Wednesday, June 5, 2024

दूरसंचार विभाग ने उद्योग 4.0 परिवर्तन में एमएसएमई और स्टार्टअप का समर्थन करने के लिए पहल शुरू की

 दूरसंचार विभाग उद्योग की उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के माध्यम से संगठनों और स्टार्टअप की सहायता करने के उद्देश्य से एक नई पहल की योजना बना रहा है। इसने एमएसएमई के बीच "उद्योग 4.0 एक बेस लाइन सर्वेक्षण" के प्रस्ताव का आह्वान किया है जो डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने और 5जी और 6जी प्रौद्योगिकियों के आगमन के लिए उद्योगों को तैयार करने के व्यापक विजन के साथ संरेखित करता है।

पहल का अवलोकन

सर्वेक्षण का लक्ष्य उद्योग 4.0 को अपनाने तथा उन्नत तकनीकों का उपयोग करने में एमएसएमई के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना होगा। सर्वेक्षण का उद्देश्य एआई, आईओटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और 5जी और 6जी नेटवर्क के एकीकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली क्षमताओं का लाभ उठाने में सक्षम एक मजबूत इको-सिस्टम के लिए आधार तैयार करना है। इसमें कम से कम 10 क्षेत्रों में सेक्टर-विशिष्ट आवश्यकताओं की पहचान करना और प्राथमिकताएं शामिल होंगी, जिसमें एमएसएमई के विविध परिदृश्य को चिन्हित करना तथा नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए लक्षित समर्थन प्रदान करना है।

सर्वेक्षण 60 दिनों की अवधि में भारत के उत्तर और दक्षिणी हिस्सों में प्रत्येक में पांच क्षेत्रों को कवर करेगा। प्रमुख सिफारिशें उद्योग 4.0 के परिवर्तनकारी अनुकूलता को प्राप्त करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप के लिए मंच तैयार करेंगीजिससे एमएसएमई की प्रतिस्पर्धी स्थिति और उत्तरजीविता में वृद्धि होगी।

कार्रवाई का आह्वान

संगठनों और स्टार्टअप्स को इस परिवर्तनकारी सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए 11 जून, 2024 तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। प्रस्ताव प्रस्तुत करने के दिशा-निर्देशों और अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जा सकता है।

https://tcoe.in/include/Call_of_Proposal_Baseline_Survey_of_MSMEs.pdf

विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में पीपल का पौधा लगाया और #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान शुरू किया

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बुद्ध जयंती पार्क, नई दिल्ली में पीपल का पौधा लगाकर #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान की शुरुआत की।

धरती माता द्वारा प्रकृति के पोषण और हमारी माताओं द्वारा मानव जीवन के पोषण के बीच समानता दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के लोगों से अपनी माँ के प्रति प्रेम, आदर और सम्मान के प्रतीक के रूप में एक पौधा लगाने और पेड़ों तथा धरती माता की रक्षा करने का संकल्प लेने का अनुरोध किया।

केंद्र और राज्य सरकार के विभाग तथा स्थानीय निकाय भी #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान में सहायता करने के लिए सार्वजनिक स्थानों की पहचान करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम का मुख्य हिस्सा वृक्षारोपण है और अन्‍य हिस्‍से हैं भूक्षरण की रोकथाम, सूखे से निपटने की क्षमता विकसित करना और रेगिस्तानीकरण को रोकना। #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान के अलावा, सितंबर तक 80 करोड़ और मार्च, 2025 तक 140 करोड़ पौधे लगाने की योजना बनाई गई है, जिसका अनुपालन सम्पूर्ण सरकार और सम्पूर्ण समाज वाले दृष्टिकोण के अनुरूप किया जाएगा। ये पौधे पूरे देश में व्यक्तियों, संस्थाओं, समुदाय आधारित संगठनों, केंद्र और राज्य सरकार के विभागों तथा स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाएंगे।

