"न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" (New World Order) एक विवादास्पद और व्यापक रूप से चर्चा में रहने वाला विषय है, जो वैश्विक राजनीति, कूटनीति और समाजशास्त्र से जुड़ा हुआ है। वर्तमान में, यह अवधारणा दो प्रमुख संदर्भों में चर्चा का विषय बनी हुई है:
1. चीन और उसके सहयोगियों द्वारा प्रस्तावित नया वैश्विक शासन
सितंबर 2025 में बीजिंग में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन और एक भव्य सैन्य परेड ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेतृत्व में एक नए वैश्विक आदेश की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत दिया। इस परेड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और ईरान के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिन्हें पश्चिमी विश्लेषकों ने "अराजकता का धुरी" (Axis of Upheaval) के रूप में वर्णित किया है। (The Week)
शी जिनपिंग ने इस अवसर पर एक "न्यायपूर्ण और उचित वैश्विक शासन प्रणाली" की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें गैर-पश्चिमी देशों को प्रमुख भूमिका दी जाए। उन्होंने चीन को एक स्थिर और विश्वसनीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया, जो अमेरिकी नेतृत्व की अनिश्चितताओं के बीच एक मजबूत विकल्प प्रदान करता है। (Financial Times)
विश्लेषकों का मानना है कि चीन की यह रणनीति पश्चिमी प्रभाव को धीरे-धीरे घेरने और अवशोषित करने की है, बजाय इसके कि वह सीधे टकराव की स्थिति में आए। यह रणनीति "शतरंज के मुकाबले शियांगची" (Chinese chess vs. Western chess) के समान मानी जा रही है। (The Sun)
2. "न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" के रूप में फैलने वाली साजिश सिद्धांत
दूसरी ओर, "न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" एक व्यापक साजिश सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है, जो यह दावा करता है कि एक गुप्त कुलीन वर्ग एक केंद्रीकृत और तानाशाही वैश्विक शासन स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस सिद्धांत के अनुसार, वैश्विक संकटों, जैसे महामारी, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकटों, का उपयोग इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों और तथ्य-जांचकर्ताओं ने इन दावों को निराधार और भ्रामक बताया है। (Wikipedia, ISD)
3. वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की भूमिका
वर्तमान में, वैश्विक शक्ति समीकरण में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच आंतरिक मतभेद, जैसे कि डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति, ने पश्चिमी गठबंधन को कमजोर किया है। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए, चीन और उसके सहयोगी देशों ने एक वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाए हैं। (The Guardian)
भारत, जो SCO और BRICS जैसे संगठनों का सदस्य है, इस नए वैश्विक परिप्रेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि, भारत की अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक प्राथमिकताएँ हैं, जो उसे इस नए वैश्विक आदेश में सक्रिय रूप से भाग लेने से रोक सकती हैं।
निष्कर्ष:
"न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" की अवधारणा विभिन्न दृष्टिकोणों से देखी जा सकती है। जहाँ एक ओर यह चीन और उसके सहयोगियों द्वारा प्रस्तावित एक वैकल्पिक वैश्विक शासन के रूप में उभर रही है, वहीं दूसरी ओर यह एक साजिश सिद्धांत के रूप में भी चर्चा में है। वैश्विक राजनीति में हो रहे इन परिवर्तनों के बीच, भारत को अपनी कूटनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
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