पत्रकारिता, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, बीते दशकों में एक बड़ी बदलाव की प्रक्रिया से गुजरी है। प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के प्रभाव ने इस क्षेत्र को पूरी तरह बदल दिया है। यह बदलाव न केवल समाचार के प्रस्तुतीकरण में दिखता है, बल्कि पत्रकारिता की भूमिका, जिम्मेदारियों और उसकी साख पर भी गहरा असर डालता है।
#### 1. **डिजिटल मीडिया का उदय**
इंटरनेट ने पारंपरिक समाचार माध्यमों को चुनौती देते हुए डिजिटल मीडिया को आगे बढ़ाया है। अब समाचार पत्र और टीवी चैनल के अलावा ऑनलाइन पोर्टल, ब्लॉग, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स समाचारों का प्राथमिक स्रोत बन गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर समाचार पहुंचाना तेज और आसान है, लेकिन इसकी वजह से फर्जी खबरों (फेक न्यूज) और अफवाहों का प्रसार भी बढ़ा है।
#### 2. **पारंपरिक मीडिया की चुनौतियां**
पारंपरिक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को डिजिटल युग में खुद को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पाठकों और दर्शकों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब वे तुरंत और संक्षेप में जानकारी चाहते हैं। इसके चलते अखबारों और टीवी चैनलों को डिजिटल रूपांतरण करना पड़ा है।
#### 3. **सोशल मीडिया का प्रभाव**
आज हर व्यक्ति एक "नागरिक पत्रकार" बन गया है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने किसी भी घटना को तुरंत साझा करने की सुविधा दी है। हालांकि, इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि बिना सत्यापन के खबरें वायरल हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरूप पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांत - सत्य, निष्पक्षता और जिम्मेदारी - पर सवाल उठने लगे हैं।
#### 4. **एआई और ऑटोमेशन का उपयोग**
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा विश्लेषण ने पत्रकारिता को नई दिशा दी है। आज पत्रकार डेटा-संचालित रिपोर्टिंग, चैटबॉट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, इससे पत्रकारिता की गुणवत्ता और मानव पत्रकारों के रोजगार पर भी प्रभाव पड़ा है।
#### 5. **वित्तीय संकट और व्यावसायीकरण**
पारंपरिक मीडिया विज्ञापनों पर निर्भर था, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रसार ने इस मॉडल को कमजोर किया है। अब समाचार माध्यमों को सब्सक्रिप्शन, प्रायोजित सामग्री और अन्य राजस्व स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है। इसके चलते कभी-कभी पत्रकारिता व्यावसायीकरण का शिकार हो जाती है और इसकी स्वतंत्रता पर असर पड़ता है।
#### 6. **जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता**
बदलते परिदृश्य में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। फेक न्यूज के इस युग में, सत्य और तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता समय की मांग है। प्रेस की भूमिका सिर्फ खबर देने की नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सच्चाई का चेहरा सामने लाने की है।
#### निष्कर्ष
बदलते दौर में पत्रकारिता का चेहरा आधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजिटल क्रांति और वैश्विक परिवर्तनों से प्रभावित हुआ है। हालांकि, इसकी मूल आत्मा – सत्य और निष्पक्षता – को बनाए रखना ही इसका असली उद्देश्य होना चाहिए। डिजिटल युग ने जहां पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया है, वहीं इससे जुड़े खतरों से निपटने के लिए सतर्कता और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
**पत्रकारिता के बदलते चेहरे को समझने के साथ-साथ इसे समाज के लिए एक सकारात्मक शक्ति बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।**
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