Friday, June 7, 2024

बस्तीवासियों के लिए कानून लाने के मांग के साथ गैर कानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर शहरी विकास मन्त्री से भेंटकर हस्तक्षेप की मांग की

 



 *बस्तीवासियों के लिए कानून लाने के मांग के साथ गैर कानूनी ध्वस्तीकरण अभियान पर शहरी विकास मन्त्री से भेंटकर हस्तक्षेप की मांग की ।*

देहरादून 7 जून 024

आज देहरादून में हो रहा लोगों को बेघर करने का गैर कानूनी अभियान और बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए कानून लाने के मांग को लेकर आज शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल से राजनैतिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से सीपीआई(एम) , कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीटू चेतना आंदोलन और इंटक  के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने शहरी विकास मंत्री से निवेदन किया कि ध्वस्तीकरण अभियान कानून के अनुसार नहीं चल रहा है और जिस दंग से अनाधिकृत अधिकारियों द्वारा नाजायज और मनमानी तरीकों से कार्यवाही की जा रही है, उस पर तुरन्त रोक लगाया जाए। उन्होंने यह भी मांग उठाया कि 2018 का कानून के प्रावधानों के अनुसार सरकार को बस्तियों का नियमितीकरण और पुनर्वास करना था, लेकिन सरकार ने इस काम को किया नहीं, जिसकी वजह से ऐसी स्थिति बन गई। तो इसलिए तुरंत अध्यादेश लाने की जरूरत है ताकि बिना पुनर्वास कर किसी को बेघर न किया जाए। दोनों बिंदुओं पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि सकारात्मक कदम उठाया जाएगा और ध्वस्तिकरण अभियान पर कदम उठाया जायेगा ताकि अभियान कानून के अनुसार ही चले। 

  प्रतिनिधि मंडल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डाक्टर एस एन सचान, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह विष्ट, सीआईटीयू के प्रान्तीय सचिव लेखराज, सिपिआई देहरादून के  सचिव अनन्त आकाश, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल और इन्टक के जिला अध्यक्ष अनिल कुमार शामिल रहे। मन्त्री जी ने आश्वासन दिया कि वे  कानून एवं आधार को मद्देनजर रखते हुये प्रमुख सचिव शहरी आवास एवं विकास को कहेंगे ।

पिछले एक महीने से भी अधिक समय से बस्तियों के मुद्दे पर चेतना आन्दोलन , सीआईटीयू ,एटक ,इन्टक ,सीपी एम,सपा ,एस एफ आई ,महिला समिति ,महिला मंच ,आयूपी आदि संगठनों एवं राजनीतिक दल आन्दोलित हैं ।


 ज्ञापन जो मन्त्री जी को दिया :-


सेवा में

माननीय श्री प्रेंमचन्द अग्रवाल जी

शहरी विकास मन्त्री

उत्तराखंड सरकार


बिषय :- बस्तियों को उजाड़ने से रोकने तथा किसी को बेघर न किया जाये और सभी बस्तियों के नियमितीकरण या पुनर्वास के लिये सरकार तत्काल कानून लाये ।


मान्यवर ,

जन संगठनों एवं राजनीतिक दलों द्वारा उपरोक्त सन्दर्भ में पिछले काफी दिनों से आपसे समय देने का अनुरोध किया किन्तु समय न मिलने के कारण आज आपके निवास पर प्रभावितों की अति आवश्यक समस्याओं एवं बस्तियों के नियमतीकरण के लिये तत्काल कानून लाने के लिए प्रदर्शन के माध्यम से आपको ज्ञापन देना पड़ रहा है ताकि सरकार अपने वादे के अनुसार कार्यवाही कर सके ।


मान्यवर ,हाल में देहरादून में प्रशासन /नगरनिगम /एमडीडीए अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक ध्वस्तीकरण अभियान चला रहा है।  इस अभियान में कानून के प्रावधानों और संविधान के मूल्यों का घोर उल्लंघन हो रहा है। इस संदर्भ में हम आपके संज्ञान में कुछ बिंदुओं को लाना चाह रहे हैं :--

(1)  मज़दूरों को न कोई कोठी मिलने वाला है और न ही कोई फ्लैट। 2016 में ही बस्तियों का नियमितीकरण और पुनर्वास के लिए कानून बना था। 2022 तक हर परिवार को घर मिलेगा, यह प्रधानमंत्री जी का आश्वासन था, और 2021 तक सारे बस्तियों का नियमितीकरण या पुनर्वास होगा, यह उत्तराखंड सरकार का क़ानूनी वादा था।  दोनों पर बेहद कम काम हुआ है जिसकी वजह से यह स्थिति आज बनी है। तो इस स्थिति के लिए सरकार पूरी तरह से ज़िम्मेदार है।