भारत सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग ने #एक_पेड़_माँ_के_नाम के संदेश को आगे बढ़ाने और प्रोत्‍साहित करने के लिए 7.5 लाख स्कूलों में इको-क्लबों को प्रेरित किया है। स्कूलों में समर कैंप इस थीम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इसे अनुभवात्मक शिक्षण के साथ जोड़ रहे हैं, जो नई शिक्षा नीति का एक मूल सिद्धांत है। पेड़ लगाने का बड़ा महत्व जो मनुष्य और वास्तव में इस धरती के सभी जीवधारियों का पोषण करता है। पेड़, माँ और धरती माँ के बीच अंतर-संबंध है जिस पर विशेष रूप से Plant4Mother के विचार के माध्यम से जोर दिया जाएगा। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सभी पर्यावरण जागरूकता, क्षमता निर्माण और आजीविका कार्यक्रम (ईआईएसीपी) केंद्र के साथ-साथ इसके संस्थान जैसे बीएसआई, ज़ेडएसआई, आईसीएफआरई, एनएमएनएम भी वृक्षारोपण के बारे में जागरूकता बढ़ाएंगे और #एक_पेड़_माँ_के_नाम की अम्‍बरेला थीम के तहत वृक्षारोपण प्रयासों को शुरू करने में सक्रिय रूप से शामिल होंगे। अन्य मंत्रालय और विभाग भी #एक_पेड़_माँ_के_नाम की थीम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। युवा कार्यक्रम मंत्रालय के ‘माई भारत’ कार्यक्रम के माध्यम से भी युवाओं में जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी इस संदेश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया है और अन्य देशों के नागरिकों से #Plant4Mother के मूल सिद्धांत के साथ इस विशाल वृक्षारोपण अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है।

इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री और दिल्ली के उपराज्यपाल भी उपस्थित थे।

Sunday, March 10, 2024

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने राजकीय परिवहन निगम कोटद्वार के बस अड्डे के पुनरोद्धार कार्यक्रम में भूमि पूजन कर शिलान्यास किया।

 


 *10 मार्च 2024 कोटद्वार* 

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण  ने राजकीय परिवहन  निगम कोटद्वार के बस अड्डे के पुनरोद्धार कार्यक्रम में भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया ‘हमारा संकल्प विकसित भारत“  के अंतर्गत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा में कोटद्वार को एक बड़ी सौगात मिली है। 


विधानसभा अध्यक्ष ने बताया की 9 करोड़ 99 लाख 47 हजार की मदद से कोटद्वार बस अड्डे का पुनरोद्धार किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा की, हम सबकी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी चीजों को संभाल कर रखें।


विधानसभा अध्यक्ष ने बताया आज के इस लोकार्पण कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्चुअल माध्यम से पूरे प्रदेश में विभिन्न जगहों पर कई बस अड्डो का जीर्णोद्धार किया गया ।


इस अवसर पर एआरएम राकेश सिंह , नगर अध्यक्ष पंकज भाटिया ,कालागढ़ अध्यक्ष मीनाक्षी चौधरी , नीना बैंजवाल , राकेश मित्तल , सुनील गोयल , राज गौरव , सोनिया अस्वाल, संजीव थपलियाल , बबलू नेगी आदि लोग उपस्थित रहे।

आरएनआई का नाम बदलकर अब पीआरजीआई- प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया हुआ

 सूचना और प्रसारण मंत्रालय


*✍️ समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का पंजीकरण अब प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगा* 


*◆ 

*◆ प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण ( पीआरपी ) पपुराना पीआरबी अधिनियम, 1867 निरस्त कर दिया गया है*


*◆ प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण (पीआरपी) अधिनियम, 2023 और इसके नियमों को अपने राजपत्र में अधिसूचित कर दिया है और इसके परिणामस्वरूप यह अधिनियम 1 मार्च, 2024 से लागू हो गया* 

 *सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला कॉल रिकॉर्डिंग अब नहीं माना जाएगा साक्ष्य*

*इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा की यदि अगर किसी की इजाजत के बिना मोबाइल या फोन कॉल रिकॉर्ड की जाती है तो वह आईटी एक्ट-2000 की धारा 72 का होगा उल्लंघन*

Saturday, March 9, 2024

देश मे जल्द लागू हो पत्रकार सुरक्षा कानून

 पत्रकारों का हित किसी भी राजनीतिक पार्टी के एजेंडे में नहीं


* वर्चुअल मीटिंग में यूपी,बिहार,झारखंड,मध्यप्रदेश,पंजाब सहित कई राज्यों से पत्रकारो ने रखे विचार 

