Sunday, June 30, 2024

1 जुलाई 2024 से भारत में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं.

 1 जुलाई 2024 से भारत में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं, जो पुराने औपनिवेशिक युग के कानूनों को प्रतिस्थापित करेंगे। ये नए कानून हैं:


1. **भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita)** - यह भारतीय दंड संहिता (IPC) को प्रतिस्थापित करेगी।

2. **भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita)** - यह आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) को प्रतिस्थापित करेगी।

3. **भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam)** - यह भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 को प्रतिस्थापित करेगी।


इन कानूनों का उद्देश्य भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक समकालीन और प्रभावी बनाना है। कुछ प्रमुख बदलावों में शामिल हैं:


- **धारा 302** (हत्या का दंड) अब **धारा 101** के तहत आएगी, जबकि **धारा 302** अब छीनाझपटी के लिए प्रयोग होगी।

- **धारा 420** (धोखाधड़ी) को **धारा 316** में स्थानांतरित किया गया है।

- **धारा 144** (अवैध सभा) अब **धारा 187** के अंतर्गत होगी।

- **धारा 376** (बलात्कार का दंड) अब **धारा 63** के अंतर्गत होगी, जबकि **धारा 70** गैंग रेप के अपराध को कवर करेगी।

- **धारा 124-A** (देशद्रोह) को **धारा 150** के अंतर्गत स्थानांतरित किया गया है।


इन नए कानूनों में आतंकवाद की परिभाषा पहली बार स्पष्ट की गई है और राजद्रोह को 'देशद्रोह' के रूप में पुन: परिभाषित किया गया है। इन परिवर्तनों के तहत, न्यायालय की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और उम्मीद की जा रही है कि मामलों का निपटान तीन साल के भीतर हो सकेगा.

पत्रकारों से सूत्र पूछने का पुलिस को कोई अधिकार नहीं- सुप्रीम कोर्

 


सूत्रों के हवाले से खबर लिखने वाले पत्रकारों के लिए अच्छी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से पुलिस विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ की बेंच ने पुलिस को भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 और 22 की याद दिलाई है।


चीफ जस्टिस ने कहा कि, ‘पत्रकारों के मौलिक अधिकारों की स्वतंत्रता के खिलाफ पुलिस किसी भी पत्रकार से उनकी खबरों के लिए सूत्र नहीं पूछ सकती है। यहां तक की कोर्ट भी उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।’चीफ जस्टिस ने कहा कि, ‘आजकल ये देखने को मिल रहा है कि बिना किसी ठोस सबूत और बिना जांच के पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर लिए जाते हैं। श्रेष्ठ बनने के चक्कर में पुलिस पत्रकारों की स्वतंत्रता का हनन कर रही है।’


आपको बता दें कि सूत्रों के हवाले से चलने वाली खबरों के कई मामले कोर्ट में जा चुके हैं। कोर्ट ने पत्रकारों से खबरों के सूत्र बताने का आदेश भी दे चुके हैं लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के इस फैसले के बाद मीडिया जगत में उत्साह है।



जानकारी के लिए बता दें कि हमारे देश में किसी विशेष कानून के जरिए पत्रकारों को अधिकार हासिल नहीं हैं। पत्रकारों के लिए अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार बाकी नागरिकों की तरह संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) के अंतर्गत ही मिले हुए हैं।


पत्रकारों को अपने सूत्र को गोपनीय रखने का अधिकार प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट 1978 के तहत मिला हुआ है। इसमें 15 (2) सेक्शन में साफ तौर पर लिखा हुआ है कि किसी भी पत्रकार को खबरों के सूत्र की जानकारी के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता लेकिन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम कानून कोर्ट में लागू नहीं होते हैं। इसके आधार पर कोर्ट में किसी तरह की छूट की मांग नहीं की जा सकती है।

Friday, June 28, 2024

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड सदन से वर्चुअल माध्यम से सी.एम. हेल्पलाईन की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि सी.एम हेल्पलाईन पर आयी सभी शिकायतों का समयबद्धता से निस्तारण किया जाए।



मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया से भेंट की।

 


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित ग्रामीण भूमि रिकॉर्ड के लिए 'भुवन पंचायत (संस्करण 4.0)' पोर्टल और 'आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम संस्करण 5.0)' नामक दो जियोपोर्टल लॉन्च किए

 

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन पोर्टलों का शुभारंभ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पिछले एक दशक में शुरू किए गए सुधारों का परिणाम है

भुवन पंचायत पोर्टल “विकेंद्रीकृत नियोजन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना समर्थन (एसआईएसडीपी)” का समर्थन करेगा और पंचायतों में जमीनी स्तर पर नागरिकों को सशक्त बनाएगा

आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम संस्करण 5.0) प्राकृतिक आपदाओं पर अंतरिक्ष आधारित इनपुट प्रदान करेगा और भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों में आपदा जोखिम कम करने में मदद करेगा

प्रविष्टि तिथि: 28 JUN 2024 7:51PM by PIB Delhi

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज पृथ्वी भवन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित दो जियोपोर्टलग्रामीण भूमि रिकॉर्ड के लिए ‘भुवन पंचायत (संस्करण 4.0)’ पोर्टल और “आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम संस्करण 5.0)” लॉन्च किए।

ये नवीनतम भू-स्थानिक उपकरण पूरे देश में विभिन्न स्थानों के लिए 1:10स्केल की उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली उपग्रह इमेजरी प्रदान करने के लिए विज़ुअलाइज़ेशन और योजना बनाने के लिए हैं।



 

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रधानमंत्री कार्यालयपरमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिकलोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "इन पोर्टलों का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से पिछले एक दशक में शुरू किए गए सुधारों की अगली कड़ी है।" 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पदभार संभालने के तुरंत बाद शुरू हुई यात्रा को याद करते हुए2015-16 की शुरुआत में बुनियादी ढांचे के विकासनियोजनआपदा जोखिम न्यूनीकरण और भूमि रिकॉर्ड प्रबंधनमौसम पूर्वानुमानकृषि विकास के लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श सत्र में चर्चा की गई।

मंत्री महोदय ने जियोपोर्टल्स के लॉन्च पर इसरो की टीम को बधाई देते हुए कहा, "हमने न केवल रॉकेट लॉन्च किए हैं और आकाश तक पहुंचे हैंबल्कि हम आकाश से पृथ्वी का मैपिंग भी कर रहे हैं।" विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा, "अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी वस्तुतः हर घर में प्रवेश कर चुकी है। हमने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के हमारे संस्थापक श्री विक्रम साराभाई के दृष्टिकोण को सही मायने में आगे बढ़ाया हैजो मानते थे कि अंतरिक्ष में विकास का आम नागरिकों के जीवन पर बहुआयामी प्रभाव पड़ेगाचाहे वह टेलीमेडिसिन होडिजिटल इंडिया होमानव रहित रेलवे क्रॉसिंग की पहचान हो।"


डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता विभिन्न सेवाओं को एकीकृत करना और आम नागरिकों को इसका लाभ उठाने की सुविधा देना है। उन्होंने उल्लेख किया कि मोदी सरकार के तहत पिछले कुछ वर्षों में नीतिगत निर्णयों के परिणामस्वरूप अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया गया हैजिसका सकारात्मक प्रभाव 2022 में एक स्टार्टअप से 2024 में 200 से अधिक स्टार्टअप तक हो सकता है। डॉ. सिंह ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यह सरकार ही थी जिसने चंद्रयान के प्रक्षेपण के दौरान श्रीहरिकोटा के द्वार आम जनता के लिए खोले ताकि वे आकर अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमता को देख सकें। उन्होंने यह भी साझा किया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में लगभग 1000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आया है।

