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, सामाजिक संकट और कठिन परिस्थितियों में देश के आम नागरिकों ने बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे की सहायता की है। यही सामाजिक पूंजी भारत को केवल एक राजनीतिक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक मानवीय सभ्यता भी बनाती है।

तकनीक ने इस मानवीय भावना को नया माध्यम दिया है। आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति दूर बैठे किसी ज़रूरतमंद तक भोजन पहुँचा सकता है। यदि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल उपभोग नहीं, बल्कि सहयोग के लिए भी होने लगे, तो यह सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

हालाँकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि भूख का समाधान केवल व्यक्तिगत दान से नहीं होगा। यह राज्य, समाज और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है कि कोई व्यक्ति भोजन के अभाव में पीड़ित न रहे। सामाजिक सुरक्षा, सामुदायिक रसोई, राहत व्यवस्था और नागरिक सहभागिता—इन सबका समान महत्व है। व्यक्तिगत संवेदनाएँ व्यवस्था का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी प्रेरणा बननी चाहिए।

जंतर-मंतर के उस पार्सल ने एक और महत्वपूर्ण बात याद दिलाई—लोकतंत्र केवल विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार से नहीं चलता, बल्कि एक-दूसरे के दुःख को समझने की क्षमता से भी मजबूत होता है। विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन संवेदनाएँ साझा होनी चाहिए।

आज जब समाज को विभाजित करने वाले अनेक विमर्श सक्रिय हैं, तब उस पार्सल पर लिखी एक पंक्ति भविष्य की दिशा भी सुझाती है—

"यदि हम इंसान को उसकी पहचान से पहले उसकी ज़रूरत से पहचानने लगें, तो शायद समाज में बहुत-सी दूरियाँ अपने आप समाप्त हो जाएँ।"

अंततः, उस फूड पार्सल का वास्तविक प्राप्तकर्ता कोई एक व्यक्ति नहीं था। उसका संदेश पूरे समाज के नाम था—मानवता का कोई पता नहीं होता, लेकिन जहाँ करुणा पहुँचती है, वहीं उसका घर बन जाता है।

देश की रक्षा और जनता की सुरक्षा—दोनों का सम्मान, लेकिन लोकतंत्र में संवाद सबसे ऊपर

देश की रक्षा और पदेश की संप्रभुता की रक्षा करते हैं और पुलिस-प्रशासन समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व निभाते हैं। दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनके योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।

लेकिन जब किसी लोकतांत्रिक देश में अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, भ्रष्टाचार या अन्य जनहित के मुद्दों पर आवाज़ उठा रहे युवाओं पर बल प्रयोग की तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती हैं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है। यदि मतभेद का उत्तर बातचीत के बजाय लाठी या बल प्रयोग से दिया जाए, तो समाज में अविश्वास बढ़ सकता है।

लोकतंत्र में सरकार की शक्ति केवल कानून लागू करने में नहीं, बल्कि असहमति को सुनने, समझने और उसका समाधान खोजने में भी निहित होती है। शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है, वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर पक्ष की जिम्मेदारी है कि विरोध शांतिपूर्ण रहे और प्रशासन आवश्यक होने पर संयम तथा कानून के अनुरूप कार्य करे।

देश का भविष्य हमारे युवा हैं। उनकी ऊर्जा, प्रश्न और आकांक्षाएँ राष्ट्र निर्माण की ताकत हैं। उनका विश्वास जीतना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सबसे बड़ी सफलता है। संवाद से समाधान निकलते हैं, जबकि टकराव केवल दूरी बढ़ाता है।

एक मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है जहाँ केवल सत्ता की आवाज़ सुनाई दे, बल्कि वह है जहाँ जनता की आवाज़ भी सम्मानपूर्वक सुनी जाए।

#लोकतंत्र #संवाद #युवा #संविधान #अभिव्यक्तिकीस्वतंत्रता #जनहित #भारत

Tuesday, July 21, 2026

सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए आरक्षण

 

सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए आरक्षण

 PIB Delhi

सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स (सीएपीएफ और एआर) में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी)/राइफलमैन के पदों की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों की एक नई श्रेणी बनाई है। इसके लिए प्रावधान इस प्रकार हैं:

