Saturday, November 16, 2024

कम हो रहे राजस्व घाटा अनुदान की भरपाई के लिए सरकार का मितव्ययिता बरतने और आय बढ़ाने पर फोकस



यूं कम होता जाएगा राजस्व घाटा अनुदान

वित्तीय वर्ष अनुदान प्रतिशत

2020-21 5076 -

2021-22 7772 53.1

2022-23 7137 -8.2

2023-24 6223 -12.8

2024-25 4916 -21.0

2025-26 2099 -57.3

2026-27 0 -100

 

 

Uttarakhand News: कम हो रहा राजस्व घाटा अनुदान, प्रदेश सरकार को करने होंगे इनकम बढ़ाने के इंतजाम

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 02 Nov 2024 10:39 AM IST
सार

सरकार को अपेक्षा के अनुरूप राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है। साल दर साल राजस्व घाटा अनुदान की राशि कम होती जा रही है। 2021-22 में यह 7,772 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में घटकर 4,916 हो चुकी है।

Revenue deficit grant is decreasing arrangements will have to be made to increase income Uttarakhand news
बैठक - फोटो : अमर उजाला
1

विस्तार
Follow Us

आगामी वित्तीय वर्ष तक केंद्र सरकार से राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान घटकर आधा रह जाएगा। सरकार को अपने खर्च को संभालने में राजस्व घाटा अनुदान से अभी काफी मदद मिल रही है। इसके कम हो जाने के बाद उसके लिए वित्तीय चुनौती बढ़ जाएगी।

राजस्व प्राप्ति के इस अंतर को पाटने के लिए सरकार राजस्व बढ़ाने के नए स्रोतों की तलाश कर रही है। साथ ही उन स्रोतों पर भी फोकस कर रही है, जहां से सरकार को अपेक्षा के अनुरूप राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा है। हाल ही में नदी, तालाब, झरनों से निकलने वाले पानी के व्यावसायिक इस्तेमाल पर शुल्क लगाने का सरकार का फैसला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विज्ञापन

अगले दो साल में शून्य हो जाएगा राजस्व घाटा अनुदान

राज्य को हजारों करोड़ में मिल रहा राजस्व घाटा अनुदान 2026-27 में शून्य हो जाएगा। साल दर साल राजस्व घाटा अनुदान की राशि कम होती जा रही है। 2021-22 में यह 7,772 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में घटकर 4,916 हो चुकी है। अनुदान की राशि जैसे-जैसे कम हो रही है, सरकार पर इसकी भरपाई करने का दबाव बढ़ रहा है।

राजस्व जुटाने वाले विभागों पर बढ़ाया दबाव

सरकार ने भी राजस्व जुटाने वाले विभागों पर अपना दबाव बढ़ा दिया है। हाल ही में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में वित्त विभाग ने राजस्व प्राप्तियों की जो रिपोर्ट रखी। उसके मुताबिक, 15 अक्तूबर तक लक्ष्य के सापेक्ष 45 प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त हो सकी थी। आधे से अधिक वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद भी राजस्व प्राप्ति के लक्ष्यों में कोई बड़ा सुधार नहीं है। जीएसटी, खनन, स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन विभाग को छोड़ दें तो बाकी विभागों का प्रदर्शन में काफी सुधार की जरूरत है। सरकार नीतियों और तकनीक में सुधार करके राजस्व बढ़ाने की कोशिश कर रही है।


 

यूं कम होता जाएगा राजस्व घाटा अनुदान

वित्तीय वर्ष अनुदान प्रतिशत

2020-21 5076 -

2021-22 7772 53.1

2022-23 7137 -8.2

2023-24 6223 -12.8

2024-25 4916 -21.0

2025-26 2099 -57.3

2026-27 0 -100

 

15 अक्तूबर तक देश सरकार की आय के मुख्य स्रोत

मद 2024 प्रतिशत

एसजीएसटी 4469 44

आबकारी 2225 51

नॉन-जीएसटी 1274 53

स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क 1240 51

परिवहन 622 41

खनन 269 52

जल कर 107 16

वानिकी व वन्यजीव 311 44

ऊर्जा (गैर कर) 76 10

ऊर्जा (इलेक्ट्री सिटी ड्यूटी) 182 33

यूपी पेंशन हिस्सेदारी 570 42

अन्य 589 49

कुल 12343 45

आज से दो दिन होगी राज्य में पक्षी गणना, वन विभाग के अलावा अन्य संगठन करेंगे सहयोग

 राज्य में दो दिन पक्षियों की गणना होगी। उत्तराखंड पक्षी गणना-2024 का कार्य ई-बर्ड संस्था करा रही है। इसमें वन विभाग के अलावा अन्य संगठन सहयोग करेंगे। इसके अलावा बर्ड वॉचर व स्वयं सेवी भी गणना में शामिल होंगे।



