Wednesday, April 9, 2025

**क्या सभ्यता और संस्कृति को समृद्ध रखने के लिए नदियों को इंसानी दर्जा देना होगा?**

  


इसका उत्तर एक गहरी सामाजिक, आध्यात्मिक और कानूनी बहस से जुड़ा है।


### 1. **नदी और संस्कृति का रिश्ता**

भारत में सभ्यता का जन्म ही नदियों के किनारे हुआ — सिंधु, गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, नर्मदा जैसी नदियाँ केवल जलस्रोत नहीं रहीं, वे **"जीवित संस्कृति"** का केंद्र बनीं।  

नदियाँ केवल पानी नहीं देतीं, वे त्योहारों, रीतियों, संगीत, साहित्य और जीवन दर्शन का हिस्सा हैं।  

> जब गंगा की पूजा होती है, तो वो केवल श्रद्धा नहीं, बल्कि संरक्षण की भावना भी है।


### 2. **इंसानी दर्जा देने का मतलब**

नदी को **"कानूनी व्यक्ति"** का दर्जा देने का अर्थ है कि—

- नदी के भी **अधिकार होंगे** (जैसे जीवन, संरक्षण, प्रदूषण से मुक्ति),

- कोई भी उसके हक में **मुकदमा दायर कर सकता है**,

- जो लोग नदी को नुकसान पहुँचाएंगे, वो **कानूनी रूप से जिम्मेदार** ठहराए जा सकेंगे।


उदाहरण:  

2017 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा और यमुना को कानूनी व्यक्ति का दर्जा दिया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्थगित कर दिया, पर विचार बेहद क्रांतिकारी था।


### 3. **सभ्यता की समृद्धि का रास्ता**

अगर हम चाहते हैं कि—

- हमारी संस्कृति जीवित रहे,  

- हमारे पर्व, परंपराएं, लोककथाएं और लोकजीवन फलें-फूलें,  

- आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और जीवंत नदियाँ मिलें,


तो नदी को **सिर्फ संसाधन** नहीं, **एक जीवित इकाई** मानना जरूरी है।  

इंसानी दर्जा देना इसका एक ठोस रास्ता हो सकता है, ताकि कानून भी नदियों की रक्षा करे।


### 4. **विकल्प और पूरक उपाय**

- **स्थानीय समुदायों को नदी की रक्षा में भागीदार बनाना** (जैसे गंगा ग्राम मॉडल),

- **नदी आधारित जीवनशैली को पुनर्जीवित करना** (जैसे परंपरागत जल संचयन, नदी उत्सव),

- **शिक्षा और कला में नदी को केंद्रित करना** (बाल साहित्य, लोक गीत, स्कूल प्रोजेक्ट)


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### निष्कर्ष:

**हां**, सभ्यता और संस्कृति को समृद्ध बनाए रखने के लिए नदियों को इंसानी दर्जा देना एक जरूरी कदम हो सकता है — लेकिन ये तब और प्रभावशाली होगा जब समाज भी इसे **संवेदनशीलता और सहभागिता** से स्वीकार करे।



Tuesday, April 8, 2025

धारा 5 – भिक्षुकों से संबंधित प्रक्रिया

मुंबई भिक्षावृत्ति निषेध अधिनियम, 1959 की धारा 5 का पूरा हिंदी अनुवाद, जिसमें उपधारा (5) भी सम्मिलित है:


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धारा 5 – भिक्षुकों से संबंधित प्रक्रिया

(1) कोई भी पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार इस कार्य हेतु अधिकृत कोई अन्य व्यक्ति, किसी भी व्यक्ति को जो भिक्षा माँगते हुए पाया जाए, बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है:

परंतु यह कि, यदि ऐसा व्यक्ति किसी ऐसे क्षेत्र में भिक्षा मांगते हुए पाया जाता है जहाँ बालक अधिनियम, 1948 (Children Act, 1948) लागू होता है, तो उसे इस अधिनियम के अंतर्गत नहीं बल्कि बालक अधिनियम के अंतर्गत ही निपटाया जाएगा।