(i) रिक्तियों में 50 प्रतिशत का आरक्षण।

(ii) निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट। इसके अतिरिक्त, पूर्व अग्निवीरों के प्रथम बैच के उम्मीदवारों को निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से परे 5 वर्ष की आयु में छूट दी जाएगी; और

(iii) शारीरिक मानक परीक्षण (पीएसटी), शारीरिक दक्षता परीक्षण (पीईटी) और लिखित परीक्षा से छूट।

2. इसके अतिरिक्त, पूर्व अग्निवीरों की प्रगति के समन्वय हेतु गृह मंत्रालय के अधीन एक समर्पित पूर्व अग्निवीर विंग की स्थापना की गई है। फिलहाल, अग्निवीरों के पहले बैच ने अभी तक अपनी सेवा अवधि पूरी नहीं की है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

बाल यौन अपराधियों का डेटाबेस

 

बाल यौन अपराधियों का डेटाबेस

 PIB Delhi

संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन मुख्य रूप से अपने विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्यम से अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार हैं।

राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (एनडीएसओ) गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बाल अधिकार बोर्ड (एनसीआरबी) द्वारा 2018 में स्थापित एक केंद्रीकृत डेटाबेस है। इसका उद्देश्य यौन अपराधियों का रिकॉर्ड रखकर, बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) के अंतर्गत आने वाले अपराधों सहित यौन अपराधों की जांच, पहचान और रोकथाम में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करना है। यह डेटाबेस यौन अपराधों की जांच के दौरान आरोपियों और बार-बार अपराध करने वालों की पहचान करने, आपराधिक पृष्ठभूमि की पुष्टि करने में सहायक एक जांच उपकरण के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस तक पहुंच केवल अधिकृत कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक ही सीमित है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि इस जानकारी का उपयोग केवल आधिकारिक जांच उद्देश्यों के लिए ही किया जाए।

राष्ट्रीय बाल अधिकार बोर्ड द्वारा विकसित राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड जांच (एनसीआरसी) पोर्टल का उपयोग सरकारी एजेंसियां ​​कर्मचारियों और कर्मियों के प्रारंभिक सत्यापन के लिए करती हैं। यह सीसीटीएनएस/अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) डेटाबेस का उपयोग करके प्रारंभिक अपराध रिकॉर्ड जांच की सुविधा प्रदान करता है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने सीसीटीएनएस एप्लिकेशन के माध्यम से एक नागरिक पोर्टल शुरू किया है। इससे व्यक्तियों/संगठनों द्वारा सत्यापन अनुरोध करना आसान हो गया है। शैक्षणिक संस्थान, बाल देखभाल गृह और अन्य प्रतिष्ठान सीसीटीएनएस नागरिक पोर्टल के माध्यम से व्यक्तियों के सत्यापन के लिए अनुरोध कर सकते हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा रिकॉर्ड (एनसीआरसी) का उपयोग कर सकती है।

गृह मंत्रालय ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण और अन्य साइबर अपराधों की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए ऑनलाइन साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग हेल्पलाइन (1930) साइबर से संबंधित अपराधों की रिपोर्टिंग में सहायता प्रदान करती है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

 

 

सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार

 

 

 सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सरकार के आश्वासन के बावजूद नीट मुद्दे पर चर्चा की अपनी पुरानी मांग से पीछे हट गए हैं।

 


 SHABD,AIR HQ, July 21,

 

 

 

सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सरकार के आश्वासन के बावजूद नीट मुद्दे पर चर्चा की अपनी पुरानी मांग से पीछे हट गए हैं। इससे पहले आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर नीट मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन किया।

 

 

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। श्री राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार संसद में नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो जाती है, तो वे तुरंत अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर देंगे। कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने इस मामले पर चर्चा करने की मांग मान ली है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस नेता को सरकार का रुख बताया गया, तो श्री गांधी अपनी पुरानी मांग से पीछे हट गए और कईं नई मांगें रख दीं।

