Monday, September 23, 2024

प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के मेम्बर का कार्य और पॉवर क्या है

 **प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)** का सदस्य एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय का हिस्सा होता है, जो प्रेस की स्वतंत्रता और नैतिकता को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। इसके सदस्य आमतौर पर विभिन्न वर्गों से आते हैं, जिनमें संपादक, पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ, और सरकारी प्रतिनिधि शामिल होते हैं। उनके कार्य और शक्तियां निम्नलिखित हैं:


### **प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य की भूमिकाएं और कार्य:**


1. **प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा**:  

   प्रेस की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार के अवांछनीय हस्तक्षेप या दबाव को रोकने के लिए सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रेस स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके और अभिव्यक्ति की आज़ादी को बनाए रखा जाए।


2. **शिकायतों का निपटारा**:  

   PCI के सदस्य प्रेस से संबंधित किसी भी शिकायत का निपटारा करते हैं। अगर कोई व्यक्ति, संगठन, या सरकार किसी समाचार पत्र या पत्रकार की सामग्री से असंतुष्ट है, तो वे PCI में शिकायत कर सकते हैं। सदस्य इस मामले की जांच करते हैं और निष्पक्ष समाधान निकालते हैं।


3. **आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना**:  

   PCI द्वारा बनाए गए **प्रेस के लिए आचार संहिता** (Code of Ethics) के तहत सदस्य यह सुनिश्चित करते हैं कि पत्रकार और समाचार एजेंसियां नैतिकता और मानकों के अनुरूप काम कर रही हैं। वे अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं, अगर पत्रकारिता में कोई नैतिक उल्लंघन होता है।


4. **सलाहकार भूमिका**:  

   PCI के सदस्य सरकार और अन्य संस्थाओं को प्रेस से जुड़े मुद्दों पर सलाह देने का काम करते हैं। वे प्रेस कानून, नियमों और पत्रकारिता के सुधार से जुड़े मुद्दों पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।


5. **समाज और प्रेस के बीच संवाद**:  

   सदस्य प्रेस और समाज के अन्य हिस्सों के बीच संवाद को मजबूत करने में मदद करते हैं, ताकि प्रेस समाज के हित में काम कर सके और जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिले।


### **शक्तियां (Powers)**:


1. **जांच करने की शक्ति**:  

   PCI के पास शिकायतों की जांच करने और किसी भी पत्रकार या समाचार पत्र से स्पष्टीकरण मांगने की शक्ति होती है। वे सरकारी एजेंसियों से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें जांच में शामिल कर सकते हैं।


2. **सुधारात्मक उपाय**:  

   PCI के सदस्य किसी भी शिकायत या जांच के आधार पर सुधारात्मक उपाय सुझा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी समाचार पत्र ने गलत सूचना प्रकाशित की है, तो PCI उसे माफी मांगने या सुधारात्मक बयान जारी करने के लिए कह सकता है।


3. **नैतिक निर्णय**:  

   PCI के पास यह अधिकार है कि वह अपनी आचार संहिता का पालन न करने पर पत्रकारों या समाचार पत्रों के खिलाफ नैतिक निर्णय ले। हालांकि PCI के निर्णयों का कानूनी रूप से पालन करना आवश्यक नहीं होता, फिर भी उनका सामाजिक और नैतिक प्रभाव होता है।


प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया प्रेस की गुणवत्ता, स्वतंत्रता और जिम्मेदारी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनके सदस्य इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपने अधिकारों और शक्तियों का उपयोग करते हैं।

फैक्ट चेक यूनिट के कामकाज पर रोक रहेगी​

 भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के तहत स्थापित होने वाली फैक्ट चेक यूनिट (FCU) की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यह यूनिट मार्च 2024 में सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार से संबंधित ऑनलाइन सामग्री की सत्यता की जांच करना था। इस यूनिट को किसी भी झूठी, गलत या भ्रामक जानकारी को पहचानने और उसे सोशल मीडिया से हटाने या डिस्क्लेमर लगाने की सिफारिश करने का अधिकार दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और कॉमेडियन कुनाल कामरा ने इसे चुनौती दी, यह कहते हुए कि यह यूनिट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) पर खतरा पैदा कर सकती है। आलोचकों का कहना है कि यह यूनिट सरकार के खिलाफ किसी भी आलोचना को दबाने का साधन बन सकती है, विशेष रूप से आगामी चुनावों के मद्देनजर।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संविधानिक प्रश्नों को उठाया और कहा कि जब तक बॉम्बे हाई कोर्ट इस पर अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक फैक्ट चेक यूनिट के कामकाज पर रोक रहेगी​

