Tuesday, July 21, 2026

देश में बंदरगाहों का स्वामित्व

 

देश में बंदरगाहों का स्वामित्व

 PIB Delhi

बारह प्रमुख बंदरगाह—चेन्नई बंदरगाहकोचीन बंदरगाहदीनदयाल बंदरगाहजवाहरलाल नेहरू बंदरगाहकामराजार बंदरगाहमोरमुगाव बंदरगाहमुंबई बंदरगाहन्यू मंगलूरु बंदरगाहपारादीप बंदरगाहश्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाहवी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और विशाखापत्तनम बंदरगाह —भारत सरकार के अधीन हैं। कामराजार बंदरगाह को छोड़करजो कंपनी कानून के तहत निगमित चेन्नई बंदरगाह प्राधिकरण की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी हैशेष 11 प्रमुख बंदरगाहों का प्रशासन प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण कानून, 2021 के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। प्रमुख बंदरगाह सामान्य बुनियादी ढांचा और नियामक निगरानी प्रदान करते हैंजबकि निर्दिष्ट बर्थ और टर्मिनलों का विकास और संचालन या तो बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा किया जाता है अथवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपीमॉडल या कैप्टिव नीति, 2016 के तहत निजी भागीदारी के माध्यम से किया जाता है।

पिछले दस वर्षों के दौरानपारदर्शी और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से पीपीपी मॉडल के तहत अनेक टर्मिनल और बंदरगाह परियोजनाएं विकसित की गई हैं। किसी भी प्रमुख बंदरगाह का निजीकरण नहीं किया गया है और भूमि तथा मुख्य बंदरगाह परिसंपत्तियों का स्वामित्व संबंधित प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण/सरकार के पास ही बना हुआ है। पिछले दस वर्षों के दौरान पीपीपी मॉडल के तहत विकसित प्रमुख बंदरगाहों के टर्मिनलों का विवरण अनुलग्नक-क में दिया गया है।

अनुलग्नक-क

पिछले 10 वर्षों के दौरान 12 प्रमुख बंदरगाहों में पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किए गए टर्मिनलों की सूची

क्रम संख्‍या

बंदरगाह का नाम

पिछले 10 वर्षों के दौरान पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किए गए बर्थ/टर्मिनलों का नाम

1

चेन्नई बंदरगाह  प्राधिकरण
 

कोई नहीं

2

कोचीन बंदरगाह  प्राधिकरण
 

कोई नहीं

3

दीनदयाल बंदरगाह  प्राधिकरण

Berth No. 13

4

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण

न्हावा शेवा फ्रीपोर्ट टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड

न्हावा शेवा डिस्ट्रीब्यूशन टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड

जेएसडब्‍ल्‍यू जेएनपीए लिक्विड टर्मिनल

ट्राइडेंट एग्रो टर्मिनल्‍स एंड लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड

5

कामराजार बंदरगाह लिमिटेड

लौह अयस्‍क टर्मिनल

6

मोरमुगाव बंदरगाह प्राधिकरण

बर्थ संख्‍या 10 और 11

7

मुम्‍बई बंदरगाह प्राधिकरण

मुम्‍बई अंतर्राष्‍ट्रीय क्रूज टर्मिनल बीपीएक्‍स

8

न्‍यू मेंगलौर बंदरगाह प्राधिकरण

बर्थ संख्‍या 16

बर्थ संख्‍या 14

9

पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण

कंटेनरों सहित स्वच्छ माल के प्रबंधन के लिए बहुउद्देशीय बर्थ

नया लौह अयस्‍क बर्थ

ईक्‍यू-1,2,3 कोयले के प्रबंधन के लिए बर्थ

कोयला आयात के प्रबंधन के लिए नया कोयला बर्थ

पश्चिमी डॉक

10

श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह प्राधिकरण

खिदिरपुर डॉक का पुनरुद्धार

एचडीसी में बर्थ संख्‍या 2

बर्थ संख्‍या और 7

बर्थ संख्‍या एनएसडी, 2 एनएसडी, 3 एनएसडी, 4 एनएसडी, 5 एनएसडी और केडीएस में बाहरी टर्मिनल

PPP मॉडल के तहत डीबीएफओटी के माध्यम से एचडीसी में बर्थ संख्या 5

11

वी.ओ. चिदम्‍बरानार बंदरगाह प्राधिकरण

8वीं बर्थ

9वीं बर्थ

एनसीबी-III

12

विशाखापत्‍तनम बंदरगाह प्राधिकरण

वीसीटीपीएल-II

बाहरी बंदरगाह सुविधा (चरण-I) और आंतरिक बंदरगाह सुविधा (चरण-II)

डब्‍ल्‍यूक्‍यू-7 और डब्‍ल्‍यूक्‍यू-8 बर्थ

पश्चिमी क्‍वे– 6 (डब्‍ल्‍यूक्‍यू -6) टर्मिनल

ईक्‍यू-7 बर्थ

पूर्वी क्‍वे– 6 बर्थ

 