 

 

श्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता के इतनी जल्दी अपनी बात से पीछे हटने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह श्री गांधी को शोभा नहीं देता। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यह स्पष्ट कर दिया है कि नीट पेपर लीक मामले के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस मामले में शामिल पाए गए लोगों पर कार्रवाई की भी जा रही है।

 

 

इसके बाद, नीट पेपर लीक के मुद्दे पर नई दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग के पास विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और विपक्षी दलों के अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया है।

 

योगी सरकार ने तकनीकी युवाओं के लिए खोले स्वरोजगार के नए द्वार, बाट-माप उपकरण मरम्मत लाइसेंस के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल लॉन्च

 

 

 योगी सरकार ने तकनीकी युवाओं के लिए खोले स्वरोजगार के नए द्वार, बाट-माप उपकरण मरम्मत लाइसेंस के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल लॉन्च

 

 

 प्रदेश के तकनीकी डिप्लोमा एवं डिग्रीधारी युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले मंत्री आशीष पटेल ने मंगलवार को बाट-माप उपकरणों के मरम्मत कार्य हेतु लाइसेंस आवेदन के लिए तकनीकी डिप्लोमा/डिग्री धारक युवाओं को प्रोत्साहित करने की नीति-2026 के ऑनलाइन मॉड्यूल का शुभारंभ किया। मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। सरकार का प्रयास है कि पॉलिटेक्निक, आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवा केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी तकनीकी दक्षता के आधार पर स्वयं का व्यवसाय भी स्थापित कर सकें। इस नीति के तहत तकनीकी डिप्लोमा और डिग्रीधारी युवाओं को बाट-माप उपकरणों की मरम्मत के क्षेत्र में कार्यशाला स्थापित करने और मरम्मतकर्ता लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्यशाला की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरणों, टूल्स और अन्य सामग्री की खरीद पर होने वाले व्यय की 50,000 रुपये तक की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। नीति के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक बाट-माप उपकरणों की मरम्मत के लिए निर्धारित तकनीकी शैक्षिक योग्यता रखने वाले युवा पात्र होंगे। इसमें आईटीआई इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन अथवा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री तथा भौतिक विज्ञान में बीएससी जैसी योग्यताएं शामिल हैं। पात्र युवा निवेश मित्र पोर्टल और विभागीय पोर्टल समहंसउमजतवसवहलण्नचण्हवअण्पद के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर मरम्मतकर्ता लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। लाइसेंस प्राप्त करने के बाद वे अपनी कार्यशाला स्थापित कर बाट-माप उपकरणों की मरम्मत का कार्य शुरू कर सकेंगे। कार्यशाला के लिए आवश्यक मास्टर सेट, लोड सेट तथा अन्य उपकरणों की खरीद पर नीति की शर्तों के अनुसार प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाएगा। मंत्री पटेल ने कहा कि ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किए जाने से आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक होगी, जिससे युवाओं को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होना सहित अन्य निर्धारित सामान्य शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। आवेदन, सत्यापन और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।

 

 

Story Line :

 SHABD,lucknow, July 21,

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार और UAE ने राज्य में फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार और UAE ने राज्य में फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

 

 

Synopsis : आंध्र प्रदेश सरकार और संयुक्त अरब अमीरात ने आज राज्य में यूएई फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इससे फ़ूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में ज़्यादा निवेश, निर्यात और व्यापार होगा। इस समझौते पर अमरावती में राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

 

 


 SHABD,AIR HQ, July 21,

 

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार और संयुक्त अरब अमीरात ने आज राज्य में यूएई फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इससे फ़ूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में ज़्यादा निवेश, निर्यात और व्यापार होगा। इस समझौते पर अमरावती में राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

 

 

समझौते के अंतर्गत यूएई फ़ूड क्लस्टर, आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर आम, केला और कोको जैसे बागवानी उत्पादों की प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा। इस साझेदारी का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करना और यूएई की कंपनियों से निवेश आकर्षित करना है।

 

 

