📜 नीति प्रस्ताव – राजनीति में आय पर कर लगाने की व्यवस्था
✅ प्रस्ताव का उद्देश्य
राजनीतिक पदों से प्राप्त आय, भत्ते, मानदेय या अन्य आर्थिक लाभ पर उचित कर लागू कर पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक समता सुनिश्चित करना।
---
🔑 मुख्य बिंदु
1. राजनीति सेवा है, परंतु आय भी है
नेताओं को वेतन, भत्ता, यात्रा व्यय, आवास आदि का लाभ मिलता है। इन पर कर लगाना न्यायसंगत है।
2. कर व्यवस्था का लक्ष्य
भ्रष्टाचार और काले धन पर रोक
जनता के प्रति जवाबदेही
आर्थिक समानता
कर प्रणाली में पारदर्शिता
3. किन पर कर लगे?
निर्वाचित पदों से मिलने वाला वेतन/मानदेय
चुनावी फंड का उपयोग जहाँ निजी लाभ में हो
राजनीतिक सलाहकारों, ठेकेदारों को दिए गए भुगतान, यदि निजी लाभ में उपयोग हो रहा हो
अन्य स्रोतों से जुड़े लाभ, जैसे भूमि, अनुबंध, निवेश
4. किन पर लागू नहीं होगा?
सार्वजनिक सेवा हेतु खर्च किए गए व्यय
राजनीतिक गतिविधियों में किए गए वैध खर्च जो जनता के हित में हों
चुनाव प्रचार पर पारदर्शी रूप से घोषित व्यय
---
✅ लागू करने के तरीके
1. आय की घोषणा अनिवार्य
प्रत्येक प्रतिनिधि को वार्षिक संपत्ति और आय का लेखा सार्वजनिक पोर्टल पर देना होगा।
2. कर दर
सामान्य आय की तरह स्लैब आधारित कर लागू हो
सेवा आधारित खर्च पर छूट
दान की राशि पर सीमित कर, और उसका पारदर्शी उपयोग
3. स्वतंत्र ऑडिट तंत्र
चुनाव आयोग/कर विभाग द्वारा नियमित ऑडिट किया जाए।
4. जनता की निगरानी
नागरिक पोर्टल पर हर प्रतिनिधि की आय, संपत्ति और कर भुगतान सार्वजनिक हो।
---
📢 बहस के पक्ष और विपक्ष
पक्ष (कर लगना चाहिए) विपक्ष (कर नहीं लगना चाहिए)
आय पर कर न्यायसंगत है राजनीति सेवा है, व्यवसाय नहीं
भ्रष्टाचार और काले धन पर रोक नए लोगों को राजनीति में आने से रोकेगा
पारदर्शिता बढ़ेगी कर से सेवा भावना कमजोर हो सकती है
जनता का विश्वास मजबूत होगा पहले से अन्य आय पर कर लगाया जाता है
---
✅ प्रस्ताव का निष्कर्ष
राजनीति में आय पर कर लगाना लोकतंत्र की मजबूती, आर्थिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए आवश्यक कदम है। इसे लागू करने से राजनीति सेवा भावना से प्रेरित रहते हुए आर्थिक अनुशासन के तहत कार्य करेगी। साथ ही, कर नीति ऐसी हो कि ईमानदार और जनसेवक नेतृत्व को प्रोत्साहन मिले और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
No comments:
Post a Comment