144 साल बाद आने वाले महाकुंभ की विशेषताएं:
1. खगोलीय योग:
ऐसा माना जा रहा है कि 144 साल बाद ग्रहों की विशेष स्थिति (जैसे सूर्य, चंद्रमा और गुरु की खास स्थिति) के कारण यह महाकुंभ विशिष्ट महत्व रखेगा।
यह संयोग हिंदू धर्म में धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है।
2. धार्मिक महत्व:
महाकुंभ का आयोजन सदियों से मानवता के कल्याण और शुद्धिकरण का प्रतीक है। इस दुर्लभ महाकुंभ के दौरान गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व और भी बढ़ जाएगा।
इस महाकुंभ के दौरान विशेष अनुष्ठान, हवन और यज्ञ किए जाएंगे, जिनका लाभ विश्व कल्याण और आत्मिक शुद्धि के लिए होगा।
3. संयोग का ऐतिहासिक महत्व:
144 साल बाद इस प्रकार का महाकुंभ अद्वितीय और ऐतिहासिक होगा, जो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।
इसे हिंदू धर्म के ग्रंथों में एक दुर्लभ और शुभ अवसर बताया गया है।
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