*  



जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इंडिया की राष्ट्रीय स्तर की एक मैराथन वर्चुअल मीटिंग राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. अनुराग सक्सेना की अध्यक्षता में की गई इस बैठक में पत्रकार हितों को लेकर जहां चिंता व्यक्त की गई वहीं पत्रकारों में इस बात को लेकर आक्रोश दिखा कि पक्ष या विपक्ष किसी भी राजनैतिक पार्टी को पत्रकार हितों की चिंता नहीं है जबकि किसी भी राजनैतिक पार्टी को अर्श से फर्श और फर्श से अर्श तक पहुंचाने में पत्रकारों की माहिती भूमिका होती है पत्रकार इस बात को लेकर भी चिंतित दिखे कि हर मोर्चे पर बेहतर कार्य करने वाले हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री पत्रकार हितों की बात क्यों नहीं करते।

ढाई घंटे से भी ज्यादा देर तक चली इस मैराथन बैठक में संगठन के राष्ट्रीय, प्रादेशिक एवं स्थानीय पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने बेबाक विचार व्यक्त किये। इस क्रम में अपना मत रखते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज पत्रकारों के ऊपर बेवजह हमले हो रहे हैं उन्हें बिना किसी कारण के प्रताड़ित किया जा रहा है आज पत्रकार स्वतंत्र होकर अपना कार्य नहीं कर पा रहा है आज जब सब कुछ डिजिटल हो रहा है तब ई पेपर को मान्यता न देना कहां तक नीति संगत है। देश में पत्रकार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है परंतु सरकार द्वारा उसके लिए पत्रकार सुरक्षा कानून न पारित करना पत्रकारों के प्रति सरकार के मंसूबों को दर्शाता है।

इसी क्रम में संस्था के राष्ट्रीय संयोजक डाॅ. आर सी श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को पत्रकारों के हित की रक्षा के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून अभिलंब लागू करना चाहिए।

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ पदाधिकारी कुणाल भगत ने कहा कि बिहार में भी पत्रकारों को बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है और मुकदमे लिखा जा रहे हैं।

राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं वरिष्ठ पत्रकार अशोक झा ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून पर सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि पत्रकार सुरक्षा की भावना से कार्य कर सके।

इसी प्रकार से करीब आधा सैकड़ा से ज्यादा लोगों ने पत्रकार हित एवं पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर अपने विचार व्यक्त किया और सरकार से मांग की की पत्रकार जो अपने अस्तित्व और वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं उनके साथ न्याय किया जाए ताकि वह निर्भीक होकर अपना कार्य कर सकें।

विचार व्यक्त करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ पदाधिकारी डाॅ. विवेक पाठक, अशोक झा, निखिल कद वर्मा, संजय, कुणाल भगत, हरिशंकर पाराशर,कोसांग पटनायक, नागेंद्र पांडे, विजय कुमार, शशि कुमार ,सुमन, रामानंद ,राघवेंद्र त्रिपाठी, संजय कुमार, राजेश कुमार, एसपी चौधरी ,आशीष कुमार प्रमाणिक, अंशिका ओझा, निर्मित कुमार, राजीव रंजन, जितेंद्र पाठक ,दिया नंदिनी ,विक्रांत, राज लूनिया, राजेश पांडे ,संजय कुमार सिंह, अब्दुल बासित ,विवेक पटनायक, बी त्रिपाठी, राजा अवस्थी आदि पत्रकार साथी मौजूद रहे। जिनका कहना था कि यदि सरकार पत्रकारों की मांगे नहीं मानती है और पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं लागू करती है तो संगठन पूरे दम खम के साथ पत्रकारों की लड़ाई लड़ेगा।

