Thursday, August 28, 2025

दिल्ली के वकील सड़क पर इसलिए उतरे हैं क्योंकि वे लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) द्वारा 13 अगस्त 2025 को जारी की गई एक अधिसूचना के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।

दिल्ली के वकील सड़क पर इसलिए उतरे हैं क्योंकि वे लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) द्वारा 13 अगस्त 2025 को जारी की गई एक अधिसूचना के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस आदेश के अनुसार, पुलिस को अब सीधे अपने थानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में गवाही देने की अनुमति दी गई है—जिससे वे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होंगे ।


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वकीलों की मुख्य आपत्तियाँ और कार्रवाई
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न्यायिक प्रक्रिया का ह्रास: वकीलों का तर्क है कि अभियोजन के गवाह—विशेषकर पुलिस अधिकारी—की व्यक्तिगत उपस्थिति बेहद आवश्यक होती है ताकि उनका बॉडी लैंग्वेज, हाव-भाव और संदेह-उत्प्रेरक संकेतों के माध्यम से ठोस परीक्षण हो सके; वीडियो के माध्यम से ऐसा संभव नहीं ।

स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय में बाधा: इस प्रस्ताव को “अन्यायपूर्ण”, “बिना सोचे-समझे” और “पुलिस राज” को बढ़ावा देने वाला बताया गया है ।

उल्‍लेखनीय विरोध और बैंडह:

शर्त सहित 48 घंटे की चेतावनी: वकीलों ने सरकार को 48 घंटे के भीतर अधिसूचना वापस लेने की मांग रखी, अन्यथा वे सड़कों पर सूप प्रदर्शन करेंगे ।

दिशा-निर्देशों का तीव्र विरोध: दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने लगातार वर्जन जारी किया, और वकील अदालत में काले रिबन पहनकर विरोध करने लगे – यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक अधिसूचना वापस नहीं हो जाती ।

अदालतों का बहिष्कार और प्रदर्शन: 22–23 अगस्त से वकीलों ने पूर्ण हड़ताल मोड अपनाया—न तो फिजिकल उपस्थिति, न ही वर्चुअल उपस्थिति—और विरोध प्रदर्शन, रोड ब्लॉक, एफ़्फिगी जलाना आदि का रास्ता अपनाया ।




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सारांश तालिका

मुद्दा वकीलों का मुख्य तर्क

विडियो गवाही गवाह की बॉडी लैंग्वेज और सच्चाई की जांच करना मुश्किल
न्यायिक अक्षमता निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय का अधिकार प्रभावित
प्रक्रियात्मक हड़ताल अदालतों में कार्य आम तौर पर बाधित, प्रदर्शन बढ़ा
शांतिपूर्ण प्रतीकात्मक विरोध काले रिबन, एफ़्फिगी जलाना, गेट लॉक करना जैसे उपाय अपनाए



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वक़्त-सीमा स्पष्ट करते हुए: आज 28 अगस्त 2025 का दिन है, और यह विरोध लगातार संचालित है—वकील लगातार अदालत से बहिष्कार कर रहे हैं और सड़क पर प्रदर्शन जारी हैं, जब तक कि यह अधिसूचना वापस नहीं ली जाती।


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Monday, August 25, 2025

"जनता ही असली ताकत है" – भाषण मसौदा



"जनता ही असली ताकत है" – भाषण मसौदा

प्रिय साथियो,
आज हम ऐसे समय में खड़े हैं जब नेता और जनता के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है।
कभी नेता हमारे बीच रहते थे, हमारे सुख-दुख में साझेदार बनते थे।
लेकिन अब? नेता आलीशान गाड़ियों में चलते हैं, सुरक्षा घेरे में रहते हैं और जनता से सिर्फ वोट लेने आते हैं।
जनता के मुद्दे? — रोजगार, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य — ये सब उनके भाषणों तक सीमित रह गए हैं।

सवाल ये है कि गलती किसकी है?
नेताओं की? या हमारी?
हमने ही उन्हें ये ताकत दी कि वे चुनाव जीतकर हमें भूल जाएं।
हम वोट देते समय मुद्दों पर नहीं, बल्कि जाति, धर्म, नोट और प्रचार के शोर में फंस जाते हैं।

