उनका सार्वजनिक जीवन संघर्ष और समर्पण की एक क्रमिक यात्रा रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की। शिक्षा जगत में रहते हुए ही उन्होंने समाज और पहाड़ की समस्याओं को निकट से समझा। अंततः जनसेवा के व्यापक उद्देश्य से उन्होंने शिक्षक पद से त्यागपत्र दिया और सक्रिय राजनीति का मार्ग चुना।
इसके बाद वे ब्लॉक प्रमुख बने—जहाँ उन्होंने स्थानीय विकास और ग्राम स्तर की समस्याओं को प्राथमिकता दी। जमीनी राजनीति की समझ और जनता से सीधे संवाद ने उन्हें आगे बढ़ाया। तत्पश्चात वे लगातार लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। जनता का यह विश्वास उनकी कार्यशैली और ईमानदारी का प्रमाण था। बाद में उन्हें राज्य योजना आयोग, उत्तराखंड का उपाध्यक्ष बनाया गया, जहाँ उन्होंने राज्य की विकास नीतियों में पहाड़ की वास्तविक आवश्यकताओं को शामिल करने का प्रयास किया।
लेकिन इन उपलब्धियों के बीच उनकी सादगी कभी नहीं बदली। सामान्य पहनावा, सीमित संसाधन, और बेहद सहज दिनचर्या—वे पद पर रहते हुए भी आम नागरिक की तरह जीवन जीते रहे। मुझे आज भी वे दिन याद हैं जब मैं उन्हें झंडा चौक से अपने स्कूटर पर उनके घर छोड़ आता था। एक पूर्व विधायक और योजना आयोग के उपाध्यक्ष का बिना किसी तामझाम, बिना सुरक्षा घेरे, साधारण स्कूटर पर बैठना—यह उनकी विनम्रता का जीवंत उदाहरण था।
कभी-कभी वे अचानक हमारे घर पिताजी से मिलने आ जाते। बिना औपचारिकता, बिना सूचना। चाय की एक साधारण प्याली के साथ पहाड़ की राजनीति, समाज और भविष्य पर गहन और व्यावहारिक चर्चा होती। वे केवल विचारक नहीं, बल्कि समाधान खोजने वाले जननेता थे। पलायन, रोजगार, जल-जंगल-जमीन जैसे मुद्दे उनके लिए केवल राजनीतिक विमर्श नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी थे।
आज जब राजनीति में वीआईपी संस्कृति का प्रभाव बढ़ गया है—भारी काफिले, दिखावटी वैभव और जनसंपर्क से अधिक छवि प्रबंधन—तब रावत जी का जीवन एक मानक की तरह सामने आता है। उन्होंने सिद्ध किया कि राजनीति का वास्तविक सम्मान सादगी, ईमानदारी और जनता के साथ जीवंत संबंध से मिलता है, न कि प्रदर्शन से।
उनकी पुण्यतिथि पर, चाहे हम उन्हें एक दिन बाद स्मरण कर रहे हों, यह संकल्प लेना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन को पुनः मूल्यों से जोड़ा जाए।
स्वर्गीय भारत सिंह रावत जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
आपकी संघर्षपूर्ण यात्रा, सादगीपूर्ण जीवन और जनसेवा का संकल्प सदैव प्रेरणा देता रहेगा। 🙏
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