पिछले पाँच वर्ष के दौरान अर्जित राजस्व का बंदरगाह-वार विवरण अनुलग्नक-ख में दिया गया है।

अनुलग्नक-ख

 

 

 

 

 

 

 

प्रमुख बंदरगाहों द्वारा अर्जित राजस्व

(करोड़ रुपये में)

क्रम संख्‍या

प्रमुख बंदरगाह

वित्‍त वर्ष  2021-22

वित्‍त वर्ष  2022-23

वित्‍त वर्ष  2023-24

वित्‍त वर्ष  2024-25

वित्‍त वर्ष  2025-26*

1

दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण

2,140.59

3,142.59

3,104.23

3,140.51

3,437.25

2

मुम्‍बई बंदरगाह प्राधिकरण

1,979.37

2,295.00

2,557.52

2,830.83

3,318.74

3

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण

2,681.14

2,895.11

3,149.18

3,918.84

4,356.34

4

मोरमुगाव बंदरगाह प्राधिकरण

457.66

486.00

585.87

563.16

607.95

5

न्‍यू मेंगलौर बंदरगाह प्राधिकरण

743.26

882.73

1,013.58

1,102.98

1,121.88

6

कोच्चिं बंदरगाह प्राधिकरण

759.12

827.24

964.43

998.73

1,091.15

7

वी.ओ. चिदम्‍बरनार बंदरगाह प्राधिकरण

654.53

820.49

1,121.91

1,205.72

1,254.96

8

चेन्‍नई बंदरगाह प्राधिकरण

1,164.97

1,357.20

1,369.08

1,552.27

1,516.47

9

कामराजार बंदरगाह लिमिटेड

850.82

1,009.22

1,081.44

1,160.19

1,272.13

10

विशाखापत्‍तनम बंदरगाह प्राधिकरण

1,609.86

1,862.10

2,334.18

2,448.87

2,585.85

11

पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण

1,895.73

2,255.22

2,658.18

2,756.86

2,893.62

12

श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह प्राधिकरण

2,734.44

2,985.48

3,419.46

3,169.08

3,126.43

कुल

17,671.49

20,818.38

23,359.06

24,848.03

26,582.77

 

अनंतिम आंकड़े – अलेखापरीक्षित

प्रमुख बंदरगाहों के प्रबंधन में पारदर्शिताप्रतिस्पर्धा और जनहित की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट (एमसीएको मानकीकृत किया है और सभी पीपीपी परियोजनाएँ खुली प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के बाद प्रदान की जाती हैं।

सरकार पीपीपी मॉडल के जरिये बंदरगाहों के विकाससंचालनरखरखाव और आधुनिकीकरण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करके लैंडलॉर्ड पोर्ट मॉडल को लगातार बढ़ावा दे रही है। जहाँ भी संभव होयह कार्य प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। इसका उद्देश्य परिचालन दक्षता बढ़ानाक्षमता में वृद्धि करनानिजी निवेश आकर्षित करना और सेवा वितरण में सुधार करना हैजबकि प्रमुख बंदरगाहों का स्वामित्व और समग्र प्रशासन संबंधित पोर्ट प्राधिकरणों के पास ही बना रहता है।

यह जानकारी केन्‍द्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्तर में दी।

ग्रामीण विकास योजनाएं

 

ग्रामीण विकास योजनाएं

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ग्रामीण विकास मंत्रालय को बजट अनुमान (बीई) 2026-27 के तहत  2,31,423.14 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 2,28,768.81 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास विभाग के लिए हैं। बीई के तहत आवंटन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार नहीं, बल्कि संबंधित विभागों के विभिन्न कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए किया गया है। बजट अनुमान के तहत कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए किए गए आवंटन में से, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को योजनाओं के संबंधित कार्यान्वयन तंत्र के माध्यम से निधियां जारी की जाती हैं, जिसमें योजनाओं के तहत पहले से आवंटित निधि का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक दस्तावेज/उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना, योजनाबद्ध दिशानिर्देशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करना, जमीनी स्तर पर वास्तविक आवश्यकता का आकलन करना और राज्यों के पास उपलब्ध निधि की शेष राशि को ध्यान में रखना शामिल है।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) और ग्रामीण विकास मंत्रालय का डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी), केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में लागू किया गया है।

ड्रोन-आधारित ज़मीन सर्वे एवं संपत्ति रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

 

ड्रोन-आधारित ज़मीन सर्वे एवं संपत्ति रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

 PIB Delhi

स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गतगांवों के आबादी क्षेत्रों के उच्च सटीकता वाली मैपिंग करने के लिए कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आबादी वाली भूमि का सीमांकन किया जाता है। ये अत्यधिक सटीक मानचित्र संपत्ति की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण करने एवं अधिकार अभिलेख तैयार करके संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने में सहायता करते हैं। यह योजना संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले सक्षम राज्य प्राधिकरणों द्वारा स्थलीय सत्यापन और आपत्तियों/विवादों के समाधान का प्रावधान करती हैजिससे संपत्तियों के सीमांकन में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

