Monday, September 23, 2024

भारत में पत्रकारों के संवैधानिक अधिकार

 भारत में पत्रकारों के संवैधानिक अधिकार भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आते हैं, जो उन्हें स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रदान करते हैं। पत्रकारों को विशेष रूप से निम्नलिखित संवैधानिक अधिकार प्राप्त होते हैं:


### 1. **अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a))**:

   - पत्रकारों को **विचारों और अभिव्यक्तियों** की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। इसका मतलब है कि वे अपनी राय स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकते हैं और समाचार, सूचना, और आलोचनात्मक दृष्टिकोण को प्रकाशित कर सकते हैं। यह अधिकार उन्हें सरकार या किसी अन्य संस्था से किसी भी प्रकार की सेंसरशिप के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।

   - हालांकि, यह अधिकार **यथोचित प्रतिबंधों** के अधीन है, जैसे कि देश की सुरक्षा, जनहित, और नैतिकता की रक्षा।


### 2. **सूचना का अधिकार (RTI) (2005)**:

   - **सूचना का अधिकार** अधिनियम 2005 के तहत पत्रकारों को सरकारी एजेंसियों और संस्थाओं से सूचनाएं प्राप्त करने का अधिकार है। यह अधिकार उन्हें सरकारी नीतियों और निर्णयों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करने की शक्ति देता है।


### 3. **समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14)**:

   - संविधान का **अनुच्छेद 14** पत्रकारों को समानता का अधिकार प्रदान करता है। इसका मतलब है कि वे किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना अपना काम कर सकते हैं और उनके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाएगा।


### 4. **जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21)**:

   - पत्रकारों को **जीवन और स्वतंत्रता** का अधिकार भी प्राप्त है, जिसके तहत उन्हें अपनी सुरक्षा की गारंटी मिलती है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब पत्रकार ऐसे मुद्दों पर काम कर रहे हों जो उन्हें खतरे में डाल सकते हैं।


### 5. **निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार (अनुच्छेद 22)**:

   - किसी पत्रकार को हिरासत में लिया जाता है, तो उसे निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। यह विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण है जब पत्रकार जांच के दौरान गलत तरीके से आरोपित या गिरफ्तार होते हैं।


### 6. **संपत्ति का अधिकार**:

   - पत्रकार, जैसे अन्य नागरिक, संपत्ति रखने और चलाने का अधिकार रखते हैं। पत्रकारिता के पेशे में, यह अधिकार महत्वपूर्ण हो जाता है, खासकर यदि वे मीडिया हाउस या पत्रकारिता संस्थान के मालिक हों।


### **प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार (प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं)**:

   - भारतीय संविधान में **प्रेस की स्वतंत्रता** का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन इसे **अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता** के तहत माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि पत्रकार और मीडिया को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित है।


### **महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले**:

   - **सुप्रीम कोर्ट** ने कई मौकों पर प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि पत्रकारों के अधिकार नागरिकों के व्यापक अधिकारों से अलग नहीं होते, लेकिन उनकी जिम्मेदारी समाज के प्रति अधिक होती है।


पत्रकारों के ये संवैधानिक अधिकार उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने में मदद करते हैं, और उन्हें कानूनी संरक्षण प्रदान करते हैं ताकि वे सरकार या किसी अन्य शक्ति से डर के बिना काम कर सकें।

The **Association of Indian Magazines (AIM)** and the **Indian Newspaper Society (INS)** are prominent bodies representing the interests of magazines and newspapers in India.



### **Association of Indian Magazines (AIM)**:

- **Purpose**: AIM represents magazine publishers and works to promote the magazine industry. It advocates for policies that support the growth of magazines, helps address challenges faced by publishers, and raises awareness about the unique role of magazines in the media landscape.

- **Activities**:

  - Helps improve advertising revenues for magazines.

  - Provides platforms for networking and collaboration between magazine publishers.

  - Lobbies for government policies that favor the magazine industry.


