Wednesday, July 22, 2026

जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई

 

संपादकीय: जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई

"जो भी दिखे, उसे ये डिलीवरी दे देना।"

जंतर-मंतर पहुँचे एक फूड पार्सल पर लिखे ये शब्द केवल एक डिलीवरी निर्देश नहीं थे, बल्कि हमारे समय के लिए एक गहरा सामाजिक संदेश थे। उस पार्सल पर न किसी व्यक्ति का नाम था, न मोबाइल नंबर, न धर्म, न जाति और न ही किसी संगठन का परिचय। मानो भेजने वाले ने यह घोषणा कर दी हो कि भूख की सबसे बड़ी पहचान केवल भूख है।

जंतर-मंतर केवल दिल्ली का एक स्थान नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र का वह सार्वजनिक मंच है जहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी समस्याएँ, अधिकार और उम्मीदें लेकर पहुँचते हैं। यहाँ किसान भी आते हैं, छात्र भी, बेरोजगार युवा भी, कर्मचारी भी, महिलाएँ भी और सामाजिक संगठन भी। उनके मुद्दे अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन एक चीज़ समान होती है—लंबा इंतज़ार, सीमित संसाधन और संघर्ष।

ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति किसी अनजान प्रदर्शनकारी के लिए भोजन भेजता है और केवल इतना लिखता है कि "जो भी दिखे, उसे दे देना", तो वह किसी एक व्यक्ति का पेट ही नहीं भरता, बल्कि लोकतंत्र में करुणा का स्थान भी मजबूत करता है।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सार्वजनिक जीवन में पहचान की राजनीति पहले से अधिक प्रभावशाली दिखाई देती है। अक्सर लोगों को उनके धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र या विचारधारा के आधार पर देखा जाता है। लेकिन भूख इन सभी सीमाओं को अस्वीकार कर देती है। एक भूखे व्यक्ति के सामने सबसे पहले भोजन का महत्व होता है, न कि उसे देने वाले की पहचान।

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता है, लेकिन उससे भी बड़ी शक्ति उसकी साझी संवेदना है। इतिहास गवाह है कि प्राकृतिक आपदाओं, महामारी, सामाजिक संकट और कठिन परिस्थितियों में देश के आम नागरिकों ने बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे की सहायता की है। यही सामाजिक पूंजी भारत को केवल एक राजनीतिक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक मानवीय सभ्यता भी बनाती है।

तकनीक ने इस मानवीय भावना को नया माध्यम दिया है। आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति दूर बैठे किसी ज़रूरतमंद तक भोजन पहुँचा सकता है। यदि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल उपभोग नहीं, बल्कि सहयोग के लिए भी होने लगे, तो यह सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

हालाँकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि भूख का समाधान केवल व्यक्तिगत दान से नहीं होगा। यह राज्य, समाज और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है कि कोई व्यक्ति भोजन के अभाव में पीड़ित न रहे। सामाजिक सुरक्षा, सामुदायिक रसोई, राहत व्यवस्था और नागरिक सहभागिता—इन सबका समान महत्व है। व्यक्तिगत संवेदनाएँ व्यवस्था का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी प्रेरणा बननी चाहिए।

जंतर-मंतर के उस पार्सल ने एक और महत्वपूर्ण बात याद दिलाई—लोकतंत्र केवल विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार से नहीं चलता, बल्कि एक-दूसरे के दुःख को समझने की क्षमता से भी मजबूत होता है। विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन संवेदनाएँ साझा होनी चाहिए।

आज जब समाज को विभाजित करने वाले अनेक विमर्श सक्रिय हैं, तब उस पार्सल पर लिखी एक पंक्ति भविष्य की दिशा भी सुझाती है—

"यदि हम इंसान को उसकी पहचान से पहले उसकी ज़रूरत से पहचानने लगें, तो शायद समाज में बहुत-सी दूरियाँ अपने आप समाप्त हो जाएँ।"

अंततः, उस फूड पार्सल का वास्तविक प्राप्तकर्ता कोई एक व्यक्ति नहीं था। उसका संदेश पूरे समाज के नाम था—मानवता का कोई पता नहीं होता, लेकिन जहाँ करुणा पहुँचती है, वहीं उसका घर बन जाता है।

देश की रक्षा और जनता की सुरक्षा—दोनों का सम्मान, लेकिन लोकतंत्र में संवाद सबसे ऊपर

देश की रक्षा और पदेश की संप्रभुता की रक्षा करते हैं और पुलिस-प्रशासन समाज में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व निभाते हैं। दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनके योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।

लेकिन जब किसी लोकतांत्रिक देश में अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, भ्रष्टाचार या अन्य जनहित के मुद्दों पर आवाज़ उठा रहे युवाओं पर बल प्रयोग की तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती हैं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है। यदि मतभेद का उत्तर बातचीत के बजाय लाठी या बल प्रयोग से दिया जाए, तो समाज में अविश्वास बढ़ सकता है।

