Wednesday, July 3, 2024

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में स्टेट प्रेस क्लब उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की।



नीति आयोग 'संपूर्णता अभियान' आरंभ करेगा


 



4 जुलाई से 30 सितंबर 2024 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य एडीपी/एबीपी जिलों और ब्लॉकों में 6 चिन्हित संकेतकों में परिपूर्णता हासिल करना है

नीति आयोग जुलाई से 30 सितंबर 2024 तक 3 महीने का 'संपूर्णता अभियानआरंभ कर रहा हैजिसका उद्देश्य देश भर के आकांक्षी जिलों में 6 प्रमुख संकेतकों और आकांक्षी ब्लॉकों में प्रमुख संकेतकों की परिपूर्णता अर्जित करने के लिए निरंतर प्रयास करना है। 'संपूर्णता अभियानका उद्देश्य आकांक्षी जिला कार्यक्रम और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के तहत 112 आकांक्षी जिलों और 500 आकांक्षी ब्लॉकों में चिन्हित 6 संकेतकों में से प्रत्येक में परिपूर्णता हासिल करना है।

'सम्पूर्णता अभियान' सभी आकांक्षी ब्लॉकों में निम्नलिखित 6 चिन्हित केपीआई  पर ध्यान केंद्रित करेगा:

  1. पहली त्रैमासिक अवधि के दौरान प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) के लिए पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत
  2. ब्लॉक में लक्षित जनसंख्या के मुकाबले मधुमेह की जांच कराने वाले व्यक्तियों का प्रतिशत
  3. ब्लॉक में लक्षित जनसंख्या के मुकाबले उच्च रक्तचाप के लिए जांचे गए व्यक्तियों का प्रतिशत
  4. आईसीडीएस कार्यक्रम के अंतर्गत नियमित रूप से पूरक पोषण लेने वाली गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत
  5. मृदा नमूना संग्रहण लक्ष्य के मुकाबले सृजित मृदा स्वास्थ्य कार्डों का प्रतिशत
  6. ब्लॉक में कुल स्वयं सहायता समूहों के मुकाबले रिवाल्विंग फंड प्राप्त करने वाले स्वयं सहायता समूहों का प्रतिशत

 

'सम्पूर्णता अभियान' के अंतर्गत आकांक्षी जिलों में चिन्हित 6 केपीआई इस प्रकार हैं:

  1. पहली त्रैमासिक अवधि के दौरान प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) के लिए पंजीकृत गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत
  2. आईसीडीएस कार्यक्रम के अंतर्गत नियमित रूप से पूरक पोषण लेने वाली गर्भवती महिलाओं का प्रतिशत
  3. पूर्णतः प्रतिरक्षित बच्चों का प्रतिशत (9-11 माह) (बीसीजी+डीपीटी3+ओपीवी3+खसरा 1)
  4. वितरित मृदा स्वास्थ्य कार्डों की संख्या
  5. माध्यमिक स्तर पर कार्यात्मक विद्युत सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत
  6. शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर बच्चों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने वाले स्कूलों का प्रतिशत

नीति आयोग उन कार्यकलापों की सूची उपलब्ध करा रहा है जिन्हें जिले और ब्लॉक 'संपूर्णता अभियान' के शुभारंभ के हिस्से के रूप में आयोजित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ब्लॉक और जिलों को अभियान की गति बनाए रखने और निरंतर भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से लोक संपर्क गतिविधियाँ आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इस प्रयास को सफल बनाने तथा जमीनी स्तर पर ठोस प्रभाव डालने के लिए:

  1. जिले/ब्लॉक छह संकेतकों को पूर्ण करने के लिए 3 महीने की कार्य योजना विकसित करेंगे
  2. जिले/ब्लॉक प्रत्येक माह परिपूर्णता पर हुई प्रगति को ट्रैक करेंगे
  3. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन अभियान लागू करना
  4. जिला अधिकारी समवर्ती निगरानी प्रक्षेत्र का दौरा करेंगे

