भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935)
📜 भारत सरकार अधिनियम, 1935
यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिनियम था। यह 1937 से लागू हुआ और 1947 तक भारत का प्रशासन इसी अधिनियम के अंतर्गत चलता रहा।
🔑 मुख्य विशेषताएँ
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संघीय संरचना (पूरी तरह लागू नहीं हुई)
- प्रावधान था कि भारत में एक संपूर्ण संघ (All-India Federation) बनेगा, जिसमें प्रांत और रियासतें शामिल होंगी।
- प्रांतों की भागीदारी अनिवार्य थी, लेकिन रियासतों की स्वेच्छा पर आधारित।
- चूँकि रियासतें शामिल नहीं हुईं, संघ की योजना लागू नहीं हो सकी।
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विषयों का विभाजन
- शक्तियों को तीन सूचियों में बाँटा गया:
- संघ सूची (Federal List): 59 विषय (रक्षा, विदेश नीति आदि)
- प्रांतीय सूची (Provincial List): 54 विषय (पुलिस, स्वास्थ्य आदि)
- सहवर्ती सूची (Concurrent List): 36 विषय (फौजदारी कानून, विवाह आदि)
- शक्तियों को तीन सूचियों में बाँटा गया:
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प्रांतीय स्वायत्तता
- प्रांतों को अधिक स्वायत्तता दी गई।
- प्रांतीय द्वैध शासन (Dyarchy) समाप्त किया गया।
- प्रांतीय मंत्रिमंडल विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी बना।
- फिर भी, गवर्नर के पास विशेष शक्तियाँ रहीं।
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केंद्रीय स्तर पर द्वैध शासन
- केंद्र स्तर पर पहली बार Dyarchy लागू हुआ।
- रक्षा और विदेश नीति गवर्नर-जनरल के अधीन रखी गई।
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द्विसदनीय केंद्रीय विधानमंडल
- केंद्र में दो सदनों की व्यवस्था की गई:
- राज्य परिषद (Council of States)
- संघीय सभा (Federal Assembly)
- केंद्र में दो सदनों की व्यवस्था की गई:
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निर्वाचन अधिकार का विस्तार
- लगभग 10% भारतीयों को मताधिकार मिला (शिक्षा, संपत्ति और कराधान के आधार पर)।
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गवर्नर-जनरल की शक्तियाँ
- गवर्नर-जनरल केंद्र का प्रमुख रहा।
- उसके पास विशेष उत्तरदायित्व और आरक्षित शक्तियाँ थीं।
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संघीय न्यायालय (Federal Court)
- 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना हुई, जो प्रांतों और केंद्र के बीच विवाद निपटाने के लिए था।
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प्रांतों का पुनर्गठन
- बर्मा और एडन को भारत से अलग किया गया।
- बिहार और उड़ीसा को अलग-अलग प्रांत बनाया गया।
- सिंध को बंबई से अलग किया गया।
- उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) को अलग प्रांत का दर्जा दिया गया।
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भारत परिषद (Council of India) समाप्त
- लंदन स्थित भारत परिषद को समाप्त कर दिया गया।
📌 महत्व
- संघीय ढाँचा लागू नहीं हो सका, लेकिन प्रांतीय स्वायत्तता लागू हुई और 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए।
- 1935 का अधिनियम ही 1947 तक भारत की प्रशासनिक रीढ़ रहा।
- भारतीय संविधान (1950) में कई प्रावधान इसी अधिनियम से लिए गए (जैसे – संघीय सूचियाँ, गवर्नर की शक्तियाँ, संघीय न्यायालय आदि)।
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