(2) प्रत्येक व्यक्ति जिसे उपधारा (1) के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है, उसे गिरफ्तारी के कारण बताए जाएँगे और अनावश्यक विलंब किए बिना मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

(3) मजिस्ट्रेट मामले की जांच करेगा, और यदि वह संतुष्ट होता है कि वह व्यक्ति भिक्षा मांगते हुए पाया गया, तो वह इस आशय का लेखबद्ध निर्णय देगा और यह आदेश दे सकता है कि ऐसे व्यक्ति को प्रमाणित संस्था (Certified Institution) में कम से कम एक वर्ष और अधिक से अधिक तीन वर्ष तक के लिए रखा जाए।

(4) उपधारा (3) के अंतर्गत कोई भी आदेश देने से पूर्व, मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देगा और उसके द्वारा प्रस्तुत किसी भी प्रतिनिधित्व या परिस्थिति को ध्यान में रखेगा।

(5) यदि मजिस्ट्रेट संतुष्ट होता है कि उपधारा (3) में उल्लिखित व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है या कुष्ठ रोगी है, तो वह यह आदेश दे सकता है कि उसे प्रमाणित संस्था में रखने के स्थान पर किसी मानसिक चिकित्सालय, कुष्ठ रोग आश्रम, या किसी अन्य सुरक्षित स्थान में रखा जाए।




: वीडियो स्टोरीबोर्ड और शॉट प्लान** डॉक्यूमेंट्री **"सम्मान – कोटद्वार की चुप कहानियाँ"**


: वीडियो स्टोरीबोर्ड और शॉट प्लान** डॉक्यूमेंट्री **"सम्मान – कोटद्वार की चुप कहानियाँ"** 

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## 🎞️ **वीडियो स्टोरीबोर्ड / शॉट प्लान (ड्राफ्ट)**  

**शीर्षक:** *सम्मान – कोटद्वार की चुप कहानियाँ*  

**शैली:** डॉक्यू-ड्रामा  

**अवधि:** 10-12 मिनट  

**शूट लोकेशंस:** कोटद्वार – स्टेशन, पुरानी बस्ती, गली मोहल्ले, DIC सेंटर, स्वास्थ्य शिविर, NGO ऑफिस


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### 🔹 **Scene 1: शहर की सुबह**  

- **शॉट टाइप:** ड्रोन शॉट + सॉफ्ट ट्रैकिंग  

- **लोकेशन:** कोटद्वार रेलवे स्टेशन, मुख्य बाज़ार  

- **नैरेटर (Voice-over):** शहर का परिचय और अदृश्य कहानियाँ  

- **मूड:** हल्का पहाड़ी म्यूजिक + धीरे-धीरे आवाज़ उभरती है


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### 🔹 **Scene 2: सरिता की परछाईं**  

- **शॉट टाइप:** स्लो-मोशन सिल्हूट, गली में चलती महिला  

- **लोकेशन:** संकरी गली, शाम का समय  

- **वॉयस-ओवर:** सरिता की पहली लाइन "मैं यहाँ 7 साल से हूँ..."  

- **स्पेशल:** चेहरा न दिखे, ह्यूमनाइजिंग फ्रेमिंग


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### 🔹 **Scene 3: संघर्ष की झलकियाँ**  

- **शॉट टाइप:** मोंटाज  

- **फुटेज:**  

  - पुलिस गाड़ी की फ्लैशिंग लाइट  

  - एक महिला भागती हुई  

  - भीड़ का शोर, अकेली बैठी महिला  

- **मूड:** हल्की बेचैनी और सच्चाई का सामना


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### 🔹 **Scene 4: विशेषज्ञों की आवाज़**  

- **शॉट टाइप:** इंटरव्यू स्टाइल, B-roll  

- **क्लिप्स:**  

  - TI आउटरीच वर्कर महिला को कंडोम देते  

  - STI क्लिनिक में चेकअप  

  - NGO मीटिंग, फॉर्म भरते लोग  

- **ग्राफिक्स:** नाम और संस्था नीचे ऑन-स्क्रीन


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### 🔹 **Scene 5: Udaen की शुरुआत**  

- **शॉट टाइप:** वाइड एंगल + कंधे पर कैमरा  

- **लोकेशन:**  

  - Drop-in Centre  

  - Legal Workshop  

  - Skill Workshop (सिलाई, खाना बनाना)  

- **नैरेटर:** "अब डर नहीं, अवसर है..."


