Sunday, February 2, 2025

भारत में हरित क्रांति के जनक (Architect of Green Revolution in India)

 **भारत में हरित क्रांति के जनक (Architect of Green Revolution in India)** के रूप में **डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन (Dr. M. S. Swaminathan)** को जाना जाता है।  


### **डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का योगदान:**  

- डॉ. स्वामीनाथन ने भारत में **उच्च उत्पादकता वाली गेहूं और धान की किस्मों** के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  

- उन्होंने कृषि वैज्ञानिक **नॉर्मन बोरलॉग** के साथ मिलकर उन्नत बीज तकनीक और आधुनिक कृषि पद्धतियों को भारत में लागू किया।  

- उनके प्रयासों के कारण भारत ने 1960 के दशक में खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की, जिससे देश में **भूखमरी और खाद्यान्न संकट** पर काबू पाया गया।  


### **महत्वपूर्ण पहल:**  

- **सिंचाई और उर्वरक उपयोग में सुधार**  

- **कृषि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना**  

- **किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम**  


डॉ. स्वामीनाथन को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें **पद्म विभूषण** और **विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize)** शामिल हैं। उन्हें अक्सर "भारत के कृषि क्रांति के पितामह" भी कहा जाता है।

ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर मॉडल - सिद्धपुर, उत्तराखंड

 **ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर मॉडल - सिद्धपुर, उत्तराखंड**


**परिचय:**  

यह ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर (Rural Business Incubator) मॉडल सिद्धपुर गांव में **UDAEN Foundation** के अंतर्गत स्थापित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सहकारी खेती, ईको-टूरिज्म, और सतत विकास को प्रोत्साहित करना है ताकि स्थानीय समुदाय को स्वरोजगार के अवसर मिल सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।  


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### **1. प्रमुख उद्देश्य:**  

- **स्थानीय उद्यमिता का विकास:** ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रशिक्षित करना।  

- **सहकारी खेती का प्रोत्साहन:** आधुनिक कृषि तकनीकों और जैविक खेती को बढ़ावा देना।  

- **ईको-टूरिज्म के अवसर:** स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन के साथ जोड़ना।  

- **हरित और सतत विकास:** नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना।  


### **2. संचालन ढांचा (Operational Framework):**  


#### **A. प्रशासनिक संरचना:**  

- **प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम (PMT):** योजना निर्माण और निगरानी के लिए।  

- **व्यवसाय परामर्श बोर्ड:** विशेषज्ञों की टीम जो व्यवसायिक रणनीति में मार्गदर्शन देगी।  

- **स्थानीय संचालन समिति:** गांव के प्रमुख और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि।  


#### **B. प्रमुख घटक:**  

- **इन्क्यूबेशन सेंटर:** प्रशिक्षण, बैठकों और कार्यशालाओं के लिए एक केंद्र।  

- **प्रौद्योगिकी हब:** डिजिटल उपकरण और इंटरनेट सुविधाएं।  

- **प्रदर्शन खेत (Demonstration Farms):** नई कृषि तकनीकों के परीक्षण के लिए।  


### **3. प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रम:**  

- **व्यवसाय प्रबंधन:** उद्यम योजना, विपणन रणनीति, वित्तीय प्रबंधन।  

- **कौशल विकास:** जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, ईको-टूरिज्म संचालन।  

- **डिजिटल साक्षरता:** ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन नेटवर्किंग।  


### **4. वित्तीय योजना (Financial Model):**  

- **प्रारंभिक निवेश:** UDAEN Foundation और सरकारी अनुदान के माध्यम से।  

- **राजस्व स्रोत:** सहकारी उत्पादों की बिक्री, ईको-टूरिज्म सेवाएं, प्रशिक्षण शुल्क।  

- **वित्तीय सहायता:** माइक्रो-क्रेडिट, सब्सिडी, और CSR भागीदारी।  


### **5. बाज़ार रणनीति (Market Linkages):**  

- **स्थानीय बाजार:** गांव के उत्पादों को निकटवर्ती शहरों और मेलों में विपणन।  

- **ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म:** ऑनलाइन बिक्री के लिए सहयोग।  