### **Indian Newspaper Society (INS)**:

- **Purpose**: INS is a national organization that represents print media, including newspapers and magazines. It ensures the proper functioning and rights of its members by addressing challenges like freedom of the press, government regulation, and advertising revenue issues.

- **Activities**:

  - Promotes press freedom and ensures fair representation of media interests.

  - Standardizes advertising policies and monitors press conduct.

  - Acts as a mediator between publishers and government bodies, especially on matters related to tariffs, postal rates, and taxation.

  

Both organizations play a vital role in supporting and representing the magazine and newspaper industries, advocating for press freedom, and providing platforms for collaboration within the media sector.

what are the power and works of press council of india

 The Press Council of India (PCI) is a statutory, autonomous body responsible for preserving the freedom of the press while maintaining and improving the standards of journalism in India. Here are its key powers and functions:

Powers of the Press Council of India:

  1. Judicial Authority:
    PCI has quasi-judicial powers, allowing it to hear complaints against the press or by the press concerning violations of ethics, professional misconduct, or media-related issues. It can summon people, request documents, and carry out investigations into such complaints.

  2. Power to Censure:
    While the PCI cannot impose penalties, it can censure (publicly reprimand) publications or journalists if found guilty of breaching journalistic ethics. This includes warnings, admonitions, and directions for correction.

  3. Advisory Role to Government:
    The PCI has the power to advise the government on issues affecting the press and its functioning, including matters of press laws and the implementation of press freedom.

  4. Regulation of Media Ethics:
    The council ensures that newspapers and journalists adhere to its Code of Ethics, maintaining professional standards. This includes the ability to take suo motu cognizance of instances where ethical journalism is compromised.

  5. Investigative Power:
    It can independently investigate complaints or issues concerning press conduct or media censorship, ensuring transparency and accountability.

Functions and Works of the Press Council of India:

  1. Protection of Press Freedom:
    PCI plays a key role in safeguarding the freedom of the press under Article 19(1)(a) of the Indian Constitution. It acts as a watchdog against government interference or other pressures on the media.

  2. Handling Complaints:
    PCI handles complaints from both the public and the press regarding violations of press freedom, defamation, biased reporting, or ethical breaches by media organizations or journalists.

  3. Setting Professional Standards:
    PCI sets and enforces guidelines on the ethics of journalism, promoting responsible reporting and discouraging sensationalism, plagiarism, or the publication of misleading information.

  4. Preventing Press Censorship:
    PCI works to ensure that the press remains free from undue censorship. It advocates for media autonomy and opposes any laws, regulations, or practices that may hinder press freedom.

  5. Education and Awareness:
    PCI engages in educational activities by conducting seminars, workshops, and publications aimed at spreading awareness about press laws, ethics, and the role of media in a democratic society.

  6. Advising on Media Laws:
    PCI advises the government on media-related laws and policies, including those affecting the freedom of speech and expression, digital media regulations, and the changing media landscape.

The PCI, while not possessing enforcement powers like a court, has significant moral authority. Its actions often influence public opinion and the behavior of media organizations through accountability and the promotion of ethical journalism.

प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के मेम्बर का कार्य और पॉवर क्या है

 **प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)** का सदस्य एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय का हिस्सा होता है, जो प्रेस की स्वतंत्रता और नैतिकता को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। इसके सदस्य आमतौर पर विभिन्न वर्गों से आते हैं, जिनमें संपादक, पत्रकार, मीडिया विशेषज्ञ, और सरकारी प्रतिनिधि शामिल होते हैं। उनके कार्य और शक्तियां निम्नलिखित हैं:


### **प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य की भूमिकाएं और कार्य:**


1. **प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा**:  

   प्रेस की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार के अवांछनीय हस्तक्षेप या दबाव को रोकने के लिए सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रेस स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके और अभिव्यक्ति की आज़ादी को बनाए रखा जाए।


2. **शिकायतों का निपटारा**:  

