लोक अदालत के फायदे और सीमाएँ
✅ लोक अदालत के फायदे (Advantages)
-
तेज़ न्याय:
-
लंबे समय तक कोर्ट में केस लटकने की बजाय यहाँ एक ही दिन में निपटारा हो सकता है।
-
-
सस्ता और निःशुल्क:
-
कोई कोर्ट फीस नहीं लगती।
-
अगर केस पहले से कोर्ट में है, तो दी गई फीस वापस मिल जाती है।
-
-
अनौपचारिक प्रक्रिया:
-
यहाँ माहौल कोर्ट जैसा नहीं होता।
-
दोनों पक्ष आराम से अपनी बात रख सकते हैं।
-
-
आपसी सहमति से समाधान:
-
फैसला थोपे जाने के बजाय समझौते से होता है, इसलिए झगड़ा आगे नहीं बढ़ता।
-
-
फैसले की वैधता:
-
लोक अदालत का निर्णय अदालत की डिक्री (Court Decree) माना जाता है और पूरी तरह मान्य होता है।
-
-
समाज में सौहार्द:
-
आपसी रिश्ते और सामाजिक शांति बनी रहती है क्योंकि मामला झगड़े से नहीं, सहमति से सुलझता है।
-
⚠️ लोक अदालत की सीमाएँ (Limitations)
-
केवल समझौते वाले मामले:
-
ऐसे केस ही सुलझ सकते हैं जिनमें दोनों पक्ष समझौते को तैयार हों।
-
-
गंभीर आपराधिक मामले नहीं:
-
हत्या, बलात्कार, डकैती जैसे गंभीर अपराध लोक अदालत में नहीं जा सकते।
-
-
अपील का अभाव:
-
लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है।
-
अगर किसी को लगता है कि समझौता दबाव में हुआ, तो फिर से सामान्य कोर्ट में ही जाना पड़ेगा।
-
-
सीमित दायरा:
-
केवल कुछ तरह के सिविल, परिवारिक और कंपाउंडेबल क्रिमिनल मामलों तक ही सीमित है।
-
👉 संक्षेप में:
लोक अदालत तेज़, सस्ता और सौहार्दपूर्ण न्याय देती है, लेकिन केवल उन्हीं मामलों में जहाँ समझौता संभव हो।
No comments:
Post a Comment