क्या सुरेंद्र
सिंह नेगी नई राजनीति के साथ पुरानी जमीन वापस ला पाएंगे?
कोटद्वार, उत्तराखंड | Udaen News Network रिपोर्ट
कोटद्वार विधानसभा
— जो कभी कांग्रेस
की मजबूत जमीन हुआ करती थी — अब राजनीतिक
ध्रुवीकरण और संगठनात्मक निष्क्रियता के कारण पार्टी के लिए चुनौती बन गई है।
ऐसे में कांग्रेस
द्वारा चलाया जा रहा सत्याग्रह धरना केवल विरोध का
प्रतीक नहीं, बल्कि पार्टी की “पुनर्स्थापना यात्रा” का संकेत माना जा रहा है।
सत्याग्रह: केवल मांगों की लड़ाई नहीं, बल्कि आत्मजागरण का प्रयास
वर्तमान सत्याग्रह
के केंद्र में स्थानीय जनसमस्याएँ अवश्य हैं, लेकिन इसके पीछे कांग्रेस का असली उद्देश्य अपनी खोई हुई
राजनीतिक ज़मीन को वापस पाना भी है।
यह आंदोलन संगठन
में नई ऊर्जा भरने, पुराने
कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जनता के बीच कांग्रेस की वापसी का संदेश देने की
कोशिश है।
सुरेंद्र सिंह नेगी: ‘विकास पुरुष’ से ‘जननेता’ बनने की चुनौती
पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह
नेगी की छवि स्वच्छ, विकासमुखी और विचारशील नेता के रूप में
अब भी कायम है।
परंतु दो विधानसभा
चुनावों की हार ने यह भी दिखा दिया कि केवल छवि नहीं, बल्कि संगठनात्मक पुनर्निर्माण अब ज़रूरी है।
नेगी के सामने अब
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या वे—
- युवाओं और
महिलाओं को नेतृत्व में लाकर नया जनाधार बना पाएंगे,
- निष्क्रिय और
विरोधाभासी तत्वों (“स्लीपर सेल
कांग्रेस”) को पहचानकर
अलग कर पाएंगे,
- और जनता के
मुद्दों को धरातल पर संघर्ष के रूप में रूपांतरित कर पाएंगे?
अगर हाँ, तो कोटद्वार ही नहीं, बल्कि गढ़वाल की राजनीति में भी उनका पुनरुत्थान
निश्चित है।
स्लीपर सेल कांग्रेस: आंतरिक विघटन की असली जड़
पार्टी की सबसे
बड़ी चुनौती उसके भीतर मौजूद वे तत्व हैं जो संगठन के बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से कमजोर करते हैं।
ये तत्व विचारों
को भ्रमित करते हैं, गुटबाजी को हवा
देते हैं और युवा व नए चेहरों के लिए रास्ता रोकते हैं।
कांग्रेस को 2027 से पहले इस आत्म-शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरना ही
होगा।
2027: कांग्रेस के लिए निर्णायक मोड़
आने वाला विधानसभा
चुनाव केवल एक राजनीतिक परीक्षा नहीं, बल्कि कांग्रेस के अस्तित्व की परीक्षा भी है।
यदि सुरेंद्र सिंह
नेगी अपने अनुभव को नई रणनीति के साथ जोड़ते हैं —
तो वे न केवल
कोटद्वार, बल्कि पूरे पौड़ी
जनपद और गढ़वाल क्षेत्र में कांग्रेस का पुनर्जागरण चेहरा बन सकते हैं।
ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री पद के
संभावित चेहरे के रूप में भी
उनकी छवि उभरना असंभव नहीं।
कोटद्वार का
सत्याग्रह कांग्रेस के लिए केवल विरोध का माध्यम नहीं,
बल्कि
"आत्ममंथन और पुनर्जागरण" का बिगुल साबित हो सकता है।
सवाल यही है — क्या कांग्रेस इस बार जनता की भावनाओं को
समझकर
नेगी की छवि को संगठन की ऊर्जा
में बदल पाएगी?
लेख: विशेष
राजनीतिक विश्लेषण विभाग, Udaen News Network
स्थान: कोटद्वार, जनपद पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड
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