Monday, May 26, 2025

Moral Responsibility of a Journalist

Moral Responsibility of a Journalist

Journalists hold a powerful position in society — they inform, influence, and sometimes ignite change. With that power comes a deep moral responsibility to uphold truth, fairness, and the public good. Below are the key moral responsibilities of a journalist:


1. Truthfulness and Accuracy

  • The first duty of a journalist is to seek the truth and report it with honesty and accuracy.
  • Facts must be verified, sources should be credible, and distortion must be avoided.

“Without truth, journalism is propaganda.”


2. Impartiality and Fairness

  • A journalist must report without bias or personal agenda.
  • All sides of a story should be covered fairly, especially in matters of public interest or conflict.

3. Accountability

  • Journalists should own their mistakes, issue corrections when needed, and remain open to public scrutiny.
  • They must remember: freedom of press ≠ freedom from responsibility.

4. Respect for Privacy and Human Dignity

  • While public interest justifies reporting, invasion of privacy or exploitation of grief/suffering is unethical unless absolutely necessary.
  • Special care should be taken while reporting on victims, children, and vulnerable groups.

5. Independence from Influence

  • Journalists should remain independent from political, corporate, or personal interests.
  • Accepting bribes, gifts, or undue favors undermines credibility and is morally wrong.

6. Social Responsibility

  • Journalism should serve democracy, justice, and public welfare.
  • Journalists must highlight social issues, marginalized voices, and act as watchdogs of power.

7. Avoidance of Harm

  • Journalists must balance the right to know with the potential harm their reporting might cause.
  • Sensationalism, hate speech, or incitement to violence is morally unacceptable.

8. Promoting Peace and Understanding

  • In conflict zones or sensitive issues, journalism must aim to reduce tensions, avoid stereotypes, and promote dialogue.

Conclusion:

"A journalist is not just a messenger of facts, but a guardian of truth and conscience of society."

Journalism is not only a profession but a public trust, and upholding moral responsibility is essential to preserving that trust.



उत्तराखंड की जनसंख्या लगभग 1.1 करोड़ है, जिनमें 15–29 वर्ष की आयु वर्ग लगभग 30 लाख के करीब है। मगर पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व स्किल का स्तर और अवसरों की कमी के चलते employability दर और कम है – करीब 35-40%,क्या होनी चाहिए योजना और उसका समाधान एक विश्लेषण।

उत्तराखंड में युवाओं की कम Employability (रोजगार-योग्यता) विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती बन चुकी है। इस समस्या के समाधान हेतु हमें एक समग्र (Holistic), स्थान-विशेष (Context-Specific), और स्थायी (Sustainable) योजना की आवश्यकता है। नीचे इसका विस्तृत विश्लेषण एवं समाधान प्रस्तुत किया गया है:


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1. समस्या की जड़ें: क्यों कम है Employability

(क) शिक्षा की गुणवत्ता

रोजगारोन्मुख शिक्षा का अभाव: स्कूल-कॉलेजों में व्यावसायिक शिक्षा या डिजिटल साक्षरता पर जोर नहीं।

शिक्षकों की कमी और ट्रेन्ड न होना, खासकर विज्ञान, गणित व तकनीकी विषयों में।

ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच सीमित – नेटवर्क व डिजिटल डिवाइड के कारण।


(ख) कौशल विकास में कमी

पर्वतीय जिलों में आईटीआई/पॉलीटेक्निक/स्किल सेंटर की संख्या बहुत कम।

स्थानीय अर्थव्यवस्था (जैसे कृषि, टूरिज्म, वनोपज) से जुड़ी स्किल ट्रेनिंग नहीं।


(ग) रोजगार के अवसरों की कमी

सीमित उद्योग, और उनमें भी बाहरी लोगों की भागीदारी ज्यादा।

सरकारी नौकरियों पर अत्यधिक निर्भरता।



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2. समाधान व योजना: 5 स्तंभ आधारित रणनीति

(1) शिक्षा को रोजगार से जोड़ना (Edu-Employ Linkage)

पर्वतीय कॉलेजों में B.Voc (Vocational Bachelor Courses) शुरू किए जाएं जैसे–

टूरिज्म व ईको-गाइडिंग

ऑर्गेनिक फार्मिंग

हर्बल वैल्यू चेन


स्कूल स्तर पर "Skilling Clubs" – कक्षा 9 से 12 तक कौशल आधारित पाठ्यक्रम।



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(2) "Zonal Skill Development Hubs" की स्थापना

