धारा 138 – Negotiable Instruments Act, 1881 (NI Act)
👉 पूरा नाम:
Section 138 of the Negotiable Instruments Act, 1881
👉 मुख्य विषय:
चेक बाउंस (Dishonour of Cheque)
⚖️ धारा 138 का सारांश (In Simple Words):
अगर कोई व्यक्ति किसी बैंक को चेक जारी करता है और वह चेक बाउंस (Dishonour) हो जाता है — यानी बैंक उस चेक का भुगतान करने से इनकार कर देता है (जैसे "insufficient funds", "account closed" आदि कारणों से), तो यह व्यक्ति कानूनी अपराध (Offence) करता है।
📜 धारा 138 के आवश्यक तत्व (Essential Ingredients):
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चेक किसी देनदारी (legally enforceable debt or liability) को चुकाने के लिए जारी किया गया हो।
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चेक बैंक द्वारा अस्वीकृत (dishonoured) हो जाए – जैसे “Funds Insufficient” या “Exceeds Arrangement”।
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बैंक से जानकारी मिलने के 30 दिनों के भीतर पेयी (payee) को लिखित नोटिस भेजा जाए।
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नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर ड्रॉअर (drawer) राशि का भुगतान न करे।
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तब ही अपराध माना जाएगा और अदालत में शिकायत दर्ज (complaint) की जा सकती है।
⚖️ सजा (Punishment under Section 138):
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कैद: अधिकतम 2 वर्ष तक
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या जुर्माना: चेक राशि के दोगुने तक
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या दोनों
🕰️ समय सीमा (Limitation):
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बैंक से “चेक बाउंस” की जानकारी के 30 दिन के भीतर नोटिस भेजना।
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नोटिस के बाद 15 दिन तक भुगतान का इंतज़ार।
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यदि भुगतान नहीं होता, तो अगले 30 दिन के भीतर अदालत में शिकायत करनी होती है।
⚖️ संबंधित धाराएँ (Related Sections):
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Section 139: Presumption in favour of holder (चेक देने वाले पर यह अनुमान लगाया जाता है कि उसने देनदारी चुकाने के लिए चेक दिया है)
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Section 140: Certain defenses not allowed
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Section 141: जब अपराध कोई कंपनी करती है तो उसके निदेशकों/अधिकारियों पर भी कार्यवाही हो सकती है
📘 उदाहरण:
अगर रमेश ने सुरेश को ₹50,000 का चेक दिया और बैंक ने उसे “Funds Insufficient” बताकर लौटा दिया —
तो सुरेश 30 दिन में नोटिस भेजेगा।
अगर रमेश 15 दिन में भुगतान नहीं करता, तो सुरेश अदालत में धारा 138 NI Act के तहत केस दायर कर सकता है।