Saturday, September 28, 2024

**पेच और पेचकस की दोस्ती की कहानी**



बहुत समय पहले की बात है, औज़ारों की दुनिया में एक छोटे से पेच और पेचकस की दोस्ती हो गई। दोनों में गहरा प्यार और समझ थी, और वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।


पेच अपने आप को बहुत अकेला महसूस करता था, क्योंकि वह जानता था कि जब तक उसे कोई कसने वाला नहीं मिलेगा, वह किसी काम का नहीं रहेगा। वह सोचता, "मैं तो सिर्फ एक छोटा सा धातु का टुकड़ा हूँ, मैं क्या कर सकता हूँ?" उसकी सारी ताकत छुपी हुई थी, उसे बस एक साथी की जरूरत थी जो उसकी ताकत को प्रकट कर सके।


दूसरी ओर, पेचकस भी यही महसूस करता था। वह बहुत सीधा और पतला था, और सोचता था कि "मैं तो बस एक साधारण सा औज़ार हूँ। मैं किसी की मदद के बिना अकेला कुछ नहीं कर सकता।"


एक दिन, एक लकड़ी का कुर्सी बन रहा था और कुर्सी को मज़बूत करने के लिए कुछ पेच लगाने की जरूरत थी। उसी समय पेच और पेचकस दोनों को बुलाया गया। पहले पेच कुर्सी में लगा दिया गया, लेकिन वह ढीला था और कुर्सी ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी। फिर पेचकस को बुलाया गया। पेचकस ने पेच की ओर देखा और मुस्कुराया, "तुम्हें कसने की जरूरत है दोस्त, और यह काम सिर्फ मैं कर सकता हूँ।"


पेचकस ने धीरे-धीरे और ध्यान से पेच को घुमाया, और पेच कुर्सी में मजबूती से कस गया। दोनों ने मिलकर कुर्सी को इतनी मजबूती दी कि अब वह बिना हिलाए-डुलाए खड़ी हो गई। दोनों ने समझा कि वे एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।


इसके बाद से पेच और पेचकस की दोस्ती और भी गहरी हो गई। वे हमेशा साथ काम करते, जहां भी किसी चीज़ को कसने की जरूरत होती, वे दोनों वहां पहुंच जाते। उनकी यह दोस्ती दूसरों के लिए एक उदाहरण बन गई।


कहानी का संदेश यह है कि किसी भी सफल रिश्ते में आपसी सहयोग, समझ और सामंजस्य की जरूरत होती है। पेच और पेचकस की तरह, हर इंसान की अपनी ताकत होती है, लेकिन असली ताकत तब प्रकट होती है जब हम सही समय पर सही साथी के साथ काम करें।

पेच और पेचकस का मानवीय रिश्ता और खतरनाक परिणाम

 पेच और पेचकस का मानवीय रिश्ता एक प्रतीकात्मक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। पेच और पेचकस दो उपकरण हैं, जिनका उपयोग एक साथ किसी चीज़ को कसने, जोड़ने या मजबूती से बांधने के लिए किया जाता है। यह रिश्ते और मानवीय संबंधों के संदर्भ में प्रतीकात्मक हो सकता है।


**पेच और पेचकस का मानवीय रिश्ता**:


1. **सहयोग और समर्थन**: पेच और पेचकस बिना एक-दूसरे के अधूरे हैं। एक पेच तब तक कस नहीं सकता जब तक पेचकस उसे सहारा नहीं देता। यह मनुष्यों के बीच आपसी समर्थन और सहयोग की भावना को दर्शाता है। जिस तरह पेच और पेचकस एक साथ मिलकर काम करते हैं, वैसे ही मनुष्य एक-दूसरे के समर्थन और सहयोग से अपनी समस्याओं को हल कर सकते हैं।


2. **समझ और सामंजस्य**: जिस तरह से पेचकस को पेच में सही तरीके से लगाना पड़ता है, वैसे ही रिश्तों में भी सही समझ और सामंजस्य की ज़रूरत होती है। अगर पेचकस गलत दिशा में घुमा दिया जाए, तो पेच टूट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे एक रिश्ते में गलतफहमी या संवाद की कमी रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है।


3. **दबाव और तनाव**: जब पेचकस को जरूरत से ज्यादा कस दिया जाता है, तो पेच टूट सकता है। यह दर्शाता है कि जीवन में जरूरत से ज्यादा दबाव, तनाव या जबरदस्ती रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। अत्यधिक नियंत्रण या कठोरता से इंसान के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।