“विकेंद्रीकृत नियोजन के लिए स्थान आधारित सूचना समर्थन (एसआईएसडीपी)” का समर्थन करने और पंचायतों में जमीनी स्तर पर नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए ‘भुवन पंचायत पोर्टल’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि यह जमीनी स्तर पर नागरिकों को सशक्त बनाने और उन्हें इन सेवाओं का लाभ उठाने की अनुमति देनेभूमि रिकॉर्ड के लिए स्थानीय प्रशासन पर निर्भरता को कम करके जीवन को आसान बनाने और डिजिटलीकरण और भूमि राजस्व प्रबंधन द्वारा भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाने के हमारे प्रयासों को जारी रखता है। ये उपकरण नागरिकों के सुझावों पर वास्तविक समय डेटा प्रदान करेंगे और जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार को कम करेंगे।

आपातकालीन प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस (एनडीईएम संस्करण 5.0) के लाभों पर बोलते हुएजो प्राकृतिक आपदाओं पर अंतरिक्ष-आधारित इनपुट प्रदान करेगा और भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों में आपदा जोखिम को कम करने में सहायता करेगा। नागरिकों को प्रकृति की अनिश्चितताओं से बचाने और एक प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए ताकि प्रशासन सक्रिय रूप से आपदाओं को रोक सके और हमें भूमि उपयोग भूमि परिवर्तन (एलयूएलसी) के बारे में सूचित कर सके।


उन्होंने यह भी बताया कि स्थिति की निरंतर निगरानी करने और मूल्यवान इनपुट प्रदान करने के लिए एक कमांड सेंटर स्थापित किया गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये पोर्टल बहुत उपयोगी साबित होंगे क्योंकि स्वामित्व पोर्टल भूमि रिकॉर्ड और भूमि राजस्व प्रबंधन के मामले में कई देशों के लिए रोल मॉडल के रूप में कार्य करता है।

इसरो के अध्यक्ष श्री एस सोमनाथअंतरिक्ष विभाग के सचिव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति उनके निरंतर मार्गदर्शन और नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाजपृथ्वी विज्ञान के सचिव श्री रवि चंद्रनगृह मंत्रालय के अपर सचिव श्री एस के जिंदलपर्यावरणवन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राजेश एस.;  जीएसआई खनन मंत्रालय के उपमहानिदेशक मनीष केऔर एनआरएससी के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान भी शुभारंभ समारोह में उपस्थित थे।


01 जुलाई से दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियम, 2024 लागू हो जाएगा

 



भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) ने 14 मार्च, 2024 को दूरसंचार मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (नौवां संशोधन) विनियम, 2024 जारी किए, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हो जाएँगे।

इन संशोधन विनियमों का उद्देश्य बेईमान तत्वों द्वारा धोखाधड़ी वाले सिम स्वैप/प्रतिस्थापन के माध्यम से मोबाइल नंबरों की पोर्टिंग पर अंकुश लगाना है। इन संशोधन विनियमों के माध्यम से, एक विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) के आवंटन के अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए एक अतिरिक्त मानदंड प्रस्तुत किया गया है। विशेष रूप से, यदि सिम स्वैप/प्रतिस्थापन की तारीख से सात दिनों की समाप्ति से पहले विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) के लिए अनुरोध किया गया है, तो विशिष्ट पोर्टिंग कोड (यूपीसी) आवंटित नहीं किया जाएगा।

किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए श्री अखिलेश कुमार त्रिवेदी, सलाहकार (नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग), भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) से टेलीफोन नंबर +91-11-20907758 पर संपर्क किया जा सकता है।


श्री भूपेंद्र यादव ने ब्रिक्स देशों से छठी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा में अपनाए गए टिकाऊ जीवनशैली प्रस्ताव के कार्यान्वयन को बढ़ावा देने का आग्रह किया

 


श्री यादव ने बल देकर कहा कि विकासशील देशों को समान अवसर की आवश्यकता है और उन्होंने विकसित देशों से कार्यान्वयन के साधनों के लिए अपने दायित्वों, जिसमें यूएनएफसीसीसी सीओपी और सीबीडी सीओपी में वादा किए गए वित्त शामिल हैं, को पूरा करने की अपील की

श्री यादव ने आगाह किया कि जलवायु वित्त को निवेश के माध्यम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए

प्रविष्टि तिथि: 28 JUN 2024 4:04PM by PIB Delhi

ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 10वीं बैठक 28 जून2024 को रूसी संघ की अध्यक्षता में हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की गई थी और इसमें केंद्रीय पर्यावरणवन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने वर्चुअल रूप से भाग लिया था। पांच नए सदस्योंयानी मिस्रइथियोपियाईरानसंयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के शामिल होने के बाद यह ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की पहली बैठक थी।


केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब एक व्यापक और बड़ा ब्रिक्स पर्यावरण चुनौतियों से निपटने के लिए एजेंडाप्राथमिकताएं और आगे का रास्ता तय कर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स के तहत पहल संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और उसकी एजेंसियों के सिद्धांतों और लक्ष्यों द्वारा दृढ़ता से निर्देशित हैं और ब्रिक्स देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपलब्ध कार्बन स्पेस का उपयोग विकासशील देशों द्वारा किया जाए।

श्री यादव ने वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में टिकाऊ जीवन शैली के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से छठी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा में अपनाए गए टिकाऊ जीवन शैली पर प्रस्ताव के कार्यान्वयन को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

श्री यादव ने बल देकर कहा कि विकासशील देशों को समान अवसर की आवश्यकता है और उन्होंने विकसित देशों से कार्यान्वयन, जिसमें यूएनएफसीसीसी सीओपी और सीबीडी सीओपी में वादा किए गए वित्त शामिल हैं, के साधनों के लिए अपने दायित्वों को पूरा करने की अपील की। श्री यादव ने आगाह किया कि जलवायु वित्त को निवेश के साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा की गई ठोस कार्रवाइयों को रेखांकित किया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से विश्व पर्यावरण दिवस2024 पर हमारे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए एक पेड़ मां के नाम अभियान में शामिल होने और भारत द्वारा संचालित वैश्विक पहलों जैसे मिशन लाइफआईबीसीएसीडीआरआईलीडआईटीग्रीन क्रेडिट इनिशिएटिवआरई एंड सीई-आईसी और जीआईआर-जीआईपी का भी समर्थन करने का आग्रह किया।

केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और सहभागिता को मजबूत करने और उसे व्यापक बनानेबहुपक्षीय मंचों पर घनिष्ठ सहयोग जारी रखने की आवश्यकता रेखांकित की तथा समानता और सीबीडीआर-आरसी के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए एक साथ खड़े होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

बैठक में 28 जून2024 को रूस के निज़नी नोवगोरोड में आयोजित 10वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक का वक्तव्य भी अपनाया गया।

Thursday, June 27, 2024

मालिकाना हक देने व ध्वस्तीकरण पर रोक को लेकर सचिवालय पर प्रदर्शन

 






