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वकीलों की मुख्य आपत्तियाँ और कार्रवाई
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न्यायिक प्रक्रिया का ह्रास: वकीलों का तर्क है कि अभियोजन के गवाह—विशेषकर पुलिस अधिकारी—की व्यक्तिगत उपस्थिति बेहद आवश्यक होती है ताकि उनका बॉडी लैंग्वेज, हाव-भाव और संदेह-उत्प्रेरक संकेतों के माध्यम से ठोस परीक्षण हो सके; वीडियो के माध्यम से ऐसा संभव नहीं ।
स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय में बाधा: इस प्रस्ताव को “अन्यायपूर्ण”, “बिना सोचे-समझे” और “पुलिस राज” को बढ़ावा देने वाला बताया गया है ।
उल्लेखनीय विरोध और बैंडह:
शर्त सहित 48 घंटे की चेतावनी: वकीलों ने सरकार को 48 घंटे के भीतर अधिसूचना वापस लेने की मांग रखी, अन्यथा वे सड़कों पर सूप प्रदर्शन करेंगे ।
दिशा-निर्देशों का तीव्र विरोध: दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने लगातार वर्जन जारी किया, और वकील अदालत में काले रिबन पहनकर विरोध करने लगे – यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक अधिसूचना वापस नहीं हो जाती ।
अदालतों का बहिष्कार और प्रदर्शन: 22–23 अगस्त से वकीलों ने पूर्ण हड़ताल मोड अपनाया—न तो फिजिकल उपस्थिति, न ही वर्चुअल उपस्थिति—और विरोध प्रदर्शन, रोड ब्लॉक, एफ़्फिगी जलाना आदि का रास्ता अपनाया ।
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सारांश तालिका
मुद्दा वकीलों का मुख्य तर्क
विडियो गवाही गवाह की बॉडी लैंग्वेज और सच्चाई की जांच करना मुश्किल
न्यायिक अक्षमता निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय का अधिकार प्रभावित
प्रक्रियात्मक हड़ताल अदालतों में कार्य आम तौर पर बाधित, प्रदर्शन बढ़ा
शांतिपूर्ण प्रतीकात्मक विरोध काले रिबन, एफ़्फिगी जलाना, गेट लॉक करना जैसे उपाय अपनाए
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वक़्त-सीमा स्पष्ट करते हुए: आज 28 अगस्त 2025 का दिन है, और यह विरोध लगातार संचालित है—वकील लगातार अदालत से बहिष्कार कर रहे हैं और सड़क पर प्रदर्शन जारी हैं, जब तक कि यह अधिसूचना वापस नहीं ली जाती।
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