Sunday, December 8, 2019

18 राज्यों में ग्लोबल फैशन डिजाइनर रितु बेरी के साथ 676 वीडीवीके के साथ प्रधानमंत्री वन धन योजना और फोर्ज एसोसिएशन के 100 दिनों का जश्न मनाया गया, जिसमें 2,00,740 लाभार्थी शामिल हैं। 99.81 करोड़ TRIFEF के प्रबंध निदेशक, श्री प्रवीर कृष्ण ने 'जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत TRIFED द्वारा संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम' प्रधानमंत्री वन धनयोजन (PMVDY) के 100 दिन पूरे होने पर मीडिया को अपडेट किया, जिसका उद्देश्य देश भर के आदिवासियों को सशक्त बनाना है। उन्हें उद्यमी। आज यहां ट्रायफेड द्वारा ग्लोबल डिजाइनर रितु के साथ ट्राइब्स इंडिया के ट्रिब्यूट्स फॉर ग्लोबल डिजाइनर रितु के साथ जुड़ने के लिए 'पीएमवीडीवाई के 100 दिन' मनाने की एक घटना को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पीएमवीडीवाई आदिवासी स्व सहायता समूहों के समूह बनाने के लिए एक मार्केट लिंक्ड ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम है। आदिवासी निर्माता कंपनियों में उन्हें मजबूत करना। इसे देश के 27 राज्यों से भागीदारी के साथ लॉन्च किया गया है। 27 अगस्त 2019 को वन धन कार्यक्रम को मंजूरी देने की पहल के बाद छोटी अवधि के दौरान, 24 राज्यों से 799 VDVKs की स्थापना के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और TRIFED ने 1876 राज्यों में 676 वान धनविकेसकेंद्र (VDVKs) स्वीकृत किए हैं, रु। 2,00,740 लाभार्थियों को रु। की स्वीकृत राशि के लिए। 99.81 करोड़। यह कार्यक्रम श्रीमती के पारंपरिक स्वागत के साथ शुरू हुआ। मीनाक्षी लखेड़ी, संसद सदस्य; और श्रीमती रीतूबेरी, नागा डांसर्स द्वारा वैश्विक फैशन डिजाइनर, जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चकाचौंध कर दिया। प्रत्येक राज्य अपने VDVK से 2 डेमो इकाइयाँ स्थापित करेगा और वर्तमान में, 11 राज्यों ने 21 डेमो इकाइयों की पहचान की है जो दिसंबर 2019 तक स्थापित हो जाएंगे। TRIFED ने मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों की भागीदारी के साथ दो राष्ट्रीय स्तर की वकालत कार्यशालाएँ और 5 राज्य स्तरीय वकालत कार्यशालाएँ भी आयोजित की हैं। , प्रधान सचिव, राज्य नोडल विभागों के प्रतिनिधि, कार्यान्वयन एजेंसियां, परामर्श संगठन, जनजातीय एसएचजी सदस्य आदि उन्हें वन धन कार्यक्रम के बारे में जागरूक करने के लिए और उन्हें आरकेवीके की स्थापना के लिए राज्य वन धन योजना तैयार करने में सहायता प्रदान करते हैं। TRIFED, PMVY के तहत सभी गतिविधियों के डेटा संग्रह, ट्रैकिंग और निगरानी के लिए एक मजबूत वेब-आधारित आईटी प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित कर रहा है। TRIFED 45 लाख आदिवासी परिवारों को कवर करने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रत्येक वर्ष 3000 VDVK की स्थापना करेगा और कार्यक्रम के तहत लगभग 2 करोड़ आदिवासी लाभार्थियों की मदद करने का लक्ष्य है। यह आदिवासी हस्तशिल्प और 117 ट्राइब्स इंडिया आउटलेट्स के अपने नेटवर्क के माध्यम से बाजार विकास में अपनी लंबी ताकत का लाभ उठाएगा और एमएफपी मूल्य वर्धित उत्पादों के विपणन के लिए एक राष्ट्रव्यापी खुदरा नेटवर्क विकसित करने के लिए अन्य विपणन खिलाड़ियों के साथ संलग्न होगा। ट्राइफेड ने आदिवासी संस्कृति, शिल्प, भोजन और वाणिज्य के माध्यम से वन धन कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ के साथ भी भागीदारी की है। इसके बाद ट्राइब्स इंडिया का सुश्री रीतुबेरी के साथ संबंध के बारे में घोषणा की गई। आदिवासी शिल्प और संस्कृति के सबसे बड़े प्रवर्तक के साथ भारत के बेहतरीन डिजाइनरों में से एक की साझेदारी में अपार संभावनाएं हैं। ट्राइफेड के साथ ट्राइब्स इंडिया के मुख्य डिजाइन सलाहकार के रूप में भागीदारी करके, सुश्री बेरी ने ट्राइब्स इंडिया को फैशन की दुनिया में अपने प्रदर्शन और अच्छी तरह से स्थापित विशेषज्ञता के साथ एक घरेलू नाम बनाने में मदद करेगी। दुनिया भर में विभिन्न देशों के साथ काम करने के अपने अनुभव के कारण, सुश्री बेरी जानती हैं कि कैसे एक क्षेत्र की संस्कृति के अनुकूल होना और स्थानीय लोगों के दिलों को छूना है। उनके इस विशेष कौशल सेट ने उन्हें फैशन की उल्लेखनीय समझ के साथ जोड़ा, ट्राइब्स इंडिया को अगले स्तर तक ले जाएगा, जैसे कि पूरे भारत और दुनिया के लोग शानदार जनजातीय संस्कृति और कला रूपों के साथ अधिक जुड़े हुए महसूस करते हैं। ट्राइफेड की पहल # ट्राइबल्स विद ट्राइब्स इंडिया अब सुश्री बेरी के तत्वावधान में पूरे देश और दुनिया में गूंज और गूंज पाएंगे। सभा में बोलते हुए, सुश्री बेरी ने ट्राइब्स इंडिया के साथ मिलकर काम करने और 1,50,000 से अधिक आदिवासी कारीगरों द्वारा दस्तकारी किए गए विश्व स्तरीय उत्पादों के लिए एक वैश्विक पदचिह्न स्थापित करने के लिए उत्साह व्यक्त किया। श्रीमती। इसके बाद मीनाक्षी ललखी ने अपने रिटेल ब्रांड ट्राइब्स इंडिया के माध्यम से TRIFED की मार्केटिंग पहल को आगे बढ़ाते हुए सभा को संबोधित किया, साथ ही कई राष्ट्रीय जनजातीय उत्सवों 'AadiMahotsavs' की जबरदस्त सफलता की ओर इशारा किया - TRIFED पूरे देश में आयोजन करता है। हाल ही में, TRIFED ने दिल्ली के वार्षिक AadiMahotsav का आयोजन 16 से 30 पखवाड़े के लिए DilliHaat में किया, जो देश के 24 राज्यों से आए 1,000 से अधिक आदिवासी कारीगरों और कलाकारों का जीवंत समूह था। इन मास्टर कारीगरों ने अपने कौशल और विश्वस्तरीय उत्पादों को एक स्टार-हिट दिल्ली के दर्शकों को दिखाया, जिन्होंने उन्हें रुपये की रिकॉर्ड राशि पर टिपिंग लेनदेन के साथ कारीगरों को पुरस्कृत किया। महज एक पखवाड़े में 20 करोड़।


