Monday, January 26, 2026
“रोज़ नए-नए मार्गों की खोज करना ही जीवन है”—यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है।
जब खेल संवाद बने और संवेदना कर्म, तब गणतंत्र जीवंत होता है
✍️ विशेष संपादकीय
जब खेल संवाद बने और संवेदना कर्म, तब गणतंत्र जीवंत होता है
77वें गणतंत्र दिवस पर कोटद्वार के राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित क्रिकेट सद्भावना मैत्री मैच केवल एक खेल आयोजन नहीं था, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक चेतना का सार्वजनिक प्रकटीकरण था, जिसकी नींव हमारे संविधान में निहित है। प्रेस क्लब कोटद्वार द्वारा अपने पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय सुधीन्द्र नेगी जी की स्मृति में आयोजित यह आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा मंच पर लाने का सार्थक प्रयास रहा।
आज के समय में जब संवाद की जगह अक्सर शोर और टकराव ले लेते हैं, तब वकील, पुलिस, मीडिया और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का एक मैदान पर उतरना अपने आप में एक संदेश था—कि असहमति के बावजूद सहअस्तित्व संभव है। खेल के दौरान दिखी प्रतिस्पर्धा मर्यादित रही और यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
ट्रॉफी भले ही बार एसोसिएशन कोटद्वार के हिस्से आई हो, पर वास्तविक जीत उस सौहार्द की रही, जो हर मैच के साथ मजबूत होता गया। ऐसे आयोजन हमें यह भी याद दिलाते हैं कि गणतंत्र केवल अधिकारों का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों का संकल्प भी है।
इस पूरे आयोजन को अर्थवत्ता तब मिली, जब खेल के बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब कोटद्वार की ओर से कुष्ठ आश्रम में सेवा का कार्य किया गया। प्रेस क्लब के सचिव दिनेश एवं कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा आश्रम में भोजन वितरण कर यह संदेश दिया गया कि लोकतंत्र की असली परीक्षा मैदान या मंच पर नहीं, बल्कि समाज के सबसे उपेक्षित व्यक्ति तक हमारी संवेदना पहुंचने में होती है।
स्वर्गीय सुधीन्द्र नेगी जी की स्मृति में खेला गया यह आयोजन और उसके साथ जुड़ा यह सेवा कार्य, दोनों मिलकर यही कहते हैं कि स्मरण तब सार्थक होता है, जब वह कर्म में ढलता है। गणतंत्र दिवस ऐसे ही प्रयासों से जीवंत बनता है—जहां खेल संवाद बने और संवेदना सामाजिक कर्तव्य।
— दिनेश गुसाईं
(वरिष्ठ पत्रकार )
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लोकतंत्र की आत्मा इसी समझ पर टिकी होती है कि जनता कौन है और जनता के सेवक कौन।
लोकतंत्र की आत्मा इसी समझ पर टिकी होती है कि जनता कौन है और जनता के सेवक कौन।
1️⃣ Civil (जनता / नागरिक) कौन होते हैं?
Civil शब्द का अर्थ है — देश के सामान्य नागरिक
यानि वे लोग जो किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।
✅ जनता (Civil) के अधिकार
भारतीय संविधान के भाग–3 (Fundamental Rights) के अंतर्गत नागरिकों को ये अधिकार मिले हैं:
🔹 (क) मौलिक अधिकार
- जीवन और सम्मान का अधिकार (अनुच्छेद 21)
- समानता का अधिकार (कानून के सामने सब बराबर)
- विचार, अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता
- धर्म मानने और प्रचार करने की स्वतंत्रता
- शांतिपूर्ण विरोध और आंदोलन का अधिकार
- सूचना पाने का अधिकार (RTI)
- न्याय पाने का अधिकार (कोर्ट जाने का अधिकार)
🔹 (ख) लोकतांत्रिक अधिकार
- वोट देने का अधिकार
- सरकार से सवाल पूछने का अधिकार
- जनहित याचिका (PIL) का अधिकार
📌 जनता (Civil) के दायित्व
संविधान का भाग–4A (Fundamental Duties) नागरिकों को ये कर्तव्य सौंपता है:
- संविधान और कानून का सम्मान
- राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीकों का आदर
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा
- सामाजिक सौहार्द बनाए रखना
- पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा
- कर (Tax) देना
- हिंसा से दूर रहना
✨ लोकतंत्र में अधिकार तभी सुरक्षित रहते हैं, जब नागरिक अपने दायित्व निभाते हैं।
2️⃣ Civil Servants (जनसेवक / सरकारी कर्मचारी) कौन होते हैं?
Civil Servants वे लोग हैं जिन्हें जनता के टैक्स से वेतन मिलता है और जिनका काम जनता की सेवा करना है।
उदाहरण:
- IAS, IPS, IFS
- राज्य प्रशासनिक सेवा
- पुलिस, तहसील, सचिवालय
- शिक्षक, डॉक्टर (सरकारी)
- नगर निगम, पंचायत कर्मचारी
✅ Civil Servants के अधिकार
- वेतन और भत्ते
- सेवा सुरक्षा (बिना कारण हटाया नहीं जा सकता)
- पदोन्नति का अधिकार
- सुरक्षित कार्य वातावरण
- न्याय पाने का अधिकार (Tribunal / कोर्ट)
📌 Civil Servants के दायित्व
यहीं असली जवाबदेही होती है:
- जनता की सेवा करना
- संविधान के अनुसार कार्य करना
- निष्पक्ष और ईमानदार रहना
- कानून का पालन कराना, न कि उसका दुरुपयोग
- राजनीतिक पक्षपात से दूर रहना
- नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार
- सूचना छिपाना नहीं (RTI का पालन)
⚖️ Civil servant मालिक नहीं, सेवक होता है।
3️⃣ जनता बनाम जनसेवक – स्पष्ट अंतर
| विषय | जनता (Civil) | जनसेवक (Civil Servant) |
|---|---|---|
| सत्ता का स्रोत | संविधान | जनता |
| भूमिका | मालिक / संप्रभु | सेवक |
| वेतन देता कौन | — | जनता (टैक्स से) |
| जवाबदेह | कानून के प्रति | जनता + कानून के प्रति |
| शक्ति | लोकतांत्रिक | प्रशासनिक |
4️⃣ अगर जनसेवक दायित्व न निभाए तो?
जनता के पास ये अधिकार हैं:
- शिकायत (CM Portal, DM, विभाग)
- RTI डालना
- कोर्ट / हाईकोर्ट / सुप्रीम कोर्ट जाना
- मीडिया और जनप्रतिनिधि के माध्यम से आवाज उठाना
- शांतिपूर्ण आंदोलन
🔴 निष्कर्ष (सबसे ज़रूरी बात)
लोकतंत्र में जनता शासक होती है और सिविल सर्वेंट सेवक।
यदि सेवक खुद को मालिक समझने लगे, तो लोकतंत्र कमजोर होता है।
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