Friday, October 24, 2025

उत्तराखंड में विकास की सच्ची कसौटी



उत्तराखंड में विकास की सच्ची कसौटी

लेखक: [Dinesh Gusain]

स्वास्थ्य, शिक्षा, अस्पताल, सड़क, रोज़ी-रोटी और रोजगार — ये किसी भी व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं। इन्हें पूरा करना किसी भी सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। अगर विकास का पैमाना यही है, तो उत्तराखंड की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है।

राज्य में आज भी बहुत से गाँवों में स्वास्थ्य सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, मेडिकल उपकरणों की अधूरी व्यवस्था और समय पर दवाओं का अभाव आम बात है। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद शिक्षक और संसाधनों की कमी बच्चों की भविष्य की संभावनाओं को सीमित कर रही है।

सड़क और यातायात सुविधाओं की हालत भी सुधार की मांग करती है। कई ग्रामीण क्षेत्र आज भी कच्ची और खस्ताहाल सड़कों पर निर्भर हैं, जिससे जीवन और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे उन्हें अपने गाँव और राज्य छोड़ कर अन्य क्षेत्रों में नौकरी की तलाश करनी पड़ती है।

सरकारें योजनाएँ बनाती हैं, घोषणाएँ करती हैं, लेकिन ज़मीन पर वास्तविक परिवर्तन अक्सर दिखाई नहीं देता। विकास केवल आंकड़ों या बजट का नाम नहीं है। असली विकास तब होता है जब आम आदमी की जीवन गुणवत्ता सुधरे, वह सम्मानजनक जीवन जी सके, और अपने गाँव में सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करे।

उत्तराखंड में असली विकास तभी संभव है जब हर घर में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, रोजगार और सम्मान सुनिश्चित हों। केवल इसी स्थिति में हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारा राज्य सच में विकसित हो रहा है। यह समय है कि विकास के मापदंडों को आंकड़ों की जगह नागरिकों की ज़िंदगी से मापा जाए।

वास्तविक विकास वह है जो जनता की जरूरतों को पूरा करे, उन्हें आत्मनिर्भर बनाए और पहाड़ की नई पीढ़ी को अपने घर और गाँव से जोड़ सके। उत्तराखंड के लिए यही सच्चा विकास होगा।


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