देहरादून 27 जून 024,

 राज्य सचिवालय पर विभिन्न मजदूर संगठनों , राजनैतिक एवं सामाजिक जिनमें सीटू ,सीपीएम,चेतना आन्दोलन ,एटक,सपा, ,सीपीआई,किसान सभा,महिला समिति ,भीम आर्मी ,महिला मंच, सर्वोदय मण्डल ,एस एफ आई ,उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी ,बसपा ,बीजीवीएस से जुड़े सैकड़ो कार्यकर्ता शामिल थे । आन्दोलन को कांग्रेस ने अपना समर्थन दिया । इस विशाल प्रदर्शन के माध्यम से जनसंगठन एवं राजनैतिक दलों के वक्ताओं ने कहा सरकार ने   वायदा किया था कि व पंचायत ,चाय बगानों तथा बस्तियों में बसी आबादी को मालिकाना हक देगी जिसके लिये सरकार ने बर्ष 2016 में जन आन्दोलन के बाद 2018 में  बस्तियों की सुरक्षा के लिए कानून लाई जो कि अक्टूबर 2024 तक प्रभावी है,बावजूद अनेक बहाना बनाकर सरकार बस्तियों को उजाड़ने के लिए आमदा है । वक्ताओं ने कहा है‌ कि हाल में चूना भट्टा ,दीपनगर ,बारीघाट तथा काठबंगला इसका ज्वलंत उदाहरण हैं, जहाँ सैकड़ों गरीबों को बिना पुनर्वास एवं मुआवजा दिये बेघरबार किया गया जबकि अभियान में रिस्पना के इर्दगिर्द बड़े लोगों ,सरकारी कब्जों को छोड़ा गया ।

  वक्ताओं ने कहा है कि सरकार की प्रस्तावित एलिवेटेड रोड़ जिसे रिस्पना तथा बिन्दाल से गुजरना है आने वाले दिनों में हजारों हजार परिवारों के बेघरबार होने का कारण बनेगी। इस योजना में पिछले 40 से पुरानी बसी आबादी को अतिक्रमणकारी कहा गया ,इसका सीधा मतलब है कि भाजपा सरकार सीधेतौर पर प्रभावितों के पुर्नवास एवं मुआवजा की जिम्मेदारी से बच रही है ।  

वक्ताओं ने कहा है किश्र राज्य के प्रगतिशील वामपंथी राजनैतिक एवं सामाजिक संगठन पिछले लम्बे समय से इन तमाम मुद्दों पर आन्दोलित हैं तथा प्रभावितोंं से हजारों हजार हस्ताक्षर करवाकर आपको भेज चुके हैं,अभी भी हजारों हस्ताक्षर मौजूद हैं ।

प्रमुख मांगें :-

(1)सरकार सभी गैर क़ानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर तुरन्त रोक लगाये  - कोई भी बेदखली की प्रक्रिया कानून के अनुसार हो ।

(2)  तमाम गरीब व भूमिहीन लोगों की पुनर्वास की ब्यवस्था करने के बाद ही यदि आवश्यक हो तो सम्बन्धित स्थान से विस्थापित किया जाये। देश की आजादी  के बाद  हर देशवासी को, आवास ,शिक्षा व रोजगार पाने का हक है,  और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का काम अपने दायित्वों का निर्वहन कर इसे पूरा करने का है।     

(3)जिन परिवारों के घरों को बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए तोड़े गए हैं, उनको मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाये और ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये। काठबंगला में अभियान के दौरान मृतका सोनम गब्बर सिंह बस्ती रिस्पना कै परिजनों को समुचित मुआवजा दिया जाऐ -।

(4)हाल के बर्षो में ग्राम पंचायत स नगरनिगम में जुड़े  लोंगों कै नोटिस निरस्त हों ।

(5) सरकार अपने वायदे के अनुरूप सभी बस्तियों कै  मालिकाना हक कै लिऐ कानून बनाये ।

(6) एलिवेटेड रोड़ की आढ़ में गरीबों को उजाड़ने की साजिश बन्द करो ।इस योजना में पुर्नवास एवं मुआवजे का प्रावधान हो ।

(7) रेहड़ी , पटरी ,फैरी ,फुटपाथ व्यवसायियों का सभी प्रकार का उत्पीड़न रोको तथा वैन्डरजोन बनने तक इन्हें यथावत रोजगार करने दिया ।

(8)राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के 13.05.2024 के आदेश (पैराग्राफ 20) के अनुसार नगर आयुक्त देहरादून ने प्राधिकरण के समक्ष बेदखली को कानून के अनुसार कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई है।  लेकिन बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए लोगों को बेदखल किया जा रहा है।  अनधिकृत अधिकारी मनमानी तरीकों से तय कर रहे हैं कि किसको बेदखल करना है। प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है।

(8) इस अभियान के दौरान कुछ लोग जो निश्चित रूप से 2016 से पहले रह रहे थे, उनकी सम्पतियों को भी नुक्सान पहुंचना ।सरकार सभी गैर क़ानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर तुरन्त रोक लगाये  - कोई भी बेदखली की प्रक्रिया कानून के अनुसार हो ।

(2)  तमाम गरीब व भूमिहीन लोगों की पुनर्वास की ब्यवस्था करने के बाद ही यदि आवश्यक हो तो सम्बन्धित स्थान से विस्थापित किया जाये। देश की आजादी  के बाद  हर देशवासी को, आवास ,शिक्षा व रोजगार पाने का हक है,  और जनता द्वारा चुनी हुई सरकार का काम अपने दायित्वों का निर्वहन कर इसे पूरा करने का है।     

(3)जिन परिवारों के घरों को बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए तोड़े गए हैं, उनको मुआवज़ा उपलब्ध कराया जाये और ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये। काठबंगला में अभियान के दौरान मृतका सोनम गब्बर सिंह बस्ती रिस्पना कै परिजनों को समुचित मुआवजा दिया जाऐ -।

(4)हाल के बर्षो में ग्राम पंचायत स नगरनिगम में जुड़े  लोंगों कै नोटिस निरस्त हों ।

(5) सरकार अपने वायदे के अनुरूप सभी बस्तियों कै  मालिकाना हक कै लिऐ कानून बनाये ।

(6) एलिवेटेड रोड़ की आढ़ में गरीबों को उजाड़ने की साजिश बन्द करो ।इस योजना में पुर्नवास एवं मुआवजे का प्रावधान हो ।

(7) रेहड़ी , पटरी ,फैरी ,फुटपाथ व्यवसायियों का सभी प्रकार का उत्पीड़न रोको तथा वैन्डरजोन बनने तक इन्हें यथावत रोजगार करने दिया ।

(8)राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के 13.05.2024 के आदेश (पैराग्राफ 20) के अनुसार नगर आयुक्त देहरादून ने प्राधिकरण के समक्ष बेदखली को कानून के अनुसार कराने के लिए प्रतिबद्धता जताई है।  लेकिन बिना कोई क़ानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए लोगों को बेदखल किया जा रहा है।  अनधिकृत अधिकारी मनमानी तरीकों से तय कर रहे हैं कि किसको बेदखल करना है। प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है।

(8) इस अभियान के दौरान कुछ लोग जो निश्चित रूप से 2016 से पहले रह रहे थे, उनकी सम्पतियों को भी नुक्सान पहुंचाना कानून कै खिलाफ है ।बेदखली के लिए क़ानूनी प्रक्रिया है, जो उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रेमिसेस (एविक्शन ऑफ़ अनअथॉराइज़्ड ऑक्यूपेशन) अधिनियम में अंकित है।  लेकिन इस कानून को ताक पर रखा गया है।

(10) इसके अतिरिक्त, प्राधिकरण का आदेश केवल मामले से सम्बन्धित पक्षकारों पर ही लागू होता है और ऐसे लोगों को मनमाने तरीके से उजाडा जा रहा है,  जो इस मामले में  पक्षकार नहीं हैं और उन्हें अपना पक्ष रखने का प्राधिकरण में कोई मौका ही नहीं दिया गया है।

