Monday, September 30, 2024

वृद्धावस्था को क्या दिव्यांगता में नहीं लाया जा सकता है ?

 वृद्धावस्था को अपने आप में दिव्यांगता नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें अक्सर शारीरिक, मानसिक और संवेदी क्षमताओं में कमी आ सकती है। इस उम्र में लोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं, जैसे चलने-फिरने में कठिनाई, सुनने और देखने में कमी, या मानसिक क्षमताओं में गिरावट। हालाँकि, सभी वृद्ध लोग दिव्यांग नहीं होते, लेकिन उम्र के साथ शारीरिक चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं, जिससे उन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता हो सकती है।


दिव्यांगता का मतलब किसी व्यक्ति की शारीरिक या मानसिक क्षमता में दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण कमी होती है। अगर वृद्ध व्यक्ति में कोई विशेष क्षमता की कमी होती है, जैसे चलने, सुनने या देखने की, तो उसे दिव्यांगता के अंतर्गत रखा जा सकता है। 


सरकार द्वारा भी वृद्धावस्था और दिव्यांगता को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है और दोनों के लिए अलग-अलग योजनाएँ बनाई जाती हैं।

Sunday, September 29, 2024

पेचकस (screwdriver) बदलने से परिणाम में बदलाव की संभावना

 पेचकस (screwdriver) बदलने से परिणाम में बदलाव की संभावना इसलिए होती है क्योंकि विभिन्न पेचकसों की डिज़ाइन, आकार और उपयोग करने का तरीका अलग होता है। उदाहरण के लिए:


1. **प्रकार का अंतर**: फ़िलिप्स और स्लॉटेड स्क्रू के लिए अलग-अलग पेचकस होते हैं। गलत पेचकस का उपयोग करने से स्क्रू सही तरीके से कसने या ढीला करने में समस्या हो सकती है।

   

2. **आकार**: अगर पेचकस का सिरा स्क्रू के सिर के आकार से मेल नहीं खाता है, तो यह स्क्रू को नुकसान पहुंचा सकता है या कसने-खोलने में मुश्किल पैदा कर सकता है।


3. **गुणवत्ता और सामग्री**: पेचकस की गुणवत्ता भी परिणाम को प्रभावित कर सकती है। सस्ते या कमजोर पेचकस से काम सही तरीके से नहीं हो पाता।


इसलिए, सही परिणाम प्राप्त करने के लिए स्क्रू के अनुसार सही प्रकार और आकार का पेचकस चुनना ज़रूरी है।

भलाई में पत्थर पड़ना एक कहानी की माध्यम से

 "भलाई में पत्थर पड़ना" एक कहावत है, जो अक्सर उस स्थिति को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है जब कोई अच्छा काम करने की कोशिश करता है, लेकिन बदले में उसे कठिनाई या अपमान झेलना पड़ता है। इसे एक कहानी के माध्यम से समझाया जा सकता है:


**कहानी: दयालु किसान और भिखारी**


एक बार की बात है, एक छोटे से गांव में एक दयालु किसान रहता था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। एक दिन, किसान अपनी खेत से घर लौट रहा था, तभी उसने रास्ते में एक भिखारी को देखा, जो भूखा और थका हुआ था। भिखारी ने किसान से मदद की गुहार लगाई। किसान ने दया दिखाई और उसे अपने घर ले जाकर खाना खिलाया और आराम करने की जगह दी।


कई दिनों तक किसान ने भिखारी की पूरी देखभाल की। धीरे-धीरे भिखारी ने अपनी ताकत वापस पा ली और स्वस्थ हो गया। किसान ने सोचा कि अब भिखारी अपने रास्ते जाएगा, लेकिन भिखारी ने और दिन रुकने का आग्रह किया। किसान ने फिर से उसे अपने घर में ठहरने दिया।


काफी दिनों बाद, एक दिन जब किसान अपने खेत में काम कर रहा था, तो भिखारी ने किसान के घर में चोरी करने की योजना बनाई। जब किसान खेत से वापस आया, तो उसने देखा कि उसका सारा कीमती सामान गायब है और भिखारी भी कहीं नहीं दिख रहा था। किसान को बहुत दुख हुआ कि जिस व्यक्ति की उसने मदद की, उसी ने उसे धोखा दिया।