लोकतंत्र में सरकार की शक्ति केवल कानून लागू करने में नहीं, बल्कि असहमति को सुनने, समझने और उसका समाधान खोजने में भी निहित होती है। शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है, वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर पक्ष की जिम्मेदारी है कि विरोध शांतिपूर्ण रहे और प्रशासन आवश्यक होने पर संयम तथा कानून के अनुरूप कार्य करे।

देश का भविष्य हमारे युवा हैं। उनकी ऊर्जा, प्रश्न और आकांक्षाएँ राष्ट्र निर्माण की ताकत हैं। उनका विश्वास जीतना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सबसे बड़ी सफलता है। संवाद से समाधान निकलते हैं, जबकि टकराव केवल दूरी बढ़ाता है।

एक मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है जहाँ केवल सत्ता की आवाज़ सुनाई दे, बल्कि वह है जहाँ जनता की आवाज़ भी सम्मानपूर्वक सुनी जाए।

#लोकतंत्र #संवाद #युवा #संविधान #अभिव्यक्तिकीस्वतंत्रता #जनहित #भारत

Tuesday, July 21, 2026

सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए आरक्षण

 

सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए आरक्षण

 PIB Delhi

सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स (सीएपीएफ और एआर) में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी)/राइफलमैन के पदों की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों की एक नई श्रेणी बनाई है। इसके लिए प्रावधान इस प्रकार हैं:

(i) रिक्तियों में 50 प्रतिशत का आरक्षण।

(ii) निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट। इसके अतिरिक्त, पूर्व अग्निवीरों के प्रथम बैच के उम्मीदवारों को निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से परे 5 वर्ष की आयु में छूट दी जाएगी; और

(iii) शारीरिक मानक परीक्षण (पीएसटी), शारीरिक दक्षता परीक्षण (पीईटी) और लिखित परीक्षा से छूट।

2. इसके अतिरिक्त, पूर्व अग्निवीरों की प्रगति के समन्वय हेतु गृह मंत्रालय के अधीन एक समर्पित पूर्व अग्निवीर विंग की स्थापना की गई है। फिलहाल, अग्निवीरों के पहले बैच ने अभी तक अपनी सेवा अवधि पूरी नहीं की है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

बाल यौन अपराधियों का डेटाबेस

 

बाल यौन अपराधियों का डेटाबेस

 PIB Delhi

संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन मुख्य रूप से अपने विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्यम से अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार हैं।

राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (एनडीएसओ) गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बाल अधिकार बोर्ड (एनसीआरबी) द्वारा 2018 में स्थापित एक केंद्रीकृत डेटाबेस है। इसका उद्देश्य यौन अपराधियों का रिकॉर्ड रखकर, बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) के अंतर्गत आने वाले अपराधों सहित यौन अपराधों की जांच, पहचान और रोकथाम में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता करना है। यह डेटाबेस यौन अपराधों की जांच के दौरान आरोपियों और बार-बार अपराध करने वालों की पहचान करने, आपराधिक पृष्ठभूमि की पुष्टि करने में सहायक एक जांच उपकरण के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस तक पहुंच केवल अधिकृत कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक ही सीमित है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि इस जानकारी का उपयोग केवल आधिकारिक जांच उद्देश्यों के लिए ही किया जाए।

राष्ट्रीय बाल अधिकार बोर्ड द्वारा विकसित राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड जांच (एनसीआरसी) पोर्टल का उपयोग सरकारी एजेंसियां ​​कर्मचारियों और कर्मियों के प्रारंभिक सत्यापन के लिए करती हैं। यह सीसीटीएनएस/अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) डेटाबेस का उपयोग करके प्रारंभिक अपराध रिकॉर्ड जांच की सुविधा प्रदान करता है।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने सीसीटीएनएस एप्लिकेशन के माध्यम से एक नागरिक पोर्टल शुरू किया है। इससे व्यक्तियों/संगठनों द्वारा सत्यापन अनुरोध करना आसान हो गया है। शैक्षणिक संस्थान, बाल देखभाल गृह और अन्य प्रतिष्ठान सीसीटीएनएस नागरिक पोर्टल के माध्यम से व्यक्तियों के सत्यापन के लिए अनुरोध कर सकते हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा रिकॉर्ड (एनसीआरसी) का उपयोग कर सकती है।

गृह मंत्रालय ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण और अन्य साइबर अपराधों की घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए ऑनलाइन साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी शुरू किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग हेल्पलाइन (1930) साइबर से संबंधित अपराधों की रिपोर्टिंग में सहायता प्रदान करती है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

 

 

सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार

 

 

 सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सरकार के आश्वासन के बावजूद नीट मुद्दे पर चर्चा की अपनी पुरानी मांग से पीछे हट गए हैं।

 


 SHABD,AIR HQ, July 21,

 

 

 

सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सरकार के आश्वासन के बावजूद नीट मुद्दे पर चर्चा की अपनी पुरानी मांग से पीछे हट गए हैं। इससे पहले आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर नीट मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन किया।

 

 