पर साथियो, लोकतंत्र में असली ताकत जनता के पास है!
जब हम सवाल पूछेंगे –
“पाँच साल में आपने क्या किया?”
जब हम वादा मांगेंगे –
“रोज़गार कब देंगे? पानी और सड़क कब देंगे?”
और जब हम वोट मुद्दों पर डालेंगे –
तब कोई भी नेता जनता से दूर नहीं भाग पाएगा।

बदलाव आसान नहीं है, लेकिन असंभव भी नहीं है।
स्थानीय स्तर पर आवाज़ उठाइए, संगठित होइए, अपने अधिकार मांगिए।
नेता वही असली होगा, जो जनता के बीच रहेगा और आपके लिए लड़ेगा।

आइए संकल्प लें:
– हम वोट सिर्फ मुद्दों पर देंगे।
– हम अपने नेता से हिसाब मांगेंगे।
– हम अपनी ताकत पहचानेंगे और उसका इस्तेमाल करेंगे।

याद रखिए,
"जो जनता को जवाबदेह नहीं बनाता, वो लोकतंत्र को कमजोर करता है।"
अब समय है जागने का, सवाल पूछने का और असली बदलाव लाने का।

जय हिंद, जय जनता!



नगर निगम क्षेत्रों में सिविल सोसायटी की भूमिका




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स्लाइड 1: शीर्षक

नागर निगम क्षेत्रों में सिविल सोसायटी की भूमिका

सिविल सोसायटी = NGO, RWA, जागरूक नागरिक, मीडिया, सामुदायिक संगठन



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स्लाइड 2: परिचय

नगर निगम: शहरी प्रशासन व विकास का जिम्मेदार निकाय

सिविल सोसायटी: शासन और जनता के बीच सेतु

उद्देश्य: पारदर्शी, जवाबदेह और सहभागी शहरी शासन



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स्लाइड 3: प्रमुख भूमिकाएँ

1. जवाबदेही और पारदर्शिता

सामाजिक लेखा परीक्षा, RTI, जन सुनवाई



2. नीति निर्माण व जनभागीदारी

वार्ड समिति, शहरी योजना में सुझाव



3. सेवा प्रदायगी सहयोग

स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण





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स्लाइड 4: अधिकार व वकालत

शहरी गरीब, झुग्गी बस्तियों के अधिकार

महिला सुरक्षा, विकलांगों के लिए सुविधाएँ

कानूनी जागरूकता अभियान



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स्लाइड 5: आपदा और डिजिटल भूमिका

आपदा प्रबंधन: राहत व स्वयंसेवक जुटाना

तकनीकी नवाचार: ई-गवर्नेंस, मोबाइल ऐप, ऑनलाइन शिकायत पोर्टल



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स्लाइड 6: प्रहरी भूमिका

विकास कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी

अवैध खनन, अतिक्रमण, प्रदूषण पर रोक



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स्लाइड 7: उदाहरण

जनाग्रह (बेंगलुरु) - सहभागी बजट

सफाई कर्मचारी आंदोलन - मैनुअल स्कैवेंजिंग उन्मूलन

दिल्ली RWA - हरित व सुरक्षा अभियान



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स्लाइड 8: सुझाव

1. वार्ड समितियों का नियमित संचालन


2. सामाजिक लेखा परीक्षा अनिवार्य


3. ई-गवर्नेंस व शिकायत पोर्टल का विस्तार


4. सिविल सोसायटी-नगर निगम साझेदारी




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स्लाइड 9: निष्कर्ष

सिविल सोसायटी = लोकतंत्र की ताकत

जनता की भागीदारी = बेहतर शहरी विकास

पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी विकास का आधार



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नोट: इस PPT को वार्ड स्तर की बैठकों, सेमिनार या जनजागरूकता कार्यक्रमों में उपयोग किया जा सकता है।