(11) बिना क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाये किसी की सम्पति को नुक़सान पहुँचाना क़ानूनी अपराध है।  प्रभावित लोगों में से कई परिवार हैं जो अनुसूचित जाति के हैं और उनको गैर क़ानूनी तरीकों से बेदखल करना SC / ST (Prevention of Atrocities) Act के अंतर्गत भी अपराध है।

(12) हमारे संविधान के अनुसार आश्रय का अधिकार मौलिक अधिकार है।  उच्चतम न्यायलय के अनेक फैसलों में इस सिद्धांत को दोहराया गया है (Olga Tellis & Ors v. Bombay Municipal Cor-poration, 1986 AIR 180, 1985 SCR Supl. (2) 51 (1985) , Shantistar Builders v. Narayan Khimalal Totame, AIR 1990 SC 630 (1990) , इत्यादि)।  इसलिए बिना पुनर्वास की व्यवस्था कर मज़दूर परिवारों को बेघर करना संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है।

(13) देहरादून की नदियों एवं नालियों में होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेंट और अनेक अन्य निजी संस्थानों द्वारा और सरकारी विभागों द्वारा भी  अतिक्रमण हुए हैं।  हरित प्राधिकरण के आदेश में कोई ज़िक्र नहीं है कि कार्यवाही सिर्फ मज़दूर बस्तियों के खिलाफ करना है, लेकिन किसी भी अन्य अतिक्रमणकारी को नोटिस तक नहीं गया है।  इसलिए  यह अभियान न केवल गैर क़ानूनी है बल्कि भेदभावपूर्ण भी है।

(14) गांधी पार्क कै निजीकरण कै फैसले को वापस लिया जाये ।

(15) चन्द्र शेखर आजाद नगर (भट्टा) भूमि का अवैध स्थानान्तरण रोका जाऐ तथा भूमि कब्जेदार कै नाम किया जाऐ ।

(16) उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों का चिन्हित किया जाये ।

(17) रेहड़ी पटरी फुटपाथ व्यवसायियों के लिऐ वैन्डरजोन घोषित किया जाये तथा पुलिस उत्पीड़न पर रोक लगाओ ।

(18) भवन एवं  अन्य सनिर्माण श्रमिकों की योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर रोक लगाओ |

(19) आंगनबाड़ी ,भोजनमाताओं,आशाओं ,ई रिक्शा की समस्याओं का समाधान हो ।

ज्ञापन सचिवालय के समक्ष मुख्यमंत्री एवं मुख्यसचिव के नाम नगर मजिस्ट्रेट श्री प्रत्युषसिंह को दिया ।

इस अवसर पर संचालन सीटू महामंत्री लेखराज ने किया । इस अवसर पर कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दशोनी  ,सीपीआई के समर भण्डारी ,सपा के राष्ट्रीय महासचिव एस एन सचान‌,सीपीएम नेता सुरेन्द्र सिंह सजवाण ,किसान सभा महामंत्री गंगा धर नौटियाल , चेतना आन्दोलन के शंकर गोपाल , महिला समिति की इंदु नौढियाल , एटक के प्रांतीय महामन्त्री अशोक शर्मा , रास्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के नवनीत गुसाई , आंदोलनकारी परिषद के चिन्तन सकलानी , सर्वोदय मण्डल के हरबीर कुशवाहा ,भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष गौरव कुमार ,उपाध्यक्ष उमेंश कुमार, आजम खान, बसपा के दिग्विजय सिंह ,पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष शिवप्रसाद देवली ,कर्मचारी नेता एस एस नेगी ,बस्ती बचाओ आन्दोलन के संयोजक नरेंद्र सिंह ,सीपीएम जिला सचिव राजेन्द्र पुरोहित ,देहरादून सचिव अनन्त आकाश  ,अध्यक्ष किशन गुनियाल ,माला गुरूंग, प्रेमा , किरन ,बिरजू, रघुवीर ,विनोद बडोनी , सुनीता पप्पू ,अशोक कुमार,संजय ,देवेन्द्र ,अनवर , भगवन्तं पयाल ,रामसिंह भण्डारी ,हरीश कुमार , नुरेशा अंसारी , शबनम ,सुरेशी नेगी ,जानकी भट्ट ,आंगनवाडी से सुनीता , लक्ष्मी पन्त रजनी गुलेरिया ,  इन्द्रैश नौटियाल ,शैलेन्द्र परमार ,एजाज ,सुधा देवली , गुरुप्रसाद , मामचंद ,शम्भु मंगाई , याकूब आली,अभिषेक भंडारी , पंकज कुमार , गगन गर्ग , प्रभा देवी , ओमवती , ईश्वरी देवी , आदी बड़ी संख्या में लोग शामिल थे ।

     समापन किसान सभा के महामंत्री   कमरूद्दीन ने की  ।

प्रदर्शन गांधी पार्क से शुरू होकर घण्टाघर राजपुर रोड़ परेड ग्राउण्ड से होता हुआ सचिवालय पहुँचा व प्रदर्शनकारी वही सड़क पर बैठ गए व सभा की ।


  जारीकर्ता


अनन्त आकाश

सचिव सीपीआई(एम)

Wednesday, June 26, 2024

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से भेंट की ।

 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से भेंट



कर उन्हें पुनः पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का दायित्व मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि उनके कुशल नेतृत्व में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।


इस दौरान मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का कार्य गतिमान है। जिसके लिए वन विभाग की 87.0815 हे0 भूमि का हस्तान्तरण किया जाना है। उन्होंने कहा कि जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण हेतु जौलीग्रान्ट के आस-पास के क्षेत्रों की कुल 96.2182 हे० भूमि में से 87.0815 हे0 भूमि वन विभाग की भी अधिग्रहण की जानी है।


उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में मा० उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार/वन विभाग के पक्ष में निर्णय पारित किया जा चुका है। मा० न्यायालय के उक्त निर्णय के उपरान्त जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट के विस्तारण हेतु वन विभाग की उक्त 87.0815 हे० भूमि नागरिक विभाग को हस्तान्तरण करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं है।


मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट से काठमाण्डू (नेपाल) के लिए वायुयान सेवा संचालित किए जाने के लिए निविदा की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। जिसके दृष्टिगत जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट को अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का दर्जा देने की कार्यवाही को गति देने की नितान्त आवश्यकता है।


मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि उत्तराखण्ड के विशिष्ठ भौगोलिक, सामरिक महत्व तथा पर्वतीय क्षेत्र में आम जनमानस को मूलभूत सुविधा प्रदान किए जाने के उद्देश्य से भारत सरकार के उपक्रमों द्वारा कराए जा रहे गैर वानिकी परियोजना हेतु पूर्व की भांति राज्य में उपलब्ध ‘अधिसूचित अवनत वन भूमि’ में क्षतिपूरक वृक्षारोपण कराए जाने तथा इन सभी प्रयोजन के लिए गतिमान वन भूमि हस्तान्तरण प्रस्तावों पर अनुमोदन प्रदान किया जाए।


इस दौरान ने मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री से जनपद रुद्रप्रयाग के विधानसभा क्षेत्र केदारनाथ के अंतर्गत चोपता (तल्लानागपुर) में राजकीय पॉलीटेक्निक चोपता की स्थापना हेतु पूर्व में राजस्व ग्राम कुंडा दानकोट में चयनित 2 हेक्टेयर वन भूमि को हस्तांतरण करने का अनुरोध किया।

Sunday, June 23, 2024

एसएएमईईआर, एमईआईटी वाई और एमसीटीई, भारतीय सेना ने प्रौद्योगिकीय प्रगति के लिए रणनीतिक साझेदारी की

 

