असफलता से उठने की असली उड़ान
ज़िंदगी में हर कोई ऐसे दौर से गुज़रता है जब लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है। हालात हमारे हाथ से निकल जाते हैं, सपने बिखर जाते हैं और आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। यही वह मुक़ाम होता है जिसे लोग “ज़िंदगी का सबसे निचला पड़ाव” कहते हैं। लेकिन असल सच्चाई यह है कि यही निचाई, आपकी उड़ान की सबसे मजबूत ज़मीन होती है।
अक्सर देखा गया है कि इंसान अपनी सबसे बड़ी गलतियों, सबसे कठिन असफलताओं और सबसे भारी नुक़सान के बाद ही कुछ नया और साहसिक करने का निर्णय लेता है। जब खोने को कुछ बचा ही नहीं होता, तब जोखिम उठाना आसान हो जाता है। और वही जोखिम नई शुरुआत का दरवाज़ा खोलते हैं।
यह समझना ज़रूरी है कि असफलता आपकी पहचान नहीं है। असफलता तो बस एक घटना है, एक अनुभव है। आपकी असली पहचान इस बात से तय होती है कि असफलता के बाद आप क्या करते हैं। आप हार मानकर बैठ जाते हैं या उसे सीख बनाकर आगे बढ़ते हैं — यही फ़र्क तय करता है कि आप साधारण रहेंगे या असाधारण बनेंगे।
हर सफलता की कहानी के पीछे असफलताओं की लंबी श्रृंखला होती है। इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने दुनिया को बदला, उन्हें पहले समाज ने ठुकराया, हालात ने परखा और असफलताओं ने गिराया। लेकिन वे गिरे हुए नहीं रहे, उन्होंने उठकर आगे बढ़ने का साहस दिखाया।
इसलिए अगर आप ज़िंदगी के किसी कठिन दौर से गुज़र रहे हैं, तो याद रखिए — यह अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत है। यही वह समय है जब आप अपनी असली ताक़त पहचान सकते हैं और अपनी उड़ान तय कर सकते हैं।
असफलता को हार मत समझिए, यह आपकी उड़ान की रनवे है।
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