नीति आयोग, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ मिलकर इन जिलों और ब्लॉकों के प्रभावी और तेज़ विकास को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेगा। यह सहयोग बेहतर नियोजन और कार्यान्वयन, क्षमता निर्माण और बेहतर तथा सतत सेवा वितरण के लिए प्रणालियां स्थापित करने पर केंद्रित होगा।

आकांक्षी जिले और ब्लॉक कार्यक्रम के बारे में

देश के अपेक्षाकृत पिछड़े और दूरदराज के क्षेत्रों के तेजी से विकास को सुनिश्चित करने के लिए 112 जिलों को कवर करने वाले आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) को वर्ष 2018 में लॉन्च किया गया था। एडीपी ने अपने नागरिकों के जीवन को उन्नत बनाने वाले प्रमुख संकेतकों को बेहतर बनाने पर एक मापनीय और ठोस प्रभाव डाला है। आकांक्षी जिला कार्यक्रम (एडीपी) की सफलता के आधार पर, आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (एबीपी) को 2023 में प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च किया गया और इसका उद्देश्य देश भर के 500 ब्लॉकों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, पेयजल और स्वच्छता, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और अवसंरचना जैसे कई क्षेत्रों में आवश्यक सरकारी सेवाओं की परिपूर्णता अर्जित करना है।

 

आकांक्षी जिला कार्यक्रम

आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम

जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च किया गया

जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च किया गया

देश भर के 112 जिलों में त्वरित और प्रभावी परिवर्तन लाने का लक्ष्य

देश भर के 500 ब्लॉकों (329 जिलों) में आवश्यक सरकारी सेवाओं की परिपूर्णता का लक्ष्य

पांच विषय वस्तुओं पर केंद्रित:

  • स्वास्थ्य एवं पोषण
  • शिक्षा
  • कृषि एवं जल संसाधन
  • वित्तीय समावेशन और कौशल विकास
  • अवसंरचना

पांच विषय वस्तुओं पर केंद्रित:

  • स्वास्थ्य एवं पोषण
  • शिक्षा
  • कृषि एवं संबद्ध सेवाएँ
  • अवसंरचना
  • सामाजिक विकास

विकास के 81 संकेतकों पर प्रगति मापी गई

प्रगति को विकास के 40 संकेतकों पर मापा जाता है

ब्लॉक प्रोफाइल यहां से एक्सेस किया जा सकता है ।


द्विपक्षीय बधिर क्रिकेट श्रृखंला में भारतीय टीम ने जीतकर रचा इतिहास

 



सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने इंग्लैंड के खिलाफ द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में ऐतिहासिक जीत के लिए भारतीय बधिर क्रिकेट टीम को बधाई दी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय बधिर क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए 18 जून से 27 जून 2024 के मध्य इंग्लैंड में खेले गए द्विपक्षीय टी-20 मैच श्रृखंला में मेजबान टीम को 5-2 से हराकर सीरीज अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत पर आज दिल्ली स्थित डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय  के केंद्रीय मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार द्वारा भारतीय बधिर टीम के सभी सदस्यों को बधाई दी गई और उन्हें सम्मानित किया गया। 

 

 
डॉ वीरेंद्र कुमार ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय बधिर टीम की यह जीत पूरे देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण है। भारतीय बधिर टीम की यह जीत एक असाधारण जीत है। यह जीत सिर्फ आपकी नहीं है बल्कि यह पूरे देश की जीत है। टीम ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को संभव कर दिखाया है। भारतीय बधिर टीम की यह जीत मेंस टी-20 वर्ल्ड कप मैच की जीत से किसी भी प्रकार से कम नहीं है। हमारे बधिर खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि जब उन्हें अवसर दिया जाता है तो वह इस अवसर पर हमेशा खरे उतरते हैं। हमारे खिलाड़ियों ने विदेशी धरती पर तिरंगा लहराया है जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।

 