(2) बड़ा जन आंदोलन होने के बाद 2018 में अध्यादेश ला कर सरकार ने अध्यादेश में ही धारा लिख दिया कि तीन साल के अंदर बस्तियों का नियमितीकरण या पुनर्वास होगा। वह कानून 2024 में खत्तम होने वाला है।  लेकिन आज तक किसी भी बस्ती में मालिकाना हक़ नहीं मिला है। वह कानून खत्म होने के बाद किसी भी बस्ती को उजाड़ा जा सकता है चाहे वे कभी भी बसे।

(3) बेदखली के लिए क़ानूनी प्रक्रिया है, लेकिन वर्त्तमान अभियान में कानून को ताक पर रख कर मनमानी तरीकों से अनाधिकृत रुप सेअधिकारी लोगों को बेदखल कर रहे हैं।  यह क़ानूनी अपराध है।

(4) देहरादून की नदियों एवं नालियों में होटल, रिसोर्ट, रेस्टोरेंट और अनेक अन्य निजी संस्थानों द्वारा और सरकारी विभागों द्वारा भी  अतिक्रमण हुए हैं।  हरित प्राधिकरण के आदेश में कोई ज़िक्र नहीं है कि कार्यवाही सिर्फ मज़दूर बस्तियों के खिलाफ करना है, लेकिन किसी भी अन्य अतिक्रमणकारी को नोटिस तक नहीं गया है।  इसलिए  यह अभियान न केवल गैर क़ानूनी है बल्कि भेदभावपूर्ण भी है।


सरकार की लापरवाही की वजह से लोग बेघर हो जाये, इससे ज्यादा कोई जन विरोधी नीति नहीं हो सकती है। लेकिन बार बार सरकार कोर्ट के आदेशों का बहाना बना कर लोगों को उजाड़ने की कोशिश कर रही है।  आपकी सरकार आने के बाद यह तीसरी बार हो रही है।


अतः इसलिए आपसे हमारा निवेदन है कि इस गैर क़ानूनी अभियान पर तुरंत रोक लगाया जाये और सरकार अध्यादेश द्वारा तत्काल कानून बना  दे कि बिना पुनर्वास किसी को बेघर नहीं किया जायेगा।  अपने ही वादों के अनुसार सरकार युद्धस्तर पर नियमितीकरण की प्रक्रिया को शुरू कर दे और सभी परिवारों एवं मज़दूरों के लिए किफायती घरों का व्यवस्था पर काम करे।


आशा है कि आप जनहित में उपरोक्त बिन्दुओं एवं मांगों पर प्रभावि कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे ।


हम आपके सदैव आभारी रहेंगे ।


         धन्यवाद सहित


जारीकर्ता


(अनन्त आकाश)

सचिव सीपीआई (एम)देहरादून

Wednesday, June 5, 2024

यूनेस्को तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर राष्ट्रीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया

 संयुक्त राष्ट्र शैक्षिकवैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय ने भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के सहयोग सेनई दिल्ली के ताज पैलेस होटल में सुरक्षितविश्वसनीय और नैतिक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय पर राष्ट्रीय हितधारक कार्यशाला आयोजित की।

भारत सरकार द्वारा हाल ही में इंडिया एआई मिशन को स्वीकृति प्रदान किए जाने के बाद यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित किया गया। इस मिशन के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैंजो भारत के आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यशाला ने राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीतियों और कार्यक्रमों में सुरक्षितविश्वसनीय और नैतिक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) विचारों को एकीकृत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण चर्चाओं के लिएयह सुनिश्चित करते हुए कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों का उपयोग सार्वजनिक कल्याण के साथ सम्मिलित होता है और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और मानकों का पालन करती हैएक मंच प्रदान किया।

इस कार्यशाला में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयोंराज्य सरकारोंनीति आयोग और नैसकॉम जैसे उद्योग भागीदारों के वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों ने भाग लियाजिससे दृष्टिकोणों का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ। सुरक्षित और विश्वसनीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की अवधारणाइसके नैतिक निहितार्थ और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों के सामाजिक प्रभाव पर व्यापक बातचीत पैनल चर्चाओं के माध्यम से की गईजिसमें भारत द्वारा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नैतिक कार्यान्वयन पर विस्तृत समूह सत्रों के साथ चर्चा की गई।

