Saturday, August 16, 2025

🔎 MRP बनाम SRP: क्या आप सही कीमत चुका रहे हैं?




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🔎 MRP बनाम SRP: क्या आप सही कीमत चुका रहे हैं?

Udaen News Network | उपभोक्ता विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली। रोज़मर्रा की खरीदारी हो या ऑनलाइन शॉपिंग – अक्सर उपभोक्ता दो शब्दों से रूबरू होते हैं – MRP (Maximum Retail Price) और SRP (Suggested Retail Price)। दोनों ही कीमत तय करने के तरीके हैं, लेकिन इनमें बुनियादी फर्क है। यह फर्क जानना हर उपभोक्ता के लिए ज़रूरी है।


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🏷️ MRP क्या है?

MRP का मतलब है अधिकतम खुदरा मूल्य।

यह वह कीमत है जिसे उत्पादक कंपनी पैकेजिंग पर छापना कानूनन अनिवार्य मानती है।

दुकानदार MRP से ज़्यादा में सामान नहीं बेच सकता।

हालांकि, वह MRP से कम पर छूट देकर बेच सकता है।


👉 उदाहरण: अगर बिस्कुट पैकेट पर MRP ₹20 लिखा है, तो दुकानदार इसे ₹25 में नहीं बेच सकता, लेकिन ₹18 या ₹15 में बेच सकता है।


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🛒 SRP क्या है?

SRP का मतलब है अनुशंसित खुदरा मूल्य।

यह सिर्फ कंपनी की सुझाई गई कीमत होती है, न कि कानूनी बाध्यता।

दुकानदार SRP से ऊपर या नीचे, अपनी रणनीति और प्रतिस्पर्धा के अनुसार दाम तय कर सकता है।


👉 उदाहरण: किसी मोबाइल कंपनी ने फोन का SRP ₹15,999 रखा। लेकिन कोई डीलर उसे ₹15,499 में देगा, तो कोई ₹16,500 तक वसूल सकता है।


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⚖️ MRP बनाम SRP – बड़ा फर्क

पहलू MRP SRP

कानूनी स्थिति कानूनन अनिवार्य केवल सुझाव
पैकेजिंग पर छापना ज़रूरी ज़रूरी नहीं
दुकानदार की छूट MRP से ऊपर नहीं बेच सकता अपनी मर्जी से दाम तय कर सकता
उदाहरण FMCG प्रोडक्ट्स – बिस्कुट, दवा, पेय पदार्थ इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, फर्नीचर



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👥 उपभोक्ता और व्यापारी पर असर

उपभोक्ता के लिए:

MRP उन्हें अतिरिक्त वसूली से बचाता है।

SRP उन्हें मोलभाव और छूट का विकल्प देता है।


व्यापारी के लिए:

MRP उनके मुनाफे पर सीमा तय करता है।

SRP उन्हें प्रतिस्पर्धी दाम लगाने की आज़ादी देता है।




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📝 निष्कर्ष

MRP और SRP, दोनों ही मूल्य निर्धारण की अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।

MRP उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करता है।

SRP बाज़ार में प्रतिस्पर्धा और लचीलापन लाता है।


👉 अगली बार खरीदारी करते समय, पैकेजिंग पर लिखा MRP ज़रूर देखें और SRP पर हमेशा बेहतर सौदे की तलाश करें।


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✍️ रिपोर्ट: Udaen News Network
(हिमालयी सरोकारों से लेकर उपभोक्ता अधिकार तक – आपकी अपनी निष्पक्ष आवाज़)



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