डॉ. भीमराव अंबेडकर की किताब “The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution” और उनके हिल्टन यंग कमीशन (1925–26) के सामने दिये गये भाषण का संक्षिप्त लेकिन अध्यायनुमा सारांश प्रस्तुत है।
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📘 “The Problem of the Rupee” (1923) – अंबेडकर का दृष्टिकोण
1. रुपये की उत्पत्ति और संकट
अंबेडकर ने दिखाया कि भारत में रुपया पहले चाँदी के सिक्के (Silver Standard) पर आधारित था।
जब चाँदी की अंतरराष्ट्रीय कीमत गिरने लगी, तो रुपये का मूल्य भी गिरा।
इसका नुकसान सबसे ज्यादा मजदूरों और गरीबों को हुआ क्योंकि उनकी आय घट गई।
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2. गोल्ड स्टैंडर्ड बनाम सिल्वर स्टैंडर्ड
अंबेडकर ने कहा कि सिल्वर स्टैंडर्ड भारत के लिए खतरनाक है।
रुपये का मूल्य स्थिर रखने के लिए इसे गोल्ड स्टैंडर्ड पर आधारित होना चाहिए।
ब्रिटिश सरकार रुपये को "टोकन करंसी" बनाना चाहती थी, लेकिन अंबेडकर ने चेतावनी दी कि यह लंबे समय में नुकसानदेह होगा।
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3. वेतन, मजदूरी और रुपया
जब रुपया गिरता है तो महंगाई बढ़ती है।
मजदूरी और वेतन महंगाई की रफ्तार से कभी नहीं बढ़ पाते।
इस तरह रुपया गरीब आदमी से उसकी मेहनत की कमाई छीन लेता है।
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4. केंद्रीय बैंक की जरूरत
अंबेडकर ने कहा कि भारत को अपनी मुद्रा और क्रेडिट व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि यह बैंक जनता के हित में काम करे और रुपये की स्थिरता बनाए रखे।
👉 यही विचार बाद में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 और RBI (1935) की स्थापना का आधार बने।
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5. समाधान (Solutions)
अंबेडकर ने प्रस्ताव रखा:
भारत को गोल्ड स्टैंडर्ड अपनाना चाहिए।
रुपये को स्थिर और मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार को एक सख्त मौद्रिक नीति बनानी होगी।
रुपये की छपाई (Currency Issue) केवल केंद्रीय बैंक के अधीन होनी चाहिए।
मुद्रा नीति का उद्देश्य अमीरों का लाभ नहीं, बल्कि गरीबों की सुरक्षा होना चाहिए।
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🏛 हिल्टन यंग कमीशन (1925–26) में अंबेडकर का भाषण
अंबेडकर को इस आयोग के सामने गवाही देने के लिए बुलाया गया। वहाँ उन्होंने कहा:
1. “यदि रुपया अस्थिर रहेगा तो भारत की पूरी अर्थव्यवस्था डगमगाएगी।”
2. “भारत को एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक चाहिए, जो केवल सरकार का आदेश मानने वाला विभाग न होकर विशेषज्ञों द्वारा चलाया जाए।”
3. “रुपये की स्थिरता ही मजदूर, किसान और गरीब वर्ग की रक्षा कर सकती है।”
👉 उनकी गवाही का सीधा असर पड़ा और बाद में Reserve Bank of India (RBI) की स्थापना का रास्ता साफ हुआ।
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✅ संक्षेप में:
डॉ. अंबेडकर ने रुपया और मुद्रा पर गहरी आर्थिक दृष्टि दी। उन्होंने कहा कि रुपया केवल धातु का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह गरीब आदमी की जिंदगी और पेट से जुड़ा हुआ है। इसलिए रुपया स्थिर और सुरक्षित होना चाहिए।
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