इस उद्घाटन सत्र में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूदइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री अभिषेक सिंहयूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक श्री टिम कर्टिस तथा सामाजिक और मानव विज्ञान के लिए यूनेस्को की सहायक महानिदेशक सुश्री गैब्रिएला रामोस जैसे प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस कार्यशाला में नैसकॉम की अध्यक्ष सुश्री देबजानी घोषवाधवानी सेंटर फॉर गवर्नमेंट डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रकाश कुमारयूनेस्को मुख्यालय में जैव नैतिकता और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नैतिकता अनुभाग के कार्यक्रम विशेषज्ञ श्री जेम्स राइटबैंकॉक में यूनेस्को क्षेत्रीय कार्यालय में संचार और सूचना के क्षेत्रीय सलाहकार श्री जो हिरोनकायूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय में शिक्षा के कार्यक्रम विशेषज्ञ श्री जियान शी टेंग और यूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यक्रम विशेषज्ञ सुश्री यूनसॉन्ग किम भी शामिल हुए।

अपने उद्घाटन भाषण मेंभारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा, "चूंकि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को लेकर नैतिकता और इसके सामाजिक निहितार्थों संबंधी चिंताएं हैइसलिए भारत का लक्ष्य आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना है। भारत ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के विकास और उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिए भारत आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मिशन सहित कई पहल शुरू की हैं। वैश्विक स्तर परयूनेस्को ने दुनिया भर में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता को बढ़ावा देने में एक सराहनीय भूमिका निभाई है और यूनेस्को के सदस्य देशों से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर यूनेस्को की सिफारिश का समर्थन प्राप्त करना एक उत्कृष्ट उदाहरण है।"

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री अभिषेक सिंह ने स्पष्ट करते हुए कहा, "जब नैतिकता शब्द के उपयोग की बात आती हैतो हम इसे एक सुरक्षित और विश्वसनीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के निर्माण के संदर्भ में परिभाषित करना पसंद करते हैंजिससे उपयोगकर्ता को कोई नुकसान नहीं होगाजिसके परिणामस्वरूप एक ऐसा ढांचा सुनिश्चित होगा जो नवाचार को प्रोत्साहन देगा और जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से संबंधित खतरों को सीमित करेगा।"

स्वास्थ्य सेवावित्तीय सेवाओं और दूरसंचार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति से प्रेरित होकरवर्ष 2025 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के लगभग 500 बिलियन डॉलर जुड़ने की संभावना है। इस दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिएइलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इंडियाएआई मिशन का नेतृत्व करने का दायित्व सौंपा गया है। यह मिशन अपने प्रमुख घटकोंजैसे इंडियाएआई कंप्यूट क्षमताइंडियाएआई इनोवेशन सेंटर (आईएआईसी)इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्मइंडियाएआई एप्लीकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिवइंडियाएआई फ्यूचरस्किल्सइंडियाएआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग और सुरक्षित व विश्वसनीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पूरे देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को और प्रोत्साहन देने के लिए तैयार है।

इस कार्यशाला के व्यापक एजेंडे में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी बातोंआर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नैतिक आयामआर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस नैतिकता में यूनेस्को की भूमिका और भारत में वर्तमान आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस नीति परिदृश्यआर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों और अवसरों के लिए सामूहिक रूप से समझ को बढ़ाना और तैयारी करने से जुड़े सत्र शामिल थे। इस कार्यशाला का उद्देश्य सूचित नीति विकास के लिए एक आधार स्थापित करना था जो देश भर में न्यायसंगत और टिकाऊ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस अपनाने को प्रोत्साहन देता है।

भारत में यूनेस्को के प्रतिनिधि और यूनेस्को दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक श्री टिम कर्टिस ने अपनी टिप्पणी में कहा, “आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस में सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में योगदान प्रदान करने की अपार क्षमता हैइससे नैतिक विकास और उपयोग सुनिश्चित करने वाले उचित ढांचे के बिना उपयोग होने पर महत्वपूर्ण नैतिक और व्यावहारिक खतरा भी पैदा हो सकता है। यूनेस्को का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस रणनीतियों व कार्यक्रमों में नैतिक विचारों को एकीकृत करने में भारत सरकार का समर्थन करना हैयह सुनिश्चित करना कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर यूनेस्को की सिफारिश में उल्लिखित अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों और मानकों के अनुरूप हो और उनका पालन करे।”