इसके अंतर्गत यूएई की कंपनी फ़्लोर मास्टर्स इंटरनेशनल ने चित्तूर ज़िले के गंगाधरा नेल्लोर में फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।

 

 

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि यह समझौता इस साल की शुरुआत में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक के दौरान बनी सहमति को पूरा करता है।

 

 

यूएई के मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बहुत ज़्यादा क्षमता है।

 

हवाई अड्डों पर बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से पीएम विश्वकर्मा (पीएमवी) कारीगरों का सशक्तिकरण

 

हवाई अड्डों पर बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से पीएम विश्वकर्मा (पीएमवी) कारीगरों का सशक्तिकरण


सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के समर्थन हेतु दूसरा परिचालन स्टॉल चंडीगढ़ के शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थापित

यह स्टॉल पीएम विश्वकर्मा योजना के उस परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है जिसके तहत कुशल शिल्पकारों को व्यापक बाजारों से जोड़कर समृद्ध पारंपरिक शिल्प विरासत को बढ़ावा दिया जा रहा है

 PIB Delhi

पारंपरिक कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, चंडीगढ़ के शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 14 जुलाई, 2026 को एक पीएमवी स्टॉल का उद्घाटन किया गया। यह किसी हवाई अड्डे पर संचालित होने वाला दूसरा पीएमवी स्टॉल है। यह स्टॉल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और एक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सहयोग से स्थापित किया गया है। इस पहल के माध्यम से, चंडीगढ़ के तीन पीएमवी लाभार्थियों को अपने हस्तशिल्प उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए एक मंच प्रदान किया गया है। पहला पीएमवी स्टॉल इससे पहले भोपाल के राजा भोज हवाई अड्डे पर शुरू किया गया था।

पीएमवी स्टॉल का संचालन लाभार्थियों - कुशल टोकरीकार श्री बेजू तुलसीदास, गुड़िया और खिलौने बनाने वाली कुमारी शास्ता रानी और चंडीगढ़ के कुम्हार श्री राहुल कुमार द्वारा किया जा रहा है। यह पीएमवी योजना के उस परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है जिसके तहत कुशल शिल्पकारों को व्यापक बाजारों से जोड़कर समृद्ध पारंपरिक शिल्प विरासत को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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मुख्य विशेषताएं: हवाई अड्डे के बाजार तक पहुंच के माध्यम से कारीगरों का सशक्तिकरण

  • चंडीगढ़ के शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे अधिक भीड़भाड़ वाले स्थान पर जगह उपलब्ध कराकर, यह पहल पीएमवी लाभार्थियों को बेहतर दृश्यता, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों सहित व्यापक ग्राहक संपर्क प्राप्त करने में मदद करती है, साथ ही भारत की समृद्ध पारंपरिक शिल्प कौशल को बढ़ावा देती है और 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना का समर्थन करती है।
  • यह पहल बाजार के अवसरों का विस्तार करती है और पीएमवी कारीगरों को ग्राहकों के साथ सीधे जुड़ने, बाजार की प्राथमिकताओं को समझने, उत्पाद प्रस्तुति को बेहतर बनाने और विकास के नए रास्ते तलाशने में सक्षम बनाती है, जिससे बड़े स्तर पर स्थायी आजीविका को समर्थन मिलता है।

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पीएम विश्वकर्मा योजना के बारे में: पीएम विश्वकर्मा योजना सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य हाथों और औजारों से काम करने वाले 18 व्यवसायों में लगे पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करना है। 2023 में शुरू की गई यह योजना मान्यता, कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक औजारों की सहायता, बिना गारंटी के ऋण, डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और बाजार संपर्क के अवसरों के माध्यम से सहायता प्रदान करती है। इसका लक्ष्य कारीगरों के उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच में सुधार करना और उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर प्राप्त करने में सहायता करना है। पीएम विश्वकर्मा वेबसाइट तक पहुंचने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करें और नॉलेज सेंटर (ई-बुक) अनुभाग में उपलब्ध कॉफी टेबल बुकलेट पढ़ें, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से पीएम विश्वकर्मा के लाभार्थियों की सफलता की कहानियां शामिल हैं।

