लोक अदालत पर छोटा नोट (Short Note / Summary in Hindi) —
📝 लोक अदालत – संक्षिप्त नोट
परिभाषा
लोक अदालत का अर्थ है जनता की अदालत। यह वैकल्पिक विवाद निपटारा प्रणाली (ADR) है, जहाँ पक्षकार आपसी सहमति से विवाद सुलझाते हैं।
कानूनी आधार
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Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत स्थापित।
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1982 में पहली बार गुजरात में लोक अदालत आयोजित हुई।
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9 नवम्बर 1995 से पूरे भारत में लागू।
प्रकार
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साधारण लोक अदालत – समय-समय पर लगती है।
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स्थायी लोक अदालत (PLA) – सार्वजनिक सेवाओं (Public Utility Services) से जुड़े मामलों के लिए।
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राष्ट्रीय लोक अदालत – पूरे देश में एक ही दिन में आयोजित।
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मोबाइल लोक अदालत – गाँव-गाँव जाकर सुनवाई।
किन मामलों का निपटारा
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सिविल विवाद (पारिवारिक, ज़मीन-जायदाद, बैंक लोन)
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मोटर दुर्घटना मुआवज़ा
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बिजली, पानी, बीमा से जुड़े विवाद
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छोटे आपराधिक मामले (Compoundable offences)
विशेषताएँ
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तेज़ और निःशुल्क न्याय
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कोर्ट फीस नहीं, पहले से जमा फीस वापस
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आपसी सहमति से समाधान
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निर्णय = कोर्ट डिक्री के समान
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अपील का प्रावधान नहीं
महत्व
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अदालतों का बोझ कम करना
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गरीब और अशिक्षित को सुलभ न्याय
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सामाजिक सौहार्द और आपसी रिश्तों की रक्षा
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समय और धन की बचत
👉 संक्षेप में:
लोक अदालत = तेज़, सस्ता, सरल और सहमति आधारित न्याय का माध्यम।
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