 PIB Delhi

आज एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई), भारतीय सेना और सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटी वाई) के अंतर्गत एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला ने ‘भारतीय सेना के लिए भविष्य में वायरलेस प्रौद्योगिकियों’ में सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौता ज्ञापन पर कमांडेंट एमसीटीई एवं कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल लेफ्टिनेंट जनरल के. एच. गवास, और सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (समीर) के महानिदेशक, डॉ. पी. एच. राव, ने हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम का आयोजन एमईआईटी वाई के समूह समन्वयक, श्री एस. के. मारवाह, एवीएसएम, वीएसएम, सेना डिजाइन ब्यूरो, भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक, मेजर जनरल सी. एस. मान की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया, जो देश की रक्षा और प्रौद्योगिकीय छवि के लिए इस रणनीतिक पहल के महत्व को दर्शाता है।

यह पहल भारतीय सेना की प्रौद्योगिकीय क्षमताओं को बल प्रदान करने में एक प्रभावशाली मील का पत्थर है, जो सेना प्रमुख द्वारा वर्ष 2024 को ‘भारतीय सेना के लिए प्रौद्योगिकी अवशोषण का वर्ष’ के रूप में घोषित दृष्टिकोण के अनुरूप है।

आज किये गये समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर से इस सहयोग को फिर से मजबूती से स्थापित होने की आशा है। साथ ही एमसीटीई में एक ‘उन्नत सैन्य अनुसंधान और ऊष्मायन केंद्र’ की स्थापना की योजना है। इस केंद्र का उद्देश्य भारतीय सेना के लिए उन्नत वायरलेस प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना है।

एसएएमईईआर और एमसीटीई के बीच साझेदारी एक समझौते से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है और आधुनिक युद्ध क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करते हुए नई तकनीकी सीमाओं की खोज में एक साझा प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करती है। वायरलेस प्रौद्योगिकियों में एसएएमईईआर की विशेषज्ञता और संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर संचालन में एमसीटीई के कौशल के साथ, यह सहयोग रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगतिकरण को दर्शाता है।

इस साझेदारी के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

  • संयुक्त अनुसंधान और विकास- सहयोगी परियोजनाएं 5जी, 6जी, उन्नत सेलुलर प्रौद्योगिकियों, सॉफ्टवेयर परिभाषित रेडियो और संज्ञानात्मक रेडियो, सैटेलाइट संचार, एंटीना डिजाइन, फ्री स्पेस ऑप्टिक्स और ट्रोपो-स्कैटर संचार, साथ ही एआई, क्वांटम और सैन्य-विशिष्ट चिप डिजाइन में संयुक्त विशेषज्ञता से लाभ प्राप्त करते हुए उचित समाधानों को लक्षित करेंगी।
  • इन्क्यूबेशन सेंटर- यह केंद्र एमएसएमई और स्टार्ट-अप को शामिल करते हुए अवधारणा से विशाल स्तर पर उत्पादन तक सैन्य-विशिष्ट अभिनव समाधानों के विकास का समर्थन करेगा।
  • इसके अतिरिक्त, समझौता ज्ञापन का उद्देश्य ज्ञान के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और विकास पहलुओं पर भी ध्यान देना है।

एसएएमईईआई और एमसीटीई के बीच सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी अवसंरचना को मजबूती प्रदान करना है, जिसके संभावित लाभ केवल सैन्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं होंगे, बल्कि इनका प्रभाव दूरगामी होगा। यह प्रगतिकरण दूरसंचार, आपातकालीन प्रतिक्रिया और सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर एसएएमईईआई और एमसीटीई के बीच साझेदारी में एक महत्वपूर्ण समयकाल को चिह्नित करता है, जो नवाचार और सहयोगी सफलता से परिपूर्ण भविष्य का संकेत है। यह रणनीतिक गठबंधन सरकारी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सैन्य शैक्षणिक निकायों के बीच सहयोग के लिए नए मानक स्थापित करने के लिए पूर्णरूप से तैयार है, जो प्रौद्योगिकी के प्रगतिपथ की ओर अग्रसर होगी।

समझौता ज्ञापन के लिये आयोजित हस्ताक्षर समारोह के दौरान, एवीएसएम, वीएसएम, अतिरिक्त महानिदेशक, आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो मेजर जनरल सी. एस. मान ने विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के अवशोषण पर भारतीय सेना के विजन के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने सैन्य अनुप्रयोगों के लिए विभिन्न उभरती हुई प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों के विकास हेतु एक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए किये गये कार्यों के बारे में जानकारी दी।

एमईआईटी वाई के समूह समन्वयक श्री एस. के. मारवाहा, ने रक्षा और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए एमईआईटी वाई की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रणनीतिक और रक्षा क्षेत्रों में एसएएमईईआर और सीडीएसी के योगदान के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।

एसएएमईईआर की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले डॉ. पी. एच. राव ने रक्षा क्षेत्र में एसएएमईईआर के कार्य के योगदान की झलकियाँ प्रस्तुत की और साथ ही भारतीय सेना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तैनाती योग्य समाधान विकसित करने हेतु समझौता ज्ञापन के लिए महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के बारे भी बताया।

पीवीएसएम, वीएसएम, कमांडेंट एमसीटीई और कर्नल कमांडेंट कोर ऑफ सिग्नल्स लेफ्टिनेंट जनरल के. एच. गवास, ने एमओयू के महत्व और एमसीटीई की एमओयू से अपेक्षाओं को प्रस्तुत किया, ताकि सामरिक युद्ध क्षेत्र में फील्ड डिप्लॉयेबल समाधान विकसित किए जा सकें, जो एमसीटीई, एसएएमईईआर, शिक्षाविदों, उद्योग, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के सहयोगात्मक प्रयासों से प्राप्त हुआ है, जो पूरे देश के दृष्टिकोण के साथ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए एक मंच पर एकत्रित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी अभूतपूर्व उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी और सरकारी अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और सैन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के लिए एक नये मानक स्थापित करेगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की राष्ट्रीय पहल में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करेगी।

 

 


Saturday, June 22, 2024

धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक खत्म , महत्व पूर्ण फैसलों पर लगी मोहर।

 धामी कैबिनेट की बैठक में बड़े फैसलों पर लगी मुहर


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक सम्पन्न हो गयी है।लोकसभा चुनाव के बाद उत्तराखंड सरकार की पहली कैबिनेट बैठक खत्म हो गई है। देहरादून स्थित सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की इस बैठक में धामी कैबिनेट ने कई बड़े फैसले लिए हैं।


धामी कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक खत्म , महत्व पूर्ण फैसलों पर लगी मोहर।


ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा का ढांचा 80 नए पद स्वीकृत विधुत सुरक्षा विभाग का मामला पहले 65 पद थे


उत्तराखंड एकीकृत महानगर विधेयक 2024 स्टेट में विभिन्न परिवहन व्यवस्था को ठीक करने को लेकर नया प्राधिकरण बनेगा जो ट्रेफिक को देखते हुए विकास कार्यों को स्वीकृति देगा


आवास विभाग मे नियुक्ति में कार्मिक विभाग के ही नियम लागू होगे


वित्त सेवा के अधिकारियो की नियुक्ति के बाद भी अलग अलग प्रमोशन के दौरान भी ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी बाकी सवर्गों मेंभी ट्रेनिंग होती रहेगी


वित्त विभाग राज्य सरकार के कर्मचारियों को कॉरपोरेट बैंकिंग अकाउंट लागू करने का फैसला लिया गया हैं 13 बैंक के साथ बात हुई 4 बैंक तैयार हुए एक्सीडेंट मुआवजा समेत तमाम अन्य सुविधाएं जिसमे बच्चों की शादी, बीमारी के मामले में मदद को लेकर भी ये व्यवस्था लागू होगी