Sunday, September 22, 2024

सांकेतिक भाषा दिवस-2024 का थीम है "साइन अप फॉर साइन लैंग्युजेज राइट्स’

 केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता (एसजेई) मंत्री, डॉ. वीरेंद्र कुमार,  नई दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के भीम हॉल में सांकेतिक भाषा दिवस-2024 समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (एसजेई), श्री बी.एल. वर्मा, सम्मानीय अतिथि होंगे।

यह आयोजन भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी), नई दिल्ली द्वारा केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडीके तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इस वर्ष के सांकेतिक भाषा दिवस-2024 का विषय है "साइन अप फॉर साइन लैंग्युजेज राइट्स"। पूरा विश्व एक बार फिर सांकेतिक भाषाओं द्वारा उत्पन्न एकता पर प्रकाश डालेगा। वैश्विक नेतागण और अन्य सरकारी अधिकारियों को बधिर लोगों के भाषाई मानवाधिकारों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजन अधिकारों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रयास करने के लिए आमंत्रित किया गया हैऔरसांकेतिक भाषा दिवस पर बधिर समुदायों के लिए एक ठोस लक्ष्य की प्राप्ति की घोषणा करने के लिए हमारे स्थानीय और राष्ट्रीय संघों के साथ काम करके सांकेतिक भाषा अधिकारों के लिए साइन अप करें।

इस कार्यक्रम के दौराननिम्नलिखित भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएलशब्दावली और वीडियो लॉन्च किए जाएँगे:

1. भारतीय सांकेतिक भाषा में 2500 शब्दों की शुरुआत: आईएसएलआरटीसी ने इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के साथ मिलकर भारतीय सांकेतिक भाषा में 2500 शब्दों को विकसित किया हैजिससे मौजूदा आईएसएल  शब्दकोश का विस्तार होगा। ये संगठन हैं: यूनिकीहैदराबाद (1000 शब्द)इंडिया साइनिंग हैंड्समुंबई (500 शब्द)ब्रिज कनेक्टिविटी सॉल्यूशंसदिल्ली (500 शब्द) और अनुप्रयासमोहाली (500 शब्द)। ये 2500 शब्द विभिन्न स्कूली विषयों जैसे गणितविज्ञानभाषाभूगोल और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों जैसे दर्शनशास्त्रभाषा विज्ञानकंप्यूटर विज्ञानआदिऔर खेलबुनियादी ढांचासुलभताआदि को शामिल करते हैं।

2. आईएसएल में 100 कांसेप्ट वीडियोज की शुरुआत: आईएसएलआरटीसी ने यूनिकी के साथ मिलकर कक्षा के बधिर छात्रों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा में 100  कांसेप्ट वीडियो विकसित किए हैंजिसमें गणितविज्ञानसामाजिक विज्ञान और भाषा जैसे विभिन्न स्कूली विषयों को शामिल किया गया है। इन कांसेप्ट वीडियो की विशेषताएं हैं: आईएसएल  में विस्तृत व्याख्याजिससे कांसेप्ट की स्पष्टता विकसित होती है, सीखने को बढ़ावा देने के लिए ग्राफिक छवियां, समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऑडियो और उपशीर्षक, सीखने के परिणामों और शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार के लिए रेखाचित्र और उदाहरण

3. आईएसएल शब्दकोष का 10 भाषाओं में प्रकाशन: सुलभता को बढ़ावा देने के लिएआईएसएल शब्दकोश 10 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा।

4. आईएसएल में शैक्षिक एनिमेटेड वीडियो का लांच: बधिर बच्चों के बीच नैतिक मूल्यों और नए सीखने के अनुभव को विकसित करने और समावेशी सीखने के माहौल को बढ़ावा देने के लिए।