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### 🔹 **Scene 6: सरिता का परिवर्तन**  

- **शॉट टाइप:** क्लोज-अप, नर्म प्रकाश  

- **लोकेशन:** DIC का कोना, बातचीत करते हुए  

- **डायलॉग:** "अब मैं अपनी बेटी को ये ज़िंदगी नहीं देना चाहती..."  

- **फीलिंग:** उम्मीद और नयापन


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### 🔹 **Scene 7: क्लोजिंग और कॉल-टू-एक्शन**  

- **शॉट टाइप:** फेड आउट + ग्राफिक  

- **दृश्य:**  

  - महिलाएं साथ मुस्कुराते हुए  

  - “सम्मान” वर्कशॉप का बोर्ड  

  - स्क्रीन पर Logo + Contact Info  

- **वॉयस-ओवर:** "हर सरिता को सम्मान दो..."  


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**डॉक्यूमेंट्री स्क्रिप्ट (TI Project – Kotdwar, Uttarakhand)**

  

**शीर्षक:** सम्मान – कोटद्वार की चुप कहानियाँ  

**अवधि:** 10–12 मिनट  

**शैली:** डॉक्यू-ड्रामा  

**मुख्य पात्र:** 'सरिता' (काल्पनिक नाम), एक FSW जो बदलाव की राह पर है  


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### ⏳ ओपनिंग सीन:

**(दृश्य)** कोटद्वार शहर की सुबह – बाजार, स्टेशन, चौराहा, सुनसान गली


🎙️ **नैरेटर (Voice-over):**  

"ये उत्तराखंड का द्वार है – कोटद्वार। पर्यटन, व्यापार और बदलते समाज का संगम। लेकिन हर गली में एक कहानी है, जो कभी सुनाई नहीं देती..."


🎶 *पृष्ठभूमि में हल्का पहाड़ी म्यूजिक*


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### 🎭 पात्र का परिचय:

**(दृश्य)** चेहरा छुपा हुआ, सिल्हूट में ‘सरिता’ बैठी है


🎙️ **सरिता (Voice-over):**  

"मैं यहाँ 7 साल से हूँ... लोग कहते हैं हम गलत हैं, पर कोई नहीं पूछता क्यों? हम इंसान नहीं, धंधा बन गए हैं..."


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### 🧩 ज़मीनी हकीकत:

**(दृश्य)** पुलिस छापे, डर, भीड़ में अकेलापन, गली में ग्राहक की प्रतीक्षा


🎙️ **सरिता:**  

"हमें डर लगता है – पुलिस से, समाज से... और सबसे ज़्यादा – खुद से।"


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### 🔍 विशेषज्ञों की राय:

**(दृश्य)** NGO, TI वर्कर, डॉक्टर, पुलिस अफसर बोलते हैं


📢 **TI वर्कर:**  

"हम हर दिन इन महिलाओं तक पहुंचते हैं – STI क्लिनिक, कंडोम, काउंसलिंग – ताकि वो सुरक्षित रहें।"


📢 **NGO प्रतिनिधि:**  

"अब समय है कि समाज इन्हें देखे – एक इंसान की नज़र से, न कि शर्म से।"


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### 🌱 समाधान की दिशा:

**(दृश्य)** Udaen Foundation द्वारा – स्वास्थ्य कैंप, कानूनी जागरूकता, हुनर प्रशिक्षण


🎙️ **सरिता:**  

"एक दिन वो आईं – Udaen वाली दीदी। कहने लगीं: 'तुम सिर्फ शरीर नहीं, इंसान हो। तुम हक़दार हो – सम्मान की।'"


