Friday, November 8, 2019

बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने की तैयारी

बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने की तैयारी

प्रदेश में कम होती बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। कृषि विभाग किसानों को बांस के पौधे मुफ्त में देगा। विभाग इस पर 20.34 करोड़ खर्च करेगा। विभाग बांस की नर्सरी से लेकर स्वरोजगार के लिए भी मदद करेगा। उन कारीगरों को भी रोजगार मिलेगा, जो बांस के पौधाें से किलटे, टोकरियां और अन्य साजो समान बनाते हैं।
बांस की पत्तियों का पशुओं के चारे के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। पत्तियों से खाद तैयार की जाएगी। जिन किसानों के पास जमीन नहीं है। उन्हें खाली जमीन मुहैया करवाई जाएगी। बांस के पौधों को उगाने और रखरखाव का जिम्मा किसानों के समूह का होगा। किसानों को इसे काटने के लिए भी वन विभाग की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी।
ब्लॉक के हर गांव में बनाया जाएगा किसानों का समूह 
बांस की खेती करने के लिए विभाग की ओर से ब्लॉक के हर गांव के करीब 25 से 30 किसानों का समूह बनाया जाएगा। इसके साथ विभाग की ओर से किसानों को जल्दी बढ़ने वाले बांस के पौधे दिए जाएंगे।
नर्सरी से व्यवसाय चलाने तक मिलेगी मदद  
बांस की नर्सरी लगाने से व्यवसाय चलाने तक कृषि विभाग किसानों को सहायता देगा। योजना में किसानों को बांस खेती और बांस का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। किसानों को नर्सरी और बांस की वस्तुओं को बनाना भी सिखाया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी मोहेंद्र सिंह भवानी ने कहा कि विभाग जल्द ही ब्लॉकों का दौरा करेगा। जमीन का चयन कर किसानों का समूह बनाया जाएगा।

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Saturday, September 21, 2019

beti suraksha


होम स्टे: पुनर्निमाण में लैंड यूज बदलने की नहीं पड़ेगी जरूरत

सरकार अब राज्य में होम स्टे योजना को रफ्तार देने के लिए खासी राहत देने जा रही है। इसके तहत पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए ऋण लेने को लैंड यूज बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इतना ही नहीं, ऋण लेते समय जमीन को बंधक रखते को सात प्रतिशत स्टांप ड्यूटी को भी माफ करने की तैयारी है।
प्रदेश सरकार इस समय होम स्टे योजना को गति देने की दिशा में काम कर रही है। दरअसल, सरकार ने पलायन को रोकने और स्थानीय लोगों को गांवों में ही रोजगार देने के उद्देश्य से होमस्टे योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में काफी काम भी हुआ है लेकिन इसके लिए ऋण लेने की शर्ते इसे रफ्तार देने में रोड़ा बन रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें बैंकों द्वारा ऋण लेने में आ रही है। सरकार ने होम स्टे योजना के तहत भवन निर्माण कराने के लिए ऋण लेने पर सब्सिडी देने का प्रावधान किया हुआ है। बैंक से ऋण लेने से पहले कई प्रकार की प्रक्रिया आड़े आ रही है। इसके बाद होम स्टे योजना शुरू करने के इच्छुक लोगों ने इस पर राहत देने की मांग की, जिस पर सरकार काम कर रही है। लैंड यूज बदलने की अनिवार्यता को लेकर मुख्यमंत्री कुछ समय पहले ही इससे छूट देने की बात कह चुके हैं। सूत्रों की मानें तो पर्यटन विभाग ने इस पर काफी काम भी कर लिया है। अभी ऋण लेने के लिए जमीन गिरवी रखनी पड़ती है, जिस पर सात प्रतिशत स्टांप ड्यूटी सरकार द्वारा ली जाती है। हालांकि, सरकार द्वारा दी जा रही छूट इससे कहीं अधिक है। बावजूद इसके स्टांप ड्यूटी को हटाने की मांग की जा रही थी जिस पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है। इसके अलावा पहले ऋण लेने के लिए निजी लैंड यूज को बदलकर व्यावसायिक करना होता था। अब पुराने भवनो की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण के लिए लैंड यूज की अनिवार्यता को समाप्त करने में तकरीबन सहमति बन चुकी है। यह मामला पहले बुधवार को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक में लाया जाना था। बैठक स्थगित होने के बाद अब इसे आगामी बैठक में लाए जाने की संभावना है।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

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