Sunday, August 10, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में यह माना है कि ग्रामसभा केवल एक औपचारिक सभा नहीं, बल्कि संविधान के 73वें संशोधन (1992) के तहत स्थानीय स्वशासन की सबसे बुनियादी और सर्वोच्च इकाई है।



मुख्य बिंदु:

संविधान का अनुच्छेद 243 ग्रामसभा को परिभाषित करता है — “ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाताओं की सभा।”

73वें संशोधन के बाद, ग्रामसभा को निर्णय लेने, संसाधनों के प्रबंधन और विकास योजनाओं को मंज़ूरी देने का वैधानिक अधिकार मिला।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र या राज्य की विधानसभाओं से ऊपर ग्रामसभा कहने का भाव यह जताने के लिए अपनाया कि स्थानीय स्तर के निर्णय में जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी सर्वोच्च है।

उदाहरण के तौर पर समता बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1997) और ओरिसा माइनिंग कॉर्प बनाम पर्यावरण एवं वन मंत्रालय जैसे मामलों में अदालत ने कहा कि जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसभा की अनुमति के बिना भूमि, खनिज या संसाधनों पर कोई फैसला नहीं हो सकता।


यानि, संसद और विधानसभाएं कानून बना सकती हैं, लेकिन गांव के मामलों में ग्रामसभा की मंज़ूरी को अनदेखा करना संवैधानिक भावना के खिलाफ है।

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