Saturday, October 4, 2025

कांग्रेस का सत्याग्रह धरना केवल विरोध का मंच नहीं — यह आत्ममंथन और पुनर्जागरण का प्रतीक बन सकता है।

 

 

1. कोटद्वार में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति

कोटद्वार विधानसभा, गढ़वाल की सबसे चर्चित और संवेदनशील सीटों में से एक रही है। यह क्षेत्र कभी कांग्रेस का गढ़ था, परंतु पिछले दो विधानसभा चुनावों में पार्टी यहाँ अपनी पकड़ खो चुकी है।
मुख्य कारण रहे

  • आंतरिक गुटबाज़ी और ध्रुवीकरण,
  • स्थानीय नेतृत्व में समन्वय की कमी,
  • और नई पीढ़ी से संवाद का अभाव।

2. सत्याग्रह का राजनीतिक महत्व

वर्तमान में कांग्रेस का सत्याग्रह धरना केवल एक प्रदर्शननहीं, बल्कि राजनैतिक पुनर्स्थापन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
यह कदम:

  • संगठन को फिर से सक्रिय करने,
  • जनता के बीच पार्टी की मौजूदगी दिखाने,
  • और पुराने कार्यकर्ताओं को ऊर्जा देने का प्रयास है।

अगर इसे जनसंवाद के अभियान में बदला गया, तो यह सोई हुई कांग्रेस के लिए जागरण का बिगुल बन सकता है।


3. सुरेंद्र सिंह नेगी की भूमिका

पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की छवि "विकास पुरुष" और "साफ़-सुथरे नेता" के रूप में अब भी जनमानस में बनी हुई है।
हालांकि, दो बार की चुनावी हार ने यह स्पष्ट किया कि केवल व्यक्तिगत छवि काफी नहीं है
अब ज़रूरत है नई रणनीति और नए सहयोगियों की।

अगर नेगी:

  • युवाओं को मौका देते हैं,
  • स्थानीय मुद्दों (जैसे बेरोज़गारी, पलायन, नगर की अव्यवस्था) पर जनांदोलन खड़ा करते हैं,
  • और महिला नेतृत्व को वास्तविक स्थान देते हैं,
    तो वह न केवल कोटद्वार बल्कि पूरे पौड़ी जनपद में कांग्रेस का चेहरा पुनः स्थापित कर सकते हैं।

4. “स्लीपर सेल कांग्रेसकी चुनौती

स्लीपर सेल कांग्रेस यानी वे निष्क्रिय या विरोधाभासी तत्व जो पार्टी के भीतर रहकर संगठन की दिशा को भ्रमित करते हैं,
वही सबसे बड़ी चुनौती हैं।
नेतृत्व को चाहिए कि वह:

  • ऐसे तत्वों को पहचानकर अलग करे,
  • संगठन में निष्ठा और कार्यक्षमता को प्राथमिकता दे,
  • और नए चेहरों को ऊपर लाने का साहस दिखाए।

5. 2027 की राह और संभावित चेहरा

2027 का चुनाव कांग्रेस के लिए निर्णायक होगा।
यदि सुरेंद्र सिंह नेगी स्वयं को केवल पूर्व मंत्रीकी छवि से आगे बढ़ाकर
जननेताके रूप में पुनः स्थापित करते हैं,
तो वे न केवल कोटद्वार बल्कि गढ़वाल मंडल में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में उभर सकते हैं।


कांग्रेस का सत्याग्रह धरना केवल विरोध का मंच नहीं
यह आत्ममंथन और पुनर्जागरण का प्रतीक बन सकता है।

अब यह इस बात पर निर्भर करता है कि
पार्टी नेगी की छविको
संगठन की ऊर्जामें बदल पाती है या नहीं।


 

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