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पीके/केसी/एसकेएस/पीके

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत लक्ष्य की प्राप्ति

 

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत लक्ष्य की प्राप्ति

 PIB Delhi

विगत पाँच वर्षों अर्थात् 2021-22 से 2025-26 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत लक्ष्य वर्ष के दौरान स्वीकृत आवासों, पूर्ण किए गए आवासों तथा निर्माणाधीन आवासों की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार संख्या का विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।

16.07.2026 की स्थिति के अनुसार स्वीकृत तथा पूर्ण किए गए आवासों की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार समेकित प्रगति का विवरण अनुलग्नक-II में दिया गया है।

विगत पाँच वर्षों (अर्थात् 2021-22 से 2025-26) के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कुल ₹1,34,242.45 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की गई है। इसमें मंत्रालय द्वारा मध्य प्रदेश को जारी किए गए ₹19,013.72 करोड़ तथा महाराष्ट्र को जारी किए गए ₹14,898.43 करोड़ भी शामिल हैं। योजना के अंतर्गत विगत पाँच वर्षों के दौरान जारी की गई वित्तीय सहायता तथा वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत वित्तीय आवंटन का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण अनुलग्नक-III में दिया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आवास निर्माण में तेजी लाने हेतु सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

(i) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को समय पर लक्ष्य आवंटित करना तथा पर्याप्त धनराशि जारी करना;
(ii) प्रगति की नियमित समीक्षा;
(iii) डैशबोर्ड के माध्यम से योजना की निगरानी एवं पर्यवेक्षण;
(iv) मंत्रालय द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित कार्यशालाओं का आयोजन;
(v) ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि।

योजना के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली आवास सहायता के अतिरिक्त, स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (एसबीएम-जी) के साथ एकीकरण के माध्यम से शौचालय निर्माण हेतु ₹12,000 की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। इसके अलावा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा)/वीबी जी-राम जी के साथ एकीकरण के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रत्येक लाभार्थी को स्वीकृत योजना मानकों के अंतर्गत, प्रचलित मजदूरी दरों पर निर्धारित मानव-दिवसों का अकुशल मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के परिवारों को जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जल जीवन मिशन (जेजेएम) तथा हर घर नल से जल (एचजीएनएसजे) अथवा अन्य समान योजनाओं के साथ एकीकरण के माध्यम से पाइपलाइन के ज़रिए पेयजल भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, लाभार्थियों को विद्युत मंत्रालय, राज्य सरकारों अथवा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा संचालित संबंधित योजनाओं के माध्यम से बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने में सहायता दी जाती है तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) अथवा अन्य संबंधित योजनाओं के अंतर्गत एलपीजी कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत एकीकरण में लाभार्थी परिवारों की महिला सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ना भी शामिल है, जिससे उनके सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।

राष्ट्रीय स्तर पर 16.07.2026 की स्थिति के अनुसार कुल 3.08 करोड़ आवासों में शौचालय, 2.43 करोड़ में पानी के कनेक्शन, 3.07 करोड़ में बिजली के कनेक्शन तथा 2.9 करोड़ में एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 1.35 करोड़ लाभार्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ा गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभाव के संबंध में राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी), राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडी एंड पीआर), राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति आयोग) तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएम-ए) जैसी संस्थाओं द्वारा अनेक आकलन किए गए हैं। इनमें नवीनतम अध्ययन आईआईएम-ए द्वारा किया गया है। सभी अध्ययनों में आवास तथा समग्र जीवन गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव की पुष्टि की गई है।

मंत्रालय ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का स्वतंत्र मूल्यांकन करने के लिए आईआईएम-ए को नियुक्त किया था। अध्ययन (2026) में पाया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने आवासीय सुरक्षा में वृद्धि, बेहतर स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी परिणामों में सुधार, परिवारों की आय एवं बचत में वृद्धि, बेघरपन और मजबूरी में होने वाले पलायन में कमी तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। मूल्यांकन में लाभार्थियों की गरिमा, जीवन की गुणवत्ता तथा समग्र सामाजिक-आर्थिक कल्याण पर भी सकारात्मक प्रभाव देखा गया।

