भारत का प्रसारण सेवा (विनियमन) विधेयक, 2023 देश में प्रसारण सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए एक नया विधायी ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक 1995 के मौजूदा केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम को प्रतिस्थापित करेगा और नए तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म जैसे डायरेक्ट-टू-होम (DTH), इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविज़न (IPTV), और ओवर-द-टॉप (OTT) सेवाओं को शामिल करेगा।
मुख्य विशेषताएं:
1. सभी प्रसारण सेवाओं का एकीकरण:
यह विधेयक सभी प्रकार की प्रसारण सेवाओं को एक एकीकृत नियामक ढांचे में लाने का प्रस्ताव करता है, जिसमें OTT और डिजिटल न्यूज़ शामिल होंगे।
2. नियामक निकायों की स्थापना:
प्रसारण प्राधिकरण (Broadcasting Authority of India) का गठन किया जाएगा।
सामग्री मूल्यांकन समितियां (Content Evaluation Committees) और प्रसारण सलाहकार परिषद (Broadcast Advisory Council) की भी व्यवस्था की गई है।
3. कार्यक्रम और विज्ञापन कोड:
अलग-अलग प्रसारण प्लेटफ़ॉर्म के लिए भिन्न कार्यक्रम और विज्ञापन कोड लागू होंगे।
4. समावेशन:
विकलांग व्यक्तियों के लिए समावेशन सुनिश्चित करने हेतु दिशानिर्देश बनाए जाएंगे।
5. दंड और जुर्माना:
गंभीर अपराधों के लिए जेल और/या जुर्माने का प्रावधान है।
अन्य मामलों में चेतावनी, सलाह और आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होगा।
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विवाद और आलोचनाएं:
1. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा:
आलोचकों का कहना है कि यह विधेयक प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश लगा सकता है।
2. पारदर्शिता की कमी:
विधेयक को तैयार करने की प्रक्रिया में नागरिक समाज और पत्रकारों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया।
3. सेंसरशिप का डर:
यह आशंका है कि सरकार को ऑनलाइन सामग्री पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है, जिससे सेंसरशिप बढ़ सकती है।
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वर्तमान स्थिति:
दिसंबर 2023 तक यह विधेयक सार्वजनिक परामर्श के लिए प्रस्तुत किया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने विशेषज्ञों, प्रसारण सेवा प्रदाताओं और जनता से सुझाव मांगे हैं। सुझाव ईमेल के माध्यम से jsb-moib@gov.in पर 30 दिनों के भीतर भेजे जा सकते हैं।
यह विधेयक यदि पारित होता है, तो भारत की प्रसारण सेवाओं पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
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