**खतरनाक परिणाम**:


1. **रिश्तों में दरार**: अगर पेच और पेचकस को ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया तो पेच टूट जाता है। इसी तरह, अगर रिश्तों में संवाद, समझ और सहानुभूति की कमी होती है, तो रिश्ते कमजोर हो सकते हैं और टूटने की स्थिति में आ सकते हैं।


2. **तनाव और टूट-फूट**: पेचकस का अत्यधिक या अनुचित प्रयोग पेच को नष्ट कर सकता है। इसी तरह, जीवन में अत्यधिक तनाव या नियंत्रण से व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट सकता है। ज़्यादा दबाव रिश्तों में दरार ला सकता है।


3. **स्वास्थ्य पर असर**: मानसिक और भावनात्मक तनाव का सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। अनियंत्रित तनाव, चिंता और निरंतर दबाव गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जैसे अवसाद, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप आदि।


यह प्रतीकात्मक दृष्टिकोण हमें यह सिखाता है कि रिश्तों को सही तरीके से संभालना चाहिए, उन्हें मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए धैर्य, सामंजस्य और सही दिशा में प्रयासों की जरूरत होती है।

जैविक खेती की अग्रणी और प्रेरणास्रोत श्रीमती पप्पाम्मलके निधन का समाचार

जैविक खेती की अग्रणी और प्रेरणास्रोत श्रीमती पप्पाम्मल के निधन का समाचार उनके क्षेत्र और जैविक खेती से जुड़े लोगों के लिए एक गहरा आघात है। पप्पाम्मल एक 105 वर्षीय किसान थीं, जिन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा दिया और अपने जीवनभर कृषि के प्रति समर्पित रहीं। उन्हें भारत सरकार ने उनके योगदान के लिए 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।


पप्पाम्मल ने खेती में आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक तरीकों को जोड़ा और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान न केवल खेती के क्षेत्र में था, बल्कि उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें कृषि कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित किया।

Friday, September 27, 2024

पर्यटन मंत्रालय आज विश्व पर्यटन दिवस मनाएगा, इस साल की थीम है ‘पर्यटन और शांति’


Chaआज पर्यटन मंत्रालय विश्व पर्यटन दिवस मना रहा है, और इस साल की थीम है 'पर्यटन और शांति'

'पर्यटन और शांति' विषय के तहत, इस साल पर्यटन की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि कैसे यह लोगों को करीब लाने, तनाव को कम करने और विश्व शांति में योगदान देने में सहायक हो सकता है।

आप इस थीम को और किस दिशा में देखना चाहेंगे?

Monday, September 23, 2024

पत्रकार सुरक्षा कानून और सरकार का दायित्व

 भारत में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई विशेष राष्ट्रीय कानून अभी तक लागू नहीं किया गया है, लेकिन इस दिशा में कई पहल और सुझाव दिए गए हैं। पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कई बार मांगें उठी हैं, खासकर तब जब वे सरकार या आपराधिक संगठनों की आलोचना करते हुए खतरे में पड़ जाते हैं। हालांकि, कुछ कानूनी प्रावधान और राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदम इस मुद्दे को संबोधित करते हैं।


### **पत्रकार सुरक्षा के लिए संभावित कानून**:

1. **महाराष्ट्र का पत्रकार सुरक्षा अधिनियम**:  

   महाराष्ट्र पहला राज्य है जिसने 2017 में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की दिशा में पहल की। इस अधिनियम के तहत पत्रकारों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा करने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान है। यह कानून पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें न्याय दिलाने का काम करता है।


2. **राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार सुरक्षा अधिनियम की मांग**:  

   कई पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से केंद्र सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग की है। यह कानून उन पत्रकारों की सुरक्षा करेगा जो अपने कार्य के कारण धमकियों, हमलों, और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। कई बार पत्रकारों पर हमले होते हैं क्योंकि वे भ्रष्टाचार, अवैध गतिविधियों, या राजनीति से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं।


### **भारत सरकार का दायित्व**:

1. **संवैधानिक दायित्व**:  