भारत में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस: नीति और व्यवहार पर चर्चा में एक पैनलिस्ट के रूप मेंनैसकॉम की अध्यक्षसुश्री देबजानी घोष ने कहा, "सबसे पहलेमनुष्यों को नैतिक मानकों का पालन करने की आवश्यकता हैऔर फिर उन सिद्धांतों को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस तक विस्तारित करना होगा। नैतिकता समानता और समावेश के बारे में हैहम एक सीमित प्रणाली को बर्दाश्त नहीं कर सकतेजहां केवल कुछ कंपनियां ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को नियंत्रित करती हैं।"

'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर सिफारिशको नवंबर 2021 में सभी 193 यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया था, यह मुख्य रूप से पारदर्शिता और निष्पक्षता जैसे बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है और साथ ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रणाली की निगरानी बनाए रखने में मानवीय देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करता है।

यूनेस्को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा हैताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वैश्विक अनुशंसा के प्रमुख मूल्यों और सिद्धांतों को डेटा प्रशासनपर्यावरण और इकोसिस्टमलैंगिकशिक्षा और अनुसंधानस्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण तथा कई अन्य क्षेत्रों के संबंध में ठोस नीतिगत कार्रवाई में परिवर्तित किया जा सके

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दूरसंचार विभाग ने उद्योग 4.0 परिवर्तन में एमएसएमई और स्टार्टअप का समर्थन करने के लिए पहल शुरू की

 दूरसंचार विभाग उद्योग की उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के माध्यम से संगठनों और स्टार्टअप की सहायता करने के उद्देश्य से एक नई पहल की योजना बना रहा है। इसने एमएसएमई के बीच "उद्योग 4.0 एक बेस लाइन सर्वेक्षण" के प्रस्ताव का आह्वान किया है जो डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने और 5जी और 6जी प्रौद्योगिकियों के आगमन के लिए उद्योगों को तैयार करने के व्यापक विजन के साथ संरेखित करता है।

पहल का अवलोकन

सर्वेक्षण का लक्ष्य उद्योग 4.0 को अपनाने तथा उन्नत तकनीकों का उपयोग करने में एमएसएमई के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना होगा। सर्वेक्षण का उद्देश्य एआई, आईओटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और 5जी और 6जी नेटवर्क के एकीकरण द्वारा प्रदान की जाने वाली क्षमताओं का लाभ उठाने में सक्षम एक मजबूत इको-सिस्टम के लिए आधार तैयार करना है। इसमें कम से कम 10 क्षेत्रों में सेक्टर-विशिष्ट आवश्यकताओं की पहचान करना और प्राथमिकताएं शामिल होंगी, जिसमें एमएसएमई के विविध परिदृश्य को चिन्हित करना तथा नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए लक्षित समर्थन प्रदान करना है।

सर्वेक्षण 60 दिनों की अवधि में भारत के उत्तर और दक्षिणी हिस्सों में प्रत्येक में पांच क्षेत्रों को कवर करेगा। प्रमुख सिफारिशें उद्योग 4.0 के परिवर्तनकारी अनुकूलता को प्राप्त करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप के लिए मंच तैयार करेंगीजिससे एमएसएमई की प्रतिस्पर्धी स्थिति और उत्तरजीविता में वृद्धि होगी।

कार्रवाई का आह्वान

संगठनों और स्टार्टअप्स को इस परिवर्तनकारी सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए 11 जून, 2024 तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। प्रस्ताव प्रस्तुत करने के दिशा-निर्देशों और अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जा सकता है।

https://tcoe.in/include/Call_of_Proposal_Baseline_Survey_of_MSMEs.pdf

विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में पीपल का पौधा लगाया और #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान शुरू किया

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बुद्ध जयंती पार्क, नई दिल्ली में पीपल का पौधा लगाकर #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान की शुरुआत की।

धरती माता द्वारा प्रकृति के पोषण और हमारी माताओं द्वारा मानव जीवन के पोषण के बीच समानता दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के लोगों से अपनी माँ के प्रति प्रेम, आदर और सम्मान के प्रतीक के रूप में एक पौधा लगाने और पेड़ों तथा धरती माता की रक्षा करने का संकल्प लेने का अनुरोध किया।