नगर निगम क्षेत्रों में सिविल सोसायटी की भूमिका

नगर निगम क्षेत्रों में सिविल सोसायटी की भूमिका



परिचय

सिविल सोसायटी का अर्थ है – वे सभी गैर-सरकारी संगठन, स्वैच्छिक समूह, निवासी कल्याण समितियाँ (RWA), मीडिया, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक कार्यकर्ता तथा जागरूक नागरिक, जो समाज और शासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
नागर निगम (नगर पालिकाओं/नगर निगमों) के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों का प्रशासन और विकास होता है। सिविल सोसायटी इन शहरी निकायों को पारदर्शी, जवाबदेह और सहभागी बनाने में अहम योगदान देती है।


1. जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना

  • सामाजिक लेखा परीक्षा (Social Audit): सिविल सोसायटी नगर निगम द्वारा किए गए विकास कार्यों का ऑडिट करती है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
  • सूचना का अधिकार (RTI): नागरिक RTI के माध्यम से योजनाओं और बजट की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • जन सुनवाई (Public Hearing): अधिकारियों को जनता के सामने जवाबदेह बनाने के लिए सिविल सोसायटी जन सुनवाई आयोजित करती है।

2. जनभागीदारी और नीति निर्माण में योगदान

  • वार्ड समितियाँ और सभा: नागरिक अपने वार्ड स्तर की समस्याएँ (पानी, सड़क, सफाई) सीधे नगर निगम को बताते हैं।
  • शहरी योजना (Urban Planning): मास्टर प्लान, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट आदि में नागरिक सुझाव देते हैं।
  • लोक संवाद: नीति निर्माण के समय आम जनता के हितों को प्राथमिकता देने के लिए सिविल सोसायटी मध्यस्थ की भूमिका निभाती है।

3. सेवा प्रदायगी और सहयोग

  • स्वच्छता व कचरा प्रबंधन: NGO और नागरिक मिलकर डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, कचरा पृथक्करण, कंपोस्टिंग जैसे कार्यों में मदद करते हैं।
  • स्वास्थ्य व शिक्षा: नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण अभियान, सामुदायिक स्कूल और कौशल केंद्र चलाने में सहयोग।
  • पर्यावरण संरक्षण: वृक्षारोपण, नदी-झील सफाई, प्रदूषण नियंत्रण अभियानों का आयोजन।

4. अधिकारों की रक्षा और वकालत (Advocacy)

  • शहरी गरीब और झुग्गी बस्तियाँ: आवास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के अधिकार के लिए संघर्ष।
  • महिला और कमजोर वर्गों के हित: महिलाओं की सुरक्षा, विकलांगों के लिए रैंप और सार्वजनिक स्थानों पर समावेशी सुविधाएँ।
  • कानूनी जागरूकता: नागरिकों को संपत्ति कर, नगरपालिका कानून और शिकायत निवारण प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना।

5. आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सहयोग

बाढ़, महामारी जैसी आपदाओं के समय सिविल सोसायटी राहत सामग्री वितरित करने, स्वयंसेवक जुटाने और प्रशासन के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


6. तकनीकी नवाचार और डिजिटल सहभागिता

  • ऑनलाइन शिकायत प्रणाली, मोबाइल ऐप और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना।
  • नागरिकों से क्राउडसोर्सिंग के माध्यम से समस्याओं (जैसे गड्ढे, अवैध निर्माण) की रिपोर्टिंग।

7. प्रहरी (Watchdog) की भूमिका

  • विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा पर निगरानी।
  • पर्यावरण विरोधी गतिविधियों, अवैध खनन, प्रदूषण या अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाना।

प्रमुख उदाहरण

  • जनाग्रह (बेंगलुरु): सहभागी बजट और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देता है।
  • सफाई कर्मचारी आंदोलन: मैनुअल स्कैवेंजिंग समाप्त करने के लिए संघर्षरत।
  • RWA मॉडल (दिल्ली): मोहल्ला स्तर पर सुरक्षा, स्वच्छता और हरित अभियान।

सुझाव और आगे की राह

  1. नगर निगम स्तर पर स्थायी वार्ड समितियों का गठन और उनकी नियमित बैठकें।
  2. सामाजिक लेखा परीक्षा को अनिवार्य करना ताकि जनता सीधे निगरानी कर सके।
  3. ई-गवर्नेंस और शिकायत पोर्टल के उपयोग को बढ़ावा देना।
  4. सिविल सोसायटी और नगर निगम के बीच साझेदारी के लिए MOU और संयुक्त कार्यक्रम।
  5. जनजागरूकता अभियान, ताकि नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझें।