प्रत्येक ब्लॉक में एक मिनी स्किल सेंटर – जहाँ NSDC, ITI व स्थानीय SHG मिलकर प्रशिक्षण दें।

लोकल स्किल को बढ़ावा – जैसे मंडुवा-बुरांश उत्पादों की प्रोसेसिंग, जैविक खेती, बांस/रिंगाल शिल्प।

गांव स्तर पर "Skill Vahini" Mobile Vans – जो प्रशिक्षण व career guidance दे।



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(3) स्वरोजगार और उद्यमिता

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना को पर्वतीय जिलों के अनुसार री-डिज़ाइन करें।

Interest-Free Seed Capital व mentorship support ग्राम स्तर पर उपलब्ध कराया जाए।

FPO और Cooperative मॉडल को युवाओं से जोड़कर, क्लस्टर आधारित व्यवसाय (जैसे हर्बल प्रोसेसिंग, मशरूम फार्मिंग) विकसित किए जाएं।



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(4) डिजिटल और ग्रीन स्किलिंग

ग्रामीण BPO, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन ट्यूटरिंग जैसे रोजगारों में युवाओं को प्रशिक्षित करें।

Renewable Energy, Solar Repairing, Forest Carbon Credit जैसे नए क्षेत्रों में स्किलिंग।

E-commerce Training ताकि युवा खुद के उत्पाद ऑनलाइन बेच सकें।



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(5) Migration Management और Youth Tracking

"Youth Employability Index" Dashboard हर जिले में, जो ट्रैक करे:

कितने युवा स्किल्ड हैं?

कौन पलायन कर चुका है?

किस क्षेत्र में स्किल की मांग है?




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3. संभावित संस्थागत मॉडल: "UYEM – Uttarakhand Youth Employability Mission"

घटक कार्य

जिला युवा केंद्र प्रशिक्षण व करियर मार्गदर्शन
पंचायत स्तर पर कौशल परिषद स्थानीय मांग के अनुसार पाठ्यक्रम चुनना
CSR और NGO साझेदारी स्किल डेवलपमेंट में निवेश



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4. निष्कर्ष:

उत्तराखंड के युवाओं की आधी आबादी को नौकरी लायक बनाने के लिए केवल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े स्किल, स्वरोजगार व डिजिटल समावेशन आवश्यक हैं।

अगर राज्य अगले 5 वर्षों में 50% Employability Rate को छूना चाहता है, तो इन 5 स्तंभों पर आधारित योजनाबद्ध और संसाधनयुक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता है।



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"क्या भारत और उत्तराखंड में युवाओं की आधी आबादी नौकरी करने लायक (Employable) है?"

 "क्या भारत और उत्तराखंड में युवाओं की आधी आबादी नौकरी करने लायक (Employable) है?" विषय पर केंद्रित है। यह विश्लेषण चार प्रमुख पहलुओं में विभाजित किया गया है: जनसंख्या संरचना, शिक्षा और कौशल, रोजगार के अवसर, और नीतिगत उपाय।


1. जनसंख्या संरचना: भारत और उत्तराखंड

  • भारत:
    भारत की कुल जनसंख्या लगभग 1.4 अरब है, जिसमें 15–29 वर्ष के युवा लगभग 27% हैं यानी करीब 38 करोड़
    लेकिन NITI Aayog और NSO Survey के अनुसार, इन युवाओं में से केवल 45-50% ही नौकरी के लिए तैयार (employable) माने जाते हैं।

  • उत्तराखंड:
    उत्तराखंड की जनसंख्या लगभग 1.1 करोड़ है, जिनमें 15–29 वर्ष की आयु वर्ग लगभग 30 लाख के करीब है।
    मगर पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व स्किल का स्तर और अवसरों की कमी के चलते employability दर और कम है – करीब 35-40%


2. शिक्षा और कौशल विकास की स्थिति

भारत:

  • सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, ग्रेजुएट युवाओं का एक बड़ा हिस्सा नौकरी के लिए आवश्यक 21वीं सदी के कौशल जैसे Communication, Digital Skills, Critical Thinking में कमजोर है।
  • स्कूलों और कॉलेजों की शिक्षा रोजगारोन्मुख नहीं है, और व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) बहुत सीमित स्तर पर दी जाती है।

उत्तराखंड:

  • ग्रामीण व पहाड़ी इलाकों में उच्च शिक्षा संस्थानों की पहुंच सीमित है।
  • ITI, Polytechnic जैसी संस्थाओं में भी नवीनतम तकनीकी प्रशिक्षण की कमी है।
  • युवाओं का पलायन (Migration) मुख्यतः रोजगार की तलाश और स्किल के अभाव के कारण है।

3. रोजगार के अवसर और उद्योग का परिदृश्य

भारत:

  • रोजगार की दर (employment rate) युवाओं में 2023-24 में करीब 42-45% रही।
  • Formal sector jobs सीमित हैं, जबकि Informal sector में अधिक रोजगार हैं – जो अस्थिर और कम वेतन वाले होते हैं।
  • स्टार्टअप और डिजिटल इकोनॉमी से कुछ नए अवसर पैदा हुए हैं, पर यह सबके लिए सुलभ नहीं।

उत्तराखंड:

  • राज्य में औद्योगिकीकरण सीमित है। केवल कुछ इलाके (जैसे हरिद्वार, रुद्रपुर) औद्योगिक केंद्र हैं।
  • टूरिज्म, हॉर्टिकल्चर, और हैंडलूम जैसे सेक्टर में संभावनाएँ हैं, पर पर्याप्त स्किल नहीं।
  • सरकारी नौकरियों पर अत्यधिक निर्भरता है, जो बहुत सीमित संख्या में उपलब्ध होती हैं।

4. नीतिगत प्रयास और सुझाव

भारत सरकार की योजनाएं:

  • Skill India Mission, PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना), Digital India, Startup India – रोजगार और कौशल विकास हेतु।
  • NEP 2020 में शिक्षा को रोजगार से जोड़ने का प्रयास।

उत्तराखंड सरकार की पहलें:

  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, Youth Start-up Scheme, Himadri कौशल विकास कार्यक्रम – लेकिन इनका असर सीमित और धीमा है।
  • स्थानीय उत्पादों (जैसे बुरांश, मंडुवा, रिंगाल) पर आधारित रोजगार बढ़ाने के प्रयासों की आवश्यकता।

निष्कर्ष:

  • भारत में युवाओं की आधी आबादी नौकरी के लायक नहीं है, क्योंकि शिक्षा प्रणाली, स्किलिंग, और रोजगार क्षेत्र में व्यापक सुधार की जरूरत है।
  • उत्तराखंड में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण है, विशेषतः पर्वतीय क्षेत्रों में। युवाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित कौशल व उद्यमिता की ओर मोड़ा जाना चाहिए।
  • यदि उचित प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा, और रोजगारपरक योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह बड़ी युवा जनसंख्या देश की आर्थिक शक्ति बन सकती है।

**उत्तराखंड के लिए चार मुख्य स्तंभों** – जल संरक्षण, कृषि, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा – पर आधारित है।

 **उत्तराखंड के लिए चार मुख्य स्तंभों** – जल संरक्षण, कृषि, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा – पर आधारित है। आप इसे अपने NGO, पंचायत, CSR, या सरकारी योजनाओं में उपयोग कर सकते हैं।


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## 📘 **विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR)**


### परियोजना नाम:


**"सशक्त ग्राम उत्तराखंड मॉडल – 4 स्तंभों पर आधारित समग्र विकास योजना"**


### परियोजना क्षेत्र:


**ग्राम: सिद्धपुर, ब्लॉक: जयहरीखाल, जनपद: पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड**


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## 🔷 **1. परियोजना पृष्ठभूमि (Background)**


उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट, कृषि से पलायन, महिला बेरोजगारी और शिक्षा की पहुंच की समस्याएं विकराल होती जा रही हैं। इस परियोजना का उद्देश्य ग्राम स्तर पर 4 मुख्य स्तंभों के माध्यम से आत्मनिर्भर, पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ और सामाजिक रूप से समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।


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## 🔷 **2. उद्देश्य (Objectives)**


* वर्षा जल संरक्षण एवं स्रोतों का पुनरुद्धार

* जैविक और मिश्रित खेती को बढ़ावा देना

* महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना

* डिजिटल और व्यावसायिक शिक्षा को ग्राम स्तर पर लागू करना


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## 🔷 **3. चार स्तंभों पर आधारित परियोजना घटक**