केंद्र और राज्य सरकार के विभाग तथा स्थानीय निकाय भी #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान में सहायता करने के लिए सार्वजनिक स्थानों की पहचान करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस 2024 की थीम का मुख्य हिस्सा वृक्षारोपण है और अन्‍य हिस्‍से हैं भूक्षरण की रोकथाम, सूखे से निपटने की क्षमता विकसित करना और रेगिस्तानीकरण को रोकना। #एक_पेड़_माँ_के_नाम #Plant4Mother अभियान के अलावा, सितंबर तक 80 करोड़ और मार्च, 2025 तक 140 करोड़ पौधे लगाने की योजना बनाई गई है, जिसका अनुपालन सम्पूर्ण सरकार और सम्पूर्ण समाज वाले दृष्टिकोण के अनुरूप किया जाएगा। ये पौधे पूरे देश में व्यक्तियों, संस्थाओं, समुदाय आधारित संगठनों, केंद्र और राज्य सरकार के विभागों तथा स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाएंगे।

भारत सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग ने #एक_पेड़_माँ_के_नाम के संदेश को आगे बढ़ाने और प्रोत्‍साहित करने के लिए 7.5 लाख स्कूलों में इको-क्लबों को प्रेरित किया है। स्कूलों में समर कैंप इस थीम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इसे अनुभवात्मक शिक्षण के साथ जोड़ रहे हैं, जो नई शिक्षा नीति का एक मूल सिद्धांत है। पेड़ लगाने का बड़ा महत्व जो मनुष्य और वास्तव में इस धरती के सभी जीवधारियों का पोषण करता है। पेड़, माँ और धरती माँ के बीच अंतर-संबंध है जिस पर विशेष रूप से Plant4Mother के विचार के माध्यम से जोर दिया जाएगा। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सभी पर्यावरण जागरूकता, क्षमता निर्माण और आजीविका कार्यक्रम (ईआईएसीपी) केंद्र के साथ-साथ इसके संस्थान जैसे बीएसआई, ज़ेडएसआई, आईसीएफआरई, एनएमएनएम भी वृक्षारोपण के बारे में जागरूकता बढ़ाएंगे और #एक_पेड़_माँ_के_नाम की अम्‍बरेला थीम के तहत वृक्षारोपण प्रयासों को शुरू करने में सक्रिय रूप से शामिल होंगे। अन्य मंत्रालय और विभाग भी #एक_पेड़_माँ_के_नाम की थीम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। युवा कार्यक्रम मंत्रालय के ‘माई भारत’ कार्यक्रम के माध्यम से भी युवाओं में जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी इस संदेश को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया है और अन्य देशों के नागरिकों से #Plant4Mother के मूल सिद्धांत के साथ इस विशाल वृक्षारोपण अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है।

इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री और दिल्ली के उपराज्यपाल भी उपस्थित थे।

Sunday, March 10, 2024

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने राजकीय परिवहन निगम कोटद्वार के बस अड्डे के पुनरोद्धार कार्यक्रम में भूमि पूजन कर शिलान्यास किया।

 


 *10 मार्च 2024 कोटद्वार* 

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण  ने राजकीय परिवहन  निगम कोटद्वार के बस अड्डे के पुनरोद्धार कार्यक्रम में भूमि पूजन कर शिलान्यास किया। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया ‘हमारा संकल्प विकसित भारत“  के अंतर्गत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा में कोटद्वार को एक बड़ी सौगात मिली है। 


विधानसभा अध्यक्ष ने बताया की 9 करोड़ 99 लाख 47 हजार की मदद से कोटद्वार बस अड्डे का पुनरोद्धार किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने सभी क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा की, हम सबकी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी चीजों को संभाल कर रखें।


विधानसभा अध्यक्ष ने बताया आज के इस लोकार्पण कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा वर्चुअल माध्यम से पूरे प्रदेश में विभिन्न जगहों पर कई बस अड्डो का जीर्णोद्धार किया गया ।


इस अवसर पर एआरएम राकेश सिंह , नगर अध्यक्ष पंकज भाटिया ,कालागढ़ अध्यक्ष मीनाक्षी चौधरी , नीना बैंजवाल , राकेश मित्तल , सुनील गोयल , राज गौरव , सोनिया अस्वाल, संजीव थपलियाल , बबलू नेगी आदि लोग उपस्थित रहे।

आरएनआई का नाम बदलकर अब पीआरजीआई- प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया हुआ

 सूचना और प्रसारण मंत्रालय


*✍️ समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का पंजीकरण अब प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगा* 


*◆ 

*◆ प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण ( पीआरपी ) पपुराना पीआरबी अधिनियम, 1867 निरस्त कर दिया गया है*


*◆ प्रेस और पत्रिकाओं का पंजीकरण (पीआरपी) अधिनियम, 2023 और इसके नियमों को अपने राजपत्र में अधिसूचित कर दिया है और इसके परिणामस्वरूप यह अधिनियम 1 मार्च, 2024 से लागू हो गया* 

