मीडिया में भाई-भतीजावाद का अर्थ है रिश्तेदारों या करीबी लोगों को योग्यता के बजाय प्राथमिकता देना। यह प्रथा प्रतिभा और पारदर्शिता को कमजोर करती है और पत्रकारिता एवं मनोरंजन क्षेत्र की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।
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मीडिया में भाई-भतीजावाद के रूप
1. भर्ती में पक्षपात:
रिश्तों के आधार पर नियुक्तियां, भले ही उम्मीदवार अयोग्य हो।
2. नेतृत्व और स्वामित्व:
मीडिया संस्थानों का स्वामित्व परिवारों तक सीमित रहना।
3. प्रचार और अवसर:
प्रमुख भूमिकाओं और परियोजनाओं में रिश्तेदारों को प्राथमिकता देना।
4. सामग्री निर्माण में पक्षपात:
परिवार के सदस्यों के काम को अधिक प्रचारित करना, जबकि स्वतंत्र कलाकारों को नजरअंदाज करना।
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भाई-भतीजावाद का प्रभाव
1. गुणवत्ता में गिरावट:
अयोग्य व्यक्तियों के महत्वपूर्ण भूमिकाओं में आने से सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
2. विविधता की कमी:
समान दृष्टिकोण और विचारों से रचनात्मकता बाधित होती है।
3. प्रतिभा का ह्रास:
योग्य लोगों को अवसर न मिलने से उनका मनोबल गिरता है।
4. विश्वसनीयता पर असर:
दर्शक उन मीडिया संगठनों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं जहां भाई-भतीजावाद हावी होता है।
5. जनता का अविश्वास:
भाई-भतीजावाद मीडिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को कमजोर करता है।
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मीडिया में भाई-भतीजावाद के उदाहरण
मनोरंजन मीडिया:
फिल्म और टीवी उद्योग में "स्टार किड्स" या रिश्तेदारों को अधिक अवसर मिलना।
समाचार मीडिया:
परिवार-आधारित समाचार चैनलों और अखबारों का स्वामित्व, जो पक्षपाती नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं।
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भाई-भतीजावाद को रोकने के उपाय
1. योग्यता आधारित भर्ती:
पारदर्शी चयन प्रक्रिया और मानकीकृत मूल्यांकन सुनिश्चित करें।
2. नियमन और निगरानी:
निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी या स्वतंत्र निगरानी तंत्र।
3. स्वतंत्र मीडिया को बढ़ावा:
उन प्लेटफॉर्म्स का समर्थन करें जो रिश्तों के बजाय प्रतिभा पर आधारित हों।
4. विसलब्लोअर सुरक्षा:
पक्षपात की शिकायत करने वालों को सुरक्षा प्रदान करें।
5. जन जागरूकता:
जनता को भाई-भतीजावाद के खतरों के प्रति जागरूक करें और उन्हें सामग्री के आलोचनात्मक विश्लेषण के लिए प्रेरित करें।
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निष्कर्ष
मीडिया में भाई-भतीजावाद इसकी निष्पक्षता और रचनात्मकता को कमजोर करता है। इसे रोकने के लिए पारदर्शी प्रक्रियाओं, सिस्टम में बदलाव और योग्यता को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। एक निष्पक्ष मीडिया ही जनता का विश्वास अर्जित कर सकता है और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका निभा सकता है।
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