   भारतीय संविधान का **अनुच्छेद 19(1)(a)** अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जो पत्रकारों को स्वतंत्रता से काम करने का अधिकार भी सुनिश्चित करता है। सरकार का दायित्व है कि वह इस स्वतंत्रता की रक्षा करे और प्रेस की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह का अवरोध न लगे।


2. **अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा**:  

   सरकार की जिम्मेदारी है कि पत्रकारों को एक सुरक्षित वातावरण में काम करने की सुविधा मिले। इसके लिए उन्हें पुलिस सुरक्षा या सरकारी सहायता प्रदान की जानी चाहिए, खासकर उन पत्रकारों को जो संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग करते हैं और धमकियों का सामना करते हैं।


3. **दुर्व्यवहार और हिंसा के खिलाफ कार्रवाई**:  

   सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा, धमकी, या किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए। इसके लिए पुलिस और न्यायिक तंत्र को संवेदनशील और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।


4. **रिपोर्टिंग की स्वतंत्रता का सम्मान**:  

   सरकार का यह कर्तव्य है कि वह पत्रकारों की रिपोर्टिंग को निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाए रखे। इसमें सरकारी संस्थाओं से स्वतंत्रता, साक्षात्कार या सूचना प्राप्त करने का अधिकार सुनिश्चित करना शामिल है।


### **संभावित सुधार और मांगें**:

- **नए कानूनों की आवश्यकता**:  

   पत्रकार सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कानून की जरूरत है, ताकि पत्रकारों को उनकी पेशेवर जिम्मेदारियों के दौरान सुरक्षा प्राप्त हो सके।

  

- **रिपोर्टिंग की पारदर्शिता और सहयोग**:  

   सरकार को सूचना का अधिकार (RTI) जैसे कानूनों के उचित क्रियान्वयन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना चाहिए ताकि पत्रकारों को समय पर सही जानकारी मिल सके।


### **निष्कर्ष**:  

पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कई चुनौतियाँ हैं, और सरकार का कर्तव्य है कि वह न केवल संवैधानिक रूप से उनकी स्वतंत्रता की रक्षा करे, बल्कि एक ऐसे कानून को लागू करे जो पत्रकारों को विशेष सुरक्षा प्रदान करे।

**मीडिया** और **प्रेस** दोनों शब्द सूचना और समाचार प्रसारण से जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर है।



### **मीडिया**:

- **व्यापक संचार माध्यम**:  

  मीडिया एक बहुत व्यापक शब्द है, जिसमें सभी प्रकार के संचार माध्यम शामिल होते हैं, जैसे कि **टीवी, रेडियो, इंटरनेट, सोशल मीडिया, अखबार, पत्रिकाएं**, आदि। मीडिया का कार्य जानकारी, मनोरंजन, और शिक्षात्मक सामग्री प्रदान करना होता है।

  

- **विभिन्न प्रकार के मंच**:  

  मीडिया विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से काम करता है। इसमें डिजिटल मीडिया, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, और सोशल मीडिया शामिल होते हैं। मीडिया का काम सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं है; यह मनोरंजन, विज्ञापन, और अन्य प्रकार की सूचनाएं भी लोगों तक पहुंचाता है।


- **विविध कार्यक्षेत्र**:  

  मीडिया का दायरा बहुत बड़ा होता है, जिसमें **फिल्में, टीवी शो, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर** आदि भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य लोगों को सूचनाओं के साथ-साथ मनोरंजन, शिक्षा, और अन्य प्रकार की सामग्री प्रदान करना है।


### **प्रेस**:

- **खबरों का स्रोत**:  

  प्रेस का मतलब विशेष रूप से उन माध्यमों से है, जो **समाचारों** का प्रसारण करते हैं। यह आमतौर पर प्रिंट माध्यम जैसे **अखबारों और पत्रिकाओं** के संदर्भ में इस्तेमाल होता है, हालांकि अब इलेक्ट्रॉनिक प्रेस (टीवी न्यूज चैनल) और डिजिटल प्रेस (ऑनलाइन न्यूज पोर्टल्स) भी इसका हिस्सा बन गए हैं।

  

- **मुख्य उद्देश्य**:  

  प्रेस का मुख्य उद्देश्य **समाचारों और सूचनाओं** को लोगों तक पहुंचाना होता है। यह सरकार, समाज, और अन्य संस्थाओं की गतिविधियों को कवर करता है और जनता को सटीक जानकारी प्रदान करता है।