पर्यटन नीति 2018 की केटेगरी जिमसे जिले रखें गए थे कैपिटल सब्सिडी का 90 प्रतिशत SGST रिम्बर्समेन्ट 10 साल में किया जाएगा


सहकारिता की प्रबंध समिति में महिलाओ का 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी


देहरादून में खाद्य विश्लेषण साला के 13 पदों को मंजूरी इसके अलावा फ़ूड सेफ्टी ऑन व्हील के लिए 8 पद स्वीकृति


 हनोल मंदिर मास्टर प्लान बनाया जा रहा हैं की व्यवस्था जमीन हैं तो 10 लाख रूपए जमीन नहीं हैं तो सरकार अपनी जमीन में बसायेगी।


आवास विभाग मे नियुक्ति में कार्मिक विभाग के ही नियम लागू होंगे।

सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार निर्मल चंद्र डंडरियाल द्वारा निर्देशित ‘6-ए आकाश गंगा’ को दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को महान संगीतकार अन्नपूर्णा देवी की एकांतप्रिय दुनिया में ले जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत 5 लाख रुपये नकद प्रदान किए गए। भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री ‘द गोल्डन थ्रेड’ को इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए गोल्डन कोंच पुरस्कार प्रदान किया गया।

 







18वें मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव को शानदार विदाई, और भी सुंदर वापसी का वादा




फिल्म निर्माता हमारे देश के कोहिनूर हैं: महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार


मुंबई के आइकॉनिक स्‍काईलाइन की टिमटिमाती रोशनी में डॉक्‍यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्‍शन और एनीमेशन फिल्मों के लिए 18वें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) का समापन हुआ। इसने सिनेमाई कलात्मकता की चमक के साथ सपनों के इस शहर को रोशन कर दिया और कभी न सोने वाला यह शहर कहानी सुनाने के अंदाज और रचनात्मकता की प्रतिध्‍वनि से गूंज उठा। महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार की मौजूदगी में आयोजित एक शानदार समापन समारोह के साथ यह महोत्‍सव अपने चरम पर पहुंच गया।


इस महोत्सव की शानदार सफलता और गैर-फीचर सिनेमा के करामाती जादू का जश्न मनाने के लिए फिल्म एवं मनोरंजन जगत की मशहूर हस्तियां, फिल्म निर्माता और कई दिग्गज एकत्र हुए। इनमें शेखर सुमन, शाजी एन. करुण, सुब्बैया नल्लामुथु, पूनम ढिल्लों, छाया कदम, एमी बरुआ, अक्षय ओबेरॉय और विशाल आदि शामिल थे।




(फोटो में: महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार समापन समारोह में मुख्य वक्‍तव्‍य देते हुए)


 


महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार ने अपने मुख्य संबोधन में कहा कि हमारे फिल्म निर्माता हमारे देश के कोहिनूर हैं। उन्होंने कहा, 'जब हम आगे बढ़ेंगे, तो हमारी विरासत और हमारी फिल्मों से संबंधित हर मामला आगे बढ़ेगा। यहां बैठे लोगों की क्षमता ऐसी है कि वे अपनी कला के जरिये हमारी आत्मा की गहराई तक पहुंच सकते हैं। वे उन गहराइयों तक पहुंच सकते हैं जहां डॉक्टर भी नहीं पहुंच सकते।' उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव को एक नए नजरिये से और आने वाले वर्षों में अपनी क्षमता बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ अलविदा करें।


मंत्री ने इस प्रतिष्ठित माध्यम के जरिये प्रतिभाशाली फिल्म निर्माताओं को प्रोत्‍साहित करने के प्रयासों के लिए भारत सरकार को भी बधाई दी। उन्‍होंने फिल्मों की बदलावकारी ताकत पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'फिल्म समाज का दर्पण है और वह सामाजिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती है। इस क्षेत्र का महज एक संवाद भी किसी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है।'


श्री मुनगंटीवार ने फिल्मों की बहुमुखी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, 'फिल्में न केवल मनोरंजन का स्रोत हैं, बल्कि व्यक्तित्व का विकास करने वाली ताकत भी हैं। जब व्यक्तित्व का विकास होता है, तो समाज विकसित होता है और जब समाज विकसित होता है, तो राष्ट्र विकसित होता है।' उन्होंने सभी को फिल्म के जरिये एकजुट होकर हमारे देश के गौरव को दुनिया के हर घर और हर दिल तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी आह्वान के साथ उन्‍होंने अपना वक्‍तव्‍य समाप्‍त किया।


प्रतिस्पर्धी फिल्मों के बारे में अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के विचारों को साझा करते हुए निर्णायक मंडल की अध्यक्ष श्री भरत बाला ने कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों की दुनिया भर की कहानियों से प्रेरित हैं। ये कहानियां मानवता और परिवार को हमारे जीवन के केंद्र में रखती हैं और इसलिए आज भी लोगों को बेहतर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने कहा, 'सभी डॉक्‍यूमेंट्री में बुनियादी तौर पर मानवता और उस संस्‍कृति को दर्शाती जाती है जिसमें हम रहते हैं और सांस लेते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हम सब डॉक्‍यूमेंट्री में अधिक से अधिक निवेश करेंगे ताकि मानवता को बढ़ावा मिल सके।'


मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव के राष्ट्रीय निर्णायक मंडल की अध्यक्ष भारतीय निर्माता अपूर्वा बख्शी ने कहा कि निर्णायक मंडल को भारत के विभिन्न हिस्सों से उभरने वाली दमदार, गंभीर और मार्मिक कहानियों को देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, 'देखने के अनुभव का मुख्य आकर्षण यह था कि विभिन्न फिल्म निर्माताओं ने किस प्रकार पितृसत्तात्‍म ढांचे को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और पुरुष संबंधों को एक ऐसे मार्मिक नजरिये से चित्रित किया जिसे शायद ही कभी देखा गया हो।'


‘द गोल्डन थ्रेड’ के लिए गोल्डन कोंच पुरस्कार


इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी में प्रतिष्ठित गोल्डन कोंच पुरस्कार निष्ठा जैन द्वारा निर्देशित भारतीय फिल्म ‘द गोल्डन थ्रेड’ को दिया गया। कोलकाता में जूट के काम के ताने-बाने को दर्शाती यह फिल्म आर्थिक बदलाव से प्रभावित औद्योगिक क्रांति के अंतिम अवशेषों के प्रति श्रद्धांजलि और अवलोकन दोनों है। निर्णायक मंडल ने कहा कि यह फिल्म मनुष्य और मशीन के रिश्ते को दर्शाती है। साथ ही यह उस समीकरण पर सवाल उठाती है जिसके तहत पूंजीवाद मनुष्य को केवल उसके श्रम के आधार पर महत्व देता है। इसमें शानदार कल्पना और ध्वनि के साथ एक सुंदर कहानी का तानाबाना बुना गया है जो डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म निर्माण की आकर्षक प्रकृति को रेखांकित करती है। इस पुरस्कार में प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये नकद शामिल है। महोत्सव के समापन फिल्म के रूप में भी ‘द गोल्डन थ्रेड’ दिखाई गई।




(फोटो: ‘द गोल्डन थ्रेड’ की निर्देशक निष्ठा जैन इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए गोल्डन कोंच पुरस्कार प्राप्त करते हुए)


 


सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय शॉर्ट फिक्‍शन फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार वेरा पिरोगोवा द्वारा निर्देशित एस्टोनियाई फिल्म 'सॉर मिल्क' को दिया गया। इस फिल्म में मां और बेटे के बीच के जटिल बंधन को बखूबी दर्शाया गया है, जो उम्मीद और निराशा से भरपूर कहानी का तानाबाना बुनती है। इस पुरस्कार में एक प्रमाण पत्र और 5 लाख रुपये नकद शामिल है।


टोमेक पोपाकुल और कासुमी ओजेकी द्वारा निर्देशित पोलैंड की फिल्म 'जिमा' को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार मिला। इसके तहत प्रमाण पत्र और 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया।


मैट वाल्डेक द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'लवली जैक्सन' को अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में जूरी का स्‍पेशल मेंशन पुरस्‍कार मिला। जूरी यानी निर्णायक मंडल ने इस फिल्म की आध्यात्मिकता और इसकी आकर्षक कहानी को बयां करने के लिए इस्तेमाल की गई रचनात्मक तकनीकों की काफी सराहना की।


सर्वश्रेष्ठ ध्वनि डिजाइन के लिए तकनीकी पुरस्कार नीरज गेरा और अभिजीत सरकार को संयुक्त रूप से 'द गोल्डन थ्रेड' और 'धारा का टेम' (दूध निकालने का समय) फिल्मों में उनकी उत्कृष्टता के लिए दिया गया। मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव में सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार संयुक्त रूप से विग्नेश कुमुलाई को ‘करपारा’ के लिए और आइरीन धर मलिक को ‘फ्रॉम द शैडोज’ के लिए दिया गया। सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी का पुरस्कार बाबिन दुलाल और सूरज ठाकुर को क्रमशः ‘धोरपाटन: नो विंटर हॉलीडेज’ और ‘एंटैंगल्ड’ के लिए दिया गया।


सबसे नवोन्‍मेषी/प्रयोगात्मक फिल्म के लिए प्रमोद पति पुरस्कार लियाम लोपिंटो द्वारा निर्देशित जापानी फिल्म ‘द ओल्ड यंग क्रो’ को दिया गया। यह फिल्म विभिन्‍न द्वंद्वों की कहानी बयां करने की अपनी नई एवं जादुई शैली के लिए सराही गई। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी और 1 लाख रुपये प्रदान किए गए।


सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार निर्मल चंद्र डंडरियाल द्वारा निर्देशित ‘6-ए आकाश गंगा’ को दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को महान संगीतकार अन्नपूर्णा देवी की एकांतप्रिय दुनिया में ले जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत 5 लाख रुपये नकद प्रदान किए गए।


इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए अंतर्राष्ट्रीय श्रेणी में प्रतिष्ठित गोल्डन कोंच पुरस्कार निष्ठा जैन द्वारा निर्देशित भारतीय फिल्म ‘द गोल्डन थ्रेड’ को दिया गया। कोलकाता में जूट के काम के ताने-बाने को दर्शाती यह फिल्म आर्थिक बदलाव से प्रभावित औद्योगिक क्रांति के अंतिम अवशेषों के प्रति श्रद्धांजलि और अवलोकन दोनों है। निर्णायक मंडल ने कहा कि यह फिल्म मनुष्य और मशीन के रिश्ते को दर्शाती है। साथ ही यह उस समीकरण पर सवाल उठाती है जिसके तहत पूंजीवाद मनुष्य को केवल उसके श्रम के आधार पर महत्व देता है। इसमें शानदार कल्पना और ध्वनि के साथ एक सुंदर कहानी का तानाबाना बुना गया है जो डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म निर्माण की आकर्षक प्रकृति को रेखांकित करती है। इस पुरस्कार में प्रमाण पत्र और 10 लाख रुपये नकद शामिल है। महोत्सव के समापन फिल्म के रूप में भी ‘द गोल्डन थ्रेड’ दिखाई गई।

ट्रॉफी और 1 लाख रुपये प्रदान किए गए।

सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्‍यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार निर्मल चंद्र डंडरियाल द्वारा निर्देशित ‘6-ए आकाश गंगा’ को दिया गया। यह फिल्म दर्शकों को महान संगीतकार अन्नपूर्णा देवी की एकांतप्रिय दुनिया में ले जाती है। इस पुरस्‍कार के तहत 5 लाख रुपये नकद प्रदान किए गए।


(फोटो: ‘6-ए आकाश गंगा’ के निर्देशक निर्मल चंद्र डंडरियाल सर्वश्रेष्ठ भारतीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार प्राप्त करते हुए)

 

सर्वश्रेष्ठ भारतीय शॉर्ट फिक्‍शन फिल्म (30 मिनट तक) के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार बरखा प्रशांत नाइक द्वारा निर्देशित 'साल्टको दिया गया। यह फिल्म एक मार्मिक और खूबसूरती से गढ़ी गई पिता-पुत्र की कहानी में कामुकता की समझ में पीढ़ीगत अंतर को बारीकी से दर्शाती है। इस पुरस्कार के तहत 3 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।

गौरव पति द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'निर्जराने सर्वश्रेष्ठ भारतीय एनिमेशन फिल्म के लिए सिल्वर कोंच पुरस्कार जीता। यह फिल्म गंगा के घाटों पर शोकगुल भरे अनुष्ठानों के दौरान दो भाइयों के पुनर्मिलन की कहानी बयां करती है। इस पुरस्‍कार के तहत 3 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।

जोशी बेनेडिक्ट द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'अ कोकोनट ट्रीको प्रवास और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्‍यान केंद्रित करने के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिता श्रेणी में जूरी का स्‍पेशन मेंशन पुरस्‍कार प्राप्त हुआ।


मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव 2024 में सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक के लिए दादा साहब फाल्के चित्रनगरी पुरस्कार श्रीमोई सिंह को उनकी फिल्म 'टुअर्ड्स हैप्पी एलीज' के लिए दिया गया। इस फिल्‍म ने महोत्‍सव का एफआईपीआरईएससीआई अंतर्राष्ट्रीय क्रिटिक जूरी पुरस्कार भी जीता है। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी और 1 लाख रुपये का नकद प्रदान किए जाते हैं।


मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव में सर्वश्रेष्ठ छात्र फिल्म के लिए आईडीपीए पुरस्कार 'चांचिसोआ (उम्मीद)' को दिया गया, जो एल्वाचिसा संगमा और दीपांकर दास द्वारा निर्देशित एक गारो फिल्म है। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी और 1 लाख रुपये का नकद प्रदान किए जाते हैं।


'अमृत काल में भारत' पर सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार एडमंड रैनसन द्वारा निर्देशित 'लाइफ इन लूम' को दिया गया, जो भारत में बुनकर समुदायों के सामने आने वाली सामाजिक-आर्थिक और जलवायु चुनौतियों पर केंद्रित है। इस पुरस्कार के तहत ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और 1 लाख रुपये नकद प्रदान किए जाते हैं।




(फोटो: समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम का दृश्य)


 


समापन समारोह में अक्षय ओबेरॉय, शीबा चड्ढा, एमी बरुआ, मान्या सिंह, छाया कदम, विशाल मल्होत्रा, चंद्र प्रसाद ठाकुर, साई देवधर, सांविका और दीपक पाराशर जैसी फिल्मी हस्तियां मौजूद थीं। शाम को रंगारंग, जीवंत और विविधतापूर्ण सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मंच पर धूम मचा दी और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में महोत्सव की तकनीकी समिति और फिल्मी हस्तियों को सम्मानित किया गया। एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक और इस महोत्सव के निदेशक श्री पृथुल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।