5. आईएसएल में बधिर रोल मॉडल वीडियो का लांच: बधिर बच्चों के बीच प्रेरणाप्रेरणाउद्देश्य की भावनानैतिक मूल्य और मार्गदर्शन पैदा करने के लिए।

6. केंद्र द्वारा 7वें भारतीय सांकेतिक भाषा प्रतियोगिता, 2024 का आयोजनश्रवण बाधित छात्रों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगित का आयोजन किया गया। छात्रों ने प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का प्रदर्शन किया है। सातवीं आईएसएल प्रतियोगिता के सभी विजेताओं को सांकेतिक भाषा दिवस 2024 कार्यक्रम के दौरान ट्रॉफी और प्रमाण पत्र वितरित किए जाएँगे।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस घोषित करने के बाद से आईएसएलआरटीसी हर साल इस अवसर पर उत्सव का आयोजन करता है। डीईपीडब्लूडी और आईएसएलआरटीसी  हमारे समाज के सभी वर्गों में आईएसएल के बारे में सकारात्मक जागरूकता पैदा करने के लिएसांकेतिक भाषा दिवस में अधिक नागरिकोंहितधारकोंसेवा प्रदाता एजेंसियोंबधिर बच्चों के लिए स्कूलोंगैर-सरकारी संगठनोंकार्यकर्ताओंबधिर समाज के नेताओंशिक्षकोंशोधकर्ताओं आदि को शामिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

यह दिन हमें भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के एक भाग के रूप में सांकेतिक भाषाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता और महत्व की याद दिलाता है। भारतीय सांकेतिक भाषाबधिर शिक्षा और सभी क्षेत्रों के दिव्यांग लोगों के क्षेत्र में काम करने वाले सभी पेशेवरबधिर बच्चों के माता-पिताबधिर छात्र और संस्थान सांकेतिक भाषा दिवस समारोह में शामिल होने वाले महत्वपूर्ण लक्षित समूह हैं।

इस अवसर पर शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्ति श्री राजेश अग्रवालसचिवडीईपीडब्लूडीडॉ. शरणजीत कौरअध्यक्षआरसीआईश्री राजीव शर्मासंयुक्त सचिवडीईपीडब्लूडीऔरडॉ. जितेंद्र शर्मानिदेशकआईएसएलआरटीसी होंगे एवं राष्ट्रीय बधिर संघअखिल भारतीय बधिर महिला संघ और इंदौर बधिर द्विभाषी अकादमी और बधिर समुदाय के अन्य प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित होंगे।

one nation one education

 The concept of One Nation, One Education revolves around the idea of providing a uniform education system across a country. The main objectives include:

  1. Equal Access to Quality Education: Ensure that all students, regardless of their geographic location or socio-economic background, receive the same quality of education. This includes access to resources, curriculum, teaching standards, and infrastructure.

  2. Standardized Curriculum: A common curriculum would be implemented across all states and regions, emphasizing national integration, unity, and equal opportunities for students. This would likely involve a nationalized curriculum framework, such as the one provided by NCERT in India.

  3. Reduction of Inequality: By eliminating differences between state-run and central schools, or between public and private educational institutions, this policy aims to reduce the disparities in educational outcomes and opportunities.

  4. Skill-Based and Value-Based Education: Such a system would also prioritize skill development, promoting a focus on practical, job-ready skills, while incorporating value-based education that instills social, moral, and cultural values.

  5. Universal Medium of Instruction: There might be an emphasis on a single medium of instruction, often aligned with promoting a national language, although this is a highly debated topic due to the linguistic diversity in countries like India.

Challenges:

  • Linguistic Diversity: Implementing a single language as the medium of instruction might ignore the diversity of languages spoken in different regions, leading to resistance.
  • Regional Needs: Different regions may have specific educational requirements, and a one-size-fits-all approach might not be effective in addressing local needs.
  • Cultural Sensitivity: A uniform system must balance national integration with respect for cultural and regional identities.

In the context of India, where education is on the concurrent list, both the central and state governments are involved in policy-making. "One Nation, One Education" is sometimes discussed alongside other initiatives like NEP 2020, which seeks to reform the education system but also supports flexibility and regional diversity in educational content.

one nation one health needs

 The concept of **One Nation, One Education** revolves around the idea of providing a **uniform education system** across a country. The main objectives include:


1. **Equal Access to Quality Education**: Ensure that all students, regardless of their geographic location or socio-economic background, receive the same quality of education. This includes access to resources, curriculum, teaching standards, and infrastructure.