- **पर्यटन नेटवर्क:** होमस्टे, लोकल गाइड, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करना।  


### **6. सतत विकास पहल:**  

- **नवीकरणीय ऊर्जा:** सौर ऊर्जा और बायोगैस संयंत्र का उपयोग।  

- **जल संरक्षण:** वर्षा जल संचयन और ड्रिप इरिगेशन तकनीक।  

- **हरित परियोजनाएं:** वनीकरण और जैव विविधता संरक्षण।  


### **7. प्रभाव और मूल्यांकन (Impact & Evaluation):**  

- **प्रदर्शन संकेतक (KPIs):** रोजगार सृजन, उत्पादकता में वृद्धि, और पर्यावरणीय स्थिरता।  

- **वार्षिक मूल्यांकन:** विकास की समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई के लिए।  


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**निष्कर्ष:**  

यह ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर मॉडल न केवल सिद्धपुर गांव में आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक **सतत विकास मॉडल** के रूप में उदाहरण पेश करेगा।


ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर (Rural Business Incubators)

 **ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर (Rural Business Incubators)** ऐसे प्लेटफॉर्म या केंद्र होते हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक **संसाधन, प्रशिक्षण, और मार्गदर्शन** प्रदान करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर पैदा करना, नवाचार को बढ़ावा देना, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना होता है।  


### **ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर के प्रमुख घटक:**  

1. **व्यवसाय परामर्श (Business Mentorship):**  

   - उद्यमियों को व्यवसाय योजना बनाने, विपणन रणनीति, और वित्तीय प्रबंधन में मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।  

   

2. **प्रशिक्षण और कौशल विकास (Training & Skill Development):**  

   - कृषि-आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, ई-कॉमर्स आदि क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।  


3. **वित्तीय सहायता (Financial Support):**  

   - स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों के लिए **सीड फंडिंग, माइक्रो फाइनेंस, और सरकारी अनुदान** की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।  


4. **नेटवर्किंग और विपणन सहायता (Networking & Market Linkages):**  

   - स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के लिए सहयोग।  

   - **ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स** के माध्यम से उत्पादों की बिक्री के अवसर प्रदान करना।  


5. **प्रौद्योगिकी और नवाचार (Technology & Innovation):**  

   - ग्रामीण उद्यमियों को नई तकनीकों का उपयोग सिखाना जैसे कि **डिजिटल मार्केटिंग, मोबाइल एप्लिकेशन, और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी**।  


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### **भारत में प्रमुख ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर मॉडल:**  


1. **Rural Technology Business Incubator (RTBI) – IIT मद्रास:**  

   - ग्रामीण समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।  

   - कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करता है।  


2. **Start-up Village Entrepreneurship Programme (SVEP) – DAY-NRLM:**  

   - ग्रामीण युवाओं के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए यह कार्यक्रम संचालित किया जाता है।  

   - **राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)** के तहत छोटे व्यवसायों को समर्थन।  


3. **TIDE (Technology Incubation and Development of Entrepreneurs) Scheme:**  

   - **इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय** द्वारा प्रायोजित, यह योजना तकनीकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देती है।  


4. **Mahatma Gandhi National Fellowship (MGNF):**  

   - स्किल इंडिया मिशन के तहत ग्रामीण उद्यमिता और व्यवसाय विकास को प्रोत्साहित करता है।  


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### **उत्तराखंड में संभावनाएँ:**  

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेटर **ईको-टूरिज्म, औषधीय पौधों की खेती, हस्तशिल्प, जैविक खेती, और स्थानीय उत्पादों के विपणन** में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  


- **UDAEN Foundation** के अंतर्गत, आप **सहकारी खेती, ईको-टूरिज्म, और स्थायी विकास परियोजनाओं** के लिए इनक्यूबेटर मॉडल विकसित कर सकते हैं।  