### 🌊 **I. जल संरक्षण**


#### गतिविधियाँ:


* 5 चेक डैम और 10 वर्षा जल संग्रहण टैंक निर्माण

* 3 पारंपरिक ‘नौला’ पुनरुद्धार

* जल समितियों का गठन और प्रशिक्षण


#### अपेक्षित लाभ:


* सिंचाई और पेयजल में 40% सुधार

* ग्रामीणों में जल संरक्षण की संस्कृति विकसित


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### 🌾 **II. कृषि सुधार**


#### गतिविधियाँ:


* 50 किसानों को जैविक खेती प्रशिक्षण

* मंडुवा, झंगोरा, चुआलाई जैसी फसलों का बीज वितरण

* 2 FPO और 3 SHG आधारित कृषि स्टोर की स्थापना


#### अपेक्षित लाभ:


* खेती योग्य भूमि का पुनः उपयोग

* किसान आय में 60% तक वृद्धि


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### 👩‍🌾 **III. महिला सशक्तिकरण**


#### गतिविधियाँ:


* 10 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन

* अचार, पापड़, हस्तशिल्प इकाइयाँ

* महिला डिजिटल केंद्र (1 यूनिट)


#### अपेक्षित लाभ:


* महिला नेतृत्व में वृद्धि

* घरेलू आय में योगदान


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### 📚 **IV. शिक्षा और कौशल विकास**


#### गतिविधियाँ:


* एक ई-लर्निंग केंद्र की स्थापना

* 100 बालकों को डिजिटल/NEP आधारित शिक्षा

* 3 महीने का कृषि/पर्यावरण आधारित स्किल कोर्स


#### अपेक्षित लाभ:


* स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी

* युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रशिक्षण


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## 🔷 **4. कार्यान्वयन रणनीति (Implementation Strategy)**


* भागीदारी: ग्राम पंचायत, UDAEN Foundation, स्थानीय SHG, CSR कंपनियाँ

* समयावधि: 18 महीने (3 चरणों में)

* निगरानी: पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI 2.0) के माध्यम से मूल्यांकन


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## 🔷 **5. अनुमानित बजट (Estimated Budget)**


| घटक                | लागत (₹ लाख में) |

| ------------------ | ---------------- |

| जल संरक्षण         | ₹12.00 लाख       |

| कृषि सुधार         | ₹15.00 लाख       |

| महिला सशक्तिकरण    | ₹10.00 लाख       |

| शिक्षा/कौशल केंद्र | ₹8.00 लाख        |

| **कुल लागत**       | **₹45.00 लाख**   |


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## 🔷 **6. अपेक्षित परिणाम (Expected Outcomes)**


* 200 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ

* जल स्रोतों का पुनर्जीवन

* SHG आधारित 50 महिलाओं की आयवृद्धि

* डिजिटल शिक्षा और कौशल प्राप्त 100+ ग्रामीण युवा


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## 🔷 **7. संभावित फंडिंग स्रोत (Funding Sources)**


* **CSR कंपनियाँ** (जैसे: ONGC, NHPC, HCL Foundation)

* **राज्य योजना**: ग्राम्य विकास विभाग, जल जीवन मिशन

* **NGO सहयोग**: UDAEN Foundation, NABARD, UNDP आदि

* **Panchayat निधि + MGNREGA संयोजन**


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### 🌐 **पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 पोर्टल की शुरूआत**

 ### 🌐 **पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 पोर्टल की शुरूआत**


*(Panchayat Development Index – Version 2.0)*


भारत सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के समग्र विकास को ट्रैक करने और उन्हें डेटा-संचालित शासन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए **पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 पोर्टल** की शुरुआत की गई है। यह पहल डिजिटल इंडिया मिशन, आत्मनिर्भर भारत और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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## 🔹 **PAI 2.0 क्या है?**


**PAI 2.0 (Panchayat Unnati Suchkank)** एक डिजिटल पोर्टल है जिसे **केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय** ने विकसित किया है, जिसका उद्देश्य है:


* ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन

* आंकड़ों के आधार पर पंचायतों को रैंक करना

* बेहतर योजना निर्माण और संसाधनों के कुशल उपयोग में सहायता देना


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## 🧩 **PAI 2.0 की प्रमुख विशेषताएँ**


1. ✅ **डेटा आधारित मूल्यांकन:**

   पंचायतों का मूल्यांकन कई विषयगत क्षेत्रों और सूचकांकों के आधार पर किया जाता है।


2. 📊 **13 मुख्य सेक्टर:**

   जैसे – जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, पर्यावरण, सामाजिक समावेशन, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल साक्षरता, शासन इत्यादि।


3. 🏆 **रैंकिंग और प्रतिस्पर्धा:**

   पंचायतों को उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग दी जाती है, जिससे प्रतिस्पर्धी विकास को बढ़ावा मिलता है।


4. 📍 **स्थान-आधारित डैशबोर्ड:**

   प्रत्येक ग्राम पंचायत का डिजिटल प्रोफ़ाइल, जिसमें उसका प्रदर्शन, योजनाएँ और सुधार दिखते हैं।


5. 🧠 **एआई और एमएल इंटीग्रेशन:**

   डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग का उपयोग करके सुझाव और चेतावनी प्रणाली भी विकसित की जा रही है।


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## 🎯 **PAI 2.0 के उद्देश्य**


* ग्राम पंचायतों में *डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस* को बढ़ावा देना

* *साक्ष्य आधारित योजना निर्माण* को सशक्त करना

* ग्रामों को आत्मनिर्भर और सतत विकास की ओर ले जाना

* *SDG-aligned Panchayat Development Plan (GPDP)* को ट्रैक करना

* पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण को दिशा देना


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## 🌿 **उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में संभावनाएँ:**


* **जैव विविधता और जल स्रोत प्रबंधन** के सूचकांक पर विशेष ध्यान

* **पर्यटन, कृषि, महिला SHG गतिविधियाँ** पंचायत मूल्यांकन में शामिल

* **भौगोलिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए रियल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग**


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## 📲 **PAI 2.0 पोर्टल तक कैसे पहुँचें?**


आप इसे **[https://panchayat.gov.in](https://panchayat.gov.in)** या विशेष PAI पोर्टल के माध्यम से देख सकते हैं, जहाँ पंचायतवार डैशबोर्ड, रैंकिंग और सुधार संकेत उपलब्ध हैं।


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**हीट वेव्स (लू) और उत्तराखंड के पर्यावरण, मनुष्य व जैव विविधता पर प्रभाव**

 **हीट वेव्स (लू) और उत्तराखंड के पर्यावरण, मनुष्य व जैव विविधता पर प्रभाव**

*(प्रासंगिक विश्लेषण एवं समाधान)*


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## 🔥 **हीट वेव्स (लू) क्या हैं?**


हीट वेव्स वह स्थिति होती है जब लगातार कई दिनों तक सामान्य से अधिक तापमान रिकॉर्ड किया जाता है। यह जलवायु परिवर्तन की सबसे गंभीर चेतावनियों में से एक है, जो पर्वतीय क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड को भी अब तीव्रता से प्रभावित कर रही है।


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## 🌄 **उत्तराखंड में हीट वेव्स का कारण**


* जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में वृद्धि

* वनों की कटाई और प्राकृतिक आवरण का क्षरण

* कंक्रीट संरचनाओं और शहरीकरण का विस्तार

* जल स्रोतों का सूखना और पारंपरिक जल प्रणालियों की उपेक्षा


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## 👥 **मनुष्य पर प्रभाव**


1. **स्वास्थ्य पर असर**


   * वृद्ध, बच्चे और मजदूर सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं

   * डिहाइड्रेशन, लू लगना, हीट स्ट्रोक जैसी बीमारियाँ बढ़ती हैं

   * मानसिक तनाव और थकावट


2. **खेती और आजीविका पर असर**


   * जल संकट से सिंचाई कठिन

   * फसलें समय से पहले सूखना

   * ग्रामीण बेरोजगारी व पलायन में वृद्धि


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## 🌿 **पर्यावरण पर प्रभाव**


1. **वन क्षेत्र में सूखापन**


   * वनों में आग की घटनाएँ बढ़ती हैं (जैसे टिहरी, पौड़ी, नैनीताल में)

   * जैविक संतुलन प्रभावित होता है


2. **जल स्रोतों पर असर**


   * नदियाँ, धाराएँ, गदेरे सूखते हैं

   * भूमिगत जल स्तर गिरता है


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## 🐾 **जैव विविधता पर प्रभाव**


1. **पशु-पक्षियों का निवास संकट**


   * जल और छाया की कमी से माइग्रेशन या मृत्यु

   * पक्षियों के प्रजनन और भोजन चक्र में अवरोध


2. **पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन**


   * कीटों, परागणकर्ताओं की संख्या में कमी

   * खाद्य श्रृंखला पर प्रभाव


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## ✅ **संभावित समाधान और उपाय**


### 🔹 *स्थानीय स्तर पर:*


* पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन (नौला-धारे)

* छायादार वृक्षारोपण अभियान

* गांव स्तर पर वर्षा जल संग्रहण

* सामुदायिक जल प्रबंधन समितियाँ


### 🔹 *सरकारी व नीति स्तर पर:*


* पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष हीट एक्शन प्लान

* "ग्रीन बिल्डिंग" नीति को ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करना

* मौसम अलर्ट व राहत सेवाओं का सुदृढ़ीकरण

* वन संरक्षण व पुनर्जनन नीति का सख्त पालन


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## 📢 **जन-जागरूकता की आवश्यकता**


* स्कूलों, पंचायतों, महिला मंडलों व युवक दलों के माध्यम से जागरूकता

* स्थानीय भाषा में जलवायु शिक्षा

* रेडियो, सोशल मीडिया और नुक्कड़ नाटकों का प्रयोग


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**‘डार्क पैटर्न’ के बारे में उपभोक्ताओं की चिंताएँ**

 **‘डार्क पैटर्न’ के बारे में उपभोक्ताओं की चिंताएँ**

*(Dark Patterns in Consumer Experience)*


‘डार्क पैटर्न’ वे डिज़ाइन तकनीकें होती हैं जो डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, वेबसाइट या ऐप पर उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध कुछ कार्य करने के लिए गुमराह करती हैं — जैसे अनजाने में सदस्यता लेना, ट्रैकिंग स्वीकार करना, या महंगे विकल्प चुनना। ये उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शिता के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।


### प्रमुख चिंताएँ:


#### 1. **भ्रमित करने वाली सदस्यता योजनाएँ**


* बहुत से उपभोक्ता अनजाने में *auto-renewal* सदस्यता में फँस जाते हैं, क्योंकि रद्द करने का विकल्प जानबूझकर छिपाया जाता है या जटिल बना दिया जाता है।


#### 2. **डिफॉल्ट ट्रैकिंग और डेटा संग्रहण**


* वेबसाइटें ‘opt-out’ की जगह ‘opt-in’ को डिफॉल्ट बनाती हैं, जिससे यूज़र का डेटा उनकी जानकारी के बिना ट्रैक होता है।


#### 3. **फर्जी तात्कालिकता का निर्माण**


* “केवल 2 सीटें बची हैं”, “यह ऑफर 5 मिनट में खत्म हो जाएगा” जैसे संदेशों से उपभोक्ता पर दबाव बनाया जाता है कि वे सोच-समझकर निर्णय न लें।


#### 4. **छुपी हुई फीस और अंतिम समय पर लागत में बढ़ोतरी**


* शुरुआत में दिखने वाली कीमत आकर्षक होती है, लेकिन चेकआउट के समय टैक्स, सर्विस चार्ज या डिलीवरी शुल्क जोड़ दिए जाते हैं।


#### 5. **अनजानी सहमति (Uninformed Consent)**


* गोपनीयता नीति और नियम शर्तों को जटिल भाषा में छिपाकर, उपभोक्ताओं से सहमति ली जाती है जो वे सही से पढ़ नहीं पाते।


#### 6. **विकल्प छुपाना (Hiding Unfavorable Options)**


* 'No thanks' या 'Cancel' जैसे विकल्प को बहुत छोटे फॉन्ट में या धुंधले रंग में दिखाया जाता है ताकि उपभोक्ता गलती से ‘Agree’ बटन पर क्लिक करे।


#### 7. **गैर-ज़रूरी ईमेल और नोटिफिकेशन**


* यूज़र को बिना स्पष्ट अनुमति के मार्केटिंग ईमेल और पुश नोटिफिकेशन भेजे जाते हैं।


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### उपभोक्ताओं की अपेक्षाएँ:


* **पारदर्शिता:** डिज़ाइन और इंटरफेस में स्पष्टता हो।

* **सूचित सहमति:** जो भी निर्णय उपभोक्ता ले, वह पूरी जानकारी पर आधारित हो।

* **सहज अनुभव:** सदस्यता या ट्रैकिंग रद्द करना आसान और बिना दबाव के हो।

* **नियमों का पालन:** कंपनियाँ उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का पालन करें और भ्रामक रणनीतियों से बचें।


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### भारत सरकार और सीसीपीए (CCPA) की पहल:


भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 2023 में ‘डार्क पैटर्न्स’ के विरुद्ध दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि डिजिटल कंपनियाँ पारदर्शिता रखें और भ्रामक UX/UI के लिए दंडित की जाएँ।


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न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...