केंद्रीय  मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने खिलाड़ियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि क्रिकेट के मैदान में जीत सिर्फ एक खेल में जीत नहीं होती है बल्कि यह जीत व्यक्ति के जीवन में वह ऊर्जा उत्साह और उमंग पैदा करती है कि हम जब खेल के मैदान में जीत सकते हैं तो जीवन की कठोर परिस्थिति से भी हम जीत सकते हैं। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि भारतीय बधिर टीम की यह जीत आने वाले समय में बधिर खिलाड़ियों के जीवन में आशा का संचार करेगी और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

कार्यक्रम में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने भी भारतीय बधिर टीम के सभी सदस्यों को बधाई और शुभकामना दी। इस अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उप महानिदेशक श्री किशोर बाबूराव सुरवाड़े सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण व इंडियन डेफ एसोसिएशन के अधिकारी भी मौजूद रहे।

भारत सरकार और एडीबी ने महामारी के खिलाफ तैयारियों और जवाबी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए 170 मिलियन डॉलर के ऋण पत्र पर हस्ताक्षर किए

 



भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने आज भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की तैयारियों और भविष्य की महामारियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई क्षमता को एकीकृत तथा मजबूत करने के लिए 170 मिलियन डॉलर के नीति-आधारित ऋण पत्र पर हस्ताक्षर किए।

भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की संयुक्त सचिव सुश्री जूही मुखर्जी और एडीबी की ओर से एडीबी के इंडिया रेजिडेंट मिशन की निदेशक सुश्री मियो ओका ने सुदृढ़ और परिवर्तनकारी स्वास्थ्य प्रणाली कार्यक्रम के लिए मजबूत और मापनीय कार्रवाई (उप-कार्यक्रम 1)’ पर हस्ताक्षर किए।

सुश्री मुखर्जी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरानसरकार ने अपनी महामारी के खिलाफ तैयारियों और जवाबी कार्रवाई क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करने के लिए कई तौर-तरीकों को अपनाया। उन्होंने कहा कि एडीबी कार्यक्रम रोग निगरानी को और मजबूत करनेस्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जलवायु-सहनीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवा वितरण को बढ़ावा देने में सरकार के चल रहे प्रयासों में मदद करेगा।

सुश्री ओका ने कहा, "यह कार्यक्रम भारत सरकार के साथ एडीबी की साझेदारी पर आधारित हैताकि देश की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया जा सके और परिवर्तनकारी समाधान अपनाए जा सकें।" "इस नीति-आधारित ऋण के माध्यम सेएडीबी सरकार को नीतिगतविधायी और संस्थागत शासन और संरचनाओं की कमियों को दूर करने में मदद करेगा और महामारी के खिलाफ तैयारी और जवाबी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुँच प्रदान करने के भारत के लक्ष्य में योगदान देगा।"

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017; प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम)राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन (एचआरएच) को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों सहित प्रमुख सरकारी योजनाओं और पहलों पर केन्द्रित होगा। कार्यक्रम के माध्यम से लक्षित सुधार क्षेत्रों में शामिल हैं: (i) मजबूत रोग निगरानी और बहुक्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई, (ii) स्वास्थ्य के लिए मजबूत मानव संसाधनऔर (iii) विस्तारित जलवायु सहनीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और अभिनव सेवा वितरण।

यह कार्यक्रम राज्यसंघ और महानगर स्तर पर संक्रामक रोग निगरानी के लिए प्रयोगशाला नेटवर्क स्थापित करने तथा गरीबोंमहिलाओं और अन्य कमजोर समूहों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की निगरानी और समन्वय के संदर्भ में मजबूत डेटा प्रणाली तैयार करके सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए रोग निगरानी प्रणालियों को मजबूत करेगा। यह कार्यक्रम भारत के वन हेल्थ दृष्टिकोण के कार्यान्वयन और उभरते संक्रामक रोगों के लिए इसकी बहुक्षेत्रीय जवाबी कार्रवाई में सुधार करेगा।

