Sunday, March 8, 2026
हाँ, केंद्र सरकार पशुधन योजनाओं के तहत गधा, घोड़ा, खच्चर और ऊंट पालन को बढ़ावा दे रही है।
LUCC घोटाले के मामले में भी Whistle Blowers Protection Act, 2014
Whistle Blowers Protection Act, 2014
New World Order की असली सच्चाई: शक्ति राजनीति का नया खेल 🌍
Old World Order का अंत? बदलती दुनिया और नई वैश्विक शक्ति राजनीति
Sunday, March 1, 2026
कोटद्वार की राजनीति: सेवा का पथ या करियर का मंच?
कोटद्वार की राजनीति: सेवा का पथ या करियर का मंच?
आज केवल एक नगर नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बदलती राजनीतिक संस्कृति का आईना बनता जा रहा है। यहाँ जनप्रतिनिधियों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा है। बैठकों, आयोजनों, स्वागत-सम्मानों और शक्ति-प्रदर्शन के बीच राजनीति का एक समानांतर पाठशाला-सा माहौल दिखाई देता है। परंतु इस दृश्य के पीछे एक गहरी बेचैनी भी छिपी है—राजनीति का उद्देश्य आखिर है क्या?
कोटद्वार में आज एक ऐसा नौजवान भी दिखता है जो उभरता है, गिरता है, फिर संभलता है और खुद को किसी न किसी खांचे में फिट करने की कोशिश करता है। वह राजनीति का ‘क, ख, ग’ सीख रहा है—लेकिन किस उद्देश्य से? समाज सेवा के लिए या पद की प्राप्ति के लिए? वह किसी नेता के इर्द-गिर्द मंडराता है, राजनैतिक चाटुकारिता को कौशल मानता है, और अवसर की प्रतीक्षा में अपने करियर की तलाश करता भटकता रहता है।
सिर्फ युवा ही नहीं, कई पूर्व कर्मचारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस दोराहे पर खड़े दिखाई देते हैं। वे अपने अनुभव और नेटवर्क के सहारे राजनीति में जगह बनाना चाहते हैं, पर स्पष्ट वैचारिक दिशा के बिना। परिणामस्वरूप राजनीति एक मिशन के बजाय ‘सेट होने’ का माध्यम बनती जा रही है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या राजनीति समाज सेवा है या करियर? यदि राजनीति को केवल करियर के रूप में देखा जाएगा, तो प्राथमिकता पद, प्रतिष्ठा और संसाधन होंगे; न कि जनसमस्याएँ। फिर विकास की चर्चा भी रणनीति बन जाएगी और जनता केवल साधन।
कोटद्वार जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहाँ पहाड़ और मैदान की सामाजिक-आर्थिक जटिलताएँ साथ-साथ चलती हैं, राजनीति को और अधिक जिम्मेदार होना चाहिए। पलायन, रोजगार, शहरी अव्यवस्था, संसाधनों का दोहन—ये मुद्दे नारेबाज़ी से नहीं, स्पष्ट दृष्टि और दीर्घकालिक सोच से हल होंगे। लेकिन जब स्वयं राजनीतिक कार्यकर्ता दिशा के संकट में हों, तो वे समाज को दिशा कैसे देंगे?
राजनीति का पहला पाठ सेवा है, दूसरा उत्तरदायित्व और तीसरा आत्मानुशासन। यदि इन तीनों की जगह महत्वाकांक्षा, चापलूसी और अवसरवाद ले लें, तो लोकतंत्र कमजोर होता है।
आज आवश्यकता है कि कोटद्वार की राजनीति आत्ममंथन करे। युवा कार्यकर्ता यह तय करें कि वे भीड़ का हिस्सा बनना चाहते हैं या बदलाव का माध्यम। पूर्व जनप्रतिनिधि मार्गदर्शक की भूमिका निभाएँ, न कि शक्ति-संतुलन के केंद्र मात्र बनें।
राजनीति यदि समाज सेवा है तो उसे त्याग, धैर्य और सिद्धांत चाहिए। और यदि वह केवल करियर है, तो वह समाज को नहीं, केवल व्यक्तियों को आगे बढ़ाएगी।
निर्णय कोटद्वार के राजनीतिक समाज को करना है—वे इतिहास रचना चाहते हैं या केवल उपस्थिति दर्ज कराना।
स्वर्गीय भारत सिंह रावत जी की पुण्यतिथि पर विशेष
न्यूज़ विचार और व्यव्हार
जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई
संपादकीय: जब पहचान नहीं, मानवता ही पता बन गई "जो भी दिखे, उसे ये डिलीवरी दे देना।" जंतर-मंतर पहुँचे एक फूड पार्सल पर लिखे ये शब्...
-
लोक अदालत के फायदे और सीमाएँ ✅ लोक अदालत के फायदे (Advantages) तेज़ न्याय: लंबे समय तक कोर्ट में केस लटकने की बजाय यहाँ एक ही दिन ...
-
📊 भारत सरकार अधिनियम: 1909, 1919 और 1935 की तुलना पहलू / विशेषता अधिनियम 1909 (मॉर्ले-मिंटो सुधार) अधिनियम 1919 (मॉन्टेग्यू-चेम्सफो...
-
**मिशन लाइफ (Mission LiFE – Lifestyle for Environment)** भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक वैश्विक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य **व्यक्तिगत और...