Sunday, January 12, 2025

144 साल बाद आने वाले इस महाकुंभ को लेकर जो खगोलीय योग और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं, वे इसे अत्यंत विशेष बनाती हैं। आइए इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी देखें:



1. खगोलीय संयोग का महत्व

यह महाकुंभ दुर्लभ खगोलीय स्थिति के कारण खास होगा, जब सूर्य, चंद्रमा, और गुरु ग्रह एक विशेष राशि (जैसे कुंभ या मेष) में प्रवेश करेंगे।

हिंदू धर्म में इन ग्रहों की स्थिति गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

गुरु ग्रह, जो ज्ञान और धर्म का कारक है, का विशेष प्रभाव इस महाकुंभ को और भी आध्यात्मिक रूप देगा।


2. धार्मिक आयोजन और अनुष्ठान

महाकुंभ के दौरान होने वाले अनुष्ठान जैसे कि महायज्ञ, मंत्रोच्चार, और साधु-संतों द्वारा प्रवचन, इस बार अधिक भव्य और दिव्य होंगे।

गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से, मान्यता के अनुसार, जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होगा।

बड़ी संख्या में अखाड़े (जैसे जूना अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा) इस विशेष महाकुंभ में भाग लेंगे।


3. 144 साल का चक्र

ज्योतिषियों के अनुसार, हर 144 साल में ऐसा खगोलीय योग बनता है जो अत्यंत दुर्लभ है।

यह चक्र हिंदू कालगणना और वेदों में वर्णित सिद्धांतों के आधार पर निर्धारित होता है।

ऐसा माना जाता है कि इस तरह का योग भगवान और भक्तों के बीच का संबंध और अधिक मजबूत बनाता है।


4. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रभाव

यह महाकुंभ केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होगा।

लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इसमें भाग लेंगे, जो इसे एक वैश्विक आयोजन में बदल देगा।

इस दौरान भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और वेदांत जैसे विषयों पर चर्चा और प्रदर्शन किया जाएगा।


5. व्यवस्थाएं और तैयारियां

सरकार और स्थानीय प्रशासन इस आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष प्रबंधन करेगा।

बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे अस्थायी आवास, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, और सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा।





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