Friday, October 24, 2025

उत्तराखंड में विकास की सच्ची कसौटी



उत्तराखंड में विकास की सच्ची कसौटी

लेखक: [Dinesh Gusain]

स्वास्थ्य, शिक्षा, अस्पताल, सड़क, रोज़ी-रोटी और रोजगार — ये किसी भी व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं। इन्हें पूरा करना किसी भी सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। अगर विकास का पैमाना यही है, तो उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है।

राज्य में आज भी बहुत से गाँवों में स्वास्थ्य सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, मेडिकल उपकरणों की अधूरी व्यवस्था और समय पर दवाओं का अभाव आम बात है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद शिक्षक और संसाधनों की कमी बच्चों की भविष्य की संभावनाओं को सीमित कर रही है।

सड़क और यातायात सुविधाओं की हालत भी सुधार की मांग करती है। कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी कच्ची और खस्ताहाल सड़कों पर निर्भर हैं, जिससे जीवन और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे उन्हें अपने गाँव और राज्य छोड़ कर अन्य क्षेत्रों में नौकरी की तलाश करनी पड़ती है।

सरकारें योजनाएँ बनाती हैं, घोषणाएँ करती हैं, लेकिन ज़मीन पर वास्तविक परिवर्तन अक्सर दिखाई नहीं देता। विकास केवल आंकड़ों या बजट का नाम नहीं है। असली विकास तब होता है जब आम आदमी की जीवन गुणवत्ता सुधरे, वह सम्मानजनक जीवन जी सके, और अपने गाँव में सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करे।

उत्तराखंड में असली विकास तभी संभव है जब हर घर में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, रोजगार और सम्मान सुनिश्चित हों। केवल इसी स्थिति में हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारा राज्य सच में विकसित हो रहा है। यह समय है कि विकास के मापदंडों को आंकड़ों की जगह नागरिकों की ज़िंदगी से मापा जाए।

वास्तविक विकास वह है जो जनता की जरूरतों को पूरा करे, उन्हें आत्मनिर्भर बनाए और पहाड़ की नई पीढ़ी को अपने घर और गाँव से जोड़ सके। उत्तराखंड के लिए यही सच्चा विकास होगा।


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Tuesday, October 21, 2025

कभी हर घर में सोना था, आज हर घर में कर्ज़ है — क्यों?



🪙 कभी हर घर में सोना था, आज हर घर में कर्ज़ है — क्यों?

✍️ संपादकीय लेख

कभी भारत के गाँवों और शहरों के घरों में सोने की खनक थी।
न ज़्यादा कमाने की होड़, न ज़्यादा दिखाने की चाह।
हर घर में थोड़ी ज़मीन, कुछ मवेशी, कुछ अनाज और थोड़ा-बहुत सोना — यही असली संपत्ति थी।
पर आज हर घर में EMI है, लोन है, कर्ज़ है।
हर सुबह अख़बार के साथ “ब्याज दरों” की चिंता भी आती है।
सवाल उठता है — आख़िर ऐसा हुआ क्यों?


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🏠 पहले आत्मनिर्भरता थी, अब उपभोगवाद है

भारत का समाज आत्मनिर्भर था।
हर परिवार खेती करता, अनाज बोता, तेल पेरता, कपड़ा बुनता था।
आज हर चीज़ बाज़ार से आती है — दूध से लेकर घर तक।
यह बदलाव सिर्फ़ आर्थिक नहीं, मानसिक भी है।
हमने “ज़रूरत” को “इच्छा” और फिर “दिखावे” में बदल दिया।


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💸 बचत की जगह कर्ज़ ने ले ली

जहाँ पहले लोग गहनों और अनाज में बचत करते थे,
अब हर चीज़ EMI पर खरीदी जाती है —
मोबाइल से लेकर मकान तक।
हर महीने की कमाई पहले से ही “भविष्य के ब्याज” में गिरवी रख दी जाती है।
बचत की संस्कृति मिट गई, और कर्ज़ की संस्कृति आ गई।


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🧠 संयुक्त परिवार बिखरे, आर्थिक सुरक्षा भी टूटी