निष्कर्ष

नागर निगम क्षेत्रों में सिविल सोसायटी लोकतंत्र को मजबूत करती है, शासन में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करती है और शहरी विकास को समावेशी और सतत बनाती है। एक सशक्त सिविल सोसायटी के बिना शहरी निकायों का सही संचालन और नागरिक अधिकारों की रक्षा संभव नहीं।



A) PPT कंटेंट – "पुलिस व्यवस्था, उनका व्यवहार और आम जनता के अधिकार"



(A) PPT कंटेंट – "पुलिस व्यवस्था, उनका व्यवहार और आम जनता के अधिकार"

Slide 1: शीर्षक

  • विषय: पुलिस व्यवस्था, उनका व्यवहार और आम जनता के अधिकार
  • प्रस्तुतकर्ता का नाम, संस्था/स्कूल का नाम

Slide 2: प्रस्तावना

  • पुलिस: समाज का प्रहरी, कानून-व्यवस्था का रक्षक
  • उद्देश्य: अपराध नियंत्रण, जनता की सुरक्षा

Slide 3: पुलिस व्यवस्था की संरचना

  • डीजीपी → आईजी → डीआईजी → एसपी → डीएसपी → इंस्पेक्टर → सब-इंस्पेक्टर → कांस्टेबल
  • राज्य स्तर पर नियंत्रण, केंद्र में कुछ विशेष बल

Slide 4: पुलिस के मुख्य कार्य

  • अपराध की रोकथाम
  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना
  • आपदा प्रबंधन और राहत
  • यातायात नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा

Slide 5: पुलिस व्यवहार की चुनौतियाँ

  • भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव
  • स्टाफ की कमी और काम का बोझ
  • जनता से असंवेदनशील रवैया
  • जवाबदेही की कमी

Slide 6: जनता के अधिकार

  • FIR दर्ज करने का अधिकार (CrPC 154)
  • गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार (CrPC 50)
  • 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश करने का अधिकार (CrPC 57)
  • कानूनी मदद और चुप रहने का अधिकार (संविधान अनुच्छेद 20, 22)

Slide 7: महिलाओं के विशेष अधिकार

  • सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी नहीं (विशेष अनुमति को छोड़कर)
  • महिला पुलिसकर्मी की उपस्थिति में ही पूछताछ
  • छेड़छाड़, घरेलू हिंसा पर विशेष कानून

Slide 8: पुलिस-जनता संबंध सुधार उपाय

  • संवेदनशीलता प्रशिक्षण
  • सीसीटीवी और तकनीक का उपयोग
  • पुलिस शिकायत प्राधिकरण का सक्रिय होना
  • जनता के बीच अधिकार जागरूकता अभियान

Slide 9: हेल्पलाइन नंबर

  • 100/112 – पुलिस आपातकालीन सहायता
  • 1090 – महिला हेल्पलाइन
  • 181 – घरेलू हिंसा सहायता
  • 1098 – चाइल्डलाइन

Slide 10: निष्कर्ष

  • पुलिस और जनता का रिश्ता भरोसे पर आधारित होना चाहिए
  • “सुरक्षा और अधिकार, दोनों का संतुलन ही लोकतंत्र की ताकत है।”

(B) नाटक/संवाद स्क्रिप्ट – "जनता के अधिकार और पुलिस"

पात्र:

  1. राम (आम नागरिक)
  2. इंस्पेक्टर शर्मा (पुलिसकर्मी)
  3. वकील अनीता
  4. महिला कार्यकर्ता सीमा

संवाद:

