Saturday, October 4, 2025

“क्या एक सुविधा दूसरी समस्या को जन्म दे देती है, उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में?”


हाँ, अक्सर ऐसा होता है, और उत्तराखंड इसका एक जीवंत उदाहरण है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं 👇


🌄 1. सड़क सुविधा → पलायन और संस्कृति क्षरण

  • सड़कें विकास का प्रतीक मानी जाती हैं, लेकिन पहाड़ों में जब सड़कें बनीं, तो गाँवों से शहरों की दूरी घट गई।

  • युवाओं के लिए शिक्षा, नौकरी, स्वास्थ्य सुविधाएँ शहरों में उपलब्ध हुईं — नतीजा, गाँव खाली होने लगे

  • पारंपरिक खेती, लोककला, रीति-रिवाज और सामुदायिक जीवन पीछे छूट गया।
    👉 यानी सड़क सुविधा ने पलायन की समस्या को जन्म दिया।


2. बिजली और तकनीकी पहुँच → भौतिकता और उपभोक्तावाद

  • बिजली और मोबाइल नेटवर्क आने से गाँव आधुनिक बने, लेकिन सामाजिक जुड़ाव कमजोर हुआ।

  • युवा अब प्रकृति या कृषि से कम, और मोबाइल या सोशल मीडिया से अधिक जुड़े हैं।

  • इससे मानसिक तनाव, बेरोजगारी और अपेक्षा संस्कृति बढ़ी है।


🏡 3. पर्यटन सुविधा → पर्यावरणीय दबाव

  • उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सड़कें, होटल और होमस्टे बने।

  • लेकिन इसने कचरा, पानी की कमी, जैव विविधता हानि और धार्मिक स्थलों के व्यावसायीकरण को जन्म दिया।
    👉 “सुविधा” ने “पर्यावरण संकट” को जन्म दिया।


💧 4. जल परियोजनाएँ → पारिस्थितिक असंतुलन

  • बाँध, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, और जल विद्युत योजनाएँ ऊर्जा के लिए बनीं, लेकिन

  • नदियाँ सूखीं, भूगर्भीय जलस्तर गिरा, और भूस्खलन बढ़े।
    👉 विकास की सुविधा ने प्रकृति की स्थिरता को चुनौती दी।


🧑‍⚕️ 5. शहरी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएँ → ग्रामीण उपेक्षा

  • जब शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्र शहरों में केंद्रित हुए, तो

  • गाँवों के स्कूल और अस्पताल औपचारिकता मात्र रह गए।
    👉 इस सुविधा ने ग्रामीण असमानता और जनसंख्या असंतुलन बढ़ाया।


🧩 6. रोजगार सुविधा (सरकारी नौकरी, ठेकेदारी) → आत्मनिर्भरता का ह्रास

  • सरकारी नौकरी और ठेका संस्कृति ने युवाओं में खेती, पशुपालन जैसी पारंपरिक आजीविका से दूरी बढ़ाई।

  • गाँव आत्मनिर्भर न रहकर अनुदान-निर्भर बन गए।


⚖️ निष्कर्ष

उत्तराखंड में सुविधाएँ जब “स्थानीय परिस्थिति, संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन” को ध्यान में रखकर नहीं दी गईं,
तो उन्होंने नई समस्याओं को जन्म दिया।
इसलिए अब आवश्यकता है —
👉 “संवेदनशील विकास मॉडल” की, जहाँ हर सुविधा संतुलित, सहभागी और स्थायी हो।



No comments:

Post a Comment

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...