2. **Standardized Curriculum**: A common curriculum would be implemented across all states and regions, emphasizing national integration, unity, and equal opportunities for students. This would likely involve a nationalized curriculum framework, such as the one provided by NCERT in India.


3. **Reduction of Inequality**: By eliminating differences between state-run and central schools, or between public and private educational institutions, this policy aims to reduce the disparities in educational outcomes and opportunities.


4. **Skill-Based and Value-Based Education**: Such a system would also prioritize skill development, promoting a focus on practical, job-ready skills, while incorporating value-based education that instills social, moral, and cultural values.


5. **Universal Medium of Instruction**: There might be an emphasis on a single medium of instruction, often aligned with promoting a national language, although this is a highly debated topic due to the linguistic diversity in countries like India.


### Challenges:

- **Linguistic Diversity**: Implementing a single language as the medium of instruction might ignore the diversity of languages spoken in different regions, leading to resistance.

- **Regional Needs**: Different regions may have specific educational requirements, and a one-size-fits-all approach might not be effective in addressing local needs.

- **Cultural Sensitivity**: A uniform system must balance national integration with respect for cultural and regional identities.


In the context of India, where education is on the concurrent list, both the central and state governments are involved in policy-making. "One Nation, One Education" is sometimes discussed alongside other initiatives like **NEP 2020**, which seeks to reform the education system but also supports flexibility and regional diversity in educational content.


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महिलाओं को अब पीरियड्स के लिए मिलेगी 6 छुट्टी! पैसा भी नहीं कटेगा; लागू हो सकता है ये नियम

 

5/5शेष फ्री लेख

महिलाओं को अब पीरियड्स के लिए मिलेगी 6 छुट्टी! पैसा भी नहीं कटेगा; लागू हो सकता है ये नियम

सरकार महिलाओं को पीरियड्स के लिए साल में 6 दिनों की छुट्टी देने पर विचार कर रही है। सरकार ने महिलाओं के पीरियड्स लीव और मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य उत्पादों पर एक विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए 18 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें कहा जा रहा है महिलाओं को छह दिन की पेड छुट्टियां मिलेंगी और उसमें कोई पैसा नहीं कटेगा।

HIGHLIGHTS

  1. महिलाओं को छह दिन की पेड छुट्टियां मिलेंगी
  2. समिति की अध्यक्ष डॉ. सपना ने पेश की रिपोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक सरकार प्राइवेट और पब्लिक दोनों सेक्टर में नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए खुशखबरी देने जा रही है। सरकार महिलाओं को पीरियड्स के लिए साल में 6 दिनों की छुट्टी देने पर विचार कर रही है। इसको लेकर अब श्रम मंत्रालय की तरफ से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है और महिलाओं के लिए 6 दिन की मासिक छुट्टी की सिफारिश की है।

सरकार ने महिलाओं के पीरियड्स लीव और मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य उत्पादों तक मुफ्त पहुंच के अधिकार पर एक विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए 18 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्ष डॉ. सपना ने इसे लेकर एक रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा जा रहा है महिलाओं को छह दिन की पेड छुट्टियां मिलेंगी और उसमें कोई पैसा नहीं कटेगा।


5/5शेष फ्री लेख

महिलाओं को अब पीरियड्स के लिए मिलेगी 6 छुट्टी! पैसा भी नहीं कटेगा; लागू हो सकता है ये नियम

सरकार महिलाओं को पीरियड्स के लिए साल में 6 दिनों की छुट्टी देने पर विचार कर रही है। सरकार ने महिलाओं के पीरियड्स लीव और मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य उत्पादों पर एक विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए 18 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें कहा जा रहा है महिलाओं को छह दिन की पेड छुट्टियां मिलेंगी 

  1. समिति की अध्यक्ष डॉ. सपना ने पेश की रिपोर्ट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक सरकार प्राइवेट और पब्लिक दोनों सेक्टर में नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए खुशखबरी देने जा रही है। सरकार महिलाओं को पीरियड्स के लिए साल में 6 दिनों की छुट्टी देने पर विचार कर रही है। इसको लेकर अब श्रम मंत्रालय की तरफ से गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है और महिलाओं के लिए 6 दिन की मासिक छुट्टी की सिफारिश की है।