एडीबी नीति सुधारों का समर्थन करेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि पर्याप्त और सक्षम स्वास्थ्य पेशेवर और कर्मचारी हों। इसमें ऐसे कानून शामिल हैं, जो नर्सोंसहायिकाओंसंबद्ध कर्मचारियों और डॉक्टरों की शिक्षासेवाओं और पेशेवर आचरण के मानकों को विनियमित करेंगे और बनाए रखेंगे।

यह कार्यक्रम संक्रामक रोगों और गंभीर बीमारियों के प्रति सेवाओं में सुधार करने के लिए पांच राज्यों और जिला क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉकों में एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं का प्रबंधन करने में मदद करेगा। यह हरित और जलवायु-सहनीय स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की स्थापना में अंतर-क्षेत्रीय शासी निकाय और बहु-क्षेत्रीय टास्क फोर्स की सहायता करेगा। सेवा वितरण के लिए अभिनव समाधानों का भी समर्थन किया जाएगा।

Tuesday, July 2, 2024

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि बच्चों में कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जच्चा और बच्चा दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिये कि राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम के माध्यम से गर्भवती माताओं का ट्रेकिंग सिस्टम अपडेट रखा जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि एनीमिया  को दूर करने के लिए महिलाओं को मिलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चत की जाए। इसके साथ ही आंगनबाड़ी के माध्यम से बच्चों और माताओं को दिये जाने वाले पुष्टाहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और पुष्टाहार की आकस्मिक रूप से गुणवत्ता जांच भी की जाए।मुख्यमंत्री ने कुपोषण से मुक्ति, मातृ-शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए राज्य के कुछ गांवों को आकांक्षी गांवों के रूप में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुपोषण से मुक्ति के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को आपसी समन्वय के साथ संचालित किया जाए।इस दौरान बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री आर मीनाक्षी सुंदरम, श्री चन्द्रेश यादव, निदेशक महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास श्री प्रशांत आर्य उपस्थित रहे।

नेशनल डॉक्टर्स डे: नेशनल मेडिकल फोरम एंड प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में एमएक्यू मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया गया

 





#नेशनल मेडिकल फर्म ने 24/7 चेस्ट पेन ऑटोमोबाइल की शुरुआत की 


# 200 से अधिक ग्रैब ने इस कैंप के माध्यम से अपना मेडिकल चेकअप किया 


नई दिल्ली, 1 जुलाई, 2024


नेशनल डॉक्टर्स डे के क्रशर में नेशनल मेडिकल फ़ोर्म और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया (पी सीआई) ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के गुट के लिए लिबरल मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया। संजीवन हॉस्पिटल द्वारा इस कार्यक्रम में 200 से अधिक ग्रैब ने अपना मेडिकल चेकअप लॉज आयोजित किया। 


इस मेडिकल चेकअप कैंप में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, ई-एनटी (कान, नाक और गला), जोड़ों के दर्द और शल्य चिकित्सा चेकअप सहित कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी प्रयोगशालाएं शामिल की गईं। इन चेकअप के अलावा ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन (एचबी), ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम), नेत्र परीक्षण, डेंटल चेकअप जैसे डायग्नोस्टिक टेस्ट भी दिए गए। 


प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेशनल मेडिकल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल ने भारत में, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में कोरोनरी धमनी रोग की महामारी से सभी को परिचित कराया। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, ''भारत में हृदय रोग से पीड़ित लगभग 25% लोग 40 साल से कम उम्र के हैं और दिल की बीमारी से पीड़ित लगभग 50% लोग 50 साल से कम उम्र के हैं।'गलत निदान और उपचार से दिल के दौरे से अधिक व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है।"  


इस कार्यक्रम के दौरान दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएनसी) के अध्यक्ष डॉ. बबेरियन, लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन पुरी, जापानी प्रो. मेडिसन सफदरजंग अस्पताल डॉ. फ़ेज़जीत ने भी अपने विचार साँझा किये। प्रोग्राम के दौरान हार्ट अटैक के मुद्दे पर अपने विचार रखते हुए कहा, ''युवाओं में हार्ट अटैक के मामले जो बढ़ रहे हैं उन्हें रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बहुत जरूरत है। इसके लिए सभी को संयुक्त रूप से साथ आना होगा।'' " 