18 राज्यों में ग्लोबल फैशन डिजाइनर रितु बेरी के साथ 676 वीडीवीके के साथ प्रधानमंत्री वन धन योजना और फोर्ज एसोसिएशन के 100 दिनों का जश्न मनाया गया, जिसमें 2,00,740 लाभार्थी शामिल हैं। 99.81 करोड़
TRIFEF के प्रबंध निदेशक, श्री प्रवीर कृष्ण ने 'जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत TRIFED द्वारा संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम' प्रधानमंत्री वन धनयोजन (PMVDY) के 100 दिन पूरे होने पर मीडिया को अपडेट किया, जिसका उद्देश्य देश भर के आदिवासियों को सशक्त बनाना है। उन्हें उद्यमी। आज यहां ट्रायफेड द्वारा ग्लोबल डिजाइनर रितु के साथ ट्राइब्स इंडिया के ट्रिब्यूट्स फॉर ग्लोबल डिजाइनर रितु के साथ जुड़ने के लिए 'पीएमवीडीवाई के 100 दिन' मनाने की एक घटना को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पीएमवीडीवाई आदिवासी स्व सहायता समूहों के समूह बनाने के लिए एक मार्केट लिंक्ड ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम है। आदिवासी निर्माता कंपनियों में उन्हें मजबूत करना। इसे देश के 27 राज्यों से भागीदारी के साथ लॉन्च किया गया है। 27 अगस्त 2019 को वन धन कार्यक्रम को मंजूरी देने की पहल के बाद छोटी अवधि के दौरान, 24 राज्यों से 799 VDVKs की स्थापना के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और TRIFED ने 1876 राज्यों में 676 वान धनविकेसकेंद्र (VDVKs) स्वीकृत किए हैं, रु। 2,00,740 लाभार्थियों को रु। की स्वीकृत राशि के लिए। 99.81 करोड़।
यह कार्यक्रम श्रीमती के पारंपरिक स्वागत के साथ शुरू हुआ। मीनाक्षी लखेड़ी, संसद सदस्यऔर श्रीमती रीतूबेरी, नागा डांसर्स द्वारा वैश्विक फैशन डिजाइनर, जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चकाचौंध कर दिया।
प्रत्येक राज्य अपने VDVK से 2 डेमो इकाइयाँ स्थापित करेगा और वर्तमान में, 11 राज्यों ने 21 डेमो इकाइयों की पहचान की है जो दिसंबर 2019 तक स्थापित हो जाएंगे। TRIFED ने मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों की भागीदारी के साथ दो राष्ट्रीय स्तर की वकालत कार्यशालाएँ और 5 राज्य स्तरीय वकालत कार्यशालाएँ भी आयोजित की हैं। , प्रधान सचिव, राज्य नोडल विभागों के प्रतिनिधि, कार्यान्वयन एजेंसियां, परामर्श संगठन, जनजातीय एसएचजी सदस्य आदि उन्हें वन धन कार्यक्रम के बारे में जागरूक करने के लिए और उन्हें आरकेवीके की स्थापना के लिए राज्य वन धन योजना तैयार करने में सहायता प्रदान करते हैं। TRIFED, PMVY के तहत सभी गतिविधियों के डेटा संग्रह, ट्रैकिंग और निगरानी के लिए एक मजबूत वेब-आधारित आईटी प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित कर रहा है।