एनीमेशन फिल्म निर्माण से संबंधित समकालीन और नवोन्‍मेषी विषयों पर गहन चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने फिल्म निर्माणप्रचार और वितरण के नए पहलुओं की खोज की। इससे उद्योग में उभरते रुझान के बारे में उनकी समझ बेहतर हुई। इसके अलावावार्नर ब्रदर्स के एक वरिष्ठ एनिमेटर के नेतृत्व में एनीमेशन और वीएफएक्स पाइपलाइन पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जो अत्याधुनिक तकनीकों की गहन खोज से प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भारतीय डॉक्यूमेंट्री निर्माता संघ द्वारा आयोजित ओपन फोरम ने डॉक्यूमेंट्री फंडिंगआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के इस दौर में फिल्म निर्माण जैसे महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर आकर्षक और गर्मजोशी से भरी चर्चा आयोजित की। इन मंचों ने पेशेवरों को उद्योग के सामने आने वाली मौजूदा चुनौतियों एवं अवसरों पर चर्चा करने और अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए एक डायनेमिक जगह उपलब्‍ध कराया। मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव 2024 ने वैश्विक सिनेमाई आदान-प्रदानरचनात्मकता को बढ़ावा देनेसहयोग करने और दुनिया भर से कहानी बयां करने की विविध परंपराओं का जश्न मनाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत की है।

_बस्तियों को बचाने एवं मालिकाना हक के सवाल पर , फुटपाथ व्यवसायियों के उत्पीड़न के सवाल पर । एलिवेटेड रोड़ के विरोध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन ।


 




27 जून024 को राज्यसचिवालय पर प्रदर्शन 

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देहरादून 22 जून 024,

आज विभिन्न जनसंगठनों तथा राजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधियों जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमन्त्रीजी को ज्ञापन प्रेषित किया गया ।ज्ञापन उपजिलाधिकारी मुख्यालय शालिनी नेगी ने लिया तथा आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया ।इस अवसर पर सीपीएम सचिव अनन्त आकाश ,सीआईटीयू महामंत्री लेखराज ,आयूपी अध्यक्ष नवनीत गुंसाई ,बस्ती बचाओ अभियान के नरेन्द्र सिंह ,राजेन्द्र शर्मा ,भीम आर्मी के आजम खान ,नेताजी संघर्ष समिति के प्रभात डण्डरियाल ,चेतना आन्दोलन के बडोनी ,रधुबीरसिंह ,डिम्पल ,रेणु ,ममता ,जतिनी ,सुनैना ,मनीषा ,मंजू ,रीना ,पिंकी ,प्रेंमफूल ,संगीता, सोनी ,विनोद,हरिओम ,सोनू के अलावा सपा ,महिला समिति ,एस एफआई उपस्थित आदि बड़ी संख्या में प्रभावित उपस्थित थे ।

इस अवसर पर गरीब बस्तियों को न उखाड़ने ,बस्तियों क नियमतीकरण करने ,फुटपाथ व्यवसायियों का उत्पीड़न रोकने तथा वैन्डरजोन घोषित करने तथा बस्तियों के लिऐ जारी नोटिस निरस्त करने की मांग की गई ।

ज्ञापन निम्नलिखित है ।

सेवा में,


माननीय मुख्यमंत्रीजी 

उत्तराखण्ड सरकार

देहरादून ।

विषय: मज़दूर बस्तियों के लोगों को बेघर करने के विरोध में ज्ञापन प्रेषण ।

द्वारा :- जिलाधिकारी महोदया देहरादून ।

मान्यवर,


राजधानी देहरादूनमें पिछले डेढ़ महीने से गरीबों को बेघर करने के खिलाफ चलाये अभियान के तहत राज्य के ट्रेड यूनियन, जन संगठन और विपक्षी दल लगातार आपके और आपकी सरकार के मंत्रियों के संज्ञान में कुछ गंभीर समस्याओं को लाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि में सोमवार से MDDA 240 से ज्यादा परिवारों को बेघर करने का अभियान शुरू करने वाला है,  जो कि गैर क़ानूनी, अन्यायपूर्ण और जन विरोधी है तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के विपरीत है ।

 मान्यवर ,हम पुनः आपके संज्ञान निम्नलिखित बिन्दुओं रखना चाहते हैं :-- 

(1)अतिक्रमण अभियान या फिर एनजीटी के फैसले के तहत किसी भी बड़े बिल्डर, होटल या सरकारी विभाग पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।  यह एनजीटी के आदेश की सरासर अवहेलना है ,इसी की आढ़ में केवल गरीब बस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है ।

(2) आपकी सरकार ने 2018 में कानून लाकर वायदा किया था कि 2021 तक सभी बस्तियों को मालिकाना हक मिलेगा । 2022 तक हर परिवार को पीएम मोदी का वायदा था कि घर मिलेगा,पुनः नवनिर्वाचित केन्द्र सरकार फिर से 3 करोड़ घर देने का ऐलान का असर हमारे राज्य में उल्टा है । इस स्थिति में मज़दूर वर्ग के परिवार कहाँ रहें ?


(3) कोर्ट में आपके अधिकारी निरन्तर घोर लापरवाही करते रहे हैं। 1 अप्रैल 024 को एक सुनवाई में हाज़िर तक नहीं हुए और फिर हरित प्राधिकरण से ऐसा आदेश आया जिसके बहाने लोगों को उजाड़ने की एकपक्षीय कार्यवाही की जा रही है । 

(4) बेदखली के लिए क़ानूनी प्रक्रिया है , लेकिन इस अभियान में कानून को ताक पर रखा गया है ,अनाधिकृत अधिकारी मनमानी तरीकों से मानक तय कर रहे हैं कि किसको बेदखल करना है ? प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और व्यक्तिगत सुनवाई और अपील करने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है। लोगों की और से दिए गए साक्ष्य को एकतरफा निरस्त कर ध्वस्तीकरण कर उन्हें प्रताड़ित एवं अपमानित कर बेघरबार किया जा रहा है। फिलहाल 2016 से पहले बसे लोग इस कार्यवाही कै शिकंजे में हैं जबकि 2018 में लाया गया आपका कानून सभी बस्तीवासियों को जो सुरक्षा देता है , उसे एक सिरे से खारिज किया जा रहा है ।

(5) बिना क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाये किसी की सम्पति को नुक़सान पहुँचाना क़ानूनी अपराध है।  प्रभावित लोगों में से कई परिवार हैं जो अनुसूचित जाति के हैं , उनको गैर क़ानूनी तरीकों से बेदखल करना SC / ST (Prevention of Atrocities) Act के अंतर्गत संज्ञेय अपराध है।

मान्यवर ,इन सारे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए हम फिर से आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि सरकार अपने ही वादों के अनुसार इस अभियान पर रोक लगाकर कानून तुरन्त लाये कि  किसी को बेघर नहीं किया जायेगा। बस्तियों का मालिकाना हक नियमितीकरण या पुनर्वास कै लिऐ युद्धस्तर पर कदम उठाना सरकार अपनी प्राथमिकता बनाये तथा पर्यावरण और उत्तराखण्ड की प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए बड़े बिल्डरों एवं सरकारी विभागों पर शक्ति सै कार्यवाही की जाये औ रिस्पना ,विन्दाल एलिवेटेड रोड जैसे बेज़रूरत, जन विरोधी एवं पर्यावरण विरोधी परियोजनाओं पर तुरंत रोक लगायी जाये। 

अन्त मेंं फुटपाथ लधु व्यवसायियों को आयेदिन पुलिसिया उत्पीड़न राजधानी देहरादून तथा राज्य प्रमुख महागरों तथा कस्बों देख


जारीकर्ता

अनन्त आकाश

सचिव ,सीपीआई (एम)

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