📢 **नैरेटर:**  

"Udaen Foundation ने ‘सम्मान’ के नाम से शुरू की एक नई पहल – जहाँ डर नहीं, अवसर है।"


🎥 **दृश्य:** Drop-in Centre, सामूहिक बैठक, महिला सुरक्षा चर्चा


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### ❤️ भावनात्मक समापन:

🎙️ **सरिता:**  

"अब मैं अपनी बेटी को ये ज़िंदगी नहीं देना चाहती। अब मैं सीख रही हूँ – खाना बनाना, सिलाई, और सपने देखना।"


🎶 *पृष्ठभूमि में भावनात्मक संगीत*


📢 **नैरेटर (अंतिम संदेश):**  

"अगर आप बदलाव चाहते हैं – शुरुआत यहीं से करें। हर सरिता को सम्मान दो। यही असली विकास है।"


**[Udaen Foundation का लोगो और संपर्क विवरण स्क्रीन पर]**


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**स्क्रिप्ट संपादन एवं निर्माण:**  

Udaen Foundation – Kotdwar  

www.udaenfoundation.org | contact@udaenfoundation.org


**डॉक्यूमेंट्री स्क्रिप्ट का प्रारूप (Draft Style)** सम्मान – कोटद्वार की चुप कहानियाँ



## 🎬 **डॉक्यूमेंट्री स्क्रिप्ट का प्रारूप (Draft Style)**  

**शीर्षक प्रस्तावित:**  

**“सम्मान – कोटद्वार की चुप कहानियाँ”**


**अवधि:** 10–12 मिनट  

**भाषा:** हिंदी (संवाद-संवेदनशील, स्थानीय टोन के साथ)  

**स्टाइल:** डॉक्यू-ड्रामा (Real footage + Narrated story)  

**मुख्य पात्र:** ‘सरिता’ (बदला हुआ नाम – एक FSW जो बदलाव की राह पर है)


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### ⏳ स्क्रिप्ट संरचना


**1. ओपनिंग शॉट: कोटद्वार शहर की सुबह – कैमरा व्यस्त बाज़ार, रेलवे स्टेशन, और एक सुनसान गली में**


📢 **नैरेटर (Voice-over):**  

_"ये उत्तराखंड का द्वार है – कोटद्वार। पर्यटन, व्यापार और बदलते समाज का संगम। लेकिन हर गली में एक कहानी है, जो कभी सुनाई नहीं देती..._"  


🎶 *पृष्ठभूमि में हल्का पहाड़ी म्यूजिक और धीमा सरस जीवन चित्रण*


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**2. ‘सरिता’ की एंट्री – चेहरा छुपाया गया / सिल्हूट में दिखाया गया**


🎙️ **सरिता (Voice-over):**  

_"मैं यहाँ 7 साल से हूँ... लोग कहते हैं हम गलत हैं, पर कोई नहीं पूछता क्यों? हम इंसान नहीं, धंधा बन गए हैं..."_


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**3. डॉक्यूमेंटेशन:  

TI वर्कर, NGO प्रतिनिधि, डॉक्टर, और पुलिस अफसर के छोटे-छोटे क्लिप्स**


📢 **TI वर्कर:**  

_"हम हर दिन इन महिलाओं तक पहुंचते हैं, कंडोम बाँटते हैं, STI क्लीनिक में लाते हैं, ताकि वो सुरक्षित रहें।_"  


📢 **NGO लीडर:**  

_"अब समय है कि समाज उन्हें देखे – एक इंसान की नज़र से, न कि शर्म से।_"  


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**4. समस्या का चित्रण – भेदभाव, पुलिस छापे, स्वास्थ्य की उपेक्षा, घरेलू हिंसा**


🎙️ **सरिता:**  

_"हमें डर लगता है पुलिस से, समाज से... और सबसे ज्यादा – खुद से।_"  


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**5. समाधान का रास्ता – Udaen Foundation के प्रयास**