सरकार ने महिलाओं के पीरियड्स लीव और मासिक धर्म से जुड़े स्वास्थ्य उत्पादों तक मुफ्त पहुंच के अधिकार पर एक विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए 18 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्ष डॉ. सपना ने इसे लेकर एक रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा जा रहा है महिलाओं को छह दिन की पेड छुट्टियां मिलेंगी और उसमें कोई पैसा नहीं कटेगा।

कर्नाटक सरकार के मंत्री संतोष लाड ने इस मामले में बताया, हम प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं और समिति के सदस्यों के साथ एक बैठक निर्धारित की है। इस पहल का उद्देश्य महिला कार्यबल का समर्थन करना है, क्योंकि महिलाओं को अपने पूरे जीवन में महत्वपूर्ण शारीरिक और भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।

श्रम मंत्री संतोष लाड ने आगे बताया, ''छुट्टियां काफी सही होंगी, जिससे महिलाओं को यह चुनने की अनुमति मिलेगी कि उन्हें कब छुट्टी चाहिए।' उन्होंने आगे ये भी कहा, समिति की बैठक आज होनी है और सरकार को इसे मंजूरी देनी होगी।

 इन राज्यों में हो चुका नियम

यदि इसे लागू किया जाता है, तो कर्नाटक बिहार, केरल और ओडिशा के बाद महिलाओं को पीरियड्स के दौरान छुट्टी देने वाला चौथा राज्य बन जाएगा।

पिछले महीने, ओडिशा सरकार ने महिलाओं के लिए पीरियड्स की एक दिन की छुट्टी की घोषणा की थी। 1992 में, बिहार ने महिलाओं को प्रति माह दो दिन का मासिक अवकाश प्रदान करना शुरू किया। केरल ने 2023 में सभी राज्य विश्वविद्यालयों में महिला छात्रों को पीरियड्स की छुट्टी देना शुरू किया।

यह पहली बार नहीं है जब पीरियड्स के लिए छुट्टी का प्रस्ताव किया गया है। दिसंबर 2023 में, पूर्व केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में इसी तरह की योजना का विरोध करते हुए कहा था कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे विशेष छुट्टी की आवश्यकता वाली विकलांगता के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। 


**NPS वात्सल्य पेंशन योजना**

 भारत में बच्चों और अनाथों के कल्याण के लिए एक प्रस्तावित पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, खासकर उन बच्चों के लिए जो अपने माता-पिता या अभिभावकों को खो चुके हैं।


योजना की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हो सकती हैं:


1. **पात्रता**: अनाथ बच्चे, जिन्हें कोई कानूनी अभिभावक नहीं है, या जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है, इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। सरकार द्वारा चिह्नित वंचित वर्ग के बच्चे भी इसका लाभ उठा सकते हैं।

  

2. **निधि का स्रोत**: यह योजना केंद्र या राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित हो सकती है, जिसमें सरकार अनाथ बच्चों के लिए पेंशन योगदान करेगी। सामाजिक संगठनों और व्यक्तिगत दानदाताओं को भी योगदान की अनुमति हो सकती है।


3. **पेंशन की राशि**: बच्चे की आयु और उसकी आवश्यकताओं के आधार पर एक निश्चित मासिक पेंशन दी जा सकती है, जो उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो।


4. **समर्थन और निगरानी**: योजना के तहत बच्चों की देखरेख और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों और संस्थानों की भूमिका होगी। बच्चों को सशक्त बनाने के लिए शैक्षिक सहायता और करियर परामर्श भी प्रदान किया जा सकता है।


5. **लाभार्थियों के लिए शर्तें**: यह योजना केवल विशेष जरूरतमंद बच्चों के लिए हो सकती है और लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ दस्तावेजी प्रमाणों की आवश्यकता हो सकती है, जैसे कि अनाथ होने का प्रमाण या सरकारी सत्यापन।


6. **अन्य सुविधाएँ**: बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और करियर से जुड़े विशेष लाभ भी दिए जा सकते हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में अपनी पहचान बना सकें।


यह योजना बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा उपाय हो सकती है।

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...