TRIFED 45 लाख आदिवासी परिवारों को कवर करने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रत्येक वर्ष 3000 VDVK की स्थापना करेगा और कार्यक्रम के तहत लगभग 2 करोड़ आदिवासी लाभार्थियों की मदद करने का लक्ष्य है। यह आदिवासी हस्तशिल्प और 117 ट्राइब्स इंडिया आउटलेट्स के अपने नेटवर्क के माध्यम से बाजार विकास में अपनी लंबी ताकत का लाभ उठाएगा और एमएफपी मूल्य वर्धित उत्पादों के विपणन के लिए एक राष्ट्रव्यापी खुदरा नेटवर्क विकसित करने के लिए अन्य विपणन खिलाड़ियों के साथ संलग्न होगा।
ट्राइफेड ने आदिवासी संस्कृति, शिल्प, भोजन और वाणिज्य के माध्यम से वन धन कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ के साथ भी भागीदारी की है।
इसके बाद ट्राइब्स इंडिया का सुश्री रीतुबेरी के साथ संबंध के बारे में घोषणा की गई। आदिवासी शिल्प और संस्कृति के सबसे बड़े प्रवर्तक के साथ भारत के बेहतरीन डिजाइनरों में से एक की साझेदारी में अपार संभावनाएं हैं। ट्राइफेड के साथ ट्राइब्स इंडिया के मुख्य डिजाइन सलाहकार के रूप में भागीदारी करके, सुश्री बेरी ने ट्राइब्स इंडिया को फैशन की दुनिया में अपने प्रदर्शन और अच्छी तरह से स्थापित विशेषज्ञता के साथ एक घरेलू नाम बनाने में मदद करेगी।
दुनिया भर में विभिन्न देशों के साथ काम करने के अपने अनुभव के कारण, सुश्री बेरी जानती हैं कि कैसे एक क्षेत्र की संस्कृति के अनुकूल होना और स्थानीय लोगों के दिलों को छूना है। उनके इस विशेष कौशल सेट ने उन्हें फैशन की उल्लेखनीय समझ के साथ जोड़ा, ट्राइब्स इंडिया को अगले स्तर तक ले जाएगा, जैसे कि पूरे भारत और दुनिया के लोग शानदार जनजातीय संस्कृति और कला रूपों के साथ अधिक जुड़े हुए महसूस करते हैं।
ट्राइफेड की पहल # ट्राइबल्स विद ट्राइब्स इंडिया अब सुश्री बेरी के तत्वावधान में पूरे देश और दुनिया में गूंज और गूंज पाएंगे।
सभा में बोलते हुए, सुश्री बेरी ने ट्राइब्स इंडिया के साथ मिलकर काम करने और 1,50,000 से अधिक आदिवासी कारीगरों द्वारा दस्तकारी किए गए विश्व स्तरीय उत्पादों के लिए एक वैश्विक पदचिह्न स्थापित करने के लिए उत्साह व्यक्त किया।  
श्रीमती। इसके बाद मीनाक्षी ललखी ने अपने रिटेल ब्रांड ट्राइब्स इंडिया के माध्यम से TRIFED की मार्केटिंग पहल को आगे बढ़ाते हुए सभा को संबोधित किया, साथ ही कई राष्ट्रीय जनजातीय उत्सवों 'AadiMahotsavs' की जबरदस्त सफलता की ओर इशारा किया - TRIFED पूरे देश में आयोजन करता है।
हाल ही में, TRIFED ने दिल्ली के वार्षिक AadiMahotsav का आयोजन 16 से 30 पखवाड़े के लिए DilliHaat में किया, जो देश के 24 राज्यों से आए 1,000 से अधिक आदिवासी कारीगरों और कलाकारों का जीवंत समूह था। इन मास्टर कारीगरों ने अपने कौशल और विश्वस्तरीय उत्पादों को एक स्टार-हिट दिल्ली के दर्शकों को दिखाया, जिन्होंने उन्हें रुपये की रिकॉर्ड राशि पर टिपिंग लेनदेन के साथ कारीगरों को पुरस्कृत किया। महज एक पखवाड़े में 20 करोड़।
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कृषि व्यवसाय और ग्रामीण उद्यमिता विकास


