लेकिन जब किसी लोकतांत्रिक देश में अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, भ्रष्टाचार या अन्य जनहित के मुद्दों पर आवाज़ उठा रहे युवाओं पर बल प्रयोग की तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती हैं। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है। यदि मतभेद का उत्तर बातचीत के बजाय लाठी या बल प्रयोग से दिया जाए, तो समाज में अविश्वास बढ़ सकता है।
लोकतंत्र में सरकार की शक्ति केवल कानून लागू करने में नहीं, बल्कि असहमति को सुनने, समझने और उसका समाधान खोजने में भी निहित होती है। शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है, वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर पक्ष की जिम्मेदारी है कि विरोध शांतिपूर्ण रहे और प्रशासन आवश्यक होने पर संयम तथा कानून के अनुरूप कार्य करे।
देश का भविष्य हमारे युवा हैं। उनकी ऊर्जा, प्रश्न और आकांक्षाएँ राष्ट्र निर्माण की ताकत हैं। उनका विश्वास जीतना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सबसे बड़ी सफलता है। संवाद से समाधान निकलते हैं, जबकि टकराव केवल दूरी बढ़ाता है।
एक मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है जहाँ केवल सत्ता की आवाज़ सुनाई दे, बल्कि वह है जहाँ जनता की आवाज़ भी सम्मानपूर्वक सुनी जाए।
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