🎥 **फुटेज:**  

- स्वास्थ्य कैंप  

- कानूनी जागरूकता सेमिनार  

- कौशल विकास प्रशिक्षण  

- Drop-in Centre में बैठकी  


📢 **नैरेटर:**  

_"Udaen Foundation ने कोटद्वार में ‘सम्मान’ नाम से एक नई शुरुआत की है – जहाँ डर नहीं, अवसर है..."_


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**6. भावनात्मक क्लोजिंग:**


🎙️ **सरिता:**  

_"आज मैंने सीखा – मैं सिर्फ शरीर नहीं, एक सपना भी हूँ। और अब मैं अपनी बेटी को ये ज़िंदगी नहीं देना चाहती।_"  


🎶 *सॉफ्ट बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ fade out*


📢 **नैरेटर (अंतिम संदेश):**  

_"अगर आप बदलाव चाहते हैं – शुरुआत यहीं से करें। हर सरिता को सम्मान दो..._"  




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**Udaen Foundation Initiative: "सम्मान – जीवन को नया अवसर"**



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## 🌸 **Udaen Foundation Initiative: "सम्मान – जीवन को नया अवसर"**  

### एक परियोजना वेश्याओं के अधिकारों, सम्मान और पुनर्वास के लिए  

**स्थान**: उत्तराखंड (प्राथमिक: देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, कोटद्वार जैसे शहरी क्षेत्र)


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### 🎯 **मुख्य उद्देश्य (Objectives)**


1. उत्तराखंड में वेश्यावृत्ति से जुड़ी **वास्तविकता और कारणों** की पहचान करना  

2. वेश्याओं को उनके **संवैधानिक और कानूनी अधिकारों** के बारे में जागरूक करना  

3. इच्छुक महिलाओं को **स्वैच्छिक पुनर्वास**, कौशल विकास और **आत्मनिर्भरता** की ओर ले जाना  

4. समाज में व्याप्त **कलंक** को मिटाने के लिए **जन-जागरूकता अभियान** चलाना  


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### 🔍 **मुख्य गतिविधियाँ (Activities)**


| गतिविधि | विवरण |

|---------|--------|

| 1. **फील्ड सर्वे और इंटरव्यू** | वेश्याओं, पुलिस, NGO, डॉक्टर, लोकल लोगों से बातचीत |

| 2. **कानूनी जागरूकता शिविर** | सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश, ITPA, और महिला अधिकारों पर आधारित |

| 3. **हेल्थ चेकअप कैंप** | HIV, STI, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण |

| 4. **पुनर्वास के विकल्प** | सिलाई, ब्यूटी पार्लर, फार्मिंग, हेल्पलाइन, होमस्टे आदि |

| 5. **जन संवाद और मीडिया रिपोर्टिंग** | Udaen News Network पर डॉक्यूमेंट्री, स्टोरीज़, पॉडकास्ट |


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### 🏠 **संपर्क और सहयोगी संस्थाएं (Collaborators)**


- **उत्तराखंड महिला आयोग**  

- **State AIDS Control Society (USACS)**  

- **Shakti Vahini, Asha Kiran, Prayas Foundation**  

- **स्थानीय पुलिस और AHTU यूनिट**  

- **Legal Aid Clinics** (जिला न्यायालयों के अंतर्गत)


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### 💡 **विशेष विचार (Unique Value of Udaen Foundation)**


- एक **हिमालयन क्षेत्रीय दृष्टिकोण** से सामाजिक मुद्दों को उजागर करना  

- वेश्याओं की कहानी को **दया से नहीं, गरिमा से** दिखाना  

- पुनर्वास को केवल shelter नहीं, **विकास का मॉडल** बनाना  

- मीडिया को जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर समाज में **संवेदनशीलता और जागरूकता** लाना


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### 📽️ क्या किया जा सकता है Udaen News Network पर?

