Wednesday, September 17, 2025

डॉ. भीमराव अंबेडकर का “रुपये की समस्या” विषय पर भाषण-शैली (Speech Style) में प्रस्तुत

 डॉ. भीमराव अंबेडकर का “रुपये की समस्या” विषय पर भाषण-शैली (Speech Style) में प्रस्तुत



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🏛 डॉ. भीमराव अंबेडकर का भाषण (रुपये की समस्या पर)

“मान्यवर अध्यक्ष महोदय, और उपस्थित साथियों,”

भारत की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए हमें सबसे पहले रुपये की समस्या को समझना होगा। रुपया कोई साधारण धातु का सिक्का नहीं है। यह हमारे मजदूर की मेहनत है, हमारे किसान की फसल है, और गरीब आदमी की रोटी है। यदि रुपया अस्थिर हो जाए तो इसका सीधा बोझ सबसे पहले गरीब पर पड़ता है।

हम सब जानते हैं कि भारत की मुद्रा चाँदी पर आधारित रही है। जब पूरी दुनिया सोने के मानक (Gold Standard) की ओर बढ़ी, तब भी हमने चाँदी को पकड़े रखा। परिणाम यह हुआ कि चाँदी का मूल्य गिरते ही हमारा रुपया गिर गया। रुपये का यह अवमूल्यन (Depreciation) महंगाई को जन्म देता है। मजदूर की मजदूरी महंगाई के साथ नहीं बढ़ती। किसान का उत्पादन महँगा हो जाता है लेकिन उसकी आय स्थिर रहती है। इस प्रकार रुपये की कमजोरी का बोझ अमीर वर्ग नहीं बल्कि गरीब जनता उठाती है।

मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मुद्रा व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल व्यापारियों या सरकार की सुविधा नहीं होना चाहिए। मुद्रा व्यवस्था का पहला और सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए – स्थिरता। बिना स्थिर रुपये के न तो मजदूर को न्याय मिलेगा, न ही किसान को सुरक्षा।

आज की हमारी समस्या यही है – रुपया अस्थिर है। इसे स्थिर करने का उपाय केवल यही है कि भारत एक सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक मुद्रा नीति अपनाए। मेरी राय में भारत को तत्काल एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक की आवश्यकता है। यह बैंक राजनीतिक दबाव से मुक्त हो और केवल जनता के हित में कार्य करे। रुपये की छपाई, उसका वितरण और उसकी स्थिरता का दायित्व केवल इस बैंक पर होना चाहिए।

मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि भारत की मौद्रिक नीति गरीब के हित को सामने रखे। यदि रुपये की अस्थिरता से सबसे अधिक पीड़ा गरीब को झेलनी पड़ती है, तो उसका समाधान भी गरीब की रक्षा को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।

अंत में मैं यही कहना चाहूँगा – रुपया केवल एक सिक्का नहीं है। यह हमारे समाज की आर्थिक न्याय की कसौटी है। यदि रुपया स्थिर है तो समाज में न्याय है, समानता है और सुरक्षा है। यदि रुपया अस्थिर है तो सबसे पहले पीड़ित होगा गरीब, और सबसे अंत में लाभान्वित होंगे अमीर। इसलिए हमें आज ही इस समस्या का समाधान करना होगा।

“जय भीम।”


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👉 यह भाषण मैंने अंबेडकर के विचारों और उनके ग्रंथ “The Problem of the Rupee” के आधार पर आधुनिक हिंदी शैली में तैयार किया है।

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