- **सिद्धपुर गांव** में स्वावलंबी ग्राम मॉडल के साथ ग्रामीण इनक्यूबेटर को जोड़ा जा सकता है ताकि स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाज़ार मिले।  


अगर आप उत्तराखंड में ग्रामीण इनक्यूबेटर स्थापित करने के लिए कोई विशेष योजना बनाना चाहते हैं तो मैं इसके लिए एक विस्तृत मॉडल तैयार कर सकता हूँ।

PricewaterhouseCoopers (PwC)

 **PricewaterhouseCoopers (PwC)** एक बहुराष्ट्रीय पेशेवर सेवाएँ प्रदान करने वाली परामर्श कंपनी है, जो मुख्य रूप से **ऑडिटिंग, टैक्सेशन, कंसल्टिंग, और बिजनेस एडवाइजरी सर्विसेज** में विशेषज्ञता रखती है। PwC दुनिया की सबसे बड़ी "Big Four" परामर्श कंपनियों में से एक है, जिसमें Deloitte, EY, और KPMG भी शामिल हैं।


### **PwC का उत्तराखंड सरकार के साथ सहयोग:**

PwC विभिन्न सरकारी विभागों के साथ नीति निर्माण, परियोजना प्रबंधन, और डिजिटल परिवर्तन से जुड़े कार्यों में सलाहकार के रूप में कार्य करता है। उत्तराखंड में, PwC ने निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग दिया है:


1. **स्मार्ट सिटी परियोजनाएं:**  

   - देहरादून स्मार्ट सिटी के तहत **सिटी इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC)** और डिजिटल गवर्नेंस के विकास में सलाहकार की भूमिका निभाई।  

   - स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना में तकनीकी परामर्श।  


2. **पर्यटन विकास:**  

   - उत्तराखंड पर्यटन विभाग के साथ काम कर **सस्टेनेबल टूरिज्म** और **ईको-टूरिज्म** के विकास के लिए रणनीतिक योजनाएं तैयार कीं।  

   - चारधाम यात्रा के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और मैनेजमेंट।  


3. **स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण:**  

   - **नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)** परियोजनाओं के लिए नीति निर्माण और निवेश प्रोत्साहन योजनाओं में सहायता।  

   - जलवायु परिवर्तन अनुकूलन योजनाओं में परामर्श सेवाएं।  


4. **राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था:**  

   - ई-गवर्नेंस, आईटी नीति, और डिजिटलीकरण के लिए सरकार के विभिन्न विभागों के साथ काम किया।  

   - **डिजिटल इंडिया मिशन** के तहत उत्तराखंड में कई परियोजनाओं का क्रियान्वयन।  


5. **अर्थव्यवस्था और वित्तीय परामर्श:**  

   - राज्य के बजट विश्लेषण, जीएसटी प्रबंधन, और आर्थिक सुधार योजनाओं में परामर्श।  

   - **सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल)** के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए रणनीति विकसित की।  


### **PwC की सेवाएँ:**  

- रणनीतिक योजना (Strategic Planning)  

- परियोजना प्रबंधन (Project Management)  

- डेटा विश्लेषण और रिपोर्टिंग (Data Analytics & Reporting)  

- वित्तीय सलाह (Financial Advisory)  

- नीति विश्लेषण और सुधार (Policy Analysis & Reforms)  



उत्तराखंड सरकार के अंतर्गत विभिन्न प्रमुख परामर्श (Consultancy) एजेंसियाँ

 उत्तराखंड सरकार के अंतर्गत विभिन्न प्रमुख परामर्श (Consultancy) एजेंसियाँ और संस्थान कार्यरत हैं जो नीति निर्माण, योजना क्रियान्वयन, और विकासात्मक परियोजनाओं में सरकार की सहायता करते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख परामर्श संस्थान निम्नलिखित हैं:


### **1. उत्तराखंड राज्य नीति और योजना आयोग (Uttarakhand State Policy and Planning Commission)**  

- यह संस्था नीति निर्माण, विकास रणनीतियों और योजना निर्धारण में सरकार को सलाह देती है।  