  • राम: "सर, मेरी बाइक चोरी हो गई, लेकिन मेरी FIR दर्ज नहीं हो रही।"
  • इंस्पेक्टर शर्मा: "हम व्यस्त हैं, बाद में आना।"
  • अनीता: "शर्मा जी, CrPC 154 के तहत FIR दर्ज करना आपका कर्तव्य है।"
  • सीमा: "और महिलाओं व बच्चों के अधिकारों की जानकारी जनता को देनी चाहिए।"
  • इंस्पेक्टर शर्मा: (संवेदनशील होकर) "आप सही कह रहे हैं। मैं तुरंत FIR दर्ज करता हूँ।"
  • राम: "धन्यवाद सर, अगर सब ऐसे सहयोग करें तो जनता का भरोसा बढ़ेगा।"
    (अंत में पुलिस और जनता के सहयोग का संदेश दिया जाता है।)

(C) अधिकार पुस्तिका (PDF) का खाका

अध्याय 1: पुलिस का परिचय

  • संरचना और भूमिकाएँ

अध्याय 2: गिरफ्तारी व FIR से जुड़े अधिकार

  • CrPC 50, 57, 154
  • चुप रहने और कानूनी मदद का अधिकार

अध्याय 3: महिलाओं और बच्चों के विशेष प्रावधान

  • घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, दुष्कर्म से संबंधित अधिकार
  • महिला हेल्पलाइन, चाइल्डलाइन

अध्याय 4: शिकायत और निवारण

  • पुलिस शिकायत प्राधिकरण
  • RTI व अन्य कानूनी उपाय

अध्याय 5: महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर

अध्याय 6: निष्कर्ष – “अधिकार और जिम्मेदारी दोनों जरूरी”

The role of civil society in Nagar Nigam (Municipal Corporation)

The role of civil society in Nagar Nigam (Municipal Corporation) areas is crucial for ensuring transparent governance, better service delivery, and inclusive urban development. Civil society includes NGOs, resident welfare associations (RWAs), community-based organizations (CBOs), media, academic institutions, advocacy groups, and active citizens.

Key Roles of Civil Society in Nagar Nigam Areas:


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1. Accountability & Transparency

Social Audit: Civil society conducts social audits of municipal works such as roads, sanitation, housing, etc., to prevent corruption and misuse of funds.

RTI & Public Hearings: Using Right to Information (RTI) and organizing public hearings (Jan Sunwai) to make Nagar Nigam officials accountable.

Citizen Charters: Advocating for service standards and monitoring their compliance.



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2. Community Participation & Policy Input

Urban Planning: Participating in city development plans, smart city projects, and master plan reviews to ensure they reflect public needs.

Ward Committees: Engaging in ward sabhas and committees to raise local concerns (water supply, waste management, roads).

Public Consultation: Suggesting policies for slum rehabilitation, affordable housing, and heritage preservation.



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3. Service Delivery & Implementation Support

Waste Management: Partnering with Nagar Nigam for door-to-door garbage collection, segregation campaigns, composting, and recycling projects.

Education & Health: Running community schools, skill centers, health camps, and vaccination drives in collaboration with municipal authorities.

Environment Protection: Tree plantation drives, river/lake clean-ups, pollution awareness campaigns.



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4. Advocacy & Rights Protection

Housing and Slum Dwellers: Ensuring rights of urban poor regarding housing, livelihood, and access to basic services.

Gender & Social Inclusion: Advocating for women’s safety, inclusive infrastructure (ramps for disabled), and spaces for marginalized communities.

Legal Aid & Awareness: Educating citizens about municipal laws, property taxes, and grievance redressal mechanisms.



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5. Disaster Management & Emergency Response

During floods, pandemics, or other crises, civil society plays a key role by mobilizing relief materials, volunteers, and coordinating with Nagar Nigam and district administration.



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6. Technology & Innovation

Promoting e-governance, grievance redressal apps, and online complaint systems.

Crowdsourcing civic issues (potholes, illegal construction) using digital platforms.



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7. Watchdog Role

Monitoring urban infrastructure projects for quality and timely completion.

Raising voice against illegal encroachments, pollution, and anti-environmental activities.



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Case Examples in India

Janaagraha (Bangalore): Works on participatory budgeting and citizen engagement.

Safai Karmachari Andolan: Advocates against manual scavenging.

Resident Welfare Associations (RWAs): Engage in cleanliness, security, and green initiatives.