   PCI के सदस्य प्रेस से संबंधित किसी भी शिकायत का निपटारा करते हैं। अगर कोई व्यक्ति, संगठन, या सरकार किसी समाचार पत्र या पत्रकार की सामग्री से असंतुष्ट है, तो वे PCI में शिकायत कर सकते हैं। सदस्य इस मामले की जांच करते हैं और निष्पक्ष समाधान निकालते हैं।


3. **आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना**:  

   PCI द्वारा बनाए गए **प्रेस के लिए आचार संहिता** (Code of Ethics) के तहत सदस्य यह सुनिश्चित करते हैं कि पत्रकार और समाचार एजेंसियां नैतिकता और मानकों के अनुरूप काम कर रही हैं। वे अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकते हैं, अगर पत्रकारिता में कोई नैतिक उल्लंघन होता है।


4. **सलाहकार भूमिका**:  

   PCI के सदस्य सरकार और अन्य संस्थाओं को प्रेस से जुड़े मुद्दों पर सलाह देने का काम करते हैं। वे प्रेस कानून, नियमों और पत्रकारिता के सुधार से जुड़े मुद्दों पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।


5. **समाज और प्रेस के बीच संवाद**:  

   सदस्य प्रेस और समाज के अन्य हिस्सों के बीच संवाद को मजबूत करने में मदद करते हैं, ताकि प्रेस समाज के हित में काम कर सके और जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिले।


### **शक्तियां (Powers)**:


1. **जांच करने की शक्ति**:  

   PCI के पास शिकायतों की जांच करने और किसी भी पत्रकार या समाचार पत्र से स्पष्टीकरण मांगने की शक्ति होती है। वे सरकारी एजेंसियों से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें जांच में शामिल कर सकते हैं।


2. **सुधारात्मक उपाय**:  

   PCI के सदस्य किसी भी शिकायत या जांच के आधार पर सुधारात्मक उपाय सुझा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी समाचार पत्र ने गलत सूचना प्रकाशित की है, तो PCI उसे माफी मांगने या सुधारात्मक बयान जारी करने के लिए कह सकता है।


3. **नैतिक निर्णय**:  

   PCI के पास यह अधिकार है कि वह अपनी आचार संहिता का पालन न करने पर पत्रकारों या समाचार पत्रों के खिलाफ नैतिक निर्णय ले। हालांकि PCI के निर्णयों का कानूनी रूप से पालन करना आवश्यक नहीं होता, फिर भी उनका सामाजिक और नैतिक प्रभाव होता है।


प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया प्रेस की गुणवत्ता, स्वतंत्रता और जिम्मेदारी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनके सदस्य इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपने अधिकारों और शक्तियों का उपयोग करते हैं।

फैक्ट चेक यूनिट के कामकाज पर रोक रहेगी​

 भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के तहत स्थापित होने वाली फैक्ट चेक यूनिट (FCU) की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यह यूनिट मार्च 2024 में सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत स्थापित की गई थी, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार से संबंधित ऑनलाइन सामग्री की सत्यता की जांच करना था। इस यूनिट को किसी भी झूठी, गलत या भ्रामक जानकारी को पहचानने और उसे सोशल मीडिया से हटाने या डिस्क्लेमर लगाने की सिफारिश करने का अधिकार दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और कॉमेडियन कुनाल कामरा ने इसे चुनौती दी, यह कहते हुए कि यह यूनिट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) पर खतरा पैदा कर सकती है। आलोचकों का कहना है कि यह यूनिट सरकार के खिलाफ किसी भी आलोचना को दबाने का साधन बन सकती है, विशेष रूप से आगामी चुनावों के मद्देनजर।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संविधानिक प्रश्नों को उठाया और कहा कि जब तक बॉम्बे हाई कोर्ट इस पर अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक फैक्ट चेक यूनिट के कामकाज पर रोक रहेगी​

Sunday, September 22, 2024

सांकेतिक भाषा दिवस-2024 का थीम है "साइन अप फॉर साइन लैंग्युजेज राइट्स’

 केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता (एसजेई) मंत्री, डॉ. वीरेंद्र कुमार,  नई दिल्ली के जनपथ स्थित डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के भीम हॉल में सांकेतिक भाषा दिवस-2024 समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (एसजेई), श्री बी.एल. वर्मा, सम्मानीय अतिथि होंगे।

यह आयोजन भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी), नई दिल्ली द्वारा केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडीके तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इस वर्ष के सांकेतिक भाषा दिवस-2024 का विषय है "साइन अप फॉर साइन लैंग्युजेज राइट्स"। पूरा विश्व एक बार फिर सांकेतिक भाषाओं द्वारा उत्पन्न एकता पर प्रकाश डालेगा। वैश्विक नेतागण और अन्य सरकारी अधिकारियों को बधिर लोगों के भाषाई मानवाधिकारों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजन अधिकारों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रयास करने के लिए आमंत्रित किया गया हैऔरसांकेतिक भाषा दिवस पर बधिर समुदायों के लिए एक ठोस लक्ष्य की प्राप्ति की घोषणा करने के लिए हमारे स्थानीय और राष्ट्रीय संघों के साथ काम करके सांकेतिक भाषा अधिकारों के लिए साइन अप करें।

इस कार्यक्रम के दौराननिम्नलिखित भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएलशब्दावली और वीडियो लॉन्च किए जाएँगे:

1. भारतीय सांकेतिक भाषा में 2500 शब्दों की शुरुआत: आईएसएलआरटीसी ने इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के साथ मिलकर भारतीय सांकेतिक भाषा में 2500 शब्दों को विकसित किया हैजिससे मौजूदा आईएसएल  शब्दकोश का विस्तार होगा। ये संगठन हैं: यूनिकीहैदराबाद (1000 शब्द)इंडिया साइनिंग हैंड्समुंबई (500 शब्द)ब्रिज कनेक्टिविटी सॉल्यूशंसदिल्ली (500 शब्द) और अनुप्रयासमोहाली (500 शब्द)। ये 2500 शब्द विभिन्न स्कूली विषयों जैसे गणितविज्ञानभाषाभूगोल और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों जैसे दर्शनशास्त्रभाषा विज्ञानकंप्यूटर विज्ञानआदिऔर खेलबुनियादी ढांचासुलभताआदि को शामिल करते हैं।

2. आईएसएल में 100 कांसेप्ट वीडियोज की शुरुआत: आईएसएलआरटीसी ने यूनिकी के साथ मिलकर कक्षा के बधिर छात्रों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा में 100  कांसेप्ट वीडियो विकसित किए हैंजिसमें गणितविज्ञानसामाजिक विज्ञान और भाषा जैसे विभिन्न स्कूली विषयों को शामिल किया गया है। इन कांसेप्ट वीडियो की विशेषताएं हैं: आईएसएल  में विस्तृत व्याख्याजिससे कांसेप्ट की स्पष्टता विकसित होती है, सीखने को बढ़ावा देने के लिए ग्राफिक छवियां, समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ऑडियो और उपशीर्षक, सीखने के परिणामों और शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार के लिए रेखाचित्र और उदाहरण

3. आईएसएल शब्दकोष का 10 भाषाओं में प्रकाशन: सुलभता को बढ़ावा देने के लिएआईएसएल शब्दकोश 10 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा।

4. आईएसएल में शैक्षिक एनिमेटेड वीडियो का लांच: बधिर बच्चों के बीच नैतिक मूल्यों और नए सीखने के अनुभव को विकसित करने और समावेशी सीखने के माहौल को बढ़ावा देने के लिए।

5. आईएसएल में बधिर रोल मॉडल वीडियो का लांच: बधिर बच्चों के बीच प्रेरणाप्रेरणाउद्देश्य की भावनानैतिक मूल्य और मार्गदर्शन पैदा करने के लिए।