इस समस्या से स्नातक के लिए नेशनल मेडिकल फोरम ने 24/7 चेस्ट पेन मोबाइल नंबर 1800-3096096 शुरू किया है। इस यूनिवर्सल प्रबंधन संजीवन अस्पताल के सलाहकारों द्वारा, जो दर्द के प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। दिल्ली में दर्द का अनुभव करने वाला कोई भी रोगी रोगी की शिकायत पर निःशुल्क कॉल कर सकता है, जहां एक विशेषज्ञ सलाहकार रोगी की शिकायत सुनेगा और उपचार के लिए उसे स्वास्थ्य सेवा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मांगेगा।  


इस मेडिकल चेकअप कैंप के समर्थन में, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गौतम लहरी ने कहा, "नेशनल मेडिकल फ़ोरम और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के बीच यह सहयोगी प्रयास के स्वास्थ्य को प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमारे समाज में अहम भूमिका निभाई है।"


राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस: नेशनल मेडिकल फोरम और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया गया।  


# नेशनल मेडिकल फोरम ने 24/7 सीने में दर्द की हेल्पलाइन शुरू की 


# इस शिविर के माध्यम से 200 से अधिक पत्रकारों ने अपना मेडिकल चेकअप कराया.


नई दिल्ली, 1 जुलाई 2024


राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के अवसर पर, नेशनल मेडिकल फोरम और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के सदस्यों के लिए एक मुफ्त चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन किया। संजीवन हॉस्पिटल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 200 से अधिक पत्रकारों ने अपना मेडिकल चेकअप कराया.


इस चिकित्सा जांच शिविर में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, ईएनटी (कान, नाक और गला), जोड़ों के दर्द और सर्जिकल जांच सहित स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर किया गया। इन जांचों के अलावा, रक्त शर्करा, हीमोग्लोबिन (एचबी), ईसीजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम), आंखों की जांच, दंत जांच जैसे नैदानिक ​​​​परीक्षण भी किए गए।


प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉनेशनल मेडिकल फोरम के अध्यक्ष प्रेम अग्रवाल ने सभी को भारत में, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में कोरोनरी धमनी रोग की बढ़ती महामारी से परिचित कराया। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ''भारत में हृदय रोग से पीड़ित लगभग 25% लोग 40 वर्ष से कम उम्र के हैं और दिल के दौरे से मरने वाले लगभग 50% लोग 50 वर्ष से कम उम्र के हैं। गलत निदान और उचित उपचार की कमी के कारण अधिकांश मामलों में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो जाती है।"


कार्यक्रम के दौरान दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएनसी) के अध्यक्ष डॉ. गिरीश त्यागी, लिपिड एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. रमन पुरी, सफदरजंग अस्पताल के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. चरणजीत ने भी अपने विचार साझा किए. कार्यक्रम के दौरान हार्ट अटैक के मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, 'युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की बहुत जरूरत है. इसके लिए सभी को मिलकर एकजुट होना होगा। "


इस समस्या से निपटने के लिए नेशनल मेडिकल फोरम ने 24/7 सीने में दर्द की हेल्पलाइन 1800-3096096 शुरू की है। इस हेल्पलाइन का प्रबंधन संजीवन अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकारों द्वारा किया जाएगा, जो सीने में दर्द के उचित प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। दिल्ली में सीने में दर्द का अनुभव करने वाला कोई भी मरीज टोल-फ्री हेल्पलाइन पर कॉल कर सकता है, जहां एक विशेषज्ञ सलाहकार मरीज की शिकायत सुनेगा और उसे उचित उपचार के लिए निकटतम स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने में मदद करेगा।


इस मेडिकल चेकअप कैंप के समर्थन में, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, गौतम लाहिड़ी ने कहा, “नेशनल मेडिकल फोरम और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बीच यह सहयोगात्मक प्रयास पत्रकारों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो एक अभिन्न अंग हैं।” हमारे समाज का. में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।"

