Sunday, August 10, 2025

📜 सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले – ग्रामसभा की सर्वोच्चता

📜 सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले – ग्रामसभा की सर्वोच्चता

1. Samata vs State of Andhra Pradesh (1997)

मुख्य टिप्पणी: अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि, वन और खनिजों के उपयोग के लिए ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य है।

निर्णय: निजी कंपनियों को आदिवासी भूमि का पट्टा देना असंवैधानिक है। ग्रामसभा को संसाधन प्रबंधन में प्राथमिक भूमिका है।


2. Orissa Mining Corporation Ltd. vs Ministry of Environment & Forests (2013)

मुख्य टिप्पणी: नीयमगिरी पहाड़ पर खनन की अनुमति के लिए ग्रामसभा की सहमति आवश्यक है।

निर्णय: ग्रामसभा यह तय करेगी कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय अधिकार प्रभावित होंगे या नहीं।


3. Union of India vs Rakesh Kumar (2010)

मुख्य टिप्पणी: पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के तहत ग्रामसभा की मंज़ूरी के बिना संसाधनों का दोहन गैरकानूनी है।


4. Kishen Pattnayak vs State of Orissa (1989) (पूर्व-73वां संशोधन)

मुख्य टिप्पणी: ग्रामीण विकास और योजनाओं में स्थानीय भागीदारी सर्वोच्च है, वरना योजनाएं असफल होंगी।


5. State of Jharkhand vs Shiv Shankar Tiwary (2006)

मुख्य टिप्पणी: जल, जंगल और जमीन से जुड़े निर्णयों में ग्रामसभा की राय अनिवार्य है।


6. Bharat Coking Coal Ltd. vs State of Jharkhand (2014)

मुख्य टिप्पणी: ग्रामसभा को खनिज संसाधनों पर अपने क्षेत्र में निर्णय लेने का संवैधानिक अधिकार है।


7. Lafarge Umiam Mining Pvt. Ltd. vs Union of India (2011)

मुख्य टिप्पणी: पर्यावरणीय मंज़ूरी में ग्रामसभा की भागीदारी और सहमति आवश्यक है।


📌 कानूनी आधार

अनुच्छेद 243(A): ग्रामसभा को पंचायत क्षेत्र में योजनाओं की स्वीकृति, कार्यक्रमों की निगरानी और स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार।

अनुच्छेद 243(B-C): ग्रामसभा की संरचना और अधिकार राज्यों द्वारा कानून में परिभाषित किए जाते हैं, पर उनकी मूल संरचना बदली नहीं जा सकती।

PESA, 1996: अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय है।

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