पंचायती राज मंत्रालय ने आईआईएम अहमदाबाद के ज़रिए इस योजना का प्रभाव जानने के लिए एक मूल्यांकन किया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि बैंक लोन लेने और ग्राम पंचायत की अपनी आमदनी के स्रोतों पर इस योजना का क्या असर पड़ा है। अध्यन में पाया गया कि स्वामित्व योजना लागू होने के बाद संपत्ति कार्ड के आधार पर लिए जाने वाले बैंक लोन की रकम में काफी बढ़ोतरी हुई है और साथ ही ग्राम पंचायत के संपत्ति कर एवं दूसरे सामान्य कर से होने वाली आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई है। मंत्रालय इस योजना के लागू होने से पहले और बाद में सुलझाए गए ज़मीन के विवादों की संख्या का डेटा नहीं रखता है। अब तक3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है और 1.97 लाख गांवों के लिए 3.24 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार हो चुके हैं।

राज्य और ज़िलेवार विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत 9 लाख 23 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 49 लाख 81 हजार से अधिक सहायक उपकरण वितरित

 

राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत 9 लाख 23 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 49 लाख 81 हजार से अधिक सहायक उपकरण वितरित


एल्डरलाइन हेल्पलाइन 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित, अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत 734 वरिष्ठ नागरिक गृहों को सहायता जारी

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने लोक सभा में डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, श्री अतुल गर्ग, श्री अरुण भारती, श्रीमती शम्भावी और डॉ. लता वानखेड़े द्वारा पूछे गए संसद प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत देश भर में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने की व्यापक पहल लागू कर रहा है। इस योजना के तहत प्रमुख पहल में – वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नम्बर 14567- एल्डरलाइन, वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम, सीनियर केयर एजिंग ग्रोथ इंजन (सेज) और राष्ट्रीय वयोश्री योजना शामिल हैं। इन सभी पहल का उद्देश्य उम्र दराज नागरिकों के लिए सुलभ सहायता सेवाएं, संस्थागत देखभाल, तकनीकी नवाचार और सहायक उपकरण सुनिश्चित करना है।

एल्डरलाइन (14567) अभी 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित है और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सूचना, मार्गदर्शन, भावनात्मक समर्थन, सहायता, बचाव और शिकायत निवारण सेवाएं प्रदान करती है। यह हेल्पलाइन राष्ट्रीय अवकाशों को छोड़कर हर दिन सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक कार्यरत रहती है , जिससे जरूरतमंद बुजुर्गों को समय पर सहायता सुनिश्चित होती है।

लिखित उत्तर में बताया गया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम के तहत , मंत्रालय अभी 734 वरिष्ठ नागरिक गृहों के संचालन और रखरखाव के लिए अनुदान सहायता दे रहा है। ये गृह वृद्ध व्यक्तियों, विशेष रूप से सहायता की आवश्यकता वाले लोगों को संस्थागत देखभाल और आवश्यक सेवाएं प्रदान करते हैं।

मंत्रालय ने सीनियरकेयर एजिंग ग्रोथ इंजन पहल आरंभ की है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ने बताया कि अगस्त 2022 में एसएजीई पोर्टल आरंभ किए जाने के बाद से अब तक 131 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से गहन जांच-पड़ताल के बाद 10 स्टार्टअप्स का चयन किया गया है और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नवोन्मेषी उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने और रजत अर्थव्यवस्था (बुजुर्गों और बढ़ती उम्र की आबादी की आवश्यकताएं पूरी करने वाली आर्थिक गतिविधियों, उत्पादों और सेवाओं का योग, जिसका उद्देश्य इस जनसांख्यिकी की क्रय शक्ति और अनुभव का उपयोग कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है) को मजबूत करने के लिए 9 करोड़ 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता जारी की गई है।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत , मंत्रालय उम्र संबंधी निःशक्तता से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता उपकरण और जीवनयापन संबंधी सहायता प्रदान कर रहा है।

सदन को बताया कि योजना के आरंभ से लेकर अब तक गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आने वाले या 15 हजार रुपये तक की मासिक आय वाले 9,23,071 वरिष्ठ नागरिकों को 49,81,380 सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं , जिससे वे स्वतंत्र और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में लोक सभा को सूचित किया गया कि अभी एक अलग राष्ट्रीय रजत नीति (सिल्वर पॉलिसी) आरंभ करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है 

श्री वी एल वर्मा ने जोर देकर कहा कि सरकार अटल वयो अभ्युदय योजना के तहत एकीकृत कल्याण कार्यक्रमों द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा पारितंत्र को सुदृढ़ बनाना जारी रखे हुए है, जिससे उनकी बेहतर देखभाल, सामाजिक समावेशिता और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित हो।

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