राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat)
📌 राष्ट्रीय लोक अदालत क्या है?
राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) वह व्यवस्था है जिसमें पूरे देश में एक ही दिन, सभी राज्यों और जिलों में लोक अदालतें आयोजित होती हैं।
👉 इसका उद्देश्य है – देशभर में लंबित मामलों को एक साथ तेजी से सुलझाना।
⚖️ शुरुआत
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पहली बार 2015 में National Legal Services Authority (NALSA) के निर्देश पर आयोजित की गई।
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इसके बाद से यह नियमित रूप से (आमतौर पर साल में 4 बार, हर 3 महीने में) आयोजित होती है।
🏛️ आयोजन का ढाँचा
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NALSA – राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनाती है।
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SLSA (राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) – राज्य स्तर पर आयोजन करता है।
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DLSA (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) – जिला स्तर पर लोक अदालत लगाता है।
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तहसील/तालुका स्तर – छोटे स्तर पर भी लोक अदालत लगाई जाती है।
📂 किन मामलों का निपटारा होता है?
राष्ट्रीय लोक अदालत में वे मामले लाए जाते हैं:
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कोर्ट में लंबित (Pending) मामले
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पूर्व-वाद (Pre-litigation) मामले – यानी कोर्ट में दाखिल करने से पहले ही समझौते के लिए भेजे गए विवाद
मुख्य मामले:
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बैंक रिकवरी केस
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बिजली/पानी बिल विवाद
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मोटर दुर्घटना मुआवज़ा केस
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श्रम विवाद
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बीमा क्लेम
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पारिवारिक विवाद
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छोटे आपराधिक मामले (Compoundable offences)
✅ राष्ट्रीय लोक अदालत के फायदे
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एक ही दिन में लाखों मामलों का निपटारा → कोर्ट का बोझ कम होता है।
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समझौते से निपटारा → दोनों पक्षों को संतोष मिलता है।
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निःशुल्क और त्वरित → फीस नहीं लगती और समय बचता है।
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सामाजिक सौहार्द → रिश्ते और सामंजस्य बने रहते हैं।
📊 प्रभाव
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उदाहरण के तौर पर, हाल की राष्ट्रीय लोक अदालतों में एक दिन में 50–60 लाख मामलों तक का निपटारा हुआ है।
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यह न्यायपालिका के लंबित मामलों (Pending Cases) को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
👉 संक्षेप में:
राष्ट्रीय लोक अदालत पूरे देश में एक दिन में आयोजित होने वाला विशाल स्तर का न्याय मेला है, जिसमें लाखों छोटे और सहमति योग्य मामलों का निपटारा समझौते से किया जाता है।
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