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। श्री राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार संसद में नीट मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हो जाती है, तो वे तुरंत अपना विरोध प्रदर्शन खत्म कर देंगे। कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने इस मामले पर चर्चा करने की मांग मान ली है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस नेता को सरकार का रुख बताया गया, तो श्री गांधी अपनी पुरानी मांग से पीछे हट गए और कईं नई मांगें रख दीं।

 

 

श्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी जैसे वरिष्ठ नेता के इतनी जल्दी अपनी बात से पीछे हटने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह श्री गांधी को शोभा नहीं देता। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यह स्पष्ट कर दिया है कि नीट पेपर लीक मामले के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इस मामले में शामिल पाए गए लोगों पर कार्रवाई की भी जा रही है।

 

 

इसके बाद, नीट पेपर लीक के मुद्दे पर नई दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग के पास विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और विपक्षी दलों के अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया है।

 

योगी सरकार ने तकनीकी युवाओं के लिए खोले स्वरोजगार के नए द्वार, बाट-माप उपकरण मरम्मत लाइसेंस के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल लॉन्च

 

 

 योगी सरकार ने तकनीकी युवाओं के लिए खोले स्वरोजगार के नए द्वार, बाट-माप उपकरण मरम्मत लाइसेंस के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल लॉन्च

 

 

 प्रदेश के तकनीकी डिप्लोमा एवं डिग्रीधारी युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा एवं उपभोक्ता मामले मंत्री आशीष पटेल ने मंगलवार को बाट-माप उपकरणों के मरम्मत कार्य हेतु लाइसेंस आवेदन के लिए तकनीकी डिप्लोमा/डिग्री धारक युवाओं को प्रोत्साहित करने की नीति-2026 के ऑनलाइन मॉड्यूल का शुभारंभ किया। मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। सरकार का प्रयास है कि पॉलिटेक्निक, आईटीआई और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवा केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी तकनीकी दक्षता के आधार पर स्वयं का व्यवसाय भी स्थापित कर सकें। इस नीति के तहत तकनीकी डिप्लोमा और डिग्रीधारी युवाओं को बाट-माप उपकरणों की मरम्मत के क्षेत्र में कार्यशाला स्थापित करने और मरम्मतकर्ता लाइसेंस प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्यशाला की स्थापना के लिए आवश्यक उपकरणों, टूल्स और अन्य सामग्री की खरीद पर होने वाले व्यय की 50,000 रुपये तक की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। नीति के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक बाट-माप उपकरणों की मरम्मत के लिए निर्धारित तकनीकी शैक्षिक योग्यता रखने वाले युवा पात्र होंगे। इसमें आईटीआई इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन अथवा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री तथा भौतिक विज्ञान में बीएससी जैसी योग्यताएं शामिल हैं। पात्र युवा निवेश मित्र पोर्टल और विभागीय पोर्टल समहंसउमजतवसवहलण्नचण्हवअण्पद के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर मरम्मतकर्ता लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। लाइसेंस प्राप्त करने के बाद वे अपनी कार्यशाला स्थापित कर बाट-माप उपकरणों की मरम्मत का कार्य शुरू कर सकेंगे। कार्यशाला के लिए आवश्यक मास्टर सेट, लोड सेट तथा अन्य उपकरणों की खरीद पर नीति की शर्तों के अनुसार प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाएगा। मंत्री पटेल ने कहा कि ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किए जाने से आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक होगी, जिससे युवाओं को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होना सहित अन्य निर्धारित सामान्य शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। आवेदन, सत्यापन और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।

 

 

Story Line :

 SHABD,lucknow, July 21,

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार और UAE ने राज्य में फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार और UAE ने राज्य में फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

 

 

Synopsis : आंध्र प्रदेश सरकार और संयुक्त अरब अमीरात ने आज राज्य में यूएई फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इससे फ़ूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में ज़्यादा निवेश, निर्यात और व्यापार होगा। इस समझौते पर अमरावती में राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

 

 


 SHABD,AIR HQ, July 21,

 

 

 

आंध्र प्रदेश सरकार और संयुक्त अरब अमीरात ने आज राज्य में यूएई फ़ूड क्लस्टर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इससे फ़ूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में ज़्यादा निवेश, निर्यात और व्यापार होगा। इस समझौते पर अमरावती में राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

 

 

समझौते के अंतर्गत यूएई फ़ूड क्लस्टर, आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर आम, केला और कोको जैसे बागवानी उत्पादों की प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए काम करेगा। इस साझेदारी का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को मज़बूत करना और यूएई की कंपनियों से निवेश आकर्षित करना है।

 

 

इसके अंतर्गत यूएई की कंपनी फ़्लोर मास्टर्स इंटरनेशनल ने चित्तूर ज़िले के गंगाधरा नेल्लोर में फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।

 

 

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि यह समझौता इस साल की शुरुआत में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक के दौरान बनी सहमति को पूरा करता है।

 

 

यूएई के मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में बहुत ज़्यादा क्षमता है।

 

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई

  संपादकीय: जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई "जो भी दिखे, उसे ये डिलीवरी दे देना।" जंतर-मंतर पहुँचे एक फूड पार्सल पर लिखे ये शब्...