- **"गुमनाम कहानियाँ"** – एक डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ वेश्याओं की असली कहानियों पर  

- **ग्राउंड रिपोर्ट्स** – पुलिस रेड, कोर्ट केस, पुनर्वास स्टोरीज़  

- **Podcast / YouTube Interviews** – सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, चिकित्सक, स्वयं वेश्याओं के अनुभव


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त्तराखंड में वेश्याओं के अधिकार और स्थिति

 उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां पहाड़ी क्षेत्रों की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना थोड़ी संवेदनशील और पारंपरिक है, वहाँ वेश्यावृत्ति (Prostitution) से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन आमतौर पर सतर्क रहता है। हालांकि वेश्यावृत्ति पर **कोई विशेष उत्तराखंड राज्य कानून नहीं** है, लेकिन यहां **भारत सरकार के कानून (जैसे ITPA, IPC)** और **सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश** लागू होते हैं।


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## 🏔️ उत्तराखंड में वेश्याओं के अधिकार और स्थिति


### 1. ✅ **सुप्रीम कोर्ट के निर्देश यहां भी लागू होते हैं**

- उत्तराखंड में भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2022 में दिए गए दिशा-निर्देश पूरी तरह लागू हैं।  

  इसका मतलब है:

  - **स्वैच्छिक सेक्स वर्क अपराध नहीं है।**

  - पुलिस को **वेश्याओं को परेशान करने का अधिकार नहीं है**।

  - वेश्याओं को **स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं** तक समान पहुंच मिलनी चाहिए।


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### 2. 🚫 **सख्त रवैया मानव तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति पर**

उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन का जोर **मानव तस्करी को रोकने**, विशेष रूप से **नेपाल बॉर्डर और सीमावर्ती क्षेत्रों** में, बहुत अधिक है।


- **अक्सर "रेड लाइट एरिया" जैसी चीजें यहाँ नहीं पाई जातीं।**

- लेकिन, कुछ **अवैध गतिविधियाँ होटलों या गुप्त स्थानों पर होती हैं**, जिन पर कार्रवाई होती है।


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### 3. 🛡️ **उत्तराखंड पुलिस द्वारा उठाए गए कदम**:

- **एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU)** का गठन हुआ है, जो जबरन कराई जा रही वेश्यावृत्ति और बच्चों की तस्करी को रोकने के लिए काम करती है।

- कई बार देहरादून, हल्द्वानी, ऋषिकेश आदि शहरों में **होटल रेड** और **गिरफ्तारियाँ** हुई हैं।


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### 4. 📋 **पुनर्वास और संरक्षण योजनाएं** (अगर वेश्या जीवन छोड़ना चाहे)

उत्तराखंड में सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा कुछ योजनाएं लागू हैं:

- **"स्वाधार गृह योजना"** – संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षित आश्रय देती है।

- **"उज्ज्वला योजना"** – तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति की शिकार महिलाओं के लिए पुनर्वास केंद्र।

- **NGOs** भी कार्यरत हैं, जैसे कि *Shakti Vahini, Asha Foundation,* आदि।


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### 5. 🧘‍♀️ उत्तराखंड की सामाजिक संरचना में चुनौतियाँ:

- पहाड़ी क्षेत्रों में वेश्यावृत्ति को लेकर **समाज में बहुत कलंक** है।

- यदि कोई महिला इस क्षेत्र से जुड़ी हो, तो उसे समाज में **अपमान और बहिष्कार** का सामना करना पड़ता है।

- इस कारण कई महिलाएं **कानूनी मदद लेने से डरती हैं**।


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## ✔️ उत्तराखंड में वेश्याओं के अधिकारों का सार:


| अधिकार | विवरण |

|--------|--------|

| गरिमा का अधिकार | सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार (अनु. 21) |

| पुलिस सुरक्षा | बिना उत्पीड़न के काम करने का हक |

| स्वास्थ्य सेवाएं | HIV और अन्य सेवाएं मुफ्त |

| पुनर्वास विकल्प | सरकारी योजनाएं उपलब्ध |

| कानूनी संरक्षण | यौन हिंसा, तस्करी, शोषण से सुरक्षा |


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न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...