कृषि व्यवसाय और ग्रामीण उद्यमिता विकास
कई विकासशील देश और अर्थव्यवस्थाएं संक्रमण में, विशेष रूप से बड़े ग्रामीण समुदायों के साथ, भोजन की अपर्याप्त पहुंच और रोजगार की कमी से पीड़ित हैं। खराब उत्पादकता और धीमी आर्थिक वृद्धि के लिए पुरानी और अक्षम प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता के कारण समस्या का समाधान किया जाता है।

कृषि आधारित औद्योगिक उत्पाद विकासशील देशों के सभी निर्यातों में से आधे के लिए जिम्मेदार हैं, फिर भी उन निर्यातों में से केवल 30 प्रतिशत में विकसित दुनिया के 98 प्रतिशत के आंकड़े की तुलना में प्रसंस्कृत सामान शामिल हैं।

इस संदर्भ में, UNIDO का उद्देश्य कृषि-व्यवसाय और कृषि-मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से ग्रामीण गरीबों के लिए स्थायी, समावेशी व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देना है। इस संबंध में यूएनआईडीओ की तकनीकी सहयोग गतिविधियां इनपुट प्रदाताओं, किसानों, व्यापारियों, प्रोसेसर, लॉजिस्टिक प्रदाताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को जोड़ने वाले आर्थिक लेनदेन की श्रृंखला के विभिन्न बिंदुओं पर गैर-खाद्य क्षेत्रों सहित कृषि वस्तुओं को मूल्य जोड़ने पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

अपनी तकनीकी सहायता के माध्यम से, UNIDO संसाधनों और बाजारों को कृषि व्यवसाय मूल्य श्रृंखलाओं में जोड़ता है और देशों के आर्थिक परिवर्तन को बढ़ाने, रोजगार और आय के अवसरों में सुधार करने और स्थायी आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए आगे और पिछड़े औद्योगिक संपर्कों को मजबूत करता है।

कृषि-औद्योगिक गतिविधियों से कई समूहों को लाभ होता है, जिनमें गरीब और हाशिए पर मौजूद ग्रामीण आबादी, शहरी कृषि उद्योग और ऐसे समुदाय शामिल हैं जो मानव सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं या कृषि उपकरणों की तत्काल आपूर्ति और खाद्य उद्योगों के पुनर्वास की आवश्यकता है। खाद्य, चमड़ा, कपड़ा, लकड़ी और कृषि उपकरण क्षेत्रों में कृषि आधारित और कृषि से संबंधित व्यवसायों और उद्योगों के लिए तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

UNIDO कृषि व्यवसाय और मूल्य श्रृंखला विकास में निवेश को बढ़ावा देता है; रणनीतिक वित्तपोषण संस्थानों के साथ साझेदारी और संबंध बनाता है; संबंधित क्षेत्रों में विभिन्न वैश्विक मंचों और विशेषज्ञ समूह की बैठकों का आयोजन करता है; और विशेष प्रशिक्षण मैनुअल, गाइड और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रकाशित करता है।

इस क्षेत्र में अपने जनादेश को पूरा करने के लिए, UNIDO क्लस्टर विकास, गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप, ग्रामीण ऊर्जा, पर्यावरण प्रबंधन और क्लीनर उत्पादन जैसी विशेषज्ञ सेवाओं को जुटाता है।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...