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Conclusion:

Civil society bridges the gap between citizens and municipal authorities. By creating awareness, mobilizing people, monitoring government actions, and co-implementing development projects, it strengthens democracy and improves quality of life in urban areas.


Sunday, August 24, 2025

बीजेपी में वर्तमान में कितने सांसद (MPs) ऐसे हैं जो पहले कांग्रेस या अन्य दलों से आए हैं

बीजेपी में वर्तमान में कितने सांसद (MPs) ऐसे हैं जो पहले कांग्रेस या अन्य दलों से आए हैं – इसका कोई एकदम सटीक और ताज़ा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि दल-बदल लगातार होते रहते हैं और संसद का रिकॉर्ड भी समय-समय पर बदलता रहता है। फिर भी, उपलब्ध रिपोर्टों और विश्लेषण से एक अनुमान लगाया जा सकता है:


2014–2021 के बीच रुझान (ADR रिपोर्ट के अनुसार)

  • ADR (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) के विश्लेषण के अनुसार 2014 से 2021 के बीच:
    • 177 कांग्रेस के सांसद/विधायक पार्टी छोड़कर अन्य दलों में गए।
    • कुल 253 सांसद/विधायक विभिन्न दलों से बीजेपी में शामिल हुए।
    • इनमें से लगभग 173 सांसद/विधायक ऐसे थे जिन्होंने बीजेपी जॉइन करके दोबारा चुनाव लड़ा।
    • सबसे ज़्यादा दल-बदलने वाले कांग्रेस से आए।

स्रोत: ADR रिपोर्ट, इकोनॉमिक टाइम्स


2016–2020 का विश्लेषण (ADR रिपोर्ट)

  • 2016–2020 के बीच 405 सांसद/विधायक ने दल-बदल किया और फिर से चुनाव लड़ा।
  • इनमें से 182 (लगभग 45%) ने बीजेपी का दामन थामा।
  • सबसे ज़्यादा कांग्रेस के नेता बीजेपी में गए।
  • इस अवधि में लोकसभा के लगभग 12 सांसदों ने दल-बदल किया, जिनमें से कई कांग्रेस से बीजेपी गए।

स्रोत: स्क्रॉल, ADR


हाल के प्रमुख उदाहरण (2022–2024)

हाल ही में कुछ प्रमुख कांग्रेस सांसद/राज्यसभा सांसद जो बीजेपी में आए:

  • किरण चौधरी – हरियाणा की पूर्व कांग्रेस नेता, 2024 में बीजेपी में आकर राज्यसभा सांसद बनीं।
  • राजू पर्मार – गुजरात के पूर्व राज्यसभा सांसद (कांग्रेस), 2022 में बीजेपी में आए।
  • प्रदान बरुआ – असम में कांग्रेस से बीजेपी में आए और 2016 में लोकसभा सांसद बने।
  • सुभाष महरिया – पूर्व कांग्रेस सांसद, 2023 में बीजेपी में लौटे।

सारांश / अनुमान

  • 2014–2021: लगभग 170–180 सांसद/विधायक कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए।
  • 2016–2020: लगभग 182 में से अधिकांश कांग्रेस से आए।
  • 2022 के बाद: कुछ प्रमुख सांसद भी बीजेपी में शामिल हुए (जैसे ऊपर के उदाहरण)।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • ये आंकड़े दल-बदल करके दोबारा चुनाव लड़ने वालों के हैं।
  • सभी विधायक/सांसद आज भी सक्रिय सांसद हों, यह ज़रूरी नहीं है।
  • ताज़ा और केवल वर्तमान सांसदों की सही गिनती के लिए हर सांसद का व्यक्तिगत रिकॉर्ड देखना पड़ेगा (लोकसभा/राज्यसभा वेबसाइट पर)।


न्यूज़ विचार और व्यव्हार

फिल्म या शॉर्ट फिल्म एआई की मदद से

 फिल्म या शॉर्ट फिल्म एआई की मदद से  1. विषय और कहानी तय करें सबसे पहले फिल्म का विषय, शैली (ड्रामा, थ्रिलर, डॉक्यूमेंट्री, साइंस फिक्शन आदि...