संयुक्त परिवारों में खर्च और संकट दोनों साझा होते थे।
अब हर व्यक्ति अकेला कमाता है, अकेला संघर्ष करता है।
सुरक्षा का जो सामाजिक तंत्र था, वह टूट चुका है।
नतीजा — व्यक्ति आर्थिक रूप से अस्थिर और मानसिक रूप से असंतुलित हो गया।


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🏭 उत्पादन की जगह उपभोग ने ली

पहले लोग “बनाते” थे, अब “खरीदते” हैं।
हमारी मेहनत दूसरों के उत्पाद बेचने में लग रही है।
विदेशी कंपनियाँ हमारे घरों की खिड़कियों से घुस आई हैं —
और हमारी आत्मा धीरे-धीरे बाहर निकल रही है।


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🌾 संतोष खो गया, दौड़ शुरू हो गई

पहले समाज में ‘संतोष’ एक मूल्य था।
आज ‘प्रतिस्पर्धा’ नया धर्म है।
सोना, ज़मीन और मूल्य — सब एक-एक कर गिरवी रख दिए गए हैं
दिखावे की चमक और आधुनिकता के नाम पर।


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💡 निष्कर्ष:

> जब जीवन सरल था, घरों में सोना था।
जब जीवन जटिल हुआ, घरों में कर्ज़ आ गया।



सवाल अब भी वही है —
क्या हम फिर से संतुलन, आत्मनिर्भरता और संतोष की ओर लौट सकते हैं?


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Monday, October 20, 2025

दीपावली की रात उल्लूओं की रखवाली में वन विभाग मुस्तैद रहा, अंधविश्वास के शिकार से बचाने की पूरी तैयारी तेज हुई



🌙 दीपावली की रात उल्लूओं की रखवाली में वन विभाग मुस्तैद रहा, अंधविश्वास के शिकार से बचाने की पूरी तैयारी तेज हुई 

रिपोर्ट: Udaen News Network | कोटद्वार

दीपावली की रोशनी के साथ जब लोग खुशियों में डूबे होते हैं, उसी समय जंगलों में एक सन्नाटा और खतरा दोनों मंडराने लगते हैं। यह खतरा है उल्लुओं के अवैध शिकार का, जो हर साल दीपावली के मौके पर बढ़ जाता है।
अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़ी मान्यताओं के चलते कई लोग उल्लू की बलि को शुभ लाभ का प्रतीक मानते हैं, जबकि वास्तव में यह एक दंडनीय अपराध है।

इसी पृष्ठभूमि में कोटद्वार वन प्रभाग ने इस वर्ष दीपावली पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। विभाग के सभी वनकर्मी पूरी रात गश्त पर रहेंगे ताकि उल्लुओं सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

🦉 अंधविश्वास पर रोक और संरक्षण का संकल्प

वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष पहले से ही कई गश्ती दल बनाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, मंदिर परिसरों और घने वन इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि “दीपावली के दौरान उल्लुओं के अवैध व्यापार और शिकार को रोकना हमारी प्राथमिकता है। स्थानीय नागरिकों की मदद से हम इस बार और अधिक सतर्क रहेंगे।”

🌿 उल्लू का पर्यावरणीय महत्व

उल्लू प्रकृति का रात्रि प्रहरी है — यह खेतों में चूहों और कीटों को नियंत्रित करता है, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उल्लू का शिकार तीन साल की सजा या जुर्माने योग्य अपराध है।

सामाजिक संगठनों की पहल

Udaen Foundation और स्थानीय वन पंचायतों ने भी इस दिशा में जनजागरूकता अभियान शुरू किया है।
“दीप जलाओ, उल्लू बचाओ” और “प्रकृति ही असली लक्ष्मी है” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि उल्लू की बलि से न तो धन की प्राप्ति होती है और न ही सौभाग्य।

🚨 जनता से अपील

वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि अगर कहीं उल्लू या किसी अन्य वन्यजीव के शिकार की गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत नज़दीकी वन चौकी या हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।


Udaen News Network की ओर से संदेश:
इस दीपावली पर आइए
“दीप जलाएँ — जीवन नहीं बुझाएँ।”
प्रकृति की रक्षा ही सबसे बड़ा त्योहार है। 🌏✨



Sunday, October 19, 2025

✍️ “दीप से पटाखे तक — जब परंपरा ने रूप बदला”

