Friday, October 23, 2026

एशियन पैरा गेम्स 2026: भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदकों के साथ अभियान समाप्त

 

एशियन पैरा गेम्स 2026: भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदकों के साथ अभियान समाप्त

Press Trust Of India

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को अब तक का सर्वश्रेष्ठ पदक परिणाम दिलाया। भारत ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य सहित कुल 114 पदक जीतकर अपना अभियान समाप्त किया। भारतीय दल पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।


यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि भारत ने पिछली प्रतियोगिता के अपने सर्वश्रेष्ठ आधिकारिक आंकड़े 108 पदकों को पीछे छोड़ दिया। इस बार भारतीय दल में 168 खिलाड़ी शामिल थे, जबकि 2023 के हांगझोउ संस्करण में भारत ने 309 खिलाड़ियों का दल भेजा था।



भारत की पदक तालिका

30

स्वर्ण पदक

35

रजत पदक

49

कांस्य पदक

114

कुल पदक

एथलेटिक्स बना भारत की सबसे बड़ी ताकत

भारत की पदक सफलता में पैरा एथलेटिक्स का सबसे बड़ा योगदान रहा। खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में 65 पदक जीते, जिनमें 22 स्वर्ण, 19 रजत और 24 कांस्य शामिल हैं। पैरा बैडमिंटन में 16 और पैरा तैराकी में 11 पदक मिले। पैरा तीरंदाजी में छह तथा पैरा निशानेबाजी में पांच पदक भारत के खाते में आए।


प्रमुख खेलों में भारत का प्रदर्शन

खेल

कुल पदक

पैरा एथलेटिक्स

65

पैरा बैडमिंटन

16

पैरा तैराकी

11

पैरा टेबल टेनिस

7

पैरा तीरंदाजी

6

पैरा निशानेबाजी

5

पैरा जूडो

2

पैरा पावरलिफ्टिंग

2

स्रोत: प्रकाशित खेलवार पदक आंकड़े।


कई खिलाड़ियों ने रचे नए कीर्तिमान

भारत के खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और निशानेबाजी में यादगार प्रदर्शन किया। संदीप ने पुरुषों की 400 मीटर टी64 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता। हनेई ने भाला फेंक में विश्व रिकॉर्ड बनाया, जबकि सुमित अंतिल ने भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता कायम रखी। निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी विश्व रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया।


दिव्यांग खिलाड़ियों की प्रतिभा और संकल्प को सलाम

एशियन पैरा गेम्स में भारत की सफलता केवल पदकों की संख्या नहीं है। यह उन खिलाड़ियों के संघर्ष, प्रशिक्षण, अनुशासन और आत्मविश्वास की उपलब्धि भी है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाया।

इस प्रदर्शन से यह संदेश भी मिलता है कि दिव्यांगजनों को उचित प्रशिक्षण, सुलभ खेल सुविधाएं, आर्थिक सहायता और समान अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। अब चुनौती इस प्रदर्शन को आगे बढ़ाने और देश के प्रत्येक क्षेत्र में पैरा खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की है।

संपादकीय संदेश: 114 पदकों की यह उपलब्धि उत्सव के साथ जिम्मेदारी का भी अवसर है। देश को अपने पैरा खिलाड़ियों को केवल जीत के बाद सम्मानित नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके प्रशिक्षण, रोजगार, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा के लिए निरंतर व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, डीडी इंडिया और इंडिया टुडे की प्रकाशित रिपोर्टें।


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