6. केंद्र द्वारा 7वें भारतीय सांकेतिक भाषा प्रतियोगिता, 2024 का आयोजनश्रवण बाधित छात्रों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगित का आयोजन किया गया। छात्रों ने प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का प्रदर्शन किया है। सातवीं आईएसएल प्रतियोगिता के सभी विजेताओं को सांकेतिक भाषा दिवस 2024 कार्यक्रम के दौरान ट्रॉफी और प्रमाण पत्र वितरित किए जाएँगे।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस घोषित करने के बाद से आईएसएलआरटीसी हर साल इस अवसर पर उत्सव का आयोजन करता है। डीईपीडब्लूडी और आईएसएलआरटीसी  हमारे समाज के सभी वर्गों में आईएसएल के बारे में सकारात्मक जागरूकता पैदा करने के लिएसांकेतिक भाषा दिवस में अधिक नागरिकोंहितधारकोंसेवा प्रदाता एजेंसियोंबधिर बच्चों के लिए स्कूलोंगैर-सरकारी संगठनोंकार्यकर्ताओंबधिर समाज के नेताओंशिक्षकोंशोधकर्ताओं आदि को शामिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

यह दिन हमें भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के एक भाग के रूप में सांकेतिक भाषाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता और महत्व की याद दिलाता है। भारतीय सांकेतिक भाषाबधिर शिक्षा और सभी क्षेत्रों के दिव्यांग लोगों के क्षेत्र में काम करने वाले सभी पेशेवरबधिर बच्चों के माता-पिताबधिर छात्र और संस्थान सांकेतिक भाषा दिवस समारोह में शामिल होने वाले महत्वपूर्ण लक्षित समूह हैं।

इस अवसर पर शामिल होने वाले गणमान्य व्यक्ति श्री राजेश अग्रवालसचिवडीईपीडब्लूडीडॉ. शरणजीत कौरअध्यक्षआरसीआईश्री राजीव शर्मासंयुक्त सचिवडीईपीडब्लूडीऔरडॉ. जितेंद्र शर्मानिदेशकआईएसएलआरटीसी होंगे एवं राष्ट्रीय बधिर संघअखिल भारतीय बधिर महिला संघ और इंदौर बधिर द्विभाषी अकादमी और बधिर समुदाय के अन्य प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित होंगे।

one nation one education

 The concept of One Nation, One Education revolves around the idea of providing a uniform education system across a country. The main objectives include:

  1. Equal Access to Quality Education: Ensure that all students, regardless of their geographic location or socio-economic background, receive the same quality of education. This includes access to resources, curriculum, teaching standards, and infrastructure.

  2. Standardized Curriculum: A common curriculum would be implemented across all states and regions, emphasizing national integration, unity, and equal opportunities for students. This would likely involve a nationalized curriculum framework, such as the one provided by NCERT in India.

  3. Reduction of Inequality: By eliminating differences between state-run and central schools, or between public and private educational institutions, this policy aims to reduce the disparities in educational outcomes and opportunities.

  4. Skill-Based and Value-Based Education: Such a system would also prioritize skill development, promoting a focus on practical, job-ready skills, while incorporating value-based education that instills social, moral, and cultural values.

  5. Universal Medium of Instruction: There might be an emphasis on a single medium of instruction, often aligned with promoting a national language, although this is a highly debated topic due to the linguistic diversity in countries like India.

Challenges:

  • Linguistic Diversity: Implementing a single language as the medium of instruction might ignore the diversity of languages spoken in different regions, leading to resistance.
  • Regional Needs: Different regions may have specific educational requirements, and a one-size-fits-all approach might not be effective in addressing local needs.
  • Cultural Sensitivity: A uniform system must balance national integration with respect for cultural and regional identities.

In the context of India, where education is on the concurrent list, both the central and state governments are involved in policy-making. "One Nation, One Education" is sometimes discussed alongside other initiatives like NEP 2020, which seeks to reform the education system but also supports flexibility and regional diversity in educational content.

न्यूज़ विचार और व्यव्हार

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी

जब मीडिया सत्ता की ढाल बने, तब जनता की पत्रकारिता ज़रूरी लोकतंत्र के चार स्तंभों में मीडिया को इसलिए जगह दी गई थी ताकि वह सत्ता पर निगरानी र...