 *सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला कॉल रिकॉर्डिंग अब नहीं माना जाएगा साक्ष्य*

*इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा की यदि अगर किसी की इजाजत के बिना मोबाइल या फोन कॉल रिकॉर्ड की जाती है तो वह आईटी एक्ट-2000 की धारा 72 का होगा उल्लंघन*

Saturday, March 9, 2024

देश मे जल्द लागू हो पत्रकार सुरक्षा कानून

 पत्रकारों का हित किसी भी राजनीतिक पार्टी के एजेंडे में नहीं


* वर्चुअल मीटिंग में यूपी,बिहार,झारखंड,मध्यप्रदेश,पंजाब सहित कई राज्यों से पत्रकारो ने रखे विचार 

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जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इंडिया की राष्ट्रीय स्तर की एक मैराथन वर्चुअल मीटिंग राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. अनुराग सक्सेना की अध्यक्षता में की गई इस बैठक में पत्रकार हितों को लेकर जहां चिंता व्यक्त की गई वहीं पत्रकारों में इस बात को लेकर आक्रोश दिखा कि पक्ष या विपक्ष किसी भी राजनैतिक पार्टी को पत्रकार हितों की चिंता नहीं है जबकि किसी भी राजनैतिक पार्टी को अर्श से फर्श और फर्श से अर्श तक पहुंचाने में पत्रकारों की माहिती भूमिका होती है पत्रकार इस बात को लेकर भी चिंतित दिखे कि हर मोर्चे पर बेहतर कार्य करने वाले हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री पत्रकार हितों की बात क्यों नहीं करते।

ढाई घंटे से भी ज्यादा देर तक चली इस मैराथन बैठक में संगठन के राष्ट्रीय, प्रादेशिक एवं स्थानीय पत्रकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने बेबाक विचार व्यक्त किये। इस क्रम में अपना मत रखते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज पत्रकारों के ऊपर बेवजह हमले हो रहे हैं उन्हें बिना किसी कारण के प्रताड़ित किया जा रहा है आज पत्रकार स्वतंत्र होकर अपना कार्य नहीं कर पा रहा है आज जब सब कुछ डिजिटल हो रहा है तब ई पेपर को मान्यता न देना कहां तक नीति संगत है। देश में पत्रकार अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है परंतु सरकार द्वारा उसके लिए पत्रकार सुरक्षा कानून न पारित करना पत्रकारों के प्रति सरकार के मंसूबों को दर्शाता है।

इसी क्रम में संस्था के राष्ट्रीय संयोजक डाॅ. आर सी श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को पत्रकारों के हित की रक्षा के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून अभिलंब लागू करना चाहिए।

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ पदाधिकारी कुणाल भगत ने कहा कि बिहार में भी पत्रकारों को बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है और मुकदमे लिखा जा रहे हैं।

राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं वरिष्ठ पत्रकार अशोक झा ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून पर सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि पत्रकार सुरक्षा की भावना से कार्य कर सके।

इसी प्रकार से करीब आधा सैकड़ा से ज्यादा लोगों ने पत्रकार हित एवं पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर अपने विचार व्यक्त किया और सरकार से मांग की की पत्रकार जो अपने अस्तित्व और वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं उनके साथ न्याय किया जाए ताकि वह निर्भीक होकर अपना कार्य कर सकें।

विचार व्यक्त करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ पदाधिकारी डाॅ. विवेक पाठक, अशोक झा, निखिल कद वर्मा, संजय, कुणाल भगत, हरिशंकर पाराशर,कोसांग पटनायक, नागेंद्र पांडे, विजय कुमार, शशि कुमार ,सुमन, रामानंद ,राघवेंद्र त्रिपाठी, संजय कुमार, राजेश कुमार, एसपी चौधरी ,आशीष कुमार प्रमाणिक, अंशिका ओझा, निर्मित कुमार, राजीव रंजन, जितेंद्र पाठक ,दिया नंदिनी ,विक्रांत, राज लूनिया, राजेश पांडे ,संजय कुमार सिंह, अब्दुल बासित ,विवेक पटनायक, बी त्रिपाठी, राजा अवस्थी आदि पत्रकार साथी मौजूद रहे। जिनका कहना था कि यदि सरकार पत्रकारों की मांगे नहीं मानती है और पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं लागू करती है तो संगठन पूरे दम खम के साथ पत्रकारों की लड़ाई लड़ेगा।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...