Saturday, August 30, 2025

“भारतीय शिक्षा कैसी हो?”आज की परिस्थितियों में शिक्षा केवल नौकरी दिलाने का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज दोनों को गढ़ने का आधार होनी चाहिए।

 “भारतीय शिक्षा कैसी हो?”

आज की परिस्थितियों में शिक्षा केवल नौकरी दिलाने का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज दोनों को गढ़ने का आधार होनी चाहिए।


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1. भारतीय शिक्षा का मूल स्वरूप कैसा होना चाहिए

1. ज्ञान + मूल्य + कौशल का संतुलन

केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, नैतिकता और व्यवहारिक कौशल भी।

"विद्या ददाति विनयं" (विद्या विनम्रता देती है) — शिक्षा का यह आदर्श फिर से जीवित होना चाहिए।



2. स्थानीयता और वैश्विकता का मेल

बच्चों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं से जोड़ना।

साथ ही विज्ञान, टेक्नोलॉजी और वैश्विक नागरिकता की समझ।



3. रटने से अधिक समझ पर ज़ोर

परीक्षा-केंद्रित शिक्षा से हटकर समस्या समाधान, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच पर बल।



4. आत्मनिर्भर और रोजगारमुखी शिक्षा

हर विद्यार्थी को ऐसा हुनर मिले जिससे वह नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने।

कृषि, शिल्प, उद्यमिता और डिजिटल स्किल्स शिक्षा का हिस्सा हों।





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2. भारत की शिक्षा में कौन-सी कमियाँ हैं

ज़्यादा परीक्षामुखी और रटंत प्रकृति।

शिक्षा और रोज़गार के बीच बड़ा अंतर।

शहर–गाँव, अमीर–गरीब, सरकारी–निजी स्कूलों में गुणवत्ता की असमानता।

बच्चों में मूल्य, अनुशासन और जिम्मेदारी की कमी।

डिजिटल डिवाइड – ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा की सुविधा कम।



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3. कैसी होनी चाहिए आगे की दिशा

1. भारतीयता से जुड़ी शिक्षा

गीता, उपनिषद, गुरु परंपरा, कबीर-तुलसी जैसे संतों का व्यावहारिक ज्ञान।

योग, ध्यान, आयुर्वेद और प्रकृति आधारित जीवनशैली को पाठ्यक्रम में शामिल करना।



2. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का सही क्रियान्वयन

मातृभाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा।

व्यावसायिक शिक्षा (Vocational training) 6वीं कक्षा से।

"लचीला और बहु-विषयक" उच्च शिक्षा ढांचा।



3. समान अवसर

गाँव और दूरदराज़ क्षेत्रों के बच्चों को भी वही शिक्षा सुविधा मिले जो बड़े शहरों में है।

डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्मार्ट क्लासरूम और शिक्षकों का प्रशिक्षण।



4. नैतिक और नागरिक शिक्षा

बच्चों को केवल "सफल" नहीं बल्कि "सजग और जिम्मेदार नागरिक" बनाना।

ईमानदारी, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सेवा को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना।





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4. निष्कर्ष

भारतीय शिक्षा का लक्ष्य होना चाहिए:
👉 विद्या + मूल्य + कौशल
👉 स्थानीय जड़ों से जुड़कर वैश्विक क्षितिज तक पहुँचना
👉 नौकरी पाने से आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना



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