इस घटना से किसान को यह समझ में आया कि हमेशा भलाई का परिणाम अच्छा नहीं होता, कई बार लोग आपकी दया का गलत फायदा उठाते हैं। 


**शिक्षा**:

इस कहानी से यह सिखने को मिलता है कि कभी-कभी अच्छे कामों का बदला भी बुरा मिल सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हमें दूसरों की मदद करना बंद कर देना चाहिए। हर इंसान एक जैसा नहीं होता। 


यह कहानी "भलाई में पत्थर पड़ना" कहावत को सही रूप से दर्शाती है।

Saturday, September 28, 2024

सामाजिक कार्यकर्ता कैंसे संघठनों में परिवर्तन कैंसे ला सकता है

 सामाजिक कार्यकर्ता संगठनों में परिवर्तन लाने के लिए कई रणनीतियों और तरीकों का उपयोग कर सकते हैं। ये प्रयास संगठन के आंतरिक ढांचे, कार्यप्रणाली, मिशन और सामाजिक प्रभाव को बेहतर बनाने पर केंद्रित होते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख तरीके दिए गए हैं जिनसे सामाजिक कार्यकर्ता संगठन में परिवर्तन ला सकते हैं:

1. संगठन की संरचना और नेतृत्व में सुधार

  • नेतृत्व में बदलाव: सामाजिक कार्यकर्ता संगठन में नेतृत्व के स्तर पर सुधार करने का प्रयास कर सकते हैं, जिससे अधिक जवाबदेही, पारदर्शिता और समावेशिता को बढ़ावा दिया जा सके।
  • टीम विकास: टीम के सदस्यों के कौशल और क्षमताओं का विकास करके संगठन की दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। प्रशिक्षण और कार्यशालाएं इस दिशा में सहायक हो सकती हैं।
  • विविधता और समावेशन: सामाजिक कार्यकर्ता संगठन में विविधता को बढ़ावा देने का काम कर सकते हैं, जिससे विभिन्न पृष्ठभूमियों और अनुभवों वाले लोग निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

2. संवाद और जागरूकता फैलाना

  • सदस्यों और समुदाय के बीच संवाद: संगठनों में बदलाव लाने के लिए संवाद आवश्यक है। सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के सदस्यों के साथ मिलकर संगठन के उद्देश्यों और प्रक्रियाओं पर चर्चा कर सकते हैं।
  • सामुदायिक जागरूकता: समुदाय को संगठनों के उद्देश्यों और योजनाओं के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। सामाजिक कार्यकर्ता जनसमूह तक पहुँचकर उन्हें संगठन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

3. संगठन के मिशन और उद्देश्य को फिर से परिभाषित करना

  • स्पष्ट विजन और मिशन: संगठन का स्पष्ट और दूरदर्शी मिशन आवश्यक है। सामाजिक कार्यकर्ता मिशन और उद्देश्य को बदलकर उन्हें अधिक प्रासंगिक और सटीक बना सकते हैं ताकि वह समाज की बदलती जरूरतों के अनुरूप हों।
  • लंबी अवधि की योजनाएँ: सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के दीर्घकालिक लक्ष्यों को फिर से परिभाषित करने और नई दिशा निर्धारित करने के लिए रणनीतिक योजनाएं बना सकते हैं।

4. संसाधनों और निधियों का प्रभावी प्रबंधन

  • निधियों का सही उपयोग: सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित कर सकते हैं। इससे संगठन के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता आ सकती है।
  • नई फंडिंग और पार्टनरशिप: नए फंडिंग स्रोतों की तलाश और महत्वपूर्ण साझेदारी स्थापित करके संगठन को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

5. संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव

  • प्रोत्साहन और पुरस्कार प्रणाली: सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के भीतर काम करने की संस्कृति को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन और पुरस्कार प्रणाली को सुधार सकते हैं। इससे सदस्यों को अपने काम के प्रति और अधिक प्रेरणा मिलेगी।
  • समय पर आंतरिक सुधार: समय-समय पर संगठनात्मक सुधार और नीतियों का पुनरीक्षण संगठन के विकास के लिए आवश्यक होता है। सामाजिक कार्यकर्ता आंतरिक समस्याओं की पहचान कर समय पर सुधार कर सकते हैं।

6. तकनीक और नवाचार का उपयोग

  • डिजिटल परिवर्तन: संगठन के कामकाज में तकनीकी सुधार जैसे कि डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग, डेटा प्रबंधन और संचार प्रक्रियाओं को सुधारने के लिए नवाचार ला सकते हैं।
  • सामाजिक मीडिया का उपयोग: सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन साधनों का उपयोग करके संगठन की पहुंच और प्रभाव को बढ़ाया जा सकता है।

7. कानूनी और राजनीतिक प्रक्रियाओं का समर्थन

  • नीति सुधारों की वकालत: सामाजिक कार्यकर्ता सरकार और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर संगठनों के लिए अनुकूल नीति सुधारों की वकालत कर सकते हैं। इससे संगठन को कानूनी और प्रशासनिक समर्थन प्राप्त होता है।
  • अधिकारिता और भागीदारी: सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के सदस्यों और हितधारकों को अधिकारिता देकर उन्हें अधिक भागीदारीपूर्ण और सक्रिय बना सकते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रभाव संगठन के सदस्यों के बीच विश्वास और सामूहिक भागीदारी पर निर्भर करता है। परिवर्तन लाने के लिए कार्यकर्ताओं को सामूहिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है ताकि संगठन अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में और अधिक सक्षम हो सके।

**पेच और पेचकस की दोस्ती की कहानी**



बहुत समय पहले की बात है, औज़ारों की दुनिया में एक छोटे से पेच और पेचकस की दोस्ती हो गई। दोनों में गहरा प्यार और समझ थी, और वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।


पेच अपने आप को बहुत अकेला महसूस करता था, क्योंकि वह जानता था कि जब तक उसे कोई कसने वाला नहीं मिलेगा, वह किसी काम का नहीं रहेगा। वह सोचता, "मैं तो सिर्फ एक छोटा सा धातु का टुकड़ा हूँ, मैं क्या कर सकता हूँ?" उसकी सारी ताकत छुपी हुई थी, उसे बस एक साथी की जरूरत थी जो उसकी ताकत को प्रकट कर सके।


दूसरी ओर, पेचकस भी यही महसूस करता था। वह बहुत सीधा और पतला था, और सोचता था कि "मैं तो बस एक साधारण सा औज़ार हूँ। मैं किसी की मदद के बिना अकेला कुछ नहीं कर सकता।"


एक दिन, एक लकड़ी का कुर्सी बन रहा था और कुर्सी को मज़बूत करने के लिए कुछ पेच लगाने की जरूरत थी। उसी समय पेच और पेचकस दोनों को बुलाया गया। पहले पेच कुर्सी में लगा दिया गया, लेकिन वह ढीला था और कुर्सी ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी। फिर पेचकस को बुलाया गया। पेचकस ने पेच की ओर देखा और मुस्कुराया, "तुम्हें कसने की जरूरत है दोस्त, और यह काम सिर्फ मैं कर सकता हूँ।"


पेचकस ने धीरे-धीरे और ध्यान से पेच को घुमाया, और पेच कुर्सी में मजबूती से कस गया। दोनों ने मिलकर कुर्सी को इतनी मजबूती दी कि अब वह बिना हिलाए-डुलाए खड़ी हो गई। दोनों ने समझा कि वे एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।


इसके बाद से पेच और पेचकस की दोस्ती और भी गहरी हो गई। वे हमेशा साथ काम करते, जहां भी किसी चीज़ को कसने की जरूरत होती, वे दोनों वहां पहुंच जाते। उनकी यह दोस्ती दूसरों के लिए एक उदाहरण बन गई।


