पिछले पाँच वर्षों में असंगठित क्षेत्र (unorganized/informal sector) में काम करने वाले लोगों की नौकरियों और व्यवसायों पर कई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़े हैं। इन प्रभावों का कारण कई सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक बदलाव रहे हैं। यहाँ इन प्रभावों का विश्लेषण दिया गया है:
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### **1. नोटबंदी (2016 के बाद का प्रभाव)**
- **प्रभाव:** नोटबंदी के कारण असंगठित क्षेत्र, जो नकदी-आधारित है, गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।
- **नौकरी पर असर:**
- छोटे व्यवसाय बंद हो गए, और श्रमिकों को रोजगार गंवाना पड़ा।
- दैनिक मजदूरी पर निर्भर लोगों के लिए काम का संकट पैदा हो गया।
- **व्यवसाय पर असर:**
- छोटे व्यापारियों और दुकानदारों की नकदी खत्म हो गई, जिससे उनका काम रुक गया।
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### **2. जीएसटी (माल और सेवा कर) का कार्यान्वयन (2017)**
- **प्रभाव:** असंगठित क्षेत्र, जिसमें छोटे व्यापारी और कारीगर शामिल हैं, जीएसटी की जटिल प्रक्रियाओं के लिए तैयार नहीं था।
- **नौकरी पर असर:**
- छोटे व्यवसायों में उत्पादन और बिक्री घटने के कारण नौकरियाँ कम हुईं।
- **व्यवसाय पर असर:**
- कई छोटे व्यवसाय जीएसटी अनुपालन में असफल रहे, और उन्हें बंद करना पड़ा।
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### **3. कोविड-19 महामारी (2020-2021)**
- **प्रभाव:** महामारी ने असंगठित क्षेत्र पर सबसे अधिक प्रभाव डाला, क्योंकि यह क्षेत्र सामाजिक दूरी, लॉकडाउन, और आर्थिक मंदी से सबसे अधिक प्रभावित हुआ।
- **नौकरी पर असर:**
- लाखों प्रवासी श्रमिकों ने अपनी नौकरी खो दी और गाँवों की ओर लौट गए।
- निर्माण, रेहड़ी-पटरी वाले काम, और घरेलू कामगारों के लिए काम पूरी तरह रुक गया।
- **व्यवसाय पर असर:**
- छोटे व्यवसाय, जैसे दुकानें, सड़क किनारे के विक्रेता, और कारीगर, लंबे समय तक बंद रहे।
- कमाई के साधन पूरी तरह ठप हो गए।
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### **4. डिजिटलीकरण और टेक्नोलॉजी का प्रभाव**
- **प्रभाव:** डिजिटलीकरण ने असंगठित क्षेत्र में नई चुनौतियाँ और अवसर दोनों पैदा किए।
- **नौकरी पर असर:**
- पारंपरिक कामों की जगह टेक्नोलॉजी आधारित काम ने ले ली, जिससे कई श्रमिक बेरोजगार हो गए।
- **व्यवसाय पर असर:**
- जो छोटे व्यापारी डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नहीं आ सके, उनका कारोबार कमजोर हुआ।
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### **5. आर्थिक मंदी और महंगाई**
- **प्रभाव:** महंगाई और आर्थिक मंदी ने असंगठित क्षेत्र की क्रय शक्ति को कम कर दिया।
- **नौकरी पर असर:**
- अस्थायी और दैनिक मजदूरी के काम कम हो गए।
- रोजगार के अवसर घटे और मजदूरी दर कम हो गई।
- **व्यवसाय पर असर:**
- ग्राहकों की क्रय शक्ति घटने से छोटे व्यापारियों की आय कम हो गई।
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### **6. सरकारी योजनाएँ और सुधार**
- **प्रभाव:** प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान, और ई-श्रम पोर्टल जैसी पहलें असंगठित क्षेत्र को समर्थन देने के लिए लाई गईं।
- **सकारात्मक असर:**
- छोटे व्यापारों को ऋण मिलने की सुविधा दी गई।
- ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से मजदूरों का पंजीकरण कर सामाजिक सुरक्षा का वादा किया गया।
- **सीमित प्रभाव:**
- इन योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक नहीं पहुँच सका।
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### **7. प्रवासन और श्रम बाजार में बदलाव**
- **प्रभाव:** लॉकडाउन और अन्य आर्थिक अस्थिरताओं के कारण प्रवासी श्रमिकों को बड़े पैमाने पर पलायन करना पड़ा।
- **नौकरी पर असर:**
- कई प्रवासी श्रमिकों ने वापस लौटने के बाद भी रोजगार नहीं पाया।
- **व्यवसाय पर असर:**
- गाँवों में श्रमिक आधारित छोटे उद्योग बढ़ने लगे, लेकिन उनका प्रभाव सीमित था।
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### **असंगठित क्षेत्र के लिए चुनौतियाँ और अवसर**
#### **चुनौतियाँ:**
1. अस्थिर आय और सामाजिक सुरक्षा की कमी।
2. डिजिटलीकरण और टेक्नोलॉजी से तालमेल में कठिनाई।
3. महामारी के बाद आर्थिक स्थिति का धीमा सुधार।
#### **अवसर:**
1. ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाना।
2. सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर छोटे उद्योगों को सशक्त करना।
3. ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना।
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### **निष्कर्ष:**
पिछले पाँच वर्षों में असंगठित क्षेत्र को कई बड़े झटके झेलने पड़े हैं, लेकिन इसमें सुधार की संभावना भी बनी हुई है। यदि सरकार, समाज, और उद्योग मिलकर इस क्षेत्र को डिजिटलीकरण, कौशल विकास, और वित्तीय सहायता से सशक्त करें, तो यह न केवल स्थिर हो सकता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत योगदान दे सकता है।
क्या आप इस पर किसी खास क्षेत्र (जैसे निर्माण, कुटीर उद्योग, या कृषि) का गहराई से विश्लेषण चाहते हैं?
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