यह जानकारी ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

अनुलग्नक-I

विगत पाँच वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत लक्ष्य वर्ष के दौरान स्वीकृत आवासों, पूर्ण किए गए आवासों तथा निर्माणाधीन आवासों का राज्यवार विवरण:

क्रम संख्‍या

राज्‍य

स्वीकृत आवास

पूर्ण किए गए आवास

निर्माणाधीन आवास

1

अरुणाचल प्रदेश

5,497

5,497

0

2

असम

21,60,640

15,44,832

6,15,808

3

बिहार

22,10,788

15,12,269

6,98,519

4

छत्तीसगढ़

13,54,352

9,63,548

3,90,804

5

गोवा

0

0

0

6

गुजरात

4,18,814

3,14,715

1,04,099

7

हरियाणा

54,816

19,805

35,011

8

हिमाचल प्रदेश

85,281

57,162

28,119

9

जम्मू और कश्मीर

1,98,923

1,92,741

6,182

10

झारखंड

7,41,074

4,55,559

2,85,515

11

केरल

63,638

18,263

45,375

12

मध्य प्रदेश

27,64,648

17,34,797

10,29,851

13

महाराष्ट्र

31,41,251

10,22,269

21,18,982

14

मणिपुर

72,781

25,229

47,552

15

मेघालय

1,22,387

1,01,284

21,103

16

मिजोरम

16,427

12,015

4,412

17

नागालैंड

30,700

22,183

8,517

18

ओडिशा

9,74,212

7,92,216

1,81,996

19

पंजाब

52,392

31,805

20,587

20

राजस्थान

11,09,687

7,00,010

4,09,677

21

सिक्किम

67

67

0

22

तमिलनाडु

2,57,759

2,34,776

22,983

23

त्रिपुरा

3,27,528

3,25,428

2,100

24

उत्तर प्रदेश

14,77,701

14,69,493

8,208

25

उत्तराखंड

42,812

42,651

161

26

पश्चिम बंगाल

12,60,941

1,52,014

11,08,927

27

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

1,288

220

1,068

28

दादरा और नगर हवेली

5,116

2,045

3,071

29

लक्षद्वीप

0

0

0

30

आंध्र प्रदेश

1,79,410

41,761

1,37,649

31

कर्नाटक

4,11,890

52,250

3,59,640

32

लद्दाख

1,125

1,125

0

कुल योग

1,95,43,945

1,18,48,029

76,95,916

 

अनुलग्नक-II

21.07.2026 को उत्तर दिए जाने वाले लोकसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 447 के भाग (ख) के उत्तर में उल्लिखित अनुलग्नक

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार प्रगति निम्नानुसार है:

क्रम संख्‍या

राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेश का नाम

मंत्रालय द्वारा आवंटित लक्ष्य

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्वीकृत आवास

पूर्ण किए गए आवास

लक्ष्य प्राप्ति हेतु शेष पूर्णता

1

अरुणाचल प्रदेश

35,937

35,591

35,591

346

2

असम

29,62,945

29,09,032

22,88,557

6,74,388

3

बिहार

50,12,752

49,09,838

41,89,147

8,23,605

4

छत्तीसगढ़

26,42,224

24,51,294

20,16,970

6,25,254

5

गोवा

257

254

243

14

6

गुजरात

8,39,116

8,29,480

7,17,038

1,22,078

7

हरियाणा

1,06,460

76,468

41,269

65,191

8

हिमाचल प्रदेश

1,08,389

1,02,682

69,018

39,371

9

जम्मू और कश्मीर

3,41,644

3,35,367

3,26,558

15,086

10

झारखंड

20,12,107

19,37,885

16,37,931

3,74,176

11

केरल

1,13,404

85,671

39,991

73,413

12

मध्य प्रदेश

57,74,572

54,14,165

43,38,053

14,36,519

13

महाराष्ट्र

43,80,522

41,39,992

19,84,776

23,95,746

14

मणिपुर

1,13,550

1,06,813

56,929

56,621

15

मेघालय

1,88,034

1,84,296

1,59,693

28,341

16

मिजोरम

29,967

29,959

25,433

4,534

17

नागालैंड

48,830

48,727

38,021

10,809

18

ओडिशा

28,28,739

28,06,753

25,47,541

2,81,198

19

पंजाब

1,13,911

1,04,710

55,522

58,389

20

राजस्थान

24,93,546

24,32,085

20,12,820

4,80,726

21

सिक्किम

1,399

1,397

1,393

6

22

तमिलनाडु

9,57,825

7,34,049

6,71,783

2,86,042

23

त्रिपुरा

3,76,913

3,76,174

3,73,940

2,973

24

उत्तर प्रदेश

42,77,493

36,55,821

36,42,934

6,34,559

25

उत्तराखंड

69,755

68,935

68,241

1,514

26

पश्चिम बंगाल

46,69,423

45,69,031

34,20,433

12,48,990

27

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

3,424

2,591

1,452

1,972

28

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

11,364

10,540

6,757

4,607

29

लक्षद्वीप

45

45

45

0

30

आंध्र प्रदेश

3,21,326

2,46,929

90,581

2,30,745

31

कर्नाटक

9,44,140

5,68,955

1,71,836

7,72,304

32

तेलंगाना

0

0

0

0

33

लद्दाख

3,004

3,004

3,004

0

कुल योग (सभी राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए)

4,17,83,017

(4.18 करोड़)

3,91,78,533

(3.92 करोड़)

3,10,33,500

(3.10 करोड़)

1,07,49,517

(1.08 करोड़)

टिप्पणी: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का कार्यान्वयन दिल्ली, चंडीगढ़ और पुदुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों में नहीं किया गया है। योजना के पूर्व चरण (वित्तीय वर्ष 2016-2024) के दौरान तेलंगाना राज्य ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का कार्यान्वयन नहीं किया।

अनुलग्नक-III

21.07.2026 को उत्तर दिए जाने वाले लोकसभा अतारांकित प्रश्न संख्या 447 के भाग (ग) के उत्तर में उल्लिखित अनुलग्नक

विगत पाँच वर्षों के दौरान योजना के अंतर्गत जारी की गई वित्तीय सहायता का राज्यवार विवरण:

( करोड़ में)

क्रम संख्‍या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

जारी की गई केंद्रीय हिस्सेदारी (वित्तीय वर्ष 2021-22 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक) **

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत अनंतिम आवंटन*

1

अरुणाचल प्रदेश

376.04

-

2

असम

24,232.40

4,769.00

3

बिहार

15,446.89

1,420.15

4

छत्तीसगढ़

9,566.51

2,730.72

5

गोवा

0.00

-

6

गुजरात

3,565.74

947.77

7

हरियाणा

211.34

269.38

8

हिमाचल प्रदेश

1,096.25

239.77

9

जम्मू और कश्मीर

2,679.57

-

10

झारखंड

3,885.96

3,181.55

11

केरल

228.88

1,341.00

12

मध्य प्रदेश

19,013.72

7,268.80

13

महाराष्ट्र

14,898.43

10,201.09

14

मणिपुर

622.41

61.43

15

मेघालय

1,788.81

-

16

मिजोरम

242.35

-

17

नागालैंड

472.10

-

18

ओडिशा

7,996.87

630.61

19

पंजाब

442.87

95.49

20

राजस्थान

6,287.23

2,690.93

21

सिक्किम

3.12

-

22

तमिलनाडु

3,159.29

1,041.91

23

त्रिपुरा

4,131.28

-

24

उत्तर प्रदेश

11,257.33

377.53

25

उत्तराखंड

685.76

-

26

पश्चिम बंगाल

687.84

-

27

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

5.45

-

28

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

23.62

-

29

लक्षद्वीप

-

-

30

आंध्र प्रदेश

515.74

4.92

31

कर्नाटक

669.17

4,652.55

32

लद्दाख

21.99

-

कुल योग

1,34,242.45

41,924.60

* वित्तीय आवंटन संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लक्ष्यों के आवंटन के आधार पर संशोधन के अधीन है।

**पीएम-जनमन सहित

***

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