- यह केंद्र सरकार के नीति आयोग की तर्ज पर कार्य करता है।  


### **2. उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स कंसल्टेंसी (Uttarakhand Infrastructure Projects Consultancy Services - UIPCS)**  

- यह संस्था राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए परामर्श सेवाएं प्रदान करती है, जैसे सड़क, पुल, जल परियोजनाएं आदि।  


### **3. उत्तराखंड जल संस्थान (Uttarakhand Jal Sansthan)**  

- जल प्रबंधन, आपूर्ति और जल संरक्षण परियोजनाओं के लिए परामर्श और तकनीकी सहयोग प्रदान करता है।  


### **4. उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (Uttarakhand Renewable Energy Development Agency - UREDA)**  

- नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास, सलाह और नीति निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है।  


### **5. उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (Uttarakhand State Council for Science and Technology - UCOST)**  

- विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित नीति और परियोजनाओं पर परामर्श सेवाएं प्रदान करता है।  


### **6. उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (Uttarakhand Tourism Development Board - UTDB)**  

- पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए रणनीतिक परामर्श और नीति निर्माण में सहायता करता है।  


### **7. PricewaterhouseCoopers (PwC) और Ernst & Young (EY)**  

- ये प्रमुख अंतरराष्ट्रीय परामर्श कंपनियां विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के लिए सलाहकार के रूप में कार्य करती हैं, खासकर आर्थिक विकास, डिजिटल परिवर्तन, और आधारभूत संरचना परियोजनाओं में।  


### **8. उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास निदेशालय (Directorate of Urban Development Uttarakhand)**  

- स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और शहरी विकास के लिए रणनीतिक परामर्श प्रदान करता है।  



उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्तीय वर्ष 2024-25

 उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ₹3,94,675 करोड़ अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% की वृद्धि को दर्शाता है। ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


यह अनुमान राज्य की आर्थिक प्रगति के अनुरूप है, क्योंकि पिछले दो दशकों में उत्तराखंड के GSDP में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2000 में, राज्य के गठन के समय GSDP ₹14,501 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर ₹3,46,000 करोड़ हो गया। ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


2023-24 में प्रति व्यक्ति GSDP ₹2,95,751 अनुमानित किया गया था, जो 2017-18 से 7% की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


राज्य की आर्थिक वृद्धि में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान रहा है, जिसमें पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थान है। दो साल पहले पर्यटन का GSDP में योगदान 37% था, जो अब बढ़कर 43.7% हो गया है। ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


ये आंकड़े उत्तराखंड की मजबूत आर्थिक विकास यात्रा और राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

The Gross State Domestic Product (GSDP) of Uttarakhand

 The Gross State Domestic Product (GSDP) of Uttarakhand for the fiscal year 2024-25 is projected to be ₹3,94,675 crore, reflecting a 14% growth over the previous year. ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


This projection aligns with the state's economic trajectory, as the GSDP has seen significant growth over the past two decades. In 2000, during its formation, Uttarakhand's GSDP was ₹14,501 crore, which increased to ₹3,46,000 crore by 2023-24. ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


The per capita GSDP in 2023-24 was estimated at ₹2,95,751, marking an annualized increase of 7% since 2017-18. ([prsindia.org](https://prsindia.org/files/budget/budget_state/uttarakhand/2024/Uttrakhand_Budget_Analysis-2024-25.pdf?utm_source=chatgpt.com))


The state's economic growth has been driven by various sectors, with tourism playing a significant role. Two years ago, tourism accounted for 37% of the GSDP, and that contribution has now risen to 43.7%. ([timesofindia.indiatimes.com](https://timesofindia.indiatimes.com/india/uttarakhands-economy-soars-gsdp-rises-24-times-per-capita-income-up-17-times-in-24-years/articleshow/115070308.cms?utm_source=chatgpt.com))


These figures underscore Uttarakhand's robust economic development and its efforts to enhance various sectors contributing to the state's economy. 

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...