- **प्रेस की स्वतंत्रता**:  

  प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है। इसका काम जनता के हित में रिपोर्टिंग करना और सरकार या अन्य शक्तियों को जवाबदेह बनाना है। प्रेस का कार्य पत्रकारिता के मानकों और नैतिकता पर आधारित होता है।


### **मुख्य अंतर**:

1. **प्रभाव और कार्यक्षेत्र**:  

   मीडिया का दायरा व्यापक है और यह सूचनाओं के साथ-साथ मनोरंजन, विज्ञापन, और अन्य सामग्री भी प्रसारित करता है। दूसरी ओर, प्रेस मुख्य रूप से समाचार और सूचनाओं तक सीमित है।


2. **माध्यमों का प्रकार**:  

   प्रेस प्रिंट, टीवी, और ऑनलाइन न्यूज मीडिया के तहत आता है, जबकि मीडिया में रेडियो, फिल्में, सोशल मीडिया, और डिजिटल प्लेटफार्मों सहित कई अन्य चैनल भी शामिल होते हैं।


3. **स्वतंत्रता और नैतिकता**:  

   प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे संविधान द्वारा संरक्षित किया जाता है, जबकि मीडिया में समाचारों के साथ-साथ अन्य व्यावसायिक और मनोरंजक सामग्री भी शामिल होती है।


**निष्कर्ष**:  

मीडिया एक व्यापक संचार माध्यम है, जिसमें प्रेस भी शामिल है। प्रेस विशेष रूप से समाचार और सूचनाओं का प्रसार करने पर केंद्रित है, जबकि मीडिया संपूर्ण संचार और मनोरंजन उद्योग को शामिल करता है।

अंधविश्वास उन्मूलन समिति और श्याम मानव

 श्याम मानव एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो अंधविश्वास उन्मूलन समिति के संस्थापक और प्रमुख के रूप में जाने जाते हैं। उनका मिशन भारत में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और अंधविश्वास तथा झूठी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ लोगों को जागरूक करना है। श्याम मानव का आंदोलन मुख्य रूप से महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है, जहां वे अंधविश्वास और कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का कार्य कर रहे हैं।

अंधविश्वास उन्मूलन समिति के उद्देश्य:

  1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार:
    समिति का उद्देश्य समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और तर्कसंगत दृष्टिकोण को स्थापित करना है।

  2. अंधविश्वासों के खिलाफ अभियान:
    यह समिति ऐसे अंधविश्वासों और कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाती है, जो लोगों को भ्रमित कर आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार बनाते हैं। इनमें तांत्रिक क्रियाएं, जादू-टोना, और अन्य कुप्रथाएं शामिल हैं।

  3. नकली बाबाओं और ढोंगी धार्मिक नेताओं का पर्दाफाश:
    श्याम मानव और उनकी समिति ने कई नकली बाबाओं और ढोंगी धार्मिक नेताओं को उजागर किया है, जो जनता को अंधविश्वास के आधार पर धोखा देते हैं।

  4. कानूनी पहल:
    अंधविश्वास और धोखाधड़ी के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए श्याम मानव और उनकी समिति ने कई अभियानों का नेतृत्व किया। महाराष्ट्र में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून लाने में उनका अहम योगदान रहा है, जो अंधविश्वास के खिलाफ कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

प्रमुख गतिविधियां:

  • साक्षात्कार और लेक्चर:
    श्याम मानव विभिन्न सार्वजनिक मंचों, साक्षात्कारों, और शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जहां वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता बढ़ाते हैं।

  • नकली धार्मिक चमत्कारों का पर्दाफाश:
    उन्होंने कई बार मंचों पर धार्मिक चमत्कारों और जादू-टोना के दावों को तर्कसंगत ढंग से खारिज किया है, यह दिखाते हुए कि वे केवल चालबाजी और भ्रम पर आधारित हैं।

निष्कर्ष:

श्याम मानव की अंधविश्वास उन्मूलन समिति का काम भारत में तर्कसंगतता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है, खासकर उन अंधविश्वासों और कुरीतियों के खिलाफ जो समाज में जड़ें जमा चुके हैं। उनका आंदोलन सामाजिक सुधार के लिए महत्वपूर्ण है, और उन्होंने कई सामाजिक कुप्रथाओं को उजागर करके उन्हें चुनौती दी है।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...