Monday, July 1, 2024

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अंतर्गत राज्य नोडल अधिकारियों और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों के लिए एक पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

 पंचायती राज मंत्रालय



श्री विवेक भारद्वाज ने प्रतिभागियों द्वारा समर्पित और गुणवत्तापूर्ण कार्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया

इस पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विकासात्मक और निदानात्मक दृष्टिकोणों के माध्यम से प्रतिभागियों की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ाना, सुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और आवश्यक शासन कौशल को और बेहतर बनाना है


पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने आज (1 जुलाई, 2024) भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए)नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत राज्य नोडल अधिकारियों (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों (एसपीएम) के लिए एक पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

श्री भारद्वाज ने अपने मुख्य भाषण में प्रतिभागियों से समर्पण और गुणवत्तापूर्ण कार्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी क्षमता को पहचानने, लोगों की आकांक्षाओं को समझने और अपने प्रदर्शन में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आवश्यक अपार मानवीय क्षमतादृढ़ संकल्प और भावावेशपूर्ण आकांक्षा पर रोशनी डाली।

श्री भारद्वाज ने जोर देते हुए कहा, “पंचायतों के पास संसाधनों और धन की कमी नहीं हैक्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीटी) पहलों में महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है। वास्तविक जरूरत इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को जमीनी स्तर पर देखने की है। सचिव महोदय ने मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के माध्यम से गुणवत्ता और ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की वकालत की। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि कैसे सकारात्मक मानसिकता के साथ परिवर्तनकारी प्रथाओं, मजबूत और सार्थक संस्थानों की स्थापना कर सकते हैं, जो आत्मनिर्भर हैं।

श्री भारद्वाज ने जोर देकर कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग से अनुदान के साथ शुरू की गई परियोजनाओं का उद्घाटन या उनका अनावरण न केवल व्यापक मान्यता प्राप्त करेगा, बल्कि अन्य पंचायतों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने आगे कहा, "स्वामित्व योजना को लागू करके और संपत्ति कर संग्रह की प्रक्रिया को स्वयं के स्रोत राजस्व (ओएसआर) पहलों के साथ जोड़करहम पंचायतों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।" श्री भारद्वाज ने प्रतिभागियों को अन्य पंचायतों को प्रेरित करने के लिए उनके सीखने और अनुभवों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

आईआईपीए के महानिदेशक श्री एस.एन. त्रिपाठीएमओपीआर के अपर सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमारएमओपीआर के संयुक्त सचिव श्री विकास आनंद और आईआईपीए के प्रोफेसर डॉ. वी.एन. आलोक की उपस्थिति ने इस उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई। 1 जुलाई से 5 जुलाई 2024 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय आवासीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम में 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 50 से अधिक राज्य नोडल अधिकारी (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (एसपीएम) भाग ले रहे हैं।

अपने संबोधन मेंश्री एस. एन. त्रिपाठी ने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीटी) की दिशा में पंचायती राज मंत्रालय की अभिनव पहलों की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कार्रवाई में वैश्विक परिप्रेक्ष्य लाते हुए सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण की अवधारणा के माध्यम से गांवों में समावेशीसमग्र और सतत विकास कार्यों को वैश्विक लक्ष्यों के साथ जोड़ने में एमओपीआर के दूरदर्शी प्रयासों पर रोशनी डाली। महानिदेशक महोदय ने इस बात पर बल दिया कि मंत्रालय के निरंतर प्रयासों से पंचायतों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके सराहनीय कार्यों के लिए मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने, आईआईएम अहमदाबाद में पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की पंचायती राज मंत्रालय की पहल की सराहना करते हुए, इसे नवप्रवर्तनकारी और पथ-प्रदर्शक बताया।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने अपने भाषण में मंत्रालय द्वारा निरंतर संवादसहायता और आउटरीच के साधन के रूप में ऐसे पुनश्चर्या पाठ्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सेवा वितरण, पंचायत विकास योजनाओं (पीडीपी) की गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन पर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से डिजिटल शासन के सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया।