बर्ड वॉचर व पक्षियों की गणना के कार्य से जुड़ी अंकिता भट्ट का कहना है कि इस गणना के दौरान राज्य में कितनी प्रजाति के पक्षी हैं, किस स्थान पर उनको देखा गया, कितनी में संख्या में पक्षी दिखे का डेटा एकत्र होगा।इससे राज्य में पक्षियों की विविधता को और बेहतर ढंग से जानने में मदद मिलेगी। साथ ही कोई अध्ययन करना चाहेगा, तो उसमें इस डेटा से मदद मिलेगी। बर्ड वॉचर ई-बर्ड के एप से पक्षियों संबंधी सूचना को भेज सकेंगे। यह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से काम करेगा।

### बदलते दौर में पत्रकारिता का चेहरा



पत्रकारिता, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, बीते दशकों में एक बड़ी बदलाव की प्रक्रिया से गुजरी है। प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के प्रभाव ने इस क्षेत्र को पूरी तरह बदल दिया है। यह बदलाव न केवल समाचार के प्रस्तुतीकरण में दिखता है, बल्कि पत्रकारिता की भूमिका, जिम्मेदारियों और उसकी साख पर भी गहरा असर डालता है।  


#### 1. **डिजिटल मीडिया का उदय**  

इंटरनेट ने पारंपरिक समाचार माध्यमों को चुनौती देते हुए डिजिटल मीडिया को आगे बढ़ाया है। अब समाचार पत्र और टीवी चैनल के अलावा ऑनलाइन पोर्टल, ब्लॉग, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स समाचारों का प्राथमिक स्रोत बन गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर समाचार पहुंचाना तेज और आसान है, लेकिन इसकी वजह से फर्जी खबरों (फेक न्यूज) और अफवाहों का प्रसार भी बढ़ा है।  


#### 2. **पारंपरिक मीडिया की चुनौतियां**  

पारंपरिक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को डिजिटल युग में खुद को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पाठकों और दर्शकों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब वे तुरंत और संक्षेप में जानकारी चाहते हैं। इसके चलते अखबारों और टीवी चैनलों को डिजिटल रूपांतरण करना पड़ा है।  


#### 3. **सोशल मीडिया का प्रभाव**  

आज हर व्यक्ति एक "नागरिक पत्रकार" बन गया है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने किसी भी घटना को तुरंत साझा करने की सुविधा दी है। हालांकि, इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि बिना सत्यापन के खबरें वायरल हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांत - सत्य, निष्पक्षता और जिम्मेदारी - पर सवाल उठने लगे हैं।  


#### 4. **एआई और ऑटोमेशन का उपयोग**  

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा विश्लेषण ने पत्रकारिता को नई दिशा दी है। आज पत्रकार डेटा-संचालित रिपोर्टिंग, चैटबॉट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, इससे पत्रकारिता की गुणवत्ता और मानव पत्रकारों के रोजगार पर भी प्रभाव पड़ा है।  


#### 5. **वित्तीय संकट और व्यावसायीकरण**  

पारंपरिक मीडिया विज्ञापनों पर निर्भर था, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रसार ने इस मॉडल को कमजोर किया है। अब समाचार माध्यमों को सब्सक्रिप्शन, प्रायोजित सामग्री और अन्य राजस्व स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है। इसके चलते कभी-कभी पत्रकारिता व्यावसायीकरण का शिकार हो जाती है और इसकी स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।  


#### 6. **जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता**  

बदलते परिदृश्य में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। फेक न्यूज के इस युग में, सत्य और तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता समय की मांग है। प्रेस की भूमिका सिर्फ खबर देने की नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सच्चाई का चेहरा सामने लाने की है।  


#### निष्कर्ष  

बदलते दौर में पत्रकारिता का चेहरा आधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्रांति और वैश्विक परिवर्तनों से प्रभावित हुआ है। हालांकि, इसकी मूल आत्मा – सत्य और निष्पक्षता – को बनाए रखना ही इसका असली उद्देश्य होना चाहिए। डिजिटल युग ने जहां पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया है, वहीं इससे जुड़े खतरों से निपटने के लिए सतर्कता और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।  


**पत्रकारिता के बदलते चेहरे को समझने के साथ-साथ इसे समाज के लिए एक सकारात्मक शक्ति बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।** 

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

उत्तराखंड में EV: संभावना बड़ी, तैयारी अभी अधूरी

इलेक्ट्रिक वाहन उत्तराखंड के लिए सिर्फ पेट्रोल-डीजल का विकल्प नहीं हैं। यह पर्यटन, सार्वजनिक परिवहन, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को ए...