कहानी का संदेश यह है कि किसी भी सफल रिश्ते में आपसी सहयोग, समझ और सामंजस्य की जरूरत होती है। पेच और पेचकस की तरह, हर इंसान की अपनी ताकत होती है, लेकिन असली ताकत तब प्रकट होती है जब हम सही समय पर सही साथी के साथ काम करें।

पेच और पेचकस का मानवीय रिश्ता और खतरनाक परिणाम

 पेच और पेचकस का मानवीय रिश्ता एक प्रतीकात्मक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। पेच और पेचकस दो उपकरण हैं, जिनका उपयोग एक साथ किसी चीज़ को कसने, जोड़ने या मजबूती से बांधने के लिए किया जाता है। यह रिश्ते और मानवीय संबंधों के संदर्भ में प्रतीकात्मक हो सकता है।


**पेच और पेचकस का मानवीय रिश्ता**:


1. **सहयोग और समर्थन**: पेच और पेचकस बिना एक-दूसरे के अधूरे हैं। एक पेच तब तक कस नहीं सकता जब तक पेचकस उसे सहारा नहीं देता। यह मनुष्यों के बीच आपसी समर्थन और सहयोग की भावना को दर्शाता है। जिस तरह पेच और पेचकस एक साथ मिलकर काम करते हैं, वैसे ही मनुष्य एक-दूसरे के समर्थन और सहयोग से अपनी समस्याओं को हल कर सकते हैं।


2. **समझ और सामंजस्य**: जिस तरह से पेचकस को पेच में सही तरीके से लगाना पड़ता है, वैसे ही रिश्तों में भी सही समझ और सामंजस्य की ज़रूरत होती है। अगर पेचकस गलत दिशा में घुमा दिया जाए, तो पेच टूट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे एक रिश्ते में गलतफहमी या संवाद की कमी रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकती है।


3. **दबाव और तनाव**: जब पेचकस को जरूरत से ज्यादा कस दिया जाता है, तो पेच टूट सकता है। यह दर्शाता है कि जीवन में जरूरत से ज्यादा दबाव, तनाव या जबरदस्ती रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। अत्यधिक नियंत्रण या कठोरता से इंसान के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।


**खतरनाक परिणाम**:


1. **रिश्तों में दरार**: अगर पेच और पेचकस को ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया तो पेच टूट जाता है। इसी तरह, अगर रिश्तों में संवाद, समझ और सहानुभूति की कमी होती है, तो रिश्ते कमजोर हो सकते हैं और टूटने की स्थिति में आ सकते हैं।


2. **तनाव और टूट-फूट**: पेचकस का अत्यधिक या अनुचित प्रयोग पेच को नष्ट कर सकता है। इसी तरह, जीवन में अत्यधिक तनाव या नियंत्रण से व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट सकता है। ज़्यादा दबाव रिश्तों में दरार ला सकता है।


3. **स्वास्थ्य पर असर**: मानसिक और भावनात्मक तनाव का सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। अनियंत्रित तनाव, चिंता और निरंतर दबाव गंभीर शारीरिक और मानसिक बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जैसे अवसाद, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप आदि।


यह प्रतीकात्मक दृष्टिकोण हमें यह सिखाता है कि रिश्तों को सही तरीके से संभालना चाहिए, उन्हें मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए धैर्य, सामंजस्य और सही दिशा में प्रयासों की जरूरत होती है।

जैविक खेती की अग्रणी और प्रेरणास्रोत श्रीमती पप्पाम्मलके निधन का समाचार

जैविक खेती की अग्रणी और प्रेरणास्रोत श्रीमती पप्पाम्मल के निधन का समाचार उनके क्षेत्र और जैविक खेती से जुड़े लोगों के लिए एक गहरा आघात है। पप्पाम्मल एक 105 वर्षीय किसान थीं, जिन्होंने तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा दिया और अपने जीवनभर कृषि के प्रति समर्पित रहीं। उन्हें भारत सरकार ने उनके योगदान के लिए 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।


पप्पाम्मल ने खेती में आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक तरीकों को जोड़ा और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान न केवल खेती के क्षेत्र में था, बल्कि उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें कृषि कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित किया।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...