श्री विकास आनंद ने इस तरह के पहले पुनश्चर्या प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालाजिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की क्षमताकौशल विकासनेतृत्व क्षमता और उनके प्रदर्शन को बेहतर करना है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित सशक्तविकसित और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के सपने को प्राप्त करने के लिए समन्वित प्रयासों और निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में नेतृत्व कौशलटीमवर्कसंघर्ष प्रबंधनसंचार कौशलमीडिया संबंधसामुदायिक जुड़ावसंकट संचार तथा विभिन्न पहलों जैसे ई-ग्राम स्वराजपीएफएमएसटीएमपीओएसआर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल हैं। प्रशिक्षण में वार्षिक कार्य योजनाओं की तैयारीआरजीएसए के तहत प्रगति की रिपोर्टिंग और ऑडिट ऑनलाइनमेरी पंचायत और पंचायत निर्णय जैसे पोर्टलों का उपयोग भी शामिल है।

पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विकासात्मक और नैदानिक ​​दृष्टिकोणों के माध्यम से प्रतिभागियों की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ानासुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और आवश्यक शासन कौशल को बेहतर बनाना है। प्रशिक्षण पूरा होने परप्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे: (i) अपनी टीमों को उच्च प्रदर्शन और प्रभावशीलता के लिए नेतृत्व प्रदान करें, (ii) स्थानीय शासन में समकालीन नेतृत्व अवधारणाओं की गहन समझ हासिल करें, (iii) महान लोक सेवकों के समान अपने स्वयं के नेतृत्व गुणों की पहचान करें, (iv) अपने पंचायतों के भीतर एक लचीले और चुस्त प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों को रणनीतिक रूप से संरेखित करें और (v) अधिक प्रभावी कामकाज के लिए अपने कौशल सेट्स को बेहतर करें।

पृष्ठभूमि:

पंचायती राज मंत्रालय ने ग्रामीण परिदृश्य को बदलने के लिए कई पहल की हैंजिसमें पीआरआई के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) का स्थानीयकरणसाक्ष्य-आधारित विषयगत पंचायत विकास योजनाओं (पीडीपी) की तैयारीस्थानिक नियोजन और पंचायत विकास सूचकांक (पीडीआई) का संस्थागतकरण शामिल है। ये पहलें कई पोर्टल और अनुप्रयोग जैसे कि ईग्रामस्वराजपीएफएमएसऑडिट ऑनलाइनप्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल आदि द्वारा समर्थित की जाती हैं।

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) के सहयोग से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य इन पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित करना और उनका कौशल बढ़ाना है। 2024-25 के दौरान आईआईपीएनई दिल्ली के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से एसएनओएसपीएम और डीपीएम को लक्षित करते हुए बारह आवासीय प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। आईआईपीए अपने व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता के साथ 1 से 5 जुलाई, 2024 के दौरान पहले बैच के प्रशिक्षण को संचालित कर रहा है।

उद्देश्य: राज्य नोडल अधिकारियों (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों (एसपीएम) की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ानाप्रतिभागियों को ई-ग्राम स्वराजपंचायत विकास योजनाएंपंचायत विकास सूचकांक (पीडीआई)प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल (टीएमपी), मेरी पंचायत जैसी एमओपीआर पहलों पर नवीनतम अपडेट से लैस करनाइन पहलों के व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित करनाआरजीएसए के तहत पीआरआई को मजबूत करने के लिए नवप्रवर्तनकारी हस्तक्षेपों पर विचार मंथन करना।

डिज़ाइन: कार्यक्रम वयस्क शिक्षा सिद्धांतों का पालन करता है, जो शिक्षा सामग्री की प्रासंगिकतासंबद्धता और अनुप्रयोज्यता सुनिश्चित करता है। इसमें नई पहलों की बेहतर समझ के लिए व्यावहारिक गतिविधियां शामिल हैं। यह कार्यक्रम नेतृत्व कौशलटीमवर्कसंघर्ष प्रबंधन और संचार कौशल पर सत्रों के साथ शुरू होता है।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

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