✍️ “दीप से पटाखे तक — जब परंपरा ने रूप बदला”

दीपावली, भारत का सबसे प्रकाशमय और पवित्र त्योहार, “अंधकार से प्रकाश की ओर” बढ़ने का प्रतीक है। इस पर्व का मूल स्वरूप सदियों पुराना है, लेकिन समय के साथ इसकी परंपराएँ भी बदलती गई हैं।

🔶 दीपों की आराधना: त्रेता युग की परंपरा

कहा जाता है कि जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों ने उनके स्वागत में संपूर्ण अयोध्या को दीपों से आलोकित कर दिया। तभी से दीपावली का अर्थ ‘दीपों की पंक्ति’ बन गया।
वैदिक ग्रंथों — ऋग्वेद, अथर्ववेद और स्कंद पुराण — में भी दीपदान को शुभ माना गया है। उस समय दीप जलाना सद्भाव, शांति और समृद्धि का प्रतीक था।

💥 पटाखों का युग: मध्यकालीन प्रभाव

बारूद और आतिशबाज़ी भारत की मूल परंपरा नहीं थे। इसका आविष्कार 9वीं शताब्दी में चीन में हुआ और भारत में यह 13वीं–14वीं सदी के बीच पहुँचा।
मुगल सम्राट अकबर के काल में पटाखे जलाने और आतिशबाज़ी देखने की प्रथा दरबारों में आम हो गई। धीरे-धीरे यह चमक आम जनता तक पहुँची और दीपावली का हिस्सा बन गई।

🌱 आज की सीख: पर्यावरण और परंपरा का संतुलन

दीपावली का असली अर्थ केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रकाश, करुणा और आत्मचिंतन है।
आज आवश्यकता है कि हम दीपों की परंपरा को जीवित रखते हुए, पटाखों के प्रदूषण से बचें। मिट्टी के दीये, घी के दीप और हरियाली से सजी दीपावली ही सच्चे अर्थों में “हर घर उजियारा” ला सकती है।


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Friday, October 17, 2025

झूठ, सच और मानव चेतना का दर्पण



झूठ, सच और मानव चेतना का दर्पण

हम जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं, वे जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं, वे जानते हैं कि हम जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं, हम जानते हैं कि वे जानते हैं कि हम जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं — लेकिन फिर भी वे झूठ बोल रहे हैं।

यह पंक्ति केवल एक कथन नहीं है; यह हमारे समाज, सत्ता, और मानव मनोविज्ञान का दर्पण है। इसमें झूठ और सच की जटिलता, सत्ता और जनता के बीच की दूरी, और मानव चेतना की विडम्बना सभी समाहित हैं।

झूठ और सच का खेल

पहली पंक्ति — “हम जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं” — हमें हमारी जागरूकता की याद दिलाती है। हम सच को पहचान सकते हैं, झूठ को समझ सकते हैं, और उसकी असत्यता को महसूस कर सकते हैं। लेकिन यही जागरूकता कभी-कभी व्यर्थ भी होती है, जब उसका सामना करने का कोई व्यावहारिक तरीका नहीं होता।

दूसरी पंक्ति — “वे जानते हैं कि वे झूठ बोल रहे हैं” — यह हमें उस आंतरिक सच का एहसास कराती है जिसे झूठ बोलने वाला जानता है। उन्हें भी अपनी असत्यता की पूर्ण जानकारी है, फिर भी उनका झूठ बोलना जारी रहता है। यह सत्ता, लाभ या किसी अन्य उद्देश्य के लिए जानबूझकर किया गया छल है।

तीसरी और चौथी पंक्ति — “वे जानते हैं कि हम जानते हैं…” और “हम जानते हैं कि वे जानते हैं कि हम जानते हैं…” — इस चरण में स्थिति और जटिल हो जाती है। यह सामूहिक चेतना और असहायता की अवस्था है। सच सबको मालूम है, झूठ भी सभी के सामने है, लेकिन फिर भी परिवर्तन नहीं हो पाता। यह मानव समाज की उस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दिखाता है जहाँ सच्चाई और न्याय केवल ज्ञात होते हैं, परंतु कार्रवाई का अभाव उनका पालन नहीं कर पाता।

