Sunday, August 31, 2025

पिछले लगभग 10–15 सालों में भारत में हुए मुख्य कानून संशोधन / नीतिगत बदलाव शामिल हैं, जिनसे मानव और प्रकृति दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा है।


 पिछले लगभग 10–15 सालों में भारत में हुए मुख्य कानून संशोधन / नीतिगत बदलाव शामिल हैं, जिनसे मानव और प्रकृति दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा है।


🌏 भारत में कानून और नीतिगत बदलाव (मानव व प्रकृति पर प्रभाव)

1. पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधिसूचना, 2020 का ड्राफ्ट

  • कई उद्योगों/प्रोजेक्ट्स को बिना पब्लिक कंसल्टेशन मंजूरी देने का प्रावधान।

  • Post-facto clearance की अनुमति (यानी पहले प्रोजेक्ट शुरू करो, बाद में मंजूरी लो)।

  • पर्यावरणीय पारदर्शिता कमज़ोर।


2. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम (LARR), 2013 में संशोधन प्रयास (2014–15)

  • मूल कानून में ग्रामसभा की सहमति और सामाजिक प्रभाव आकलन अनिवार्य था।

  • संशोधनों के ज़रिए इन प्रावधानों को कमजोर करने की कोशिश।

  • किसान और आदिवासी समुदायों में बड़े पैमाने पर विरोध।


3. वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act), 1980 में संशोधन, 2023

  • जंगल की परिभाषा को बदला गया।

  • अब कई वन क्षेत्रों को गैर-वन उपयोग (industries, defense, infrastructure) के लिए खोला जा सकता है।

  • स्थानीय समुदायों और जैवविविधता पर गहरा खतरा।


4. खनिज और खनन कानून (Mines and Minerals Development & Regulation Act), 2015 और 2021 संशोधन

  • निजी कंपनियों के लिए खनन क्षेत्र खुला

  • कोयला और खनिज ब्लॉकों की नीलामी आसान।

  • आदिवासी इलाकों में विस्थापन और पर्यावरणीय विनाश तेज़।


5. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम संशोधन, 2022

  • प्रोजेक्ट्स को मंजूरी आसान, "Schedule" में बदलाव।

  • संरक्षण क्षेत्र (Eco-sensitive zones) कमजोर।

  • कई उद्योगिक प्रोजेक्ट्स को छूट।


6. कामगारों के अधिकारों में कमी – 2020 के श्रम कोड्स (Labour Codes)

  • श्रम कानूनों को चार कोड्स में समेटा गया।

  • यूनियन बनाने, हड़ताल करने और सामाजिक सुरक्षा पाने के अधिकार कमजोर।

  • मानव श्रम का शोषण आसान हुआ।


7. कोयला खनन और ऊर्जा नीतियाँ (2019–2022)

  • कोयला खनन में 100% FDI की अनुमति।

  • नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान होने के बावजूद जंगलों और नदियों को बांध व खनन प्रोजेक्ट्स से नुकसान।


8. राइट टू फेयर कम्पन्सेशन एंड ट्रांसपेरेंसी अधिनियम को दरकिनार करने की प्रवृत्ति

  • कई राज्यों ने अपने स्तर पर इसे कमजोर किया।

  • किसानों और आदिवासियों को न्यूनतम मुआवज़ा और पुनर्वास तक नहीं।


9. जल प्रबंधन और नदी जोड़ो परियोजनाएँ (River Linking Projects)

  • कानूनी सुरक्षा कमजोर।

  • नदियों को सिर्फ़ "जल आपूर्ति स्रोत" मानकर प्रोजेक्ट पास।

  • पारिस्थितिकी और स्थानीय संस्कृति को अनदेखा।


10. जंगल अधिकार कानून (Forest Rights Act, 2006) का कमजोर क्रियान्वयन

  • कागज़ पर मजबूत कानून, पर ज़मीनी स्तर पर ग्रामसभाओं के अधिकार छीने गए।

  • सुप्रीम कोर्ट ने भी 2019 में 11 लाख से अधिक आदिवासी परिवारों को बेदखल करने का आदेश दिया था (बाद में रोका गया)।


निष्कर्ष:
इन बदलावों का सीधा असर —

  • मानव पर: विस्थापन, बेरोज़गारी, आजीविका संकट, श्रम शोषण।

  • प्रकृति पर: जंगल कटान, नदियों पर बांध, जैवविविधता का विनाश, जलवायु संकट।


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