झूठ की अडिग शक्ति

आखिरी पंक्ति — “लेकिन फिर भी वे झूठ बोल रहे हैं” — यह सबसे भयानक और चिंताजनक सत्य है। यह दिखाता है कि झूठ अब सिर्फ असत्य नहीं रहा, बल्कि वह सत्ता और व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। जब सच और झूठ के बीच अंतर सबको ज्ञात हो और फिर भी असत्य चलता रहे, तब समाज में निराशा, अविश्वास और मानसिक थकावट बढ़ती है।

समाज और व्यक्तिगत जिम्मेदारी

यह कथन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम सच के प्रति सक्रिय हैं या केवल निरीक्षक बनकर बैठ गए हैं? क्या हम अपनी चेतना को केवल जानने तक सीमित रखेंगे, या झूठ के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? क्योंकि झूठ केवल तब तक शक्तिशाली रहता है जब सच के ज्ञात होने के बावजूद कोई उसे चुनौती न दे।

निष्कर्ष

यह पंक्ति किसी व्यक्तिवादी या राजनीतिक सन्दर्भ तक सीमित नहीं है; यह हर उस परिस्थिति पर लागू होती है जहाँ सच और झूठ का संघर्ष हो, जहाँ मानव चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच दूरी हो। यह हमें यह याद दिलाती है कि सच की पहचान और उसे अपनाना केवल व्यक्तिगत जागरूकता नहीं, बल्कि सामूहिक साहस की भी मांग करता है।

सच्चाई की ताक़त तभी महसूस होती है जब हम न केवल जानते हैं, बल्कि उसका समर्थन करते हैं और झूठ के खिलाफ खड़े होते हैं।

Tuesday, October 14, 2025

ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक निर्माण के लिए पूरा सिस्टम और ऑटोमेशन सेटअप कैसे बनाया जा सकता है — यानी कच्चे माल से लेकर बोतल पैकिंग तक की पूरी प्रक्रिया



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🧩 1. सिस्टम की मुख्य संरचना

आपके उत्पादन सिस्टम में पाँच मुख्य भाग होने चाहिए:

चरण कार्य उपयोगी तकनीक

1. कच्चे माल की तैयारी पानी शोधन, सिरप तैयारी आरओ सिस्टम, शुगर डिसॉल्वर
2. मिक्सिंग और ब्लेंडिंग सभी अवयवों का मिश्रण PLC नियंत्रित ब्लेंडिंग टैंक
3. कार्बोनेशन / फर्मेंटेशन CO₂ मिलाना या प्राकृतिक फर्मेंटेशन कार्बोनेटर या फर्मेंटर
4. बॉटलिंग व पैकेजिंग रिंसिंग, फिलिंग, कैपिंग, लेबलिंग ऑटोमेटिक फिलिंग लाइन
5. गुणवत्ता नियंत्रण व डेटा ट्रैकिंग pH, ब्रिक्स, तापमान, लेबलिंग डेटा SCADA + QR/बारकोड सिस्टम



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⚙️ 2. प्रक्रिया का ऑटोमेशन (Automation Design)

A. पानी शोधन यूनिट (Water Treatment)

सिस्टम: RO + UV + मिनरल डोजिंग

ऑटोमेशन: फ्लोमीटर, pH सेंसर, और कंडक्टिविटी सेंसर PLC से जुड़े होते हैं।

लक्ष्य: पानी की गुणवत्ता को स्थिर रखना (TDS 20–30 ppm)।



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B. सिरप तैयारी (Syrup Preparation & Mixing)

चरण:

1. गर्म पानी में चीनी (या बुरांश, माल्टा आदि के अर्क) को घोला जाता है।


2. फ्लेवर, विटामिन, माल्ट आदि को डोजिंग पंप से मिलाया जाता है।


3. मिश्रण को स्टेनलेस-स्टील टैंक में ब्लेंड किया जाता है।



ऑटोमेशन:

तापमान, RPM और अवयवों की मात्रा PLC द्वारा नियंत्रित।

लोड सेल से टैंक के नीचे वज़न के आधार पर सटीक मिश्रण।




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C. ब्लेंडिंग व कार्बोनेशन यूनिट

सिस्टम: सिरप और पानी का ऑनलाइन ब्लेंडिंग + CO₂ इंजेक्शन।

ऑटोमेशन:

फ्लो सेंसर सिरप-पानी अनुपात नियंत्रित करते हैं (जैसे 1:5)।

CO₂ का दबाव और तापमान सेंसर द्वारा PID कंट्रोल में रखा जाता है।

एक समान कार्बोनेशन सुनिश्चित होता है (3.0–4.0 वॉल्यूम CO₂)।




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D. फिलिंग और पैकेजिंग ऑटोमेशन

मशीनें:

रिंसिंग → फिलिंग → कैपिंग (3-इन-1 मोनोब्लॉक सिस्टम)

लेबलिंग → डेट कोडिंग → श्रिंक रैपिंग → कार्टन पैकिंग।


ऑटोमेशन:

बोतल डिटेक्शन के लिए ऑप्टिकल सेंसर।

सर्वो मोटर द्वारा स्पीड कंट्रोल।

HMI पैनल से ऑपरेटर को नियंत्रण।

QR कोड/बारकोड के जरिए बैच ट्रैकिंग।




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E. गुणवत्ता और मॉनिटरिंग सिस्टम

ऑनलाइन सेंसर: Brix (शर्करा माप), pH, CO₂ प्रेशर, तापमान।

डेटा लॉगिंग: सभी मापदंड SCADA या क्लाउड पर सेव।

ऑटोमेशन: किसी भी विचलन पर अलर्ट या मशीन ऑटो स्टॉप।



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🧠 3. डिजिटल ऑटोमेशन (Smart Factory)

स्तर टूल उद्देश्य

PLC कंट्रोल Siemens / Allen-Bradley पूरे प्रोसेस का अनुक्रम नियंत्रित
HMI इंटरफेस टच स्क्रीन पैनल ऑपरेटर नियंत्रण
SCADA सिस्टम Wonderware / Ignition डेटा विज़ुअल मॉनिटरिंग
IoT सेंसर तापमान, CO₂, फ्लो क्लाउड पर रियल-टाइम डेटा
ERP इंटीग्रेशन Odoo / SAP कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक ट्रैकिंग



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🧪 4. एनर्जी ड्रिंक निर्माण के लिए अतिरिक्त ऑटोमेशन

प्रक्रिया विवरण

फंक्शनल इंग्रीडिएंट्स डोजिंग कैफीन, टॉरिन, विटामिन आदि की माइक्रो मात्रा पंप से डालना
होमोजेनाइजेशन सभी तत्वों का एकसमान मिश्रण
पाश्चराइजेशन / कोल्ड फिलिंग बिना प्रिज़र्वेटिव के शेल्फ लाइफ बढ़ाना
नाइट्रोजन डोजिंग (वैकल्पिक) नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक के लिए स्थिरता बढ़ाना



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🔋 5. सहायक यूटिलिटी सिस्टम (Utilities)

यूटिलिटी ऑटोमेशन सिस्टम

बॉयलर / हॉट वाटर ऑटो फ्यूल कंट्रोल + थर्मोस्टेट
कंप्रेस्ड एयर ऑटो ड्रेन वॉल्व
चिलिंग सिस्टम टेम्परेचर सेंसर + ऑटो कंप्रेसर कंट्रोल
CIP (क्लीनिंग इन प्लेस) ऑटोमेटिक क्लीनिंग साइकल — क्षार व एसिड रिंस



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💼 6. कार्यान्वयन रोडमैप

चरण विवरण अनुमानित समय

1. डिजाइन फ्लो चार्ट, ऑटोमेशन लेआउट 2–4 सप्ताह
2. खरीद मशीन, सेंसर, PLC पैनल 4–6 सप्ताह
3. इंस्टॉलेशन मशीनरी व इलेक्ट्रिकल फिटिंग 3–5 सप्ताह
4. परीक्षण (Commissioning) सिस्टम कैलिब्रेशन, डेटा लिंकिंग 2 सप्ताह
5. प्रशिक्षण ऑपरेटर व क्वालिटी टीम को प्रशिक्षण 1 सप्ताह



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🌱 7. वैकल्पिक उन्नत सुविधाएँ

सोलर एनर्जी इंटीग्रेशन (ऊर्जा बचत के लिए)

AI आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस

कच्चे माल की इन्वेंट्री पर ऑटो अलर्ट सिस्टम

QR आधारित प्रोडक्ट ट्रैकिंग और उपभोक्ता पारदर्शिता

Saturday, October 4, 2025

आपकी पूंजी, आपका अधिकार” राष्ट्रव्यापी वित्तीय जागरूकता अभियान



अभियान का नाम

आपकी पूंजी, आपका अधिकार (Your Money, Your Right)

📍 शुभारंभ

  • स्थान: गांधीनगर, गुजरात

  • तारीख: 4 अक्टूबर 2025

  • शुभारंभकर्ता: केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण

  • आयोजक संस्था: वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

  • सहयोगी संस्थाएँ:

    • RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक)

    • SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड)

    • IRDAI (बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण)

    • PFRDA (पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण)

    • IEPFA (Investor Education and Protection Fund Authority)


🎯 मुख्य उद्देश्य

इस अभियान का उद्देश्य देश के आम नागरिकों को अनक्लेम्ड (बिना दावा की गई) वित्तीय संपत्तियों के बारे में जागरूक करना है —
जैसे:

  • निष्क्रिय बैंक खाते

  • पुरानी बीमा पॉलिसियाँ

  • म्यूचुअल फंड या शेयर में बची राशि

  • लाभांश (Dividend)

  • पीएफ / पेंशन से जुड़ी रकम

  • निवेश के अन्य अप्राप्त दावे


💰 कितनी राशि पड़ी है बिना दावा के?

लगभग ₹1.84 लाख करोड़ रुपये की ऐसी संपत्तियाँ देशभर में बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थाओं के पास पड़ी हुई हैं, जिन्हें उनके वास्तविक मालिक या वारिस अब तक नहीं पहचान पाए हैं।


🧭 अभियान की अवधि

  • अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025 तक (तीन महीने)

  • देश के सभी राज्यों और ज़िलों में जागरूकता शिविर, डिजिटल कैंप और मीडिया कैंपेन के ज़रिए इसका प्रचार किया जाएगा।


🪶 मुख्य सिद्धांत — 3A मॉडल

  1. Awareness (जागरूकता): लोगों को यह बताना कि उनकी पूंजी कहाँ फँसी हो सकती है।

  2. Accessibility (पहुंच): उन्हें डिजिटल और ऑफलाइन माध्यम से अपनी जानकारी तक पहुंच दिलाना।

  3. Action (कार्रवाई): आसान प्रक्रिया से दावा कर अपनी पूंजी वापस प्राप्त करना।


💻 डिजिटल पोर्टल: UDGAM

UDGAM (Unclaimed Deposits – Gateway to Access Information)
👉 वेबसाइट: https://udgam.rbi.org.in

🔹 UDGAM पोर्टल से कैसे पता करें कि आपकी राशि पड़ी है या नहीं:

  1. वेबसाइट पर जाएँ — udgam.rbi.org.in

  2. मोबाइल नंबर या PAN कार्ड से लॉगिन करें।

  3. अपना नाम और बैंक चुनें।

  4. सिस्टम बताएगा कि आपके नाम से कोई बिना दावा की गई जमा या निवेश राशि तो नहीं है।

  5. अगर है, तो आपको बैंक/संस्था से दावा करने की प्रक्रिया का विवरण मिल जाएगा।


⚙️ दावा करने की प्रक्रिया

  1. संबंधित बैंक या संस्था से संपर्क करें।

  2. आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें (पहचान पत्र, खाते का विवरण, वारिस प्रमाण आदि)।

  3. सत्यापन के बाद राशि सीधे आपके खाते में ट्रांसफर की जाएगी।


🗣️ वित्त मंत्री का संदेश

“ये रकम केवल कागज़ पर लिखे अंक नहीं हैं, ये आम भारतीय परिवारों की मेहनत की कमाई है। सरकार का कर्तव्य है कि ये धन अपने असली मालिकों तक पहुंचे।”
निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री


📢 जनजागरूकता के तरीके

  • रेडियो / टीवी / सोशल मीडिया पर प्रचार

  • ग्राम पंचायत और नगर स्तर पर कैम्प

  • बैंक शाखाओं में सहायता केंद्र

  • निवेशक शिक्षा कार्यक्